Dharm

Dharm (103)

उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी में हुई एक अद्भुत धार्मिक घटना से लोग अचंभित हैं। अखंड महाकाल कॉलोनी में स्थित 100 साल पुराने इमली के पेड़ के भीतर से एक शिवलिंग निकला है। यह घटना काफी पुराने इमली के पेड़ को काटे जाने के दौरान घटी। शिवलिंग दिखाई देते ही लोगों में हड़कंप मच यह खबर आग की तरह पूरे शहर में फैल गई। इसके बाद यहां पूजा पाठ शुरू हो गई। - जानकारी अनुसार जयसिंहपुरा अखंड कॉलोनी में टेंट हाउस संचालक लक्ष्मीनारायण के प्लॉट पर इमली का पुराना पेड़ था। - पेड़ की कटाई के दौरान इसकी जड़ में शिवलिंग दिखाई दिया। शिवलिंग के दर्शन हुए तो क्षेत्र में लोगों का हुजूम लग गया। - लोगों का कहना है कि यहां शिव मंदिर बनाया जाएगा। क्षेत्र के राजेश चौधरी ने बताया यह पेड़ काफी पुराना है, लेकिन इसकी जड़े सूख रही थी इसलिए इसे काटा जा रहा था। हवन पूजन हुआ शुरू - पेड़ का निचला हिस्सा काफी चौड़ा था। कटाई के दौरान यह फट गया और लोगों को बीच में एक पत्थर दिखाई दिया। - जब लोगों ने इसे ध्यान से देखा तो एक शिवलिंग नजर आया। शिवलिंग दिखते ही पेड़ को काटने का काम रोक दिया गया। - शिवलिंग निकले की सूचना मिलते ही काफी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचे और हवन-पूजन शुरू हो गया। - लोगों ने चंदन का टीका लगाकर भोले की भक्ति की। इसी के साथ यहां बड़े आयोजन की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

�सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है जो सूर्य चंद्र व पृथ्वी की विशेष स्थिति के कारण बनती है। जब चंद्र सूर्य व पृथ्वी के बीच आता है तब सूर्य कुछ देर के लिए अदृश्य हो जाता है। आम भाषा में इस स्थिति को सूर्य ग्रहण कहते हैं। इसमे चंद्र, सूर्य व पृथ्वी एक ही सीध में होते हैं व चंद्र पृथ्वी और सूर्य के बीच होने की वजह से चंद्र की छाया पृथ्वी पर पड़ती है। सूर्य ग्रहण की सदैव अमावस्या के दिन घटित होता है। पूर्ण ग्रहण के समय पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश पूर्णत अवरुद्ध हो जाता है। ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना जाता है। भारतीय ज्योतिष में ग्रहण का बहुत महत्व है क्योंकि उनका सीधा प्रभाव मानव जीवन पर होता है। वर्ष 2017 का पहला वलयाकार सूर्यग्रहण रविवार दिनांक 26.02.17 को घटित होने जा रहा है। अमावस्या के दिन ही 26 फरवरी साल 2017 का पहला सूर्य ग्रहण भी लगेगा।� �भारत के स्थानीय समयानुसार खंडग्रास सूर्य ग्रहण रविवार दिनांक 26.02.17 को शाम 17 बजकर 40 मि॰ पर प्रारंभ होकर रात 22 बजकर 01 मि॰ तक रहेगा। ग्रहण का सूतक रविवार दिनांक 26.02.17 को प्रातः 05 बजकर 40 मि॰ से प्रारंभ हो जाएगा। परंतु रविवार दिनांक 26.02.17 को घटित होने वाला ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा अतः इसका धार्मिक दृष्टिकोण से शुभाशुभ प्रभाव भी मान्य नहीं होगा। परंतु ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसका प्रभाव संपूर्ण विश्व पर पड़ेगा। कुंभ राशि में घटित होने वाले इस ग्रहण से नौकरीपेशा, मजदूरों, जल संसाधन के कार्यों, मीडिया कर्मियों, राजनेताओं को परेशानी होगी। इस ग्रहण से सोने की कीमतों में थोड़ी मंदी के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में कमी भी आएगी। �� साल 2017 का पहला सूर्यग्रहण इस साल का पहला सूर्यग्रहण 26 फरवरी को पड़ने जा रहा है। इस सूर्यग्रहण को भारत, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, प्रशांत, अटलांटिक, और हिंद महासागर में देखा जा सकेगा। इंडियन स्टैंडर्ड टाइम के मुताबिक भारत में सूर्यग्रहण 26 फरवरी यानी कि रविवार को शाम 5 �बजकर 40 मिनट पर शुरू होगा और रात 10 बजकर 1 मिनट तक चलेगा। लेकिन रात होने की वजह से इसका पूरा नज़ारा देख पाना मुमकिन नहीं होगा।� सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है, और ये घटना तभी होती है जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरती है। पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा ढका हुआ प्रतीत दिखाई देता है। सूर्यग्रहण तीन तरह के होते हैं। पूर्ण सूर्यग्रहण, आंशिक सूर्यग्रहण और वलयाकार सूर्यग्रहण। पूर्ण और आंशिक सूर्यग्रहण का अर्थ नाम से ही स्पष्ट है, अब हम आपको वलयाकार सूर्यग्रहण के बारे में बताते हैं। वलयाकार सूर्यग्रहण वो खगोलीय घटना है जब पृथ्वी का उपग्रह चांद पूथ्वी से काफी दूर रहने के बावजूद पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। इससे पृथ्वी से सूर्य की जो तस्वीर उभरती है उसमें सूरज का बीच का हिस्सा भी ढका हुआ नज़र आता है। और सूर्य का बाकी हिस्सा प्रकाशित होने की वजह से सूर्य की कंगन या वलय के आकार की तस्वीर उभरती है, इसलिए इसे वलयाकार सूर्यग्रहण कहते हैं।� सूर्यग्रहण से जुड़ी क्या क्या हैं भ्रांतियां? पुरानी मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा ग्रहण के बाद स्नान भी ज़रुरी होता है। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष हिदायत दी जाती है कि वे बाहर ना निकलें ना ही ग्रहण को देखें। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के दौरान दान करने से पुण्य मिलता है। हालांकि ये सारी चीजें महज मान्यताएं हैं और मॉर्डन साइंस इसे नहीं मानता है।� कब होगा अगला ग्रहण? 26 फरवरी के बाद साल 2017 में दो और ग्रहण नजर आएंगे। इसमें एक चन्द्र ग्रहण होगा, तो दूसरा सूर्य ग्रहण। 7-8 अगस्त को हमें भारत में आंशिक चन्द्रग्रहण देखने को मिलेगा। इसे यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्रेलिया से देखा जा सकेगा। जबकि 21 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। �सूर्य ग्रहण 2017 जानें राशिनुसार क्या पड़ेगा प्रभाव ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ग्रहण के कारण पीड़ित सूर्य की दशा व अन्य ग्रहों की स्थिति विभिन्न राशियों को प्रभावित करेगी। ज्योतिषाचार्य इस बारे में क्या कहते हैं आइये जानते हैं- मेष ; मेष राशि के स्वामी मंगल सूर्य ग्रहण के दिन उच्चस्थ शुक्र के साथ बृहस्पति के घर में विराजमान हैं। यह आपके लिये शुभ फलदायी हो सकता है। आपकी राशि से सूर्य 11वें घर में विचरण कर रहे हैं जो कि लाभ का घर माना जाता है। ग्रहण के कारण इस दिन आप कोई विशेष लेन-देन न ही करें तो बेहतर है क्योंकि ग्रहण आपके लाभक्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। वृषभ ; वृषभ राशि का स्वामी शुक्र उच्चस्थ होकर मंगल के साथ बृहस्पति के घर में विराजमान है जो आपके लिये अति लाभकारी कहा जा सकता है। वहीं ग्रहण के दिन सूर्य आपकी राशि से दशम स्थान पर है जो कि आपका कर्मक्षेत्र है। इसलिये आपके लिये सलाह है कि अपने कार्यों में सतर्कता बरतें। यदि आप नया कार्य शुरु करने का विचार कर रहे हैं तो उसमें अपने से बड़ों की सलाह जरूर लें क्योंकि ग्रहण के कारण आपके कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। मिथुन ; मिथुन राशि का स्वामी बुध कुंभ राशि में सूर्य के साथ ही विचरण कर रहा है जिसे आपका राशि स्वामी भी प्रभावित रहेगा। अपनी वाणी में नियंत्रण रखें। बेवजह किसी से बहस न करें अन्यथा इसका अशुभ प्रभाव आपके जीवन पर पड़ सकता है। कर्क ; कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा कुंभ राशि में सूर्य के साथ विराजमान है जिससे आपकी मानसिक चिंताए बढ़ने के संकेत हैं। आप में उत्साह की कमी भी हो सकती है। आपके राशि स्वामी इस ग्रहण से प्रभावित हैं इसलिये इस दिन शुभ कार्यों को टालना ही आपके लिये बेहतर रहेगा। सिंह ; राशि स्वामी सूर्य स्वयं इस ग्रहण में पीड़ित हैं और आपकी राशि को सपष्ट रूप से देख भी रहे हैं। संभल कर रहें आपके मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा व आत्मसम्मान के लिये यह कुछ अनिष्ट के संकेत कर रहा है। मानसिक व शारीरिक तौर पर कुछ परेशानियों का आपको सामना करना पड़ सकता है। इनका कारण दांपत्य या प्रेमजीवन के कुछ छुट-पुट विवाद भी हो सकते हैं। इस दिन धैर्य से काम लें व जितना हो सके प्रात:काल सूर्य देव की आराधना व मंत्रों का जाप करें। कन्या ; कन्या राशि का स्वामी बुध कुंभ राशि में विराजमान है जो कि अपनी राशि से छठवें घर में विराजमान है। अपने काम में सावधानी रखें कोई गुप्त शत्रु आपके कार्यों में रूकावट बन सकता है। अपनी वाणी में विनम्रता व संयम रखें। विशेषकर व्यावसायिक साझेदार के साथ किसी भी प्रकार की बहसबाजी या वाद-विवाद न करें अन्यथा तल्ख़ियां बढ़ सकती हैं जिसका प्रभाव आपके कार्य जीवन पर पड़ेगा। तुला ; तुला राशि के स्वामी शुक्र अपनी उच्चस्थ राशि मीन में विराजमान हैं जिससे ग्रहण का सीधा प्रभाव आपकी राशि पर नहीं होगा लेकिन आपकी राशि से सूर्य पंचम भाव में ग्रहणित हो रहे हैं जिससे कि मानसिक तनाव बढ़ सकता है विशेषकर विद्यार्थियों के लिये परीक्षा संबंधी तनाव बढ़ने के आसार हैं। साथ ही आपके प्रेमसंबंध भी ग्रहण से प्रभावित हो सकते हैं। अपने साथी से कोई ऐसी बात न कहें जिससे उनकी भावनाएं आहत हों या कोई ऐसा वादा न करें जिस पर आप खरे न उतर सकें। वृश्चिक ; वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल शुक्र के साथ मीन राशि में विराजित है जो कि आपकी राशि से पांचवें घर में है। आपकी राशि से चौथे घर में सूर्य ग्रहण का योग बन रहा है जो कि आपकी सुख-सुविधाओं में कमी लाने वाला हो सकता है। माता के लिये भी यह कष्टदायी हो सकता है। इस दिन यात्रा करने का जोखिम न ही लें तो बेहतर है। धनु ; धनु राशि का स्वामी बृहस्पति कन्या राशि में वक्र चल रहा है। बृहस्पति के वक्र होने के कारण आपके लिये यह समय थोड़ा परेशानियों भरा रहने से आपके लिये अनुकूल नहीं कहा जा सकता, आपकी राशि से तीसरे घर में सूर्य ग्रहण लगेगा जिससे भाई-बहनों से विवाद हो सकता है। आपकी इच्छाशक्ति जवाब दे सकती है। सूझ-बूझ वाले निर्णय लें। मकर ; मकर के राशि स्वामी शनि धनु राशि में विराजमान हैं आपकी राशि से दूसरे घर में सूर्य ग्रहण योग बन रहा है। दूसरा घर आपका धन संपदा का घर है। अपने धन का उपयोग देखभाल कर करें। अचानक से आपके खर्चों में बढ़ोतरी होने की भी आशंका है। किसी भी जोखिम वाले क्षेत्र में पैसा न लगायें खासकर लॉटरी, जुआ आदि में धन न लगायें। इससे हानि हो सकती है। कुंभ ; कुंभ राशि के स्वामी शिनि धनु राशि में विराजमान हैं जो कि आपकी राशि से दसवां है जिसे हम लाभ पद मानते हैं किंतु वर्तमान स्थिति में आपकी राशि पर ही सूर्य ग्रहण योग बना हुआ है जोकि आपके लिये शुभ नहीं कहा जा सकता। इस समय आपका मानसिक और शारीरिक कष्ट बढ़ सकता है। तनाव को कम करने व नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिये भगवान शिव शंकर का मंत्र जाप करें। मीन ; मीन राशि का स्वामी बृहस्पति कन्या राशि में विराजमान है जोकि आपकी राशि से सातवां है और सपष्ट रूप से देख रहा है। किसी प्रकार का बड़ा नुक्सान तो आपको नहीं होगा। आपकी राशि से 12वां सूर्यग्रहण दोष बन रहा है। जिससे आपके खर्चों में अचानक बढोतरी हो सकती है इसलिये बेहतर रहेगा कि धन संबंधी फैसले सोच समझ कर ही लें।�

‘महाशिवरात्रि’ के विषय में भिन्न - भिन्न मत हैं, कुछ विद्वानों का मत है कि आज के ही दिन शिवजी और माता पार्वती विवाह-सूत्र में बंधे थे जबकि अन्य कुछ विद्वान् ऐसा मानते हैं कि आज के ही दिन शिवजी ने ‘कालकूट’ नाम का विष पिया था जो सागरमंथन के समय समुद्र से निकला था | ज्ञात है कि यह समुद्रमंथन देवताओं और असुरों ने अमृत-प्राप्ति के लिए किया था |एक शिकारी की कथा भी इस त्यौहार के साथ जुड़ी हुई है कि कैसे उसके अनजाने में की गई पूजा से प्रसन्न होकर भगवान् शिव ने उस पर अपनी असीम कृपा की थी | यह कथा पौराणिक “शिव पुराण” में भी संकलित है … प्राचीन काल में, किसी जंगल में एक गुरुद्रुह नाम का एक शिकारी रहता था जो जंगली जानवरों का शिकार करता तथा अपने परिवार का भरण-पोषण किया करता था |एक बार शिव-रात्रि के दिन जब वह शिकार के लिए निकला , पर संयोगवश पूरे दिन खोजने के बाद भी उसे कोई शिकार न मिला, उसके बच्चों, पत्नी एवं माता-पिता को भूखा रहना पड़ेगा इस बात से वह चिंतित हो गया , सूर्यास्त होने पर वह एक जलाशय के समीप गया और वहां एक घाट के किनारे एक पेड़ पर थोड़ा सा जल पीने के लिए लेकर, चढ़ गया क्योंकि उसे पूरी उम्मीद थी कि कोई न कोई जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए यहाँ ज़रूर आयेगा |वह पेड़ ‘बेल-पत्र’ का था और उसी पेड़ के नीचे शिवलिंग भी था जो सूखे बेलपत्रों से ढके होने के कारण दिखाई नहीं दे रहा था | रात का पहला प्रहर बीतने से पहले एक हिरणी वहां पर पानी पीने के लिए आई |उसे देखते ही शिकारी ने अपने धनुष पर बाण साधा |ऐसा करने में, उसके हाथ के धक्के से कुछ पत्ते एवं जल की कुछ बूंदे नीचे बने शिवलिंग पर गिरीं और अनजाने में ही शिकारी की पहले प्रहर की पूजा हो गयी |हिरणी ने जब पत्तों की खड़खड़ाहट सुनी, तो घबरा कर ऊपर की ओर देखा और भयभीत हो कर, शिकारी से , कांपते हुए स्वर में बोली- ‘मुझे मत मारो |’ शिकारी ने कहा कि वह और उसका परिवार भूखा है इसलिए वह उसे नहीं छोड़ सकता |हिरणी ने वादा किया कि वह अपने बच्चों को अपने स्वामी को सौंप कर लौट आयेगी| तब वह उसका शिकार कर ले |शिकारी को उसकी बात का विश्वास नहीं हो रहा था |उसने फिर से शिकारी को यह कहते हुए अपनी बात का भरोसा करवाया कि जैसे सत्य पर ही धरती टिकी है; समुद्र मर्यादा में रहता है और झरनों से जल-धाराएँ गिरा करती हैं वैसे ही वह भी सत्य बोल रही है | क्रूर होने के बावजूद भी, शिकारी को उस पर दया आ गयी और उसने ‘जल्दी लौटना’ कहकर , उस हिरनी को जाने दिया | थोड़ी ही देर बाद एक और हिरनी वहां पानी पीने आई, शिकारी सावधान हो गया, तीर सांधने लगा और ऐसा करते हुए, उसके हाथ के धक्के से फिर पहले की ही तरह थोडा जल और कुछ बेलपत्र नीचे शिवलिंग पर जा गिरे और अनायास ही शिकारी की दूसरे प्रहर की पूजा भी हो गयी |इस हिरनी ने भी भयभीत हो कर, शिकारी से जीवनदान की याचना की लेकिन उसके अस्वीकार कर देने पर ,हिरनी ने उसे लौट आने का वचन, यह कहते हुए दिया कि उसे ज्ञात है कि जो वचन दे कर पलट जाता है ,उसका अपने जीवन में संचित पुण्य नष्ट हो जाया करता है | उस शिकारी ने पहले की तरह, इस हिरनी के वचन का भी भरोसा कर उसे जाने दिया | अब तो वह इसी चिंता से व्याकुल हो रहा था कि उन में से शायद ही कोई हिरनी लौट के आये और अब उसके परिवार का क्या होगा |इतने में ही उसने जल की ओर आते हुए एक हिरण को देखा, उसे देखकर शिकारी बड़ा प्रसन्न हुआ ,अब फिर धनुष पर बाण चढाने से उसकी तीसरे प्रहर की पूजा भी स्वतः ही संपन्न हो गयी लेकिन पत्तों के गिरने की आवाज़ से वह हिरन सावधान हो गया |उसने शिकारी को देखा और पूछा –“ तुम क्या करना चाहते हो ?” वह बोला-“अपने कुटुंब को भोजन देने के लिए तुम्हारा वध करूंगा |” वह मृग प्रसन्न हो कर कहने लगा – “मैं धन्य हूँ कि मेरा यह शरीर किसी के काम आएगा, परोपकार से मेरा जीवन सफल हो जायेगा पर कृपया कर अभी मुझे जाने दो ताकि मैं अपने बच्चों को उनकी माता के हाथ में सौंप कर और उन सबको धीरज बंधा कर यहाँ लौट आऊं |” शिकारी का ह्रदय, उसके पापपुंज नष्ट हो जाने से अब तक शुद्ध हो गया था इसलिए वह विनयपूर्वक बोला –‘ जो-जो यहाँ आये ,सभी बातें बनाकर चले गये और अभी तक नहीं लौटे ,यदि तुम भी झूठ बोलकर चले जाओगे ,तो मेरे परिजनों का क्या होगा ?” अब हिरन ने यह कहते हुए उसे अपने सत्य बोलने का भरोसा दिलवाया कि यदि वह लौटकर न आये; तो उसे वह पाप लगे जो उसे लगा करता है जो सामर्थ्य रहते हुए भी दूसरे का उपकार नहीं करता | शिकारी ने उसे भी यह कहकर जाने दिया कि ‘शीघ्र लौट आना |’ रात्रि का अंतिम प्रहर शुरू होते ही उस शिकारी के हर्ष की सीमा न थी क्योंकि उसने उन सब हिरन-हिरनियों को अपने बच्चों सहित एकसाथ आते देख लिया था |उन्हें देखते ही उसने अपने धनुष पर बाण रखा और पहले की ही तरह उसकी चौथे प्रहर की भी शिव-पूजा संपन्न हो गयी | अब उस शिकारी के शिव कृपा से सभी पाप भस्म हो गये इसलिए वह सोचने लगा-‘ओह, ये पशु धन्य हैं जो ज्ञानहीन हो कर भी अपने शरीर से परोपकार करना चाहते हैं लेकिन धिक्कार है मेरे जीवन को कि मैं अनेक प्रकार के कुकृत्यों से अपने परिवार का पालन करता रहा |’ अब उसने अपना बाण रोक लिया तथा मृगों से कहा की वे सब धन्य है तथा उन्हें वापिस जाने दिया|उसके ऐसा करने पर भगवान् शंकर ने प्रसन्न हो कर तत्काल उसे अपने दिव्य स्वरूप का दर्शन करवाया तथा उसे सुख-समृद्धि का वरदान देकर “गुह’’ नाम प्रदान किया |मित्रों, यही वह गुह था जिसके साथ भगवान् श्री राम ने मित्रता की थी | शिव जी जटाओं में गंगाजी को धारण करने वाले, सिर पर चंद्रमा को सजाने वाले,मस्तक पर त्रिपुंड तथा तीसरे नेत्र वाले ,कंठ में कालपाश [नागराज] तथा रुद्रा- क्षमाला से सुशोभित , हाथ में डमरू और त्रिशूल है जिनके और भक्तगण बड़ी श्रद्दा से जिन्हें शिवशंकर, शंकर, भोलेनाथ, महादेव, भगवान् आशुतोष, उमापति, गौरीशंकर, सोमेश्वर, महाकाल, ओंकारेश्वर, वैद्यनाथ, नीलकंठ, त्रिपुरारि, सदाशिव तथा अन्य सहस्त्रों नामों से संबोधित कर उनकी पूजा-अर्चना किया करते हैं —– ऐसे भगवान् शिव एवं शिवा हम सबके चिंतन को सदा-सदैव सकारात्मक बनायें एवं सबकी मनोकामनाएं पूरी करें |

जय माता की आज का राशिफल 03/02/2017. आचार्य.. संजय कुमार मिश्र प्रयागराज. इलाहाबाद राशि फलादेश मेष प्रयत्न एवं दूरदर्शिता से सहयोग एवं समर्थन मिलेगा। आलस्य को त्यागकर प्रत्येक कार्य समय पर करें। सुखद, लाभदायी यात्रा होने के योग बनेंगे। राशि फलादेश वृष पारिवारिक जीवन खुशहाल रहेगा। आपके द्वारा लिए गए निर्णय सही होंगे। व्यापार में आशानुरूप लाभ होने की संभावना है। रुका पैसा प्राप्त होगा। राशि फलादेश मिथुन वाहन चलाते वक्त सावधानी आवश्यक है। कलात्मक अभिव्यक्ति को प्रकट कर पाएंगे। व्यापार व्यवसाय अच्छा चलेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। राशि फलादेश कर्क महत्वपूर्ण व्यक्तियों के संपर्क में आएंगे। पारिवारिक वातावरण सहयोगात्मक रहेगा। कलात्मक अभिव्यक्ति को प्रकट करने की क्षमता बढ़ेगी। राशि फलादेश सिंह यात्रा सुखद एवं सफलता देने वाली होगी। अपनी वस्तुएं संभालकर रखें। आत्मविश्वास बढ़ेगा। परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। विवादों से दूर रहें। राशि फलादेश कन्या आमदनी में वृद्धि के योग हैं। यात्रा सुखद एवं सफलता देने वाली होगी। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप से बचें। पुराने मित्रों, रिश्तेदारों से मुलाकात होगी। राशि फलादेश तुला व्यावसायिक सफलता से हर्ष होगा। जवाबदारी के कार्य ठीक से कर पाएंगे। क्रोध एवं उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। रुका धन प्राप्त होने का योग। राशि फलादेश वृश्चिक आपके कार्यों की प्रशंसा होगी। अधूरे कार्य समय पर पूरे होने से संतोष रहेगा। संतान के कार्यों पर नजर रखना होगी। राज्य में आपका प्रभाव बढ़ेगा। राशि फलादेश धनु व्यावसायिक कार्य सफल होने की संभावना है। हितकारक व्यक्ति से भेंट होगी। वाहन क्रय करने के योग हैं। जल्दबाजी में कोई काम न करें। राशि फलादेश मकर महत्वपूर्ण व्यक्तियों के संपर्क में आएंगे। भाइयों का सहयोग मिल सकता है। व्यापार विस्तार के अवसर बनेंगे। परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। राशि फलादेश कुंभ दूसरों के बारे में गलत धारणा नुकसानदेह हो सकती है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा। व्यापार अच्छा चलेगा। भौतिक सुख सुविधाओं की ओर रुझान बढ़ेगा। राशि फलादेश मीन व्यक्तिगत समस्या हल होगी। जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद होंगे। परोपकारी स्वभाव के कारण दूसरों की मदद से संतोष ...

हिन्दू संस्कृति के अनुसार पत्नी को अर्धांगनी अर्थात पति के शरीर का आधा अंग माना जाता है। महाभारत के एक प्रसंग में भीष्म पितामह ने भी कहा है कि, "पत्नी को हमेशा खुश रखना चाहिए क्योंकि पत्नी की वजह से वंश की वृद्धि होती है"। हमारे कई प्राचीन ग्रंथों में पत्नी के गुण और अवगुण का ज़िक्र मिलता है। एक तरफ अगर पत्नी अच्छी हो तो पति की ज़िन्दगी स्वर्ग बन जाती है, वहीं दूसरी तरफ अगर पत्नी अवगुणी हो तो उसकी ज़िन्दगी नरक बन जाती है। शास्त्रों के अनुसार किसी व्यक्ति के व्यवहार के द्वारा ही आप उसका भाग्य और व्यक्तित्व जान सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार अगर स्त्री के अंदर ये गुण मौजूद हैं, तो उसका पति भाग्यशाली होता है। गरुण पुराण के अनुसार वह पत्नी गुणी होती है जो घर के काम-काज संभालने में निपुण हो। घर के काम-काज सँभालने का मतलब सिर्फ घर के काम करना ही नहीं है बल्कि वह ऐसी होनी चाहिए कि वह घर के सदस्यों का आदर-सम्मान करती हो। अगर घर में कोई अतिथि आए तो उनका मान-सम्मान करें, कम संसाधनों में भी गृहस्थी को अच्छे से चलाती रहे। ऐसी पत्नी हमेशा ही अपने पति के साथ-साथ पूरे परिवार की प्रिय होती है। गरुण पुराण के अनुसार पति की हर बात मानने वाली पत्नी एक गुणी पत्नी होती है। पत्नी के लिए उसका पति देवता सामान होना चाहिए। आदर्श पत्नी वह होती है जो सपने में भी अपने पति का बुरा न सोचती हो। शादी के बाद पति का घर ही उसका घर बन जाता है। इसलिए नए परिवार से जुड़े रीति-रिवाज़ को स्वीकारना पत्नी का धर्म होता है। अपने पति और परिवार के हित के बारे में सोचना भी पत्नी का एक धर्म है। इसके अलावा उसे ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे परिवार का अहित हो। आज के जमाने में स्त्री को पुरुषों के समान ही समझा जाता है। उसे अपनी बात कहने का पूरा हक़ है लेकिन एक आदर्श पत्नी के अंदर यह गुण होना चाहिए कि वह सबसे प्यार से बात करे। गरुण पुराण के अनुसार अपने पति से संयमित भाषा में बात करने वाली, प्रेम के साथ धीरे-धीरे बात करने वाली, पत्नी गुणी होती है। पत्नी अगर इस प्रकार बात करती है तो पति भी उसकी बात को ध्यान से सुनता है, उसकी इच्छाएं पूरी करने की कोशिश करता है। ऐसी पत्नी जो अपने परिवार के साथ-साथ घर के सभी सदस्यों और परिवार से जुड़े सभी लोगों से संयम से बात करती है, वह एक गुणी पत्नी कहलाती है। ऐसी पत्नी के घर में होने से कलह नहीं आता और परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है। गरुण पुराण के अनुसार ऐसी पत्नी जो प्रतिदिन स्नान कर पूजा पाठ करती है और सभी मंगल चिन्हों से युक्त होती है। उसका पति बहुत भाग्यशाली होता है।

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