लखनऊ। समाजवादी पार्टी को एक और झटका लगा है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति रमेश यादव के बेटे आशीष यादव ने पार्टी छोड़ दी है। आशीष यादव उत्तर प्रदेश की एटा सीट से सपा के विधायक हैं। उन्होंने आज समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। गौरतलब है कि सूत्रों के मुताबिक पूर्व मंत्री शादाब फातिमा भी सपा छोड़कर बसपा में जाने वाली है। हालांकि टिकट न मिलने पर हर चुनाव में नेता एक पार्टी छोड़ दूसरी पार्टी का रुख करते हैं, पर विधायक शादाब फातिमा और विधायक आशीष यादव का पार्टी छोड़कर जाना सपा के लिए किसी झटके से कम नहीं है। शादाब फातिमा सपा की जानी-पहचानी महिला मुस्लिम चेहरा थी, तो आशीष यादव के पिता रमेश यादव विधान परिषद के सभापति हैं। सूत्रों के मुताबिक आशीष यादव बसपा से चुनाव लड़ेंगे।

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हम जानते हैं हमारे पास नेताजी हैं शिवपाल यादव लखनऊ/इटावा। लखनऊ से इटावा पहुंचे मुख्यमंत्री के चाचा शिवपाल यादव आज अपने समर्थकों से बात करते हुए भावुक हो गए। शिवपाल यादव ने कहा कि वैसे अब हमारा मन इस समय चुनाव लड़ने का कदापि नहीं था, लेकिन आप लोगों को भी छोड़ने का मन नहीं करता। शिवपाल ने कहा कि हमें पता है कि आप ही हमारी ओर से लोगों का मुकाबला करेंगे, इसलिए हम चुनाव जरूर लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि दुश्मन को कभी कमजोर मत समझना। बहुत सी बातें चलेंगी। बहुत से भितरघाती भी होंगे। भितरघातियों से बहुत सावधान रहने की जरूरत है। जो कुछ भी हुआ है, वह भितरघातियों की करतूत की वजह से हुआ है। शिवपाल ने भितरघातियों पर निशाना साधते हुए कहा कि हो सकता है कि उनके पास धन, बल और शक्ति हो लेकिन हम जानते हैं हमारे पास नेताजी हैं और आप लोग हैं। ऐसे लोगों से बहुत सचेत रहने की जरूरत है, अगर आपकी इच्छा है कि हम यहीं से चुनाव लड़े, तो हम यहीं से चुनाव लड़ेंगे और जिस तरीके से 2012 में बहुत से लोगों ने सरकार बनने के बाद फायदा उठाया, मलाई काटी ऐसे लोगों से सावधान रहने की बहुत जरूरत है। अभी एक महीना बचा है ऐसे में बहुत तेजी से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा कोई गलत काम नहीं किया, सिर्फ बेईमानी करने वालों का विरोध किया है। हम चाहते हैं कि गलत काम नहीं हो, मेहनत करने वालों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिलना चाहिए। हम यह चाहते हैं कि सही काम हो। केवल मैंने यही बात कही और रखी थी इसी बात का मैंने विरोध किया था। हमारा विरोध का कोई नजरिया नहीं था और गलत काम करने का हमेशा विरोध करते हैं और करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में नेताजी के नाम पर लोग वोट देते हैं, उसे हमको हासिल करना है और हम ऐसा करके रहेंगे। जब नेताजी साथ है और आप लोग साथ हैं, तो फिर हम को किसी बात का गम नहीं है।

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इस बार चुनाव ही ना लड़ूं शिवपाल यादव लखनऊ- समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता शिवपाल यादव ने गुरुवार को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मेरा मन तो कर रहा है इस बार मैं चुनाव ही ना लड़ूं। आपको बता दें कि पिछले तीन महीने से समाजवादी पार्टी में पारिवारिक और राजनीतिक कलह जारी है। चुनाव आयोग के फैसले के बाद अखिलेश को चुनावी चिह्न साइकिल मिल गई है। बीते दो दिन पहले नेताजी मुलायम सिंह यादव ने 38 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी। जिसमें शिवपाल यादव का नाम नहीं था। शिवपाल के इस बयान को उसी मसले से जोड़कर देखा जा रहा है। अभी ये कह पाना मुश्किल होगा कि शिवपाल चुनाव लड़ेंगे या नहीं। क्योंकि अभी सपा ने पहली ही लिस्ट जारी की है। आगे की लिस्ट में शिवपाल के नाम की संभावना हो सकती है।

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी में भले ही पिता-पुत्र मुलायम और अखिलेश के बीच सुलह होने की खबरें सामने आ रही हैं लेकिन चाचा शिवपाल अभी भी नहीं माने हैं। बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ शिवपाल यादव सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने साइकिल पर फैसला अखिलेश यादव के पक्ष में सुनाया था।लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि शिवपाल अपने वकीलों से सलाह मशविरा कर रहे हैं। वकीलों से परामर्श लेने के बाद शिवपाल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं। वहीं सुनील सिंह ने ये भी कहा कि उनकी शिवपाल से मुलाकात हुई है वह लोकदल के चुनाव चिन्ह “हल जोतता किसान” के चुनाव चिन्ह पर अपने उम्मीदवार उतार सकते हैं।

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लखनऊ। अखिलेश और कांग्रेस में गठबंधन की खबरों के बीच आज अखिलेश यादव उम्मीदवारों के नाम की पहली लिस्ट जारी कर सकते हैं. आज ही अखिलेश चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत भी करेंगे. यूपी में पहले चरण के चुनाव में सिर्फ 22 दिन बचे हैं, लेकिन अभी न तो समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों का एलान किया है और न ही कांग्रेस में। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन में एक नहीं दो पेंच हैं.गठबंधन में पहला पेंच ये है कि कांग्रेस सौ से ज्यादा सीट चाहती है, लेकिन समाजवादी पार्टी इसके लिए तैयार नहीं है. गठबंधन में दूसरा पेंच अमेठी और रायबरेली को लेकर फंसा है, अमेठी से राहुल गांधी और रायबरेली से सोनिया गांधी सांसद हैं. यही कारण है कि कांग्रेस यहां की सभी 10 सीटों पर दावा कर रही है। 2012 में अमेठी में दो सीटों पर जीती थी कांग्रेस- जिस अमेठी सीट के लिए अमिता सिंह और गायत्री प्रजापति के बीच अनबन चल रही है उस अमेठी में विधानसभा की पांच सीटें हैं. 2012 में तीन सीटों पर एसपी और दो पर कांग्रेस की जीत हुई थी।वहीं, रायबरेली और अमेठी को मिलाकार कुल दस सीटों पर समाजवादी पार्टी सिर्फ दो सीटों पर जीत पाई थी. सीटों की इस लड़ाई के बीच सत्य ये है कि गठबंधन दोनों पार्टियों की मजबूरी है इसलिए गठबंधन तो होगा लेकिन इसके लिए किसी पार्टी को तो कुर्बानी देनी ही होगी।

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