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व्हाटसप के जरिए धार्मिक भावनाओ को भडकाने व दुष्प्रचार का आरोपी गिरफ्तार श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाराणसी महोदय वह श्रीमान पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान वह श्रीमान क्षेत्र अधिकारी सदर वाराणसी के कुशल नेतृत्व में थानाध्यक्ष लोहता श्री जय श्याम शुक्ला द्वारा WhatsApp मैसेज का अवलोकन किया जा रहा था तो देखा कि WhatsApp ग्रुप के मोहम्मद हुसैन उर्फ मुन्नू अंसारी पुत्र स्वर्गीय निजामुद्दीन अंसारी निवासी धमरिया थाना लोहता जनपद वाराणसी मोबाइल नंबर 7499476459 के द्वारा धर्म वह व्यक्ति विशेष के विरुद्ध धार्मिक भावनाओं को भड़काने वह धर्म नष्ट करने के संबंध में इलेक्ट्रॉनिक मोबाइल व इंटरनेट के माध्यम से ग्रुप पर भेजा गया है। जिस के संबंध में थाना अध्यक्ष द्वारा मोहम्मद हुसैन उर्फ मुन्नू अंसारी पुत्र स्वर्गीय निजामुद्दीन अंसारी के विरुद्ध मुकदमा संख्या 207/17 का मुकदमा पंजीकृत किया गया है इस मामले को तत्काल संज्ञान में लेते हुए विवेचक द्वारा अभियुक्त को एक अदद मोबाइल के साथ गिरफ्तार किया गया है। मु0अ0स0 207/17 धारा 295ए/153ए आइपीसी ।

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इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व में शामिल लोगों ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर बैठक की। अतीत में प्रदेश में जब कभी भाजपा सत्ता में रही तो आरएसएस के साथ मुख्यमंत्री या मंत्रियों की बैठकें संघ मुख्यालय भारती भवन, सरस्वती शिशु मंदिर निरालानगर या फिर संघ की ओर से तय किसी अन्य स्थान पर होती थीं। अतीत में कोई ऐसा मौका याद नहीं आता जब प्रांत प्रचारक स्तर का भी संघ का कोई पदाधिकारी भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री आवास गया हो। लेकिन इस बार सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और डॉ. कृष्णगोपाल ने मुख्यमंत्री आवास पर जाकर यह बैठक की। संघ परिवार में इसको तरह-तरह से देखा जा रहा है।

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उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई ऐसे निर्देश जारी किए ताकि लोगों में सरकार और प्रशसन के लिए भरोसा बढ़े और पारदर्शिता आए। इसी में से एक फैसला मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और विधायकों के लिए जारी किया था, जिसमें सभी आला अधिकारियों और विधायकों को अपनी संपत्ति संपत्ति का ब्योरा देने को कहा गया था।
पहली बार उन्हें चल संपत्ति बताने को कहा गया था। मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने 20 अप्रैल को दोबारा एक परिपत्र जारी करते हुए चल संपत्ति का विवरण उपलब्ध न कराने वाले आइएएस अफसरों से नाराजगी जताई।
उन्होंने 25 अप्रैल से पहले हर हाल में चल संपत्ति का विवरण उपलब्ध कराने को कहा। इसके बाद भी ब्यौरा नहीं मिला। अब मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने तीन मई को सभी प्रमुख सचिवों की एक बैठक बुलाई है। बार-बार निर्देश के बावजूद ब्यौरा न देने वाले अफसरों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसे लोगों की वार्षिक प्रविष्टि रोकी जा सकती है। इससे इंक्रीमेंट और पदोन्नति भी प्रभावित हो सकती है। 
140 अफसरों के जारी हुए थे नाम

नियुक्ति और कार्मिक विभाग ने 21 अप्रैल तक चल संपत्ति का ब्यौरा उपलब्ध न कराने वाले 140 अफसरों का नाम भी जारी किया है। इनमें अनुज कुमार विश्वनोई, अनिल स्वरूप, राजीव कुमार, देवेन्द्र चौधरी, कुंवर फतेह बहादुर, जेएस दीपक, नीरज कुमार गुप्ता, अविनाश कुमार श्रीवास्तव, सुशील कुमार, दिनेश सिंह, प्रभाष कुमार झा, राजीव कपूर, हरीराज किशोर, अनंत कुमार सिंह, दुर्गा शंकर मिश्रा, डॉ. प्रभात कुमार, भूपेन्द्र सिंह, शालिनी प्रसाद, गुरदीप सिंह, अनीता भटनागर जैन, आलोक सिन्हा, बलविन्दर सिंह भुल्लर, उमेश सिन्हा, प्रभात कुमार सारंगी, अरुण सिंघल, अवनीश कुमार अवस्थी, लीना नंदन, संजीव कुमार मित्तल, सुनील कुमार, जीवेश नंदन, आलोक कुमार प्रथम, राजन शुक्ल, एमवीएस रामी रेड्डी, मनोज कुमार सिंह, टी. वेंकटेश,
अरविन्द कुमार, अनिल संत, एस राधा चौहान, शशि प्रकाश गोयल, देवेश चतुर्वेदी, डॉ. प्रशांत त्रिवेदी, मनोज सिंह, संजय आर भूसरेडडी, कल्पना अवस्थी, दीपक कुमार, सुधीर एम बोवड़े, अर्चना अग्रवाल, राजेश कुमार सिंह प्रथम, नरेन्द्र भूषण, अनुराग श्रीवास्तव, राजीव अग्रवाल, आलोक कुमार द्वितीय, मोहम्मद मुस्तफा, आमोद कुमार, अमृत अभिजात, आर. रमेश कुमार, नीतीश्वर कुमार, एम. देवराज, वी हेकाली झिमोमी, एस. सुंदरम एमके, अनिल कुमार सागर, अजय कुमार सिंह प्रथम, नीना शर्मा, विपिन कुमार द्विवेदी, नवदीप रिनवा, पी. गुरु प्रसाद, रवीन्द्र, संयुक्त समद्दर, सौरभ बाबू, मनीष चौहान,
रणवीर प्रसाद, दिनेश कुमार सिंह प्रथम, अपर्णा यू, शंभूनाथ, राकेश कुमार, विनोद कुमार शर्मा, राजीव रौतेला, रुद्र प्रताप सिंह, वीरेश्वर सिंह, चंद्रकांत पाण्डेय, ओम नारायण सिंह, सत्येन्द्र सिंह, वेद प्रकाश, विकास गोठलवाल, श्याम नारायण त्रिपाठी, यशवंत राव, अनामिका सिंह, रवि कुमार एनजी, विजय विश्वास पंत, लोकेश एम, गुर्राला श्रीनिवासुलू, नरेन्द्र सिंह पटेल, सुरेन्द्र विक्रम, अजय शंकर पाण्डेय, सेल्वा कुमार जे, डॉ. हृषिकेश भाष्कर यशोद, रवीन्द्र मधुकर गोडबोले, आलोक तिवारी, अभय, चैत्रा वी., नवीन कुमार जीएस, प्रभु नारायण सिंह, एस मुथु शालिनी, किंजल सिंह, डॉ.काजल, विद्या भूषण, सहदेव, राधेश्याम मिश्रा, वैभव श्रीवास्तव, अजीत कुमार, श्रीकांत मिश्रा, अखिलेश तिवारी, नेहा शर्मा,संजय कुमार खत्री, भवानी सिंह खंगारौत, दुर्गा शक्ति नागपाल, इंद्र विक्रम सिंह, फैसल आफताब, नागेन्द्र प्रताप, नरेन्द्र प्रसाद पाण्डेय, अभिषेक सिंह-प्रथम, रवीश गुप्ता, नेहा प्रकाश, अमित सिंह बंसल, इंदुमती सी., संजीव सिंह, ए. दिनेश कुमार, प्रियंका निरंजन, अक्षय त्रिपाठी, अवनीश कुमार राय, निखिल टीकराम फुंडे, गौरांग राठी, ईशा दुहन, अरविन्द कुमार चौहान, आशीष कुमार, जोगिन्दर सिंह, महेन्द्र सिंह तंवर, पवन अग्रवाल, राजेन्द्र पेसिया और थमीम अंसरिया ए. के नाम हैं। इनमें सिर्फ 20 लोगों ने मुख्य सचिव के आदेश के बाद अपनी चल संपत्ति का ब्यौरा दिया और 120 लोगों ने अनेदखी कर दी है।

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उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बुधवार को एक प्रेमी-युगल ने मंदिर में जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली. आत्महत्या से पहले दोनों ने मंदिर में विधिवत शादी भी की.
पुलिस ने मौके से प्रेमिका द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट भी बरामद किया है. जिसमें दोनों ने स्वेच्छा से आत्महत्या करने की बात कही है और पुलिस से शव का पोस्टमार्टम न कराए जाने और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार करने का अनुरोध किया है.
घटना अटरिया थाना क्षेत्र के पश्चिम गांव की है, यहां बंदी छोड़ बाबा के नाम से शंकर जी का मंदिर है. इसी मंदिर में आज गांव के एक प्रेमी युगल का शव बरामद हुआ. बताया जा रहा है कि इन दोनों के बीच काफी समय से प्रेम-प्रसंग चल रहा था. प्रेमी और प्रेमिका दोनों ही अलग-अलग बिरादरी के थे जिससे लड़की के परिजन विवाह के लिए राज़ी नहीं थे.
लड़की के परिवार वालो ने उसकी शादी कहीं दूसरी जगह तय कर दी थी और जल्द ही शादी होनी थी. इसी के चलते प्रेमी युगल ने इस मंदिर में पहले शादी रचाई और फिर जहर खाकर आत्महत्या कर ली.

मौके से बरामद हुए सुसाइड नोट में लड़की ने लिखा है, "हमारे परिवार वाले हमारी शादी के बाद मेरे प्रेमी की हत्या कर देते, इसलिए मैंने शादी से पहले यह कदम उठाया."
मृतका ने सुसाइड नोट में एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार करने और शवों का पोस्टमार्टम न कराये जाने का अनुरोध किया है.
पुलिस अधीक्षक सौमित्र यादव ने बताया कि मंदिर में दो प्रेमी युगल का शव बरामद हुआ है. दोनों ने कीटनाशक दावा खाकर आत्महत्या की है. लड़की ने अपने साथ एक पत्र भी छोड़ा है. इसके अलावा मंदिर की दीवार पर भी उन्होंने लिखा है. दोनों प्रेमी युगल थे और अलग-अलग जाति से थे. लिहाजा उनकी शादी का विरोध दोनों ही परिवार कर रहे थे. लड़की की शादी भी तय हो गई थी, जिसके बाद दोनों ने यह कदम उठाया.

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आदर्श तालाबों में भी उड़ रहे धूल के गुब्बारे।
अंधाधुंध जल दोहन के कारण तेजी से खिसकते भू-गर्भ जलस्तर पर अंकुश लगाने को मनरेगा के तहत खोदे गये जलाशय बस औपचारिकता तक सिमट कर रह गए हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत खोदाई एवं घाट निर्माण के बाद निर्मित आदर्श जलाशयों में जल संरक्षण हेतु अनिवार्य बोरिंग के प्रावधान का अनुपालन न होने से गर्मी आते ही ऐसे पोखरे सूखने लगते हैं। उधर गर्मी के दिनों में पोखरों में पानी भरे जाने के शासनादेश का भी अभी तक अनुपालन नहीं शुरू हो सका है। सूखे जलाशय मुंह चिढ़ा रहे हैं। चारों तरफ घाट और किनारे पर लहलहाते हरे पेड़-पौधे। बीचोबीच गहरा जलाशय है पर सूखा है। यह दृश्य गर्मी के दिनों में समूची व्यवस्था पर एक सवाल बन जाता है। हाल यह कि यदि किसी जलाशय में पानी है तो या वह निजी स्वामित्व में है या फिर मत्स्य पालन किया जाता है। सार्वजनिक जलाशय तो सूखे ही रहते हैं। तेजी से कट रहे वृक्ष, पट रहे जलाशय, सिकुड़ रहे तालों एवं बढ़ रही आबादी के बीच प्राकृतिक जल का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। पर्यावरण पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव एवं प्रदूषण ने औसत तापमान में वृद्धि कर दिया है। इन कारणों के चलते भूजल स्तर तेजी से प्रतिवर्ष नीचे खिसकता जा रहा है। हाल यह कि गरमी आते ही हैंडपंप पानी छोड़ देते हैं। कुआं का प्रयोग प्रचलन से बाहर हो गया तो जल संरक्षण का यह आम स्त्रोत अब स्वयं अंतिम सांस ले रहा है। बात करें केंद्र से ले कर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन की तो जल संरक्षण हेतु बेहद स्पष्ट प्रावधान वर्णित है। जलाशयों में विशेषकर आदर्श जलाशयों की खुदाई एवं सुंदरीकरण के साथ ही बीचोबीच बोरिंग अनिवार्य है। गरमी के दिनों में इनमें नहर, शासकीय नलकूप या फिर निजी नलकूप से जल भरे जाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। जल संरक्षण के साथ ही श्रमिकों को गांव में रोजगार उपलब्ध कराए जाने हेतु केंद्र सरकार द्वारा संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत पोखरे की खोदाई कर इनलेट व आउटलेट के साथ ही बीचोबीच बोरिंग अनिवार्य है। इस बोरिंग की पाइप का व्यास जलाशय के क्षेत्रफल के अनुसार तय किया जाता है। पाइप पर फिल्टर लगाना भी अनिवार्य है। इसके पीछे मंशा यह कि बरसात का पानी इसके फिल्टर से छन कर पाइप के सहारे नीचे जमीन में जाए। ऐसा होने से गरमी के दिनों में इस जलाशय का पानी आसानी से नहीं सूखेगा। विडंबना यह कि बदलापुर तहसील के चंद गांवों में खोदे गए जलाशयों को अपवाद मान लें तो इस अहम प्रावधान का अनुपालन ही नहीं हो रहा है। इस बाबत अधिकारी भी मौन हैं तो कोई खुलकर बोलता नहीं। यह जांच का विषय है कि इन पोखरों की खोदाई के बजट में बोरिंग का व्यय प्रदर्शित है या नहीं। यदि ऐसा है तो तय है कि एक बहुत बड़े घोटाले की संभावना भी है। मनरेगा के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में खोदे गए पोखरे को गरमी के दिनों में नहर या नलकूप से पानी भरे जाने का फरमान है। यह भी लगभग बेमानी साबित हो रहा है। निजी नलकूप से पानी भरे जाने पर ग्राम पंचायत द्वारा भुगतान की व्यवस्था भी है। उपजिलाधिकारी बदलापुर श्री शिवशरणप्पा ने गरमी के दिन में प्यासे पशु पक्षियों ही नहीं वरन जलस्तर बनाए रखने को जलाशयों में पानी भरा जाना जरूरी तो बताया, परन्तु उन्होने यह भी कहा कि इस संबंध में अभी कोई शासनादेश नहीं आया है फिर भी मैं कृषि विभाग के अधिकारियों से बात किया हूँ और मत्स्य पालन वाले तालाबों में पानी भरवाने की बात चल रही है।

फोटो - -
जनपद जौनपुर के बदलापुर तहसील के अंतर्गत सिंगरामऊं सर्किल के बर्रैया गॉव का आदर्श तालाब।

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