बाकरगंज हुसैनबाग के रहने वाले मोहम्मद रिजवान ने कुछ दिन पहले गैस की बुकिंग कराई थी। वह जागेश्वर धाम एजेंसी के कज्यूमर्स है। जब डिलीवरी मैन गैस लेकर रिजवान के घर पहुंचा तो एक्स्ट्रा पैसे की मांग करने लगा गया। चूंकि, घर में गैस खत्म हो चुकी थी तो रिजवान को 20 रुपए गैस दाम से एक्स्ट्रा देना पड़ा।

केस टू
कुछ ऐसा ही हाल आलमगिरी गंज की रहने वाली शमा गुप्ता के साथ भी है। 48 घंटे की जगह इन्हें एक वीक के बाद ही गैस मिल पाता है। कारण डिलीवरी मैन को यह एक्स्ट्रा पैसे नहीं देती है। शमा ने बताया कि एक बार इन्होंने दस रुपए दिए थे लेकिन उसके बाद एक्स्ट्रा पैसा नहीं देने पर वह मनमानी करता है।

समय पर गैस नहीं मिलने व एक्स्ट्रा पैसे मांगे जाने से मोहम्मद रिजवान और शमा गुप्ता ही परेशान नहीं हैं। बल्कि, शहर में सैकड़ों लोग इस समस्या से त्रस्त हैं। डिलीवरी मैन की मनमानियों पर रोक लगा पाने में गैस एजेंसियां भी नाकाम साबित हो रही हैं। जिसका खामियाजा एलपीजी उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।

एक वीक में होती है डिलीवरी
एलपीजी कंपनियों के नियम के मुताबिक गैस की बुकिंग के 48 घंटे के अंदर गैस की डिलीवरी उपभोक्ता तक हो जानी चाहिए। लेकिन डिलीवरी मैन एक- एक वीक बीत जाने के बाद भी उपभोक्ता के घर गैस नहीं पहुंचा पा रहे हैं। एक्स्ट्रा पैसे लेने के लिए वह एजेंसी मालिक के सामने यह बहाना बनाते हैं कि संबंधित उपभोक्ता घर पर नहीं मिला। लिहाजा, वह गैस की डिलीवरी नहीं कर सके। जबकि, गैस एजेंसियां बार- बार यह दबाव बनाती है कि कोई उपभोक्ता एक बार नहीं मिला तो वहां पर 2- 3 बार जाओ लेकिन उसका भी कोई असर नहीं हैं।

उत्पीड़न से हो जाते हैं परेशान
एक बार गैस रिटर्न होने के बाद बुकिंग कैंसिल हो जाती है और उपभोक्ता को दोबारा गैस की बुकिंग करानी पड़ती है। इस बीच उसे गैस की किल्लत से जूझना पड़ता है। लिहाजा, डिलीवरी मैन के उत्पीड़न की वजह से उपभोक्ता भी कभी- कभी दस रुपए एक्स्ट्रा देना ही उचित समझते हैं। यह हाल तक है जब प्रति गैस की डिलीवरी पर डिलीवरी मैन को एजेंसियां 10- 12 रुपए कमीशन देती है।

कर सकते हैं कंप्लेन
समय पर गैस नहीं मिलने या एक्स्ट्रा पैसे मांगने पर डिलीवरी मैन के खिलाफ संबंधित गैस एजेंसी पर कंप्लेन दर्ज कराई जा सकती है। यहां पर सुनवाई नहीं होने पर डायरेक्ट कंपनी के अधिकारियों से कंप्लेन कर सकते है।

उपभोक्ता के घर गैस पहुंचने के लिए डिलीवरी मैन को एजेंसी खुद कमीशन देती है। एक बार कोई उपभोक्ता नहीं मिला तो डिलीवरी मैन को यह कहां जाता है कि वहा दो- तीन बार जाएं। कोई डिलीवरी मैन गलत कर रहा है, तो इस बात की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

रंजना सोलंकी, प्रेसीडेंट, डोमेस्टिक गैस डिस्ट्रिब्यूशन एसोसिएशन

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अपनी हाड़तोड़ मेहनत से अन्न उगाने वाला अन्नदाता सरकारी मशीनरी के लिए मजाक बनकर रह गया है। सरकारी इमदाद तो उसे वक्त पर मिलती नहीं है, और अगर दी भी जाती है तो मौत के बाद। यानी जीते जी उसकी कद्र नहीं होती और मौत के बाद उसे हजारों रूपये के चेक काटकर थमाने की कोशिश होती है। और आगरा की तहसीलों में तो एक और नई करतूत ने अन्नदाता का उपहास उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। ओलावृष्टि की राहत राशि देने के लिए तहसील के जिम्मेदारों ने चेक बनाकर जारी कर दिए। ये कोशिश भी नहीं की कि जिन किसानों के चेक बनाए हैं, वह अब इस दुनिया में हैं भी या नहीं।

51 मृतक किसानों के बनाए चेक
मामला सदर तहसील से जुड़ा है। ब्लॉक अकोला के करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों को ओलावृत्ति के चेक ही नहीं मिले हैं। इन्हीं गांवों के 51 ऐसे किसानों के चेक जारी कर दिए गए हैं, जो अब इस दुनिया में जिंदा नहीं है। खास बात ये है कि संबंधित लेखपाल इन चेकों को कैश कराने की फिराक में था। हालांकि लेखपाल को सफलता नहीं मिली। मामला संज्ञान में आने के बाद एक बार तो अधिकारियों ने इसे दबाए जाने का प्रयास किया, लेकिन दबा नहीं सके। आखिर में कार्रवाई के नाम पर लेखपाल को निलंबित कर दिया। जबकि आरोप पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया है।

आरोप पत्र का नहीं दिया है जवाब
एसडीएम सदर ने आरोपी लेखपाल देवेंद्र उपाध्याय को आरोप पत्र दिया था, जिसका जवाब उसे देना है, लेकिन अभी तक आरोप पत्र का जवाब नहीं दिया है। इधर, लेखपाल देवेंद्र उपाध्याय को बहाल किए जाने के लिए अधिकारियों पर भाजपा नेता दबाव बना रहे हैं।

सूखा और ओलावृष्टि का आया था बजट
वर्ष 2015- 16 में ओलावृत्ति और सूखा राहत के लिए 88 करोड़ से अधिक का बजट आया था। इस बजट के वितरण की जानकारी शासन को दी जा चुकी है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।

51 मृतक किसानों के बनाए चेक
मामला सदर तहसील से जुड़ा है। ब्लॉक अकोला के करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों को ओलावृत्ति के चेक ही नहीं मिले हैं। इन्हीं गांवों के 51 ऐसे किसानों के चेक जारी कर दिए गए हैं, जो अब इस दुनिया में जिंदा नहीं है। खास बात ये है कि संबंधित लेखपाल इन चेकों को कैश कराने की फिराक में था। हालांकि लेखपाल को सफलता नहीं मिली। मामला संज्ञान में आने के बाद एक बार तो अधिकारियों ने इसे दबाए जाने का प्रयास किया, लेकिन दबा नहीं सके। आखिर में कार्रवाई के नाम पर लेखपाल को निलंबित कर दिया। जबकि आरोप पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया है।

आरोप पत्र का नहीं दिया है जवाब
एसडीएम सदर ने आरोपी लेखपाल देवेंद्र उपाध्याय को आरोप पत्र दिया था, जिसका जवाब उसे देना है, लेकिन अभी तक आरोप पत्र का जवाब नहीं दिया है। इधर, लेखपाल देवेंद्र उपाध्याय को बहाल किए जाने के लिए अधिकारियों पर भाजपा नेता दबाव बना रहे हैं।

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यूपी में सत्ता संभाले हुए योगी आदित्यनाथ सरकार को 8 दिन हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी की तरह ही बड़े और कड़े फैसले लिए, और इन्हें सख्ती से लागू करने के फरमान भी जारी कर दिए। यूपी में सत्ता संभाले हुए योगी आदित्यनाथ सरकार को 8 दिन हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी की तरह ही बड़े और कड़े फैसले लिए, और इन्हें सख्ती से लागू करने के फरमान भी जारी कर दिए। यूपी में सत्ता संभाले हुए योगी आदित्यनाथ सरकार को 8 दिन हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी की तरह ही बड़े और कड़े फैसले लिए, और इन्हें सख्ती से लागू करने के फरमान भी जारी कर दिए। 3
लखनऊ. यूपी में सत्ता संभाले हुए योगी आदित्यनाथ को रविवार को 8 दिन पूरे हो गए। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी की तरह ही कड़े फैसले लिए। वे हर दिन 18 से 20 घंटे काम पर जोर दे रहे हैं। सख्ती इतनी है कि कई अफसरों की नींद उड़ी हुई है। योगी ने कहा है कि जो डिलिवर नहीं कर सकते,वे काम करने के लिए दूसरों को रास्ता दे दें। बीते 40 साल में योगी पहले ऐसे सीएम हैं जिन्होंने पूरे सेक्रेटेरिएट के हर सेक्शन का पैदल दौरा किया।योगी आदित्यनाथ के 10 फैसले...

1)एक भी कैबिनेट मीटिंग किए बिना काम में सख्ती
-योगी ने कुर्सी संभालने के बाद अब तक एक भी कैबिनेट मीटिंग नहीं की। ना ही ब्यूरोक्रेसी में कोई बड़ा बदलाव किया। लेकिन,एक्सटेंशन पर चल रहे 50 अफसरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
-सरकार के स्पोक्सपर्सन सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा-हम पहले ही दिन से फास्ट ट्रैक पर काम कर रहे हैं। कैबिनेट मीटिंग जल्द होगी।
-दरअसल,योगी ने कैबिनेट की फॉर्मल मीटिंग करने के बजाए सीधे जमीनी हकीकत सुधारने पर जोर दिया। गैर कानूनी स्लॉटर हाउस बंद करने और एंटी रोमियो स्क्वॉड एक्टिव करके योगी ने इरादे साफ कर दिए। अफसरों और अपने सहयोगियों से भी दो टूक कहा-18 से 20 घंटे काम करने वाले ही साथ रह सकते हैं। बाकी जाना चाहें तो रास्ते खुले हैं।
-बता दें कि मोदी ने भी 2014 में अपने शपथ ग्रहण के दिन ही कैबिनेट मीटिंग किए बिना सार्क देशों को बुलावा भेजा था और उनसे वन-टू-वन मीटिंग की थी। इनमें पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ शामिल थे।

2)पहले 100 दिन पर जोर,हर डिपार्टमेंट से पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन
-योगी ने हर डिपार्टमेंट से पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देने को कहा है। 100 दिन का प्लान भी मांगा गया है। मंत्रियों और अफसरों से कहा गया है कि फाइलें घर ना ले जाएं,उन्हें ऑफिस ऑवर्स में ही निपटाएं। ये भी कहा है कि दो महीने के अंदर फर्क नजर आना चाहिए। हर जिले के डीएम से कहा गया है कि अगर भूख से कोई मौत हुई तो वो जिम्मेदार होंगे।
-एक अफसर ने न्यूज एजेंसी से कहा-इन ऑर्डर के बाद अफसरों की रातों की नींद उड़ गई है। सरकारी दफ्तरों में जीन्स और टी-शर्ट पहनने पर रोक लगा दी गई है। हॉस्पिटल्स से कहा गया है अगर स्टाफ ड्रेस कोड फॉलो ना करे तो उनकी उस दिन सैलरी काट दी जाए। टीचर्स से कहा गया है कि वो स्कूल में मोबाइल फोन लेकर ना आएं।
-बता दें कि मोदी सरकार ने भी पहले 100 दिन में रिजल्ट देने पर फोकस किया था। इसमें पाकिस्तान के साथ सरकार की डिप्लोमैसी अहम रूप से शामिल थी। कई सरकारी विभागों में बायोमैट्रिक्स मशीनें भी लगवाई गईं।

3)दागियों पर सख्ती
-यूपी में लॉ एंड ऑर्डर हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है। योगी ने सख्ती दिखाते हुए कहा-गुंडे अब यूपी छोड़कर चले जाएं। इलीगल माइनिंग पर रोक के ऑर्डर भी दिए जा चुके हैं। गलत काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
-सीएम ने क्रिमिनल रिकॉर्ड वालों की जगह क्लीन रिकॉर्ड वालों को तरजीह देने के आदेश दिए गए हैं,ताकि काम अच्छा हो सके।

4)सफाई पर जोर
-सेक्रेटेरिएट में सरप्राइज इन्सपेक्शन के दौरान योगी वहां गंदगी देखकर नाराज हुए। अफसरों से फौरन सफाई कराने को कहा। दफ्तरों में पान मसाला और गुटखा ना खाने के ऑर्डर दिए गए। सरकारी दफ्तरों में बॉयोमैट्रिक मशीन और सीसीटीवी इंस्टॉल करने के ऑर्डर भी दिए गए हैं।
-योगी के आदेश के अगले ही दिन मंत्री और अफसर हाथ में झाड़ू थामकर सफाई करते नजर आए। एनेक्सी दौरे के वक्त सीएम ने धूल देखकर कहा-इससे तो स्टाफ को टीबी हो जाएगी।
-बता दें कि मोदी भी स्वच्छ भारत मिशन पर लगातार जोर दे रहे हैं।

5)ट्रांसपरेंसी पर जोर
-करप्शन रोकने के लिए योगी ने मंत्रियों और अफसरों से 15 दिन में प्रॉपर्टी का ब्योरा देने को कहा है। मंत्रियों और अफसरों से साफ कहा गया है कि वो अपनी गाड़ियों पर हूटर या लाल बत्ती ना लगाएं। बीजेपी नेताओं और पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव्स से भी साफ कहा गया है कि वो ठेकों के चक्कर में ना पड़ें। इसके बजाए सरकारी कामों की मॉनिटरिंग करें।

6) पुलिस थानों पर पैनी नजर
- योगी ने होम मिनिस्ट्री खुद के पास रखी है। कुर्सी संभालने के बाद खुद कई थानों का जायजा लिया। अफसरों के थाने पहुंचने से पहले योगी खुद वहां पहुंच गए। अफसरों से कहा कि हर थाने में रिसेप्शन पर एक पुरुष और एक महिलाकर्मी तैनात होना चाहिए। हर थाने में साफ-सफाई, पानी और बिजली बराबर मिलनी चाहिए।

7) 15 जून तक सुधारें सड़कें
- PWD डिपार्टमेंट केशव प्रसाद मौर्य के पास है। लेकिन, इस डिपार्टमेंट के अफसरों को सीएम ने ऑर्डर दिया है कि 15 जून तक सड़कें सुधारी जाएं। इन पर गड्ढे नजर नहीं आना चाहिए।

8) हिंदुओं के लिए तोहफा
- योगी ने कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वालों को एक लाख रुपए देने का एलान किया है। गाजियाबाद या नोएडा में हज हाउस की तर्ज पर मानसरोवर हाउस बनाने के आदेश दिए गए हैं।
- नवरात्रि और राम नवमी पर सभी शक्तिपीठों पर नॉन स्टाप बिजली सप्लाई और साफ-सफाई रखने के ऑर्डर दिए गए हैं।

9) बेटियां स्कूल जाना छोड़ रही थीं, इसलिए बनाया एंटी रोमियो स्क्वाड
- योगी ने हाल ही में गोरखपुर में कहा, ''मुझे कई माताओं-बहनों के फोन आए। मुझे बताया गया कि बालिकाएं स्कूल जाना छोड़ रही हैं क्योंकि मनचले उन्हें तंग करते हैं। हमने प्रशासन से कहा है कि कई ऐसे तत्वों पर कड़ाई बरती जाए जो मनचले और शोहदे किस्म के हैं। उन पर कड़ाई होनी चाहिए। हमने बीजेपी के संकल्प पत्र की तर्ज पर एंटी रोमियो स्क्वॉड को एक्टिव कर दिया है।''

10) अवैध बूचड़खाने
- यूपी में सिर्फ 45 स्लॉटर हाउस ही लीगल हैं। करीब 400 इलीगल हैं। लेकिन कारोबार हर साल 11 हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार होता है। योगी ने इलीगल स्लॉटर हाउस बंद करने के आदेश दिए हैं। इस फरमान का विरोध भी हो रहा है लेकिन सरकार ने कहा है कि इलीगल स्लॉटर हाउस पर कार्रवाई बंद नहीं की जाएगी।

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विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद भी समाजवादी पार्टी और मुलायम कुनबे में एका होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. समाजवादी पार्टी पर एकाधिकार मिलने के बाद जिस तरह से समाजवादी महाभारत का पटाक्षेप हुआ था लगता है वह अब ब्रेक के बाद फिर शुरू होने वाला है. सपा में उत्पन्न हो रही मौजूदा स्थिति तो इसी ओर इशारा कर रही हैं.
दरअसल सपा के संस्थापक अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष एक बार आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं. जहां 28 मार्च को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दल के निर्वाचित विधायकों की बैठक पार्टी दफ्तर में पहले से ही बुला रखी थी, वहीं अब पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने भी पार्टी विधायकों की बैठक 29 मार्च को बुला ली है. जाहिर है, पार्टी में इससे एक बार फिर रार के आसार पैदा हो गए हैं.

जहां एक ओर 28 मार्च को अखिलेश यादव विधायकों के साथ बैठक रख चुके हैं. वहीं दूसरी ओर 29 मार्च को पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी नवनिर्वाचित विधायकों से मिलने का खत भेज चुके हैं. जाहिर है, दोनों खेमों की अलग-अलग बैठक इशारा कर रही है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है.

बताया जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के विधान मंडल दल का नेता चुनने के लिए बैठक बुलाई है. जबकि नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव 29 मार्च की बैठक के जरिये यह जानना चाहते हैं कि अब आगे का सफर पार्टी किस राह पर चले.

आजम, शिवपाल को दरकिनार कर अखिलेश ने बनाया रामगोविन्द चैधरी को नेता प्रतिपक्ष
मुलायम की यह बैठक दरअसल अखिलेश पर दबाव बनाने की कोशिश का हिस्सा है. मुलायम सिंह यादव चाहते हैं कि विधान सभा में प्रतिपक्ष का नेता पद के लिए अखिलेश, शिवपाल यादव या फिर आजम खान के नाम को हरी झंडी दें. मगर सूत्र बताते हैं कि अखिलेश नहीं चाहते कि पार्टी के भीतर उनके इन बुरे दिनों में कोई नया मोर्चा खुले, लिहाजा वो रामगोविंद चैधरी के नाम पर दांव लगा रहे हैं. जो अखिलेश के बेहद करीबी हैं.

गौरतलब है कि सपा के नवनिर्वाचित विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष चुनने का अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश को दे रखा है, और मंगलवार को रामगोविंद चौधरी के नाम पर अधिकारिक मुहर भी लग जाएगी.

शिवपाल यादव को लेना होगा अपने सियासी भविष्य पर फैसला
समाजवादी पार्टी में हाशिये पर ढकेले गए शिवपाल यादव के लिए भी अब आर-पार की लड़ाई है. सूत्र बताते हैं कि चुनावों के दौरान शिवपाल ने इस बात के संकेत दिए थे कि 11 मार्च के बाद वे अलग पार्टी बनाएंगे. चुनाव में हार के बाद एक बार लग रहा था कि परिवार एकजुट हो जाएगा. इसका संकेत मुलायम ने भी दिया. उन्होंने हार के लिए अखिलेश को जिम्मेदार नहीं ठहराया बल्कि बहुत ही संतुलित बयान दिए. लेकिन पार्टी में महज एक विधायक के तौर पर शामिल शिवपाल यादव को अपने सियासी भविष्य के बारे में भी सोचना होगा. नेता प्रतिपक्ष न बनाए जाने के बाद कहा जा रहा है कि शिवपाल कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं.

वहीं अखिलेश यादव इशारो ही इशारों में कह चुके हैं कि उनके बहुत करीबियों ने ही भितरघात किया है. जिस पर समीक्षा कर कार्रवाई की जाएगी. साफ़ है कि इशारा किधर है. लिहाजा शिवपाल और उनके करीबियों पर भी गाज गिर सकती है.

इसकी शुरुआत अखिलेश ने बलिया के बांसडीह से विधायक रामगोविन्द चैधरी पर नेता प्रतिपक्ष के नाम पर मुहर लगाकर कर दी है. पुराने समाजवादी रामगोविन्द बीते दिनों दोनों गुटों की लड़ाई में अखिलेश के साथ डटकर खड़े हुए थे. ऐसे में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर अखिलेश सबसे ज्यादा भरोसा रामगोविन्द पर ही कर रहे हैं. कहा यह भी जा रहा है कि सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष 30 सितम्बर से पहले चुना जाना है. लिहाजा, अगले कुछ महीनों के दरमियान समाजवादी खेमे में सिरफुटव्वल तेज होने के आसार हैं.


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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में 'योगी जिंदाबाद' का नारा लगाना एक 17 साल के किशोर को महंगा पड़ा. विनिकेत उर्फ नन्हे को शिशुपाल नामक सपा नेता ने गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई.

मुरादाबाद मंडल के असमोली थाना क्षेत्र अंतर्गत मढ़ान के रहने वाले भाजपा नेता मोनू सिंह का भाई नन्हे रविवार की रात 'योगी जिंदाबाद' का नारा लगा रहा था. तभी उधर से गुजर रहे जिला पंचायत सदस्य उषा सिंह के पति शिशुपाल सिंह (सपा नेता) ने नन्हे को गोली मार दी.

पुलिस ने नन्हे का शव सोमवार को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
पुलिस का कहना है कि मामला चुनावी रंजिश का लगता है, वरना नारे लगाने पर कोई किसी को गोली क्यों मार देगा. सच क्या है, यह जांच से पता चलेगा. आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द होगी.

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