Tuesday, 10 January 2017 05:30

चुनाव से ठीक पहले मायावती बड़े मुसीबत में, अगर पार्टी की मान्यता रद्द होती है तो अपील का वक़्त भी नहीं हैं

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चुनाव तारीखों के एलान के साथ ही उत्‍तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी परवान चढ़ने लगी हैं। सभी दल चुनाव तैयारियों में जुटे हुए हैं। इस बीच यूपी की पूर्व मुख्‍यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती के लिए बुरी खबर आई है। मायावती के खिलाफ चुनाव आयोग में याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में उन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिसके आधार पर उनकी पार्टी की मान्‍यता रद्द करने के साथ ही मायावती के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की भी मांग की गई है। जाहिर है चुनाव के वक्‍त में चुनाव आयोग से की गई ये शिकायत मायावती को काफी भारी पड़ सकती है। आयोग की ओर से शिकायत की पुष्टि की जा रही है। उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। बीएसपी सुप्रीमो मायावती के खिलाफ चुनाव आयोग में ये शिकायत बीजेपी के प्रदेश कार्यकारणी के सदस्य नीरज शंकर सक्सेना ने दर्ज कराई है। बीजेपी नेता नीरज शंकर सक्‍सेना का आरोप है कि बीएसपी सुप्रीमो ने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के फैसले के खिलाफ बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि जाति और धर्म के आधार पर वोट नहीं मांग सकते। फिर भी उन्‍होंने इसका उल्‍लंघन किया। बीजेपी के प्रदेश कार्यकारणी के सदस्य नीरज शंकर सक्सेना ने अपनी शिकायत में कहा है कि उन्‍होंने ने तीन जनवरी 2017 को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस प्रेस कांफ्रेंस में उन्‍होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लड़ने वाले उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट जारी की थी। आरोप है कि मायावती ने इस लिस्‍ट को धर्म और जाति के आधार पर बांटा था। उन्‍होंने अपनी शिकायत में ये भी आरोप लगाया है कि मायावती ने बीएसपी की एक बुकलेट जारी कर ये भी कहा था कि मुसलमानों की असली हितैषी सिर्फ उनकी ही पार्टी है। आने वाले चुनाव में मुसलमान बीएसपी को छोड़कर बाकी दूसरे दलों को वोट ना दें। बीजेपी के प्रदेश कार्यकारणी के सदस्य नीरज शंकर सक्सेना का आरोप है कि बीएसपी सुप्रीमो ने इस तरह के बयान और बुकलेट जारी कर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की है। इतना ही नहीं ये सारी बातें जनप्रतिनिधि अधिनियम एक्ट के प्रावधान 125 के तहत अपराध की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में मायावती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही शिकायत में बीएसपी की सदस्‍यता को भी रद्द करने की मांग की गई है। दरसअल, अभी कुछ दिनों पहले ही बीएसपी सुप्रीमो ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी पार्टी के उम्‍मीदवारों के नामों का एलान किया था। इसके साथ ही उन्‍होंने बताया था कि उनकी पार्टी जातिगत आधार पर किस जाति के उम्‍मीदवार को कितने टिकट दे रही है। मायावती की पार्टी ने इसे सोशल इंजीनियरिंग करार दिया था। लेकिन, विपक्ष का कहना है कि मायावती जाति के आधार पर प्रदेश को बांटने का काम कर रही हैं। जाहिर है यूपी विधानसभा चुनाव से पहले ये शिकायत बीएसपी सुप्रीमो को भारी पड़ सकती है। बीएसपी ने इस बार 87 दलित, 97 मुसलमानों और 106 अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को चुनाव मैदान में उतारा है। जबकि 113 सीटों पर अगड़ी जाति के उम्‍मीदवारों को टिकट दिया गया है। जिसमें 66 ब्राहमण, 36 क्षत्रिय और 11 कायस्थ, वैश्य और सिख बिरादरी के लोग हैं।i

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