इस बार चुनाव ही ना लड़ूं शिवपाल यादव लखनऊ- समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता शिवपाल यादव ने गुरुवार को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मेरा मन तो कर रहा है इस बार मैं चुनाव ही ना लड़ूं। आपको बता दें कि पिछले तीन महीने से समाजवादी पार्टी में पारिवारिक और राजनीतिक कलह जारी है। चुनाव आयोग के फैसले के बाद अखिलेश को चुनावी चिह्न साइकिल मिल गई है। बीते दो दिन पहले नेताजी मुलायम सिंह यादव ने 38 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी। जिसमें शिवपाल यादव का नाम नहीं था। शिवपाल के इस बयान को उसी मसले से जोड़कर देखा जा रहा है। अभी ये कह पाना मुश्किल होगा कि शिवपाल चुनाव लड़ेंगे या नहीं। क्योंकि अभी सपा ने पहली ही लिस्ट जारी की है। आगे की लिस्ट में शिवपाल के नाम की संभावना हो सकती है।

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गोरखपुर- जाम की परेशानी तो जाने की नाम ही नही ले रही है कल रात शादी की लग्न मे गोरखनाथ पुल पर घण्टो परेशान रहे लोग भी फसे रहे इसको लेकर पुलिस प्रशाशन भी मूक दर्शक बानी हुई है

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी में पहली लिस्ट जारी होने के बाद अब बचे प्रत्याशियों में हलचल शुरू हो गयी है। इसी बीच प्रतापगढ़ के कुंडा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह(राजा भैया) ने समाजवादी पार्टी से अलग होने की अटकलों पर विराम लगा दिया। राजा भैया ने कहा, सपा से कोई विवाद नहीं है, निर्दलीय रहते हुए चुनाव में अखिलेश यादव के समर्थन में वोट डालने की अपील करूंगा। राजा भैया ने बातचीत के दौरान कहा,मैं बाहुबली नहीं हूं, मीडिया ने नाम दे रखा है। बता दें कि बीते कि दिनों से राजा भैया के भाजपा में जाने की अटकलें लगाई जा रही थी। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाक़ात के सवाल पर उन्होने कहा कि राजनाथ सिंह से इधर मुलाकात नहीं हुई पर होती रहती है। उन्होने कहा कि इस बार भी समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत से सरकार बनेगी।

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यूपी विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के नामांकन प्र​क्रिया की शुरुआत हो चुकी है और अभी तक बसपा को छोड़ कोई भी दल सभी प्रत्याशी नहीं दे सका है. एक तरफ सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर रस्साकशी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ कई साल बाद यूपी की सत्ता में आने के सपने बुन रही बीजेपी भी गठबंधन के फेर में प्रत्याशियों की घोषणा नहीं कर पा रही है. यही नहीं बीजेपी में शामिल हुए बाहरी नेता भी प्रत्याशी चयन में भारी रोड़ा बने हुए हैं. दरअसल बीजेपी की सहयोगी अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) ने 50 से ज्यादा सीटों पर दावा जता दिया है. वहीं बीजेपी इन दोनों ही दलों को एक दर्जन से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं है. कारण ये है कि बिहार में गठबंधन दलों ने सीटें काफी बढ़-चढ़कर ली थीं लेकिन उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था, इसलिए इस बार बीजेपी कोई भी रिस्क लेना नहीं चाहती. पार्टी की रणनीति पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुर्मी और इसकी समकक्ष जातियों को साधने की है. इसी रणनीति के तहत पार्टी ने न सिर्फ इसी बिरादरी के केशव प्रसाद मौर्य को अध्यक्ष बनाया, बल्कि उज्जवला योजना आदि की शुरुआत भी पूर्वी उत्तर प्रदेश से ही की. 2007 में सोनेलाल पटेल के रहते भाजपा ने अपना दल को 38 सीटें दी थी. वैसे अपना दल में भी बहुत कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पार्टी में वर्चस्व की जंग को लेकर अनुप्रिया पटेल एक तरफ हैं, जबकि उनकी बहन पल्लवी पटेल दूसरी तरफ, इनमें मां कृष्णा पटेल पल्लवी की तरफ हैं. इनके बीच पार्टी पर कब्जे की लड़ाई काफी समय से चुनाव आयोग में चल रही थी. अब पिछले दिनों चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि मामले का निपटारा दोनों पक्ष जाकर निचली अदालत में कराएं. इधर चुनावों का ऐलान हो चुका है और ऐसे में अदालत जाने पर चुनाव तैयारियां पूरी तरह से धुल जाएंगे. इसी को लेकर अनुप्रिया पटेल की तरफ से मां कृष्णा पटेल से समझौते को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं. अपना दल में अनुप्रिया पटेल गुट के राष्ट्रीय प्रवक्ता बृजेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहती है इसके लिए कृष्णा पटेल पक्ष को राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ रोहनिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया है. हम दूसरे पक्ष से लगातार बात करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनकी तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिला. उधर लखनऊ की शहरी और ग्रामीण सीटों पर कई बाहरी नेताओं को शामिल करने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी से भी गठबंधन की खबरें आ रही हैं. मामले मे पार्ट के संस्थापक आरके चौधरी का कहना है कि उनकी तरफ से आधा दर्जन सीटें मांगी जा रही हैं लेकिन बीजेपी अभी दो सीटें देने को कह रही है. आरके चौधरी की मोहनलालगंज सीट पर अच्छी पकड़ मानी जाती है. ये वो सीट हैं, जहां से बीजेपी को कभी जीत ​नहीं मिली है. यूपी में सात चरणों में चुनाव उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के अखिलेश धड़े के बीच गठबंध के बावजूद बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा. केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर दांव खेला है. इसका कितना फायदा उसे इन चुनावों में मिलेगा वह 11 मार्च को सामने आ ही जाएगा. ये होंगे चुनावी मुद्दे इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के अलावा प्रदेश की कानून व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है. जहां एक ओर बीजेपी और बसपा प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश सरकार को घेर रही हैं, वहीँ विपक्ष नोटबंदी के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है. यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 224 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. पिछले चुनावों में बसपा को 80, बीजेपी को 47, कांग्रेस को 28, रालोद को 9 और अन्य को 24 सीटें मिलीं थीं.

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पीएम मोदी को जान से मारने की साजिश, सिक्‍योरिटी तोड़ने का आतंकियों ने बनाया प्‍लान देहरादून। 21 जनवरी को देहरादून में होने वाली इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की संयुक्त कमांडर कांफ्रेंस के दौरान कोई चूक न हो इसलिए तमाम सरकारी विभागों ने अपनी-अपनी तैयारी पूरी कर ली है। कमांडर कांफ्रेंस के दौरान ड्यूटी में लगे पुलिस कर्मियों को सतर्क रहने के लिए खास हिदायत दी गई है। आशंका है कि कोई फर्जी पुलिस या फर्जी आर्मी का सहारा लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जान को खतरा पंहुचा सकता है। पुलिस अधिकारी राम सिंह मीणा ने कहा है कि संदिग्‍ध आतंकी पुलिस या सेना की वर्दी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसलिए आईएमए कैंपस को पूरी तरह से जीरो जोन बना दिया गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि बाहर की सुरक्षा व्‍यावस्था पूरी तरह से पुलिस के हाथों में होगी, जबकि अंदर की सुरक्षा सेना के हाथों में होगी। इसके लिए पुलिसकर्मियों कोअच्‍छी तरह से ब्रीफ भी किया गया है। सुरक्षा में तैनात सभी सुरक्षाकर्मियों को फोटो युक्‍त पहचान पत्र जारी किए गये हैं। पुलिस को निर्देश दिए गए कि ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे लोगों को ज्यादा परेशानी न हो परिसर कोपमरी तरह से मोबाइल फोन फ्री रखा गया है। अभिसूचना एपी अंशुमन, गढ़वाल आयुक्त विनोद शर्मा, डीआईजी पुष्पक ज्योति, जिलाधिकारी रविनाथ रमन, एसएसपी स्वीटी अग्रवाल जैसे तमाम बड़े अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विचार विमर्श किया। शुक्रवार को रिहर्सल और शनिवार को कार्यक्रम के दौरान आईएमए परिसर पूरी तरह जीरो जोन रहेगा। साथ ही संदिग्धों की धरपकड़ के लिए अभियान चलाया गया है। कमांडर कांफ्रेंस के दौरान पुलिस अधीक्षक 10, एएसपी एक, पुलिस उपाधीक्षक 14, इंस्पेक्टर 12, थानाध्यक्ष तीन, उप निरीक्षक 79, महिला उप निरीक्षक छह, हैड कांस्टेबल 21, कांस्टेबल 218, महिला कांस्टेबल 11, पीएसी की तीन कंपनी मौजूद रहेगी।

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