लखनऊ/इटावा। समाजवादी पार्टी में मचा विवाद थमने के बाद अब सब एक जुट होते हुए दिख रहे हैं। हाल ही में मुलायम सिंह यादव के भतीजे और शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव ने एक पोस्टर अपने ट्विटर एकाउंट पर शेयर किया है। जिसमें एक बार फिर से यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने के लिए लोगों से गुजारिश कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी में मचे सत्ता संग्राम के बाद अब ऐसा माना जा रहा है कि अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी का सिंबल मिलने और 1 जनवरी के अधिवेशन को वैधानिक मानकर मानने के बाद नए सिरे से जोशोखरोश देखा जा रहा है क्योंकि मुलायम सिंह यादव ने अपने आप को संरक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका में स्वीकार कर लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अखिलेश यादव की ताजपोशी के बाद अब समाजवादी पार्टी में स्पूर्ति आ गई है लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी का एक बार होना है। परिवार में चले घमासान के बीच कुछ नहीं है लेकिन मुलायम सिंह यादव ने जिस दिन से सभी लोगों को चुनाव में जाने के लिए छूटने के लिए कहा है, उसको देख कर के यही कहा जा सकता है कि आप एक बार फिर से समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल करने की तैयारी में जुट गई है। मुलायम और अखिलेश परिवार के बीच हुए विवाद के बाद विलेन की भूमिका में सामने आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव ने एक पोस्टर अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया है। यह पोस्ट आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पोस्टर में जहां मुलायम सिंह यादव की तस्वीर को जगह मिली हुई है मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर को जगह मिली हुई है भाई आदित्य यादव ने अपने पिता शिवपाल सिंह यादव को भी जगह दी ए खुदा रेत यादव की भी एक फोटो इसमें दर्शाई गई है आदित्य यादव ने इस पोस्टर के जरिए एक बार फिर से उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार विकास के जरिए बनाने की लोगों से अपील की है। लगातार इस तरीके की खबर निकालकर के सामने आ रही है कि मुलायम परिवार की परंपरागत जसवंतनगर विधानसभा सीट से शिवपाल सिंह यादव की जगह उनके पुत्र आदित्य यादव को टिकट दी जा रही है लेकिन ऐसा सिर्फ खबरों में ही बताया जा रहा है कि की अधिकारिक तौर पर अभी इस बात की पुष्टि और तस्दीक नहीं हो पाई है। बताते चले कि शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव पीसीएफ के चैयरमैन हैं।

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नई दिल्ली (टीम डिजिटल): आरजेडी चीफ लालू प्रसाद ने अपनी पार्टी के आसन्न उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कोई उम्मीदवार नहीं खडा करने की बात को दोहराते हुए आज कहा कि वे समाजवादी शक्ति की जीत सुनिश्चित करने के लिए अखिलेश यादव के पक्ष में प्रचार करेंगे। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रघुनाथ झा के फिर से राजद में शामिल होने के अवसर पर लालू ने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि भगवाधारी पार्टी की हार सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे। राजद प्रमुख ने कहा कि उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल एक राज्य का चुनाव नहीं बल्कि पूरे देश का है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार सुनिश्चित करने के बाद हम 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भगवाधारी पार्टी को उखाड फेंकेंगे। उन्होंने कहा कि समाजवादी शक्ति की जीत के लिए संयुक्त रूप से काम करने को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री (जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष) नीतीश कुमार से बात करेंगे। लालू ने नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री पर प्रहार करते हुए कहा कि नोटबंदी के विरोध में राजद द्वारा पटना में शीघ्र ही आयोजित की जाने वाली रैली में वे समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और वामदलों के नेताओं को बुलाएंगे। उन्होंने नोटबंदी के कारण लोगों को अभी भी हो रही कठिनाईयों का जिक्र करते हुए कहा कि गैर संगठित क्षेत्र के 40 हजार से अधिक मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।

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दिल्ली: उत्तर प्रदेश चुनाव में जहां कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर अपनी खोई हुई जमीन तलाश करने में लगी हुई है. तो वहीं इसी बीच कांग्रेस को एक बड़ा झटका लग गया है. आपको बता दें कि कई दशकों से कांग्रेस के साथ रहने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता, जो न जाने कितने बड़े पदों पर रह चुके हैं उन्होंने पार्टी को छोड़ दिया है. कांग्रेस के लिए सबसे बुरी खबर यह है कि उस नेता ने पार्टी छोड़ने के बाद बुधवार को भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. बीजेपी में जाने वाले इस वरिष्ठ नेता का नाम नारायण दत्त तिवारी हैं. जो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलने उनके आवास 11 अकबर रोड पहुंच चुके है. एनडी तिवारी की साथ उनकी पत्नी उज्जवला और उनके पुत्र रोहित शेखर भी मौजूद है. कहा जा रहा है कि एनडी तिवारी अपनी पत्नी और पुत्र के साथ बीजेपी में शामिल होंगे.

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नई दिल्ली : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सीएम अखिलेश यादव ने आज कांग्रेस और आरएलडी के बीच गठबंधन की अटकलों को साफ कर दिया है। बता दें कि पिछले कई दिनों से गठबंधन का मामला उलझा हुआ था। अखिलेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद ही यह साफ हो गया था कि अब जल्द ही कांग्रेस से सपा का गठबंधन होगा। लेकिन लोगों को इंतजार था कि गठबंधन करने वाली पार्टियों को अखिलेश कितनी सीटें देंगे। अखिलेश यादव द्वारा बनाया गया गठबंधन का फार्मूला कुछ इस तरह से है - - कांग्रेस को 85 सीट - आरएलडी को 25 सीट - समाजवादी पार्टी-293 कांग्रेस और आरएलडी को इतनी सीटें देकर अखिलेश ने गठबंधन की उलझी हुई गुत्थी को अब सुलझा दी है।

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यूपी चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के बीच गठबंधन करीब तय है। सीटों के बंटवारे पर भी सहमति हो चुकी है। इसका एलान बुधवार को कभी भी हो सकता है। अखिलेश यादव कांग्रेस के लिए 89 और रालोद के लिए 20 सीटें छोड़ने को तैयार हैं। सपा के 14 कैंडिडेट्स कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। यही वजह है कि यूपी में गठबंधन को लेकर अब कांग्रेस नेता खुलकर बोलने लगे हैं। शीला दीक्षित ने साफ तौर पर कहा कि सीएम की दावेदारी छोड़ देंगी। अखिलेश के सामने कई चुनौतियां... - हालांकि, गठबंधन के बाद अखिलेश के सामने कई चुनौतियां आने वाली हैं। कांग्रेस ने सपा के कब्जे वाली 10 से अधिक सीटें मांगी हैं। - अगर अखिलेश कांग्रेस की बात मान लेते हैं तो पार्टी में बगावत हो सकती है। - इन 10 सीटों के एसपी कैंडिडेट्स बागी होकर निर्दलीय लड़ सकते हैं या बीजेपी और बीएसपी का दामन थाम सकते हैं। - यही वजह है कि सपा के 14 कैंडिडेट्स कांग्रेस के सिंबल पर लड़ेंगे। 2012 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 27 और आरएलडी को 9 सीटें मिली थी। - बता दें कि कांग्रेस के 8 और आरएलडी के विधायक दल के नेता चौधरी दलबीर सिंह बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। मुलायम खेमे ने मानी हार,अखिलेश के लिए मांगेंगे वोट - इलेक्शन कमीशन (ईसी) के फैसले के बाद परिवार की महामीटिंग में यह तय हुआ है कि सारे वाद-विवाद खत्म कर सभी लोग चुनाव में प्रचार करेंगे। - मुलायम ने कहा, सत्ता वापसी की खातिर सभी लोग लग जाएं। परिवार की एकता के खिलाफ कोई बयान न दें। उन्होंने अखिलेश को अपने 38 उम्मीदवारों की लिस्ट सौंपी है। - बता दें कि ईसी ने पार्टी सिंबल विवाद पर फैसला अखिलेश गुट के फेवर में दिया था। 35% वोटबैंक पर नजर - पिछले तीन असेंबली इलेक्शन में एवरेज सपा को 25% और कांग्रेस को 10 फीसदी वोट मिले हैं। यूपी में 30% वोट पाने वाली पार्टी सरकार बना लेती है। इसके अलावा पश्चिमी यूपी में रालोद को 10% मत मिलते हैं। मुस्लिमों का भरोसा बढ़ेगा - प्रदेश में 19% मुस्लिम हैं। यह सपा और बसपा के वोटर्स हैं। बसपा ने इस बार 93 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। पिछले बार 67 टिकट दिए थे। - अब सपा औऱ् कांग्रेस से गठबंधन पर मुस्लिम वोटर का भरोसा बढ़ेगा। बीजेपी सवर्ण, ओबीसी और दलित वोटबैंक के भरोसे - बीजेपी ने पहली लिस्ट में 64 सवर्ण (जिसमें 33 क्षत्रिय और 11 ब्राह्मण), 44 ओबीसी और 26 दलित उतारे हैं। एक मुस्लिम कैंडिडेट्स को टिकट न देकर ध्रुवीकरण करने की भी कोशिश है। अखिलेश की सपा होने के क्या हैं मायने 1. अमर-शिवपाल को झटका, मुलायम बनेंगे मार्गदर्शक - अब अमर सिंह पार्टी से बाहर हो गए हैं। शिवपाल की चुनाव में भूमिका सीमित होगी। - प्रदेश अध्यक्ष पद नहीं मिलेगा। मुलायम सिंह यादव पार्टी के मार्गदर्शक के तौर पर पारी शुरू करेंगे। 2. मुख्तार की कौमी एकता दल का पत्ता कटेगा - कौमी एकता दल का विलय रद्द होगा। इस पर अखिलेश नाराज थे। इससे माफिया अतीक अहमद, मुख्तार के भाई सिबगतुल्लाह अंसारी के टिकट कट जाएंगे। 3. शिवपाल के करीबी और दागियों के कटेंगे - टिकट इस लड़ाई में शिवपाल के करीब शादाब फातिमा, अंबिका चौधरी, पिंटू राणा, गायत्री प्रजापति, रामपाल यादव, नारद राय, ओम प्रकाश सिंह का भी टिकट कट सकता है।

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