बीएसएफ जवान तेज बहादुर की पत्‍नी ने कहा- मेरे पति पर शिकायत वापस लेने और माफी मांगने का बनाया जा रहा है दबाव* सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान तेज बहादुर यादव की पत्‍नी शर्मिला यादव ने गुरुवार को दावा किया कि मेरे पति पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही मेरे पति पर माफी मांगने का दबाव बनाया जा रहा है। तेज बहादुर ने नया आरोप लगाते हुए कहा है कि उस पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। बता दें कि जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर तैनात बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्‍ट कर आरोप लगाया है कि जवानों को घटिया खाना खिलाया जाता है और कई बार उन्हें ‘खाली पेट’ रहना पड़ता है। *तेज बहादुर ने कल पत्नी से बातचीत में दबाव की बाबत खुलासा किया है। तेज बहादुर की पत्नी ने बुधवार को मीडिया में ऑडियो जारी कर आरोप लगाया है कि बीएसएफ जांच का दिखावा कर रही है और तेजबहादुर पर आरोप वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। तेज बहादुर की पत्नी ने कहा है कि अगर उनके पति को कुछ हुआ तो सरकार जिम्मेदार होगी। शर्मिला यादव ने यह भी दावा किया कि मेरे पति से कहा जा रहा है कि मीडिया से इस मामले में बात क्‍यों की। तेज बहादुर ने पत्‍नी से फोन पर बात कर इसका खुलासा किया है। तेज बहादुर ने नया आरोप लगाया है कि अधिकरी मेरे ऊपर दबाव बना रहे हैं। मुझ पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।* *मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जवान तेज बहादुर को दूसरी यूनिट में भेज दिया गया है और उसे प्लम्बर का काम सौंपा गया है। प्लंबर का काम दिए जाने पर आलोचना के बाद बीएसएफ ने कहा कि तेज बहादुर को कोई सजा नहीं दी गई है। निष्पक्ष जांच के लिए उसे अलग यूनिट में रखा गया है। तेज बहादुर के साथ न्याय होने की बात कही गई है।* बता दें कि तेज बहादुर ने सीमा पर बीएसएफ जवानों को मिलने वाले खाने की शिकायत करते हुए दो दिन पहले फेसबुक पर वीडियो पोस्‍ट किया था। इसके बाद ये वीडियो वायरल हो गया और बीएसएफ में खराब खाने के मुद्दे ने काफी जोर पकड़ लिया। गौर हो कि जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर तैनात बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने आरोप लगाया है कि जवानों को घटिया खाना खिलाया जाता है और कई बार उन्हें ‘खाली पेट’ रहना पड़ता है। बीएसएफ ने आरोप की जांच शुरू कर दी है। सोशल मीडिया मंच पर अपलोड किए गए वीडियो में वर्दी में और राइफल लिए इस जवान ने दावा किया है कि सरकार उनके लिए जरूरी चीजें खरीदती हैं लेकिन उच्च अधिकारी उसे ‘अवैध तरीके से बाजार में बेच देते हैं।’ चार मिनट से अधिक के तीन अलग अलग वीडियो में बीएसएफ की 29 वीं बटालियन के कांस्टेबल टीबी यादव ने वह खाना भी दिखाया है जो उन्हें कथित तौर पर खिलाया जाता है। यादव ने आरोप लगाया कि हमें नाश्ता में बस परांठा और चाय मिलती है और वह भी बिना अचार या सब्जी के। हम 11 घंटे ड्यूटी करते हैं, और कई बार हमें पूरी ड्यूटी के दौरान खड़ा रहना पड़ता है। भोजन में हमें दाल रोटी मिलती है और दाल में बस हल्दी और नमक होते हैं। यह है खाने की गुणवत्ता जो हमें मिलती है। (ऐसे में) कोई जवान कैसे अपनी ड्यूटी कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मैं प्रधानमंत्री से इसकी जांच कराने का अनुरोध करता हूं। कोई हमारी पीड़ा नहीं दिखाता।

NEW DELHI: बॉर्डर सिक्‍युरिटी फोर्स (बीएसएफ) के जवान तेज बहादुर का वीडियो सामने आने के बाद पूरे देश में सैनिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर लंबी बहस छिड़ चुकी है, वहीं इसबीच एक और जवान के वायरल वीडियो ने लोगों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। सामने आया नया वीडियो कहां और कब फिल्‍माया गया इसकी जानकारी अबतक नहीं प्राप्‍त हुई है। वीडियो में अपनी पीड़ा व्‍यक्‍त कर रहा युवक खुद को सीआरपीएफ का जवान बता रहा है। उसने अपना नाम कांस्‍टेबल जीत सिंह बताया है। बताई अपनी पीड़ा जीत सिंह नाम के जवान ने वीडियो के जरिए अपनी पीड़ा व्‍यक्‍त करते हुए कहा है कि वह सीआरपीएफ में कार्यरत है। उसने बताया कि सीआरपीएफ के जवान देश में विषम परिस्‍थितयों में अपनी ड्यूटी देते हैं। लोकसभा चुनावों से लेकर ग्राम पंचायत के चुनाव में सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किया जाता है। उसने कहा कि कश्‍मीर से लेकर छत्‍तीसढ़ के जंगलों, वीवीआईपी-वीआईपी सिक्‍युरिटी, एयरपोर्ट, मंदिर-मस्‍जिद और बाजारों में भी सीआरपीएफ के जवान अपनी सेवा देते हैं बावजूद इसके उन्‍हें दी जाने वाली सुविधाएं नाकाफी हैं। पीएम मोदी से लगाई है गुहार वायरल हुए इस नए वीडियो में जीत सिंह ने सरकार से मांग की है कि सीआरपीएफ के जवानों के साथ भेदभाव बंद किया जाए। उसने मांग की है कि सेना के जवानों की तरह ही सीआरपीएफ के जवानों को भी पेंशन सुविधा, मेडिकल सुविधा, कैंटीन की सुविधा प्रदान की जाए। जीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का ध्‍यान अपनी मांगों की तरफ आकृष्‍ट किया है। वीडियो में सीआरपीएफ जवान ने यह भी कहा कि जहां एक तरफ देश में शिक्षकों के लिए अच्‍छी तनख्‍वाह के साथ-साथ परिवार के साथ पर्व-त्‍यौहार मनाने के लिए छुट्टियों की सुविधाएं मिलती हैं वहीं सीआरपीएफ जवानों के साथ भेदभाव क्‍यों अपनाया जाता है। जवान ने सेना और सीआरपीएफ के जवानों को मिलने वाली सुविधाओं में अंतर को भी बताया है। .

*अपने अफसरों को पोलखोलने वाले BSF जवान के पिता ने दिया बयान* बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के जवान तेज बहादुर यादव के पिता ने मामले पर पहली बार बयान दिया। मंगलवार (10 जनवरी) को तेज बहादुर के पिता ने कहा, ‘दिसंबर में आया था, कह रहा था कि वहां अब नहीं रह सकता, खाना नहीं मिल रहा है।’ गौरतलब है कि 9 जनवरी को फेसबुक पर एक वीडियो शेयर किया गया था। उसमें बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने अफसरों पर सेना का राशन बेच  देने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही बहादुर ने कुछ वीडियो पोस्ट करके दिखाया था कि जवानों को खाने-पीने के लिए ठीक खाना नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा था कि सरकारें को उनके लिए काफी कुछ करती हैं लेकिन सेना के अफसर आने वाले राशन को मार्केट में बेच देते हैं। उन्होंने कहा था कि नाश्ते  में उन्हें केवल चाय और एक जला हुआ परांठा मिलता है। उन्होंने दाल रोटी की वीडियो पोस्ट करके दिखाया था कि दाल के नाम पर सिर्फ पानी दिया जाता है। वहीं बीएसफ ने तेज बहादुर द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत बताया था। अधिकारियों की तरफ से तेज बहादुर को शराबी तक कहा गया था। साथ ही कहा गया था कि उसने कई बार पहले भी अनुशासनहीनता का काम किया है। एक अधिकारी ने बताया था कि यादव को कम से कम चार बार बड़ी सजाएं दी जा चुकी है। इनमें शराब पीकर गाली-गलौच करना, अभद्र भाषा का इस्‍तेमाल, गैरमौजूद रहना और आधिकारिक आदेश से विपरीत काम करने के आरोप शामिल हैं। आखिरी अपराध के लिए उन्‍हें बीएसएफ कोर्ट ने सात दिन की कड़ी जेल की सजा दी थी। दूसरी तरफ 10 जनवरी को तेज बहादुर ने कहा कि वीडियो के सबके सामने आने के बाद उसका तबादला करके प्लंबर का काम दे दिया गया है। इतना ही नहीं तेज बहादुर ने दावा किया कि उसके सीनियर ने वीडियो को हटाने का दवाब भी बनाया था। इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, तेज बहादुर ने कहा कि अब बीएसएफ कैंप से उसका ट्रांसफर हेडक्वाटर में कर दिया गया। उसने यह भी कहा कि उसे प्लंबर का काम करने के लिए दिया गया। उसने कमांडेंट पर वीडियो को हटाने के लिए दबाव बनाने का आरोप भी लगाया।

...* न्यूज़ ग्राउंड एक्सक्लूसिव/जसप्रीत सिंह सुरक्षा बलों के 35 हजार 473 जवान और कर्मियों ने 2010 और 2012 में स्वैछिक सेवानिवृत्ति ली या इस्तीफा दे दिया। यानी औसतन हर रोज करीब 50 जवान नौकरी छोड़ देते हैं। 2012 में जारी गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में यह दावा किया गया। सबसे ज्यादा नौकरी सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के जवान छोड़ते हैं। 2010 से 2012 के बीच 15 हजार 990 बीएसएफ जवानों ने यह कदम उठाया। दूसरा नंबर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का है, जिसके 11 हजार से ज्यादा जवानों ने इन दो सालों में वीआरएस लिया। जवानों की नौकरी छोड़ने, आत्महत्या और अनुशासनहीनता का कारण पता करने के लिए सरकार ने आईआईएम अहमदाबाद को शोध की जिम्मेदारी सौंपी। 2012 में ही जारी इस शोध रिपोर्ट में तनाव को नौकरी छोड़ने का सबसे बड़ी वजह बताया गया। तनाव के कारण,कम नींद, लंबी ड्यूटी, कम छुट्टी, रैंक के अनुसार ड्यूटी न मिलना, हमले की स्थिति में भी फैसला लेने का कम अधिकार, वेतन में असमानता, शिकायतों पर गौर न करना, खराब वर्दी पहनने से आत्मविश्वास कम होना, क्षेत्र में तैनाती के दौरान सेलफोन की सुविधा न मिलना, परिवार के साथ वक्त गुजारने का कम मौका, अधिकारियों की कमी और अधिकारियों की गलत टिप्पणी। अगस्त, 2015 में संसद में एक सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बताया कि जवानों का तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान, वरिष्ठों के साथ नियमित संपर्क, छुट्टियों को लेकर लचीली नीति और तनाव प्रबंधन जैसे उपाय किए जा रहे हैं। जसप्रीत

जय श्री राम शुभ मंगलवार भारत माता की जय ॐ रामाय नमः सेना को बदनाम न करे 1947 से आज तक भारत को सुरक्षित रखने का काम सेना ने किया है । कैसे 2 हालात में युद्ध लड़े 1948 और 1962 में तो हथियार भी पुरे नही थे तब क्या कोई भारतीय नागरिक , मीडिया या राजनेता खुद को कठघरे में खड़ा किया अगर नही तो एक टुकडी में कुछ गड़बड़ी को लेकर 70 साल से विश्व में सशक्त सेना को एक साथ कठघरे में खड़े करने वाले मीडिया और राजनेताओं को 24 घण्टे जाँच तक सब्र नही क्यों क्या मीडिया और नेता सेना के मनोबल को गिराने का अवसर ढ़ुढ़ते रहते है । जबकि 70 साल में हर राजनेता किसी न किसी रूप से सत्ता में थे पर किये कुछ नही अब दिन भर बहस और टीका टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है जाँच का इंतजार करे जो दोषी होगा उसे सजा मिलेगी क्योकि सेना की न्याय प्रणाली मजबूत है इतना दिन चुप नही रह सकते है क्या हर हर महादेव बी एस त्रिपाठी राष्ट्रीय संयोजक तिरपाल से मन्दिर निर्माण मुहीम अयोध्या

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