लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी, इमरजेंसी, कालाधन पर कांग्रेस पर किये तीखे कटाक्ष नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब दिया. उन्होंने चर्चा का जवाब देते हुए हाल के दिनों में राजनीतिक मुहावरे के रूप में प्रयोग होने वाले भूकंप शब्द का उपयोग किया और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि कोई तो कारण रहा होगा कि भूकंप आ गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज विमुद्रीकरण, बेनामी संपत्ति, कालाधन व इमरजेंसी का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर खूब तीर दागे. मालूम हो कि संसद के शीतकालीन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी विमुद्रीकरण समेत कई मुद्दों पर नहीं बोल पाये थे. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोई स्कैम में भी सेवा भाव देखता है, स्कैम में भी नम्रता का भाव देखता है तो धरती मां दुखी हो जाती हैं. तब जाकर भूकंप आता है।

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चुनाव और राजनीति के भंवर में आम बजट भी फंसा। जीएसटी भी एक अप्रैल से लागू होना मुश्किल। इस बार केन्द्र सरकार के आम बजट को लेकर देश भर के लोगों में उत्सुकता के साथ-साथ अपेक्षाएं भी है। देश के नागरिक नोटबंदी के माहौल में राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। चूंकि इस बार रेल बजट भी आम बजट में शामिल है, इसलिए बजट का महत्व और बढ़ गया है। इस बार के आम बजट की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार 28 फरवरी के बजाए एक फरवरी को ही बजट प्रस्तुत करने जा रही है। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस बार का आम बजट चुनाव और राजनीति के भंवर में फंस गया है। 4 जनवरी को चुनाव आयोग ने जैसे ही 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव की घोषणा की, वैसे ही राजनीतिक दलों ने मांग शुरू कर दी कि अब एक फरवरी को आम बजट प्रस्तुत नहीं किया जाए। ऐसे राजनीतिक दलों के नेताओं को लगता है कि केन्द्र में भाजपा की सरकार है इसलिए आम बजट में राहत की घोषणाएं कर भाजपा 5 राज्यों में राजनीतिक फायदा उठाएगी। 4 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त जैदी ने भी एक सवाल के जवाब में कहा कि आम बजट के बारे में चुनाव आयोग को जानकारी है। यानि चुनाव आयोग भी यह चाहता है कि केन्द्र सरकार एक फरवरी को आम बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं करें जो चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करती हो। अब देखना है कि भंवर में फंसे बजट को केन्द्र सरकार किस प्रकार लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रस्तुत करती है। हो सकता है कि एक फरवरी को सरकार का खर्च चलाने के लिए ही अन्तरिम बजट पेश किया जाए। चुनाव परिणाम के बाद राहत वाला बजट प्रस्तुत हो। यह तो तय है कि अब एक फरवरी वाले बजट में नागरिकों को कोई राहत नहीं मिल पाएगी। जीएसटी भी मुश्किल में : देश में एक समान कर प्रणाली यानि जीएसटी और बजट से पहले देशभर के वित्त मंत्रियों की एक बैठक 4 जनवरी को दिल्ली में केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली की अध्यक्षता में हुई। सरकार ने जीएसटी बिल को संसद के दोनों सदनों में स्वीकृत करा रखा है और आगामी एक अप्रैल से देश भर में जीएसटी लागू होना है, लेकिन 4 जनवरी को जेटली की बैठक में दिल्ली, केरल, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के वित्त मंत्रियों ने जो तेवर दिखाए, उससे प्रतीत होता है कि देश के सभी राज्यों में जीएसटी लागू होना मुश्किल है। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा तो बैठक का बायकाट कर बाहर आ गए। दलगत राजनीति की वजह से देश में जनता की भलाई की योजनाएं भी लागू नहीं हो पा रही हैं। सब जानते हैं कि जीएसटी के लागु होने से देश में कर प्रणाली एक सी होगी। (एस.पी.मित्तल) 4-01-17)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर से लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव साथ साथ कराने की वकालत करते हुए मीडिया से इस मामले में देश भर में माहौल तैयार करने की अपील की है। मीडियाकर्मियों के साथ दिवाली मिलन समारोह के संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में साथ-साथ चुनाव न होने केकारण कई तरह की समस्या खड़ी होती है। आचार संहिता लागू होने केकारण न सिर्फ विकास कार्यों पर असर पड़ता है, बल्कि चुनावी व्यवस्था में गैरचुनावी राज्यों के अधिकारियों की भूमिका केकारण योजनाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान सहित कई अभियानों में जनभागीदारी बढ़ाने में मीडिया की भूमिका की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि मीडिया देश में कई तरह की महत्वपूर्ण चर्चाओं को जन्म ही नहीं देती बल्कि इसे मजबूती प्रदान कर देश में एक सकारात्मक माहौल तैयार करती है। मगर लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ होने जैसे मुद्दे पर चर्चा में ठहराव आ जाता है। उन्होंने कहा कि निजी बातचीत में सभी दल साथ साथ चुनाव कराने के पक्षधर हैं। मगर जब उन्होंने खुल कर इसका समर्थन किया तो राजनीतिक दलों साथ नहीं मिला। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार साथ साथ चुनाव कराने का निर्णय थोप नहीं सकती। मीडिया से भी वह यह नहीं कह रहे कि वह साथ-साथ चुनाव के पक्ष में खड़ा हो। अगर उसे लगता है कि साथ-साथ चुनाव नहीं होना चाहिए तो वह इसकी भी चर्चा कराए। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मोदी सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाई। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की जादुई व्यक्तित्व, स्पष्ट नीति और दृढ़इच्छाशक्ति ने एक समय अनिश्चय में फंसे देश का शुमार ताकतवर देशों में कराया है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, रक्षा मंत्री मनोहर परिकर, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा भी मौजूद थे।

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