नई दिल्ली: बुधवार को आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने संसदीय समिति को बताया कि किस तरह पिछले साल जनवरी से नोटबंदी पर चर्चा शुरू हो चुकी थी. वहीं पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह कुछ सवालों के मामले में पटेल की मदद के लिए आगे बढ़े. डॉ सिंह जो कि प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री से पहले आरबीआई के गवर्नर रह चुके हैं, उन्होंने पटेल को सलाह दी थी कि ऐसे किसी सवाल का जवाब न दें जो केंद्रीय बैंक और उसकी स्वायत्ता के लिए परेशानी का सबब बन जाए. बता दें कि जानकारों का मानना है कि नोटबंदी के बाद आरबीआई की छवि और उसकी स्वायत्ता पर बुरा असर पड़ा है. वित्तीय मामलों की स्थायी समिति के सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के सांसद दिग्विजय सिंह ने जब पटेल से पूछा कि अगर नकदी निकासी पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया जाए तो क्या माहौल 'अराजक' हो जाएगा. इस पर सिंह ने पटेल को समझाया कि 'आपको इस सवाल का जवाब नहीं देना चाहिए.' गौरतलब है कि हाल ही में आरबीआई ने एटीएम से पैसे निकालने की सीमा को 4500 प्रति दिन से बढ़ाकर 10 हज़ार रुपये कर दी है. हालांकि एक बचत खाते से हफ्ते में अभी भी 24 हज़ार रुपये ही निकाले जा सकते हैं. गुरुवार को आरबीआई प्रमुख ने समिति को बताया कि नई करेंसी में 9.23 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में डाले जा चुके हैं. उर्जित पटेल ने संसदीय समिति को यह भी बताया कि नोटबंदी पर चर्चा पिछले साल जनवरी से जारी थी. आरबीआई गवर्नर का यह बयान समिति को पहले दिए गए उस लिखित बयान के उलट है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री द्वारा 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोटों को प्रचलन से हटाने की घोषणा से सिर्फ एक दिन पहले 7 नवंबर को सरकार ने आरबीआई को बड़े रद्द नोटों को रद्द करने की 'सलाह' दी थी. वहीं पिछले साल नवंबर में डॉ सिंह ने संसद में पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले को ‘प्रबंधन की विशाल असफलता’ है और यह संगठित एवं कानूनी लूट-खसोट का मामला बताया था. उन्होंने कहा था कि वह नोटबंदी के उद्देश्यों को लेकर असहमत नहीं हैं, लेकिन इसके बाद बहुत बड़ा कुप्रबंधन देखने को मिला, जिसे लेकर पूरे देश में कोई दो राय नहीं.

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पंजाब में गुरुदासपुर बॉर्डर के पास सात आतंकियों के देखे जाने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट और सभी मेट्रो स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था चुस्त कर दी गई है. अमृतसर से मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, 'चकरी और गुरुदासपुर चौकी के पास सात आतंकी कैप्टन और सुबेदार रैंक के आर्मी यूनिफॉर्म हासिल करने में सफल हो गए हैं. यह आशंका है कि घुसपैठ के बाद आतंकी इन यूनिफॉर्म को पहनकर घूम रहे हैं.' यह जानकारी के मिलने के तत्काल बाद पंजाब में चुनाव ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों और दिल्ली एयरपोर्ट तथा मेट्रो स्टेशनों में लगे सुरक्षा कर्मियों को अलर्ट कर दिया गया है. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार सीआईएसएफ के एक अध‍िकारी ने बताया, 'गणतंत्र दिवस को देखते हुए पहले से ही एयरपोर्ट पर उच्च स्तर की सुरक्षा है और दो अतिरिक्त सुरक्षा लेयर बनाए गए हैं. इसी तरह मेट्रो की सुरक्षा में एक और लेयर तैनात कर दिया गया है. मेट्रो में पहली सुरक्षा लेयर लाइन में लगे लोगों के पास और उसके बाद मेटल डिटेक्टर के पास एक लेयर तैनात है.' हालांकि लोगों को इससे थोड़ी दिक्कत हो रही है, क्योंकि सीआईएसएफ के जवान अक्सर दो जगह सामान की जांच कर रहे हैं. एक यात्री ने बताया, 'कई जगह सीआईएसएफ के लोग महिलाओं से उनकी ज्वैलरी भी निकलवा ले रहे हैं. कई यात्रियों से एंट्री गेट पर सामान जांच करवाने को कहा जा रहा है.' इसी तरह एयरपोर्ट पर भी सुरक्षा व्यवस्था काफी चाक-चौबंद कर दी गई है. सीआईएसएफ के डायरेक्टर जनरल ओपी सिंह ने कहा कि हमने एयरपोर्ट आने वाली सड़क की सुरक्षा बढ़ाई है और ब्रेकर्स लगाए हैं ताकि गाड़ियों की रफ्तार कम हो सके. हमने विमान कंपनियों से भी कहा है कि विमान में यात्रियों के घुसने से पहले एक चेकिंग पॉइंट शुरू किया जाए. इसके अलावा कई बार सुरक्षा जांच होने से यात्रियों से कहा गया है कि वह काफी पहले एयरपोर्ट पहुंचे, क्योंकि कतारें लंबी हो सकती हैं.

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समाजवादी पार्टी का चुनाव निशान साइकिल अखिलेश यादव गुट को मिलने के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का पूरा स्वरूप ही बदलता दिख रहा है। समाजवादी पार्टी में अखिलेश और मुलायम गुट के झगड़े की वजह से ऐसी परिस्थितियां बन रहीं थीं कि ये चुनाव अब तक बीजेपी के लिए walkover माना जा रहा था । इस झगड़े का सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को मिलता दिखाई दे रहा था । हालांकि चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलते नज़र आ रहे हैं । उत्तर प्रदेश का चुनाव अब त्रिकोणीय ना होकर Bipolar होता नज़र आ रहा है । यही नहीं अगर अखिलेश यादव अगर राहुल गांधी और अजित सिंह के साथ मिलकर मजबूत महागठबंधन बना लेते हैं तो संभावित गठबंधन की भूमिका उत्तर प्रदेश में ठीक वैसी ही होगी जैसी बिहार चुनाव में नीतीश के नेतृत्व में बने महागठबंधन की थी । साइकिल का चुनाव निशान अखिलेश यादव को मिलने का समाजवादी पार्टी पर तो असर पड़ा ही है साथ ही साथ इसका सीधा असर भारतीय जनता पार्टी पर भी पड़ने जा रहा है । समाजवादी पार्टी और यादव परिवार के झगड़े से फायदा उठाने की ताक में बैठी बीजेपी को अब पूरी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा । माना जा रहा है कि संभावित गठबंधन का एजेंडा caste और Communal मुद्दों से अलग government और development का होगा । संभावित महागठबंधन गरीबी, बेरोज़गारी, भुखमरी, क्षेत्रीय असंतुलन और नोटबंदी से पैदा हुई दुश्वारियों को लेकर जनता के बीच जाएगा। राजनैतिक समीकरण के बदलने के साथ ही ये चुनाव अब किसी के लिए cakewalk नहीं रह गया है, बल्कि अब लड़ाई बराबर की है । अब प्रत्याशियों का चयन बेहद खास और महत्वपूर्ण हो गया है, चाहे बीजेपी हो या फिर संभावित महागठबंधन, किसी ने भी प्रत्याशियों के चयन में थोड़ी भी लापरवाही बरती तो इन दलों को इसका सीधा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए अब सभी दलों के लिए प्रत्याशियों का चयन सबसे बड़ी चुनौती है। अगर प्रत्याशियों के चयन की प्रतिक्रिया में आंतरिक विद्रोह बढ़ा, तो विद्रोही प्रत्याशी उन दलों के political propects को बुरी तरह प्रभावित करेंगे।

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जनाधिकार पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के मधेपुरा से लोक सभा सांसद पप्पू यादव अक्सर अपने बयानों से मीडिया में बने रहते हैं। इस बार उन्होंने राजधानी पटना से सटे हाजीपुर में खुले मंच से कहा कि उन्होंने न कभी राष्ट्र गान गाया है और न कभी गाएंगे। सांसद ने कहा कि ‘जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता’ यह जॉर्ज पंचम को खुश करने के लिए गाया गया था। लिहाजा, यह जानने के बाद भी कोई दूसरा व्यक्ति हमारे देश का भाग्य विधाता कैसे हो सकता है और हम इसे कैसे गा सकते हैं। हाजीपुर के चकमकरण गांव में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान पप्पू यादव नए अंदाज में दिखे। उन्होंने भोजपुरी गाना गाकर भी लोगों का मनोरंजन किया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से यह भी कहा कि आज तक उन्होंने जन गण मन को नहीं गाया है और न आगे कभी गाऊंगा। सांसद ने कहा कि इसे गाने की बाध्यता को लेकर संविधान भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। यह पहला मौका नहीं है जब पप्पू यादव का बड़ बोलापन सामने आया हो। वह कई बार कई नेताओं पर भी उल्टे-पुल्टे बयान दे चुके हैं। लालू यादव और उनके परिवार पर बयानों की वजह से ही पप्पू यादव को राष्ट्रीय जनता दल से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मधेपुरा से जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव को हराकर सांसद बने हैं। इससे पहले पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बारे में भी कई बातें कही थीं और उन्हें चरित्रहीन तक करार दिया था। पप्पू से पहले जेडीयू के एक नेता ने भी राष्ट्र गान को लेकर सवाल उठाया था। उसके बाद पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था। कुछ दिनों पहले पहले पप्पू यादव ने कहा था कि सच में अगर नीतीश कुमार बेनामी संपत्ति को बाहर लाना चाहते हैं तो पहले आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार सहित अपने पार्टी के विधायकों और सांसदों की संपत्ति की जांच कराएं। इसके बाद अधिकारियों की संपति की भी जांच कराएं।

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भारतीय रेल बदलाव के दौर से गुजर रही है। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद रेलवे में प्राथमिकता के आधार पर सुधार किए गए हैं। रेल मंत्रालय ने कई पुराने नियम बदले हैं। मुसाफिरों की सुविधा का ध्यान भी रखा है। इसी कड़ी में सुरेश प्रभु की रेलवे ने 50 साल पुराना एक नियम बदल दिया है। इसी के साथ अब मुसाफिरों की बल्ले-बल्ले हो गई है। रेलवे ने टिकट बुकिंग और रिजर्वेशन को लेकर कई बदलाव किए हैं। इन बदलावों की कड़ी में अब 50 साल पुराने एक नियम को बदला गया है। इसके तहत अब रेलवे में डिस्टेंस पर लगाई गई पाबंदी को हटा दिया गया है। अब लंबी दूरी की ट्रेन में टिकट के लिए लोगों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। सुरेश प्रभु की रेलवे ने मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में टिकट बुक कराने का 50 साल पुराना नियम बटा दिया है। अब लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में भी किसी भी दूरी तक का टिकट लिया जा सकता है। रेलवे ने डिस्टेंस रिस्ट्रिक्शन के नियम को खत्म कर दिया है। इस नियम को हटाने से पहले लंबी दूरी की मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों में 160 किलोमीटर से कम और स्लीपर क्लास के लिए 400 किलोमीटर से कम के सफर के लिए टिकट नहीं दिये जाते थे।इसको लेकर यात्रियों ने कई बार अपनी शिकायत भी दर्ज कराई थी। रेलवे का ये नियम 1968 में लागू किया गया था। उस समय रेलवे ने तर्क दिया था कि कम दूरी का टिकट देने से लंबी दूरी का सफर करनेवालों को परेशानी हो सकती है। कम दूरी का टिकट बुक होने के कारण लंबी दूरी का टिकट लेनेवालों को बर्थ नहीं मिल पाती है। इसके तहत रेलवे की तरफ से सभी जोन को ये अधिकार दिये गए थे कि वे अपने अपने जोन में ट्रेनों में जरुरत के मुताबिक इस नियम के तहत स्टेशन की पहचान कर के उनके लिए न्यूनतम दूरी के टिकट देने पर रोक लगा सकते हैं। अलग अलग जोन की तरफ से ट्रेन की क्लास और दूरी अलग से तय की गई थी। यात्रियों की शिकायत रहती थी। होता ये था कि लंबा सफर करने वालों को लंबी दूरी की ट्रेन में टिकट नहीं मिल पाती थी। एक शिकायत ये भी थी कि लंबी दूरी की ट्रेनों में बर्थ खाली रहने पर करंट काउंटर से टिकट दिया जाता है तो फिर एडवांस रिजर्वेशन में ये सुविधा क्यों नहीं दी जाती। फिलहाल अब सुरेश प्रभु की रेलवे ने पुराने नियम को खत्म कर दिया। अब किसी भी ट्रेन में कितनी भी दूरी के लिए सीट या बर्थ बुक कराया जा सकेगा। इसी के साथ अब मुसाफिर किसी भी ट्रेन में कितनी भी दूरी का टिकट ले सकते हैं। बता दें कि सुरेश प्रभु के रेल मंत्री बनने के बाद से रेलवे में कई बदलाव आए हैं। रेल मंत्री सुरक्षा और सुविधा दोनों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। पीएम मोदी ने भी एक कार्यक्रम में कहा था कि पहले रेलवे का इस्तेमाल सरकारें गिराने और बनाने के लिए किया जाता था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने रेल बजट को भी खत्म कर दिया है। अब अलग से रेल बजट नहीं पेश किया जाएगा। आम बजट के साथ ही वित्त मंत्री रेल बजट भी पेश करेंगे।

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