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Dharm (115)

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फतवा को लेकर इतना शोर मचा दिया जाता है . जैसे वो फतवा नही बल्कि कोई तुगलकी फरमान आ गया है. अब वो सारे अधिकार छीन लेना. वो सांस नही लेने देगा. वो सिर कलम कर देगा . ये शोर मचाने का नतीजा है . ये नासमझी का नतीजा है . इस हल्ले गुल्ले में फतवे का मतलब गायब हो जाता है ।
फतवा अरबी का शब्द है . जिसका मतलब होता है मुस्लिम लॉ के मुताबिक किसी निर्णय पर नोटिफिकेशन जारी करना .ओह थोड़ा मुश्किल हो गया. इसको ऐसे समझिए फतवा यानी राय ,जो किसी को तब दी जाती है जब कोई अपना निजी मसला लेकर मुफ़्ती साहब के पास पहुचे .और कहे मुफ़्ती साहब मरे साथ ऐसा ऐसा है. इस सिचुएशन में बताइये इस्लाम के मुताबिक मुझे क्या करना चाहिए .

फतवा महज एक राय है . जिसको मानना उसके हाथ मे है जो फतवे के लिए मौलवी साहब के पास गया था .फतवा कोई कानून नही है . जिससे डरना चाहिए. फतवा एक राय है उसको वैसे ही देखना चाहिए.और कोई भी फतवा नही दे सकता .जब तक उसे इस्लाम की पूरी जानकारी नहीं है .फतवा देने के लिए एक ऑथॉरिटी होती है जो पूरे तरह सोच विचार करती है।

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर मामले को लेकर हरिद्वार के एक अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने सन 1528 में मुगल सम्राट बाबर व उसके सहयोगियों और वर्तमान में उसके वंशज एवं बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के पैरोकारों के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज करने के लिए अयोध्या के एसएसपी को नोटिस भेजा है। अपने नोटिस में उन्होंने बाबर उसके सहयोगियों और बाबरी मस्जिद के पैरोकारों पर राम जन्म भूमि मंदिर को तोड़ने की साजिश में सम्मिलित होने और उसकी जगह पवित्र कुरान शरीफ की धार्मिक मान्यताओं के विपरीत मस्जिद का निर्माण कराने की अपराधिक साजिश में शामिल होने और उस साजिश के तहत वर्तमान में भी देश का माहौल खराब करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में एसएसपी स्तर पर अपराधिक मुकदमा दर्ज ना करने पर न्यायालय की शरण में जाने की बात भी कही है। एडवोकेट अरुण भदौरिया ने आरोप लगाया है कि इस मामले में हिंदू पक्ष के विभिन्न नेताओं और संतों पर मुकदमे की कार्रवाई एक पक्षी है, जो न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। उनका कहना है कि इस मामले में पहले ही अपराधिक षड्यंत्र व कार्रवाई मुस्लिम पक्ष की ओर से 1528 में की गई थी और उसके बाद उस पक्ष के लोग लगातार अवैध रूप से अपराधिक षड्यंत्र के तहत की गई। इस कार्रवाई को सही ठहरा कर देश का माहौल खराब करने है। इसलिए इस मामले में मृत बाबर बुआ मीर बाकी सही मुस्लिम पक्ष के सभी पैरोकारों व वंशजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कारवाई की जानी चाहिए।

एक बार फिर सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों के प्रयोग पर बहस छिड़ गई है. इस बार मामला गर्माया है केटी पेरी के मां काली का चित्र प्रयोग करने पर‍.
दरअसल, हॉलीवुड सिंगर केटी पेरी ने अपने इंस्‍टाग्राम अकाउंट पर मां काली की तस्‍वीर पोस्‍ट की है. उन्‍होंने जबसे ये तस्‍वीर पोस्‍ट की है, तबसे वे भारतीयों के निशाने पर है. 
ये है केटी पेरी का पोस्‍ट- 
हालांकि केटी ने अपने मूड को जाहिर करने के लिए ये तस्‍वीर शेयर की थी, लेकिन इसके लिए उन्‍हें काफी ट्रोल किया जा रहा है. लोगों का कहना है कि वे अपने मूड को दर्शाने के लिए इस तरह भारतीय देवी के चित्र का प्रयाेग नहीं कर सकतीं. 
बीयर बोतल पर गणेश तो जूते पर ऊं, ऑनलाइन कंपनी के खिलाफ केस दर्ज 
ये इस तरह का पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी भारतीय देवी-देवताओं की तस्‍वीरों के गलत प्रयोग पर लोगों ने आपत्ति जताई है. कुछ समय पहले ही अमेरिका की एक कंपनी ने बियर की बोतल पर भगवान गणेश की तस्वीर का इस्तेमाल किया था जबकि जबकि एक अन्‍य कंपनी ने जूतों पर ओम लिख दिया था. 

गौरतलब है कि ओम लिखे जूते बेचने के मामले में वेबसाइट yeswevibe.com और भगवान गणेश की तस्वीर वाली बीयर बोतल बेचने के मामले में lostcoast.com के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी. 
पाकिस्तान के सिंध में बिक रहे हैं 'ऊँ' लिखे हुए जूते, हिंदू संगठन ने जताया आक्रोश 
इससे पहले, ऑनलाइन वेबसाइट अमेजन पर हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर वाले पायदान बेचने का मामला तो खूब गर्माया था. 
फिर अमेजन पर ही तिंरगा झंडा वाले पायदान की बिक्री भी विवादों में रही थी. भारतीय विदेश मंत्रालय ने जब कड़ा रुख अपनाया तो अमेजन ने ये उत्पाद हटा लिए थे.

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विज्ञान और आस्था को लेकर बहस वर्षों से होती रही है लेकिन आज भी दोनों के बीच समानता और असमानता को लेकर बहस जारी है। ताजा मामला मुरादाबाद के कटघर थाना क्षेत्र का है जहां एक पेड़ की जड़ में शिवलिंग निकलने की जानकारी होने के बाद लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

भगवान शिव के साक्षात् रूप का अवतार मानकर लोग शिवलिंग के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। पेड़ की जड़ पर विराजमान शिवलिंग के दर्शन कर भगवान का आशीर्वाद लेने पहुंचे लोग इसे भक्ति की शक्ति मान रहे हैं। धूपबत्ती की महक और घंटियों की आवाज के बीच भगवान के जयकारे और पेड़ की जड़ पर चढ़ते चढ़ावे के बाद माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आ रहा है।

भगवान पेड़ की जड़ से दर्शन देने लगे तो क्षेत्र में मेला भी लग गया। आस-पास के ग्रामीण इलाकों के साथ ही दूरदराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु लगातार भगवान के दर्शन को पहुंच रहे हैं। भगवान शिव के जयकारों का उद्घोष, भक्ति में लीन होती महिलाएं और पुरुष सबका मानना है कि भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए हैं। मामला मुरादाबाद के कटघर थाना क्षेत्र स्थित जैतिया फिरोजपुर गांव का है। दरअसल तीन दिन पहले गांव में पुराने मंदिर में पीपल का पेड़ था जिसका एक हिस्सा पेड़ से अलग हो गया। पेड़ पर खेल रहे दो बच्चों ने पेड़ की जड़ में स्थित शिवलिंग को देखा था। इसके बाद बच्चों ने गांव जाकर परिजनों को जानकारी दी तो ग्रामीण भी मौके पर पहुंचकर सच्चाई जानने लगे।




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अपने देश में है मस्तक पर तिलक लगाने की प्रथा प्रचलित है। यह प्राचीन है। मनुष्य के मस्तक के मध्य में विष्णु भगवान का निवास है,इसलिए तिलक इसी स्थान पर लगाया जाना चाहिए है।
स्त्रियां लाल कुंकुम का तिलक लगाती हैं। यह भी बिना प्रयोजन नहीं है। लाल रंग ऊर्जा एवं स्फूर्ति का प्रतीक होता है। तिलक स्त्रियों के सौंदर्य में अभिवृद्धि करता है। तिलक लगाना देवी की आराधना से भी जुड़ा है। देवी की पूजा करने के बाद माथे पर तिलक लगाया जाता है। तिलक देवी के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
हिन्दु परम्परा में मस्तक पर तिलक लगाना शूभ माना जाता है इसे सात्विकता का प्रतीक माना जाता है विजयश्री प्राप्त करने के उद्देश्य रोली, हल्दी, चन्दन या फिर कुम्कुम का तिलक या कार्य की महत्ता को ध्यान में रखकर, इसी प्रकार शुभकामनाओं के रुप में हमारे तीर्थस्थानों पर, विभिन्न पर्वो-त्यौहारों, विशेष अतिथि आगमन पर आवाजाही के उद्देश्य से भी लगाया जाता है ।
तिलक लगाने के अद्भुत फायदे:

मस्तिष्क के भ्रु-मध्य ललाट में जिस स्थान पर टीका या तिलक लगाया जाता है यह भाग आज्ञाचक्र है । शरीर शास्त्र के अनुसार पीनियल ग्रन्थि का स्थान होने की वजह से, जब पीनियल ग्रन्थि को उद्दीप्त किया जाता हैं, तो मस्तष्क के अन्दर एक तरह के प्रकाश की अनुभूति होती है । पीनियल ग्रन्थि के उद्दीपन से आज्ञाचक्र का उद्दीपन होगा । इसी वजह से धार्मिक कर्मकाण्ड, पूजा-उपासना व शूभकार्यो में टीका लगाने का प्रचलन है। उस के उद्दीपन से हमारे शरीर में स्थूल-सूक्ष्म अवयन जागृत हो सकें । इस आसान तरीके से सर्वसाधारण की रुचि धार्मिकता की ओर, आत्मिकता की ओर, तृतीय नेत्र जानकर इसके उन्मीलन की दिशा में किया गया। जिससे आज्ञाचक्र को नियमित उत्तेजना मिलती रहती है ।
तन्त्र शास्त्र के अनुसार माथे को इष्ट इष्ट देव का प्रतीक समझा जाता है। हमारे इष्ट देव की स्मृति हमें सदैव बनी रहे इस तरह की धारणा , ध्यान में रखकर, मन में उस केन्द्रबिन्दु की स्मृति हो सकें । शरीर व्यापी चेतना शनैः शनैः आज्ञाचक्र पर एकत्रित होती रहे । अतः इसे तिलक या टीके के माध्यम से आज्ञाचक्र पर एकत्रित कर, तीसरे नेत्र को जागृत करा सकें ताकि हम परा – मानसिक जगत में प्रवेश कर सकें ।
मनोविज्ञान की दृष्टि से भी तिलक लगाना उपयोगी माना गया है। माथा चेहरे का केंद्रीय भाग होता है। उसके मध्य में तिलक लगाकर, दृष्टि को बांधे रखने का प्रयत्न किया जाता है। तिलक हिंदू संस्कृति का पहचान है। तिलक केवल धार्मिक मान्यता नहीं है। तिलक लगाने से मन को शांति मिलती है। चन्दन को पत्थर पर घिस कर लगाते है । ऐनक के सामने हमारी मुखमंडल की आभा काफी सौम्य दिखता है। तिलक से मानसिक उतेज़ना पर काफी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक का कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोड खुद ही अगले एक-डेढ साल में एक-साथ तीन बार तलाक बोलने की प्रथा को खत्म कर देगा और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

मौलाना ने मुसलमानों को बीफ खाने से बचने की भी सलाह दी. उन्होंने सोमवार रात यहां हजरत अली के जन्म दिन पर आयोजित मुशायरे से इतर जिला दीवानी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के आवास पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि एक-साथ तीन बार तलाक बोलने वाली प्रथा महिलाओं के पक्ष में गलत है. लेकिन यह समुदाय का निजी मसला है और वे खुद एक-डेढ साल के भीतर इसे सुलझा लेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

बीफ खाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि धार्मिक पुस्तकों को बीफ खाने की सलाह नही दी गयी है और मुसलमानों को यह नहीं खाना चाहिए. मौलाना ने कहा, यदि सरकार देश में गोवध और बीफ खाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए कोई कानून लाती है तो मुसलमान उसका स्वागत करेंगे. उन्होंने कथित गोरक्षकों की गैरकानूनी गतिविधियों की आलोचना करते हुए उन्हें बंद करने की मांग की.
राम मंदिर के मामले पर, उन्होंने कहा कि विवाद अब खत्म होना चाहिए और हिन्दुओं तथा मुसलमानों को एक आधार तैयार करना होगा ताकि कोई समझौता हो सके. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को वहां मस्जिद बनाने की जिद नहीं करनी चाहिए जहां मंदिर बनना है.

सादिक ने मुसलमानों की खराब हालत के लिए समुदाय के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि कश्मीरी युवाओं को अपनी आंखें खुली रखनी चाहिए और पाकिस्तान की खराब मंशा को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को समृद्ध बनने के लिए एकजुट रहना चाहिए.

हनुमान जी के जन्मदिवस पर विशेष : मंगल को जन्मे, मंगल ही करते* चैत्र पूर्णिमा पर भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार हनुमान का जन्म हुआ था और यह दिन हनुमान जयंती के रूप में धूमधाम से मनाया जाता। चैत्र पूर्णिमा पर भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार हनुमान का जन्म हुआ था और यह दिन हनुमान जयंती के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है, पहली चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन और दूसरी कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को। वाल्मीकि रामायण के अनुसान हनुमान का जन्म कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हुआ जबकि पुराणों में पवनसुत का जन्म चैत्र पूर्णिमा बताया गया है। वैसे अधिकांश जगहों पर चैत्र पूर्णिमा को ही मारुतिनंदन हनुमान की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। स्कंदपुराण में वर्णन है कि शिव के ग्यारहवें रुद्र ही विष्णु के अवतार श्रीराम की सहायता हेतु हनुमान रूप में अवतरित हुए। भगवान शंकर ने श्री विष्णु से दास्य का वरदान प्राप्त किया था, जिसे पूर्ण करने हेतु वह अवतार लेना चाहते थे। परंतु उनके समक्ष धर्मसंकट यह था कि जिस रावण के वध हेतु वह श्रीराम की सहायता करना चाहते थे वह उनका परम भक्त था। अपने परम भक्त के विरुद्ध राम की सहायता वह आखिर कैसे करते यह प्रश्न था। रावण ने अपने दस सिरों को अर्पित कर भगवान शंकर के दस रुद्रों को संतुष्ट कर रखा था। अत: हनुमान ग्यारहवें रुद्र के रूप में अवतरित हुए और राम के सहायक बने। कलियुग में भक्तों के कष्टों को हरने में हनुमान समान दूसरा कोई देव नहीं है। वे जल्दी कृपा करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास उनके बारे में लिखते हैं, 'संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बल बीरा।" सभी देवताओं के पास अपनी-अपनी शक्तियां हैं। जैसे विष्णु के पास लक्ष्मी, महेश के पास पार्वती और ब्रह्मा के पास सरस्वती लेकिन हनुमान खुद की शक्ति से संचालित देव हैं। वे सर्वशक्तिशाली हैं लेकिन अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पित हैं। अपूर्व बलशाली होते हुए भी वे भक्ति की अनुपम मिसाल हैं। उनकी भक्ति भावना से प्रसन्ना होकर श्रीराम ने ही उन्हें वरदान दिया था कि मुझसे भी ज्यादा तुम्हारे मंदिर होंगे और लोग अपने संकटों के निवारण के लिए तुम्हारी उपासना करेंगे। हनुमान भक्तों की पुकार पर तुरंत ही उनके कष्ट हरते हैं। कलियुग में हनुमान सभी तरह के कष्टों को दूर करते हैं। वे भक्तों का हर तरह से मंगल करते हैं। वेद पुराणों में हनुमानजी को अजर-अमर कहा गया है। शास्त्रों में सप्त चिरंजीवों में हनुमान, राजा बली, महामुनि व्यास, अंगद, अश्वत्थामा, कृपाचार्य और विभीषण सम्मिलित हैं। चूंकि हनुमान सदेह इस धरा पर मौजूद हैं तो उनकी उपासना किसी भी तरह से की जाए निश्चित फलदायी होती है। *मनोकामना पूर्ण करेंगे पवनसुत* तंत्र शास्त्र के अनुसार मंगलवार के दिन हनुमान को प्रसन्ना करने के लिए कुछ उपाय सार्थक सिद्ध होते हैं। ऐसे ही कुछ उपाय- मंगलवार को संध्याकाल में किसी हनुमान मंदिर में जाएं और एक सरसों तेल का और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। हनुमान चालीसा का पाठ करें। मंगलवार की सुबह पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं। उसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके राम नाम का जाप करें। यदि शनि दोष से पीड़ित हैं तो हनुमान चालीसा का पाठ करने पर शनिदेव व्यक्ति का बुरा नहीं करते हैं। *हनुमान जयंती पर करें ये उपाय* हनुमान जयंती के दिन रामायण और राम रक्षास्रोत का पाठ करने से आपको मानसिक और शारीरिक शक्ति मिलती है। हनुमान जयंती पर उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं। ऐसा करने से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। यदि व्यापार में गिरावट हो तो हनुमानजी को चोला चढ़ाने से फायदा मिलता है। हनुमान जयंती के दिन किसी हनुमान मंदिर की छत पर लाल झंडा लगाने से हर तरह के आकस्मिक संकट से मुक्ति मिलती है। *इसलिए चढ़ाते हैं हनुमान जी को सिंदूर*  रामायण में एक कथा प्रसिद्ध है कि हनुमानजी ने जानकी की मांग में सिंदूर लगा देख आश्चर्य से पूछा- माते, आपने यह लाल द्रव्य मस्तक पर क्यों लगाया है? माता जानकी ने हनुमान की इस उत्सुकता पर कहा, 'पुत्र, इसे लगाने से मेरे स्वामी की रक्षा होती है, वे दीर्घायु होते हैं और वे मुझ पर सदैव प्रसन्न रहते हैं। हनुमानजी ने यह सुना तो वे बहुत प्रसन्ना हुए और विचार किया कि जब अंगुलीभर सिंदूर से प्रभु की रक्षा होती है तो क्यों न पूरे शरीर पर सिंदूर लगाकर स्वामी को सुरक्षित कर दूं। उन्होंने वैसा ही किया। जब वे इस तरह श्रीराम के सामने पहुंचे तो प्रभु मुस्कुराए बिना न रह सके। हनुमान का विश्वास मां जानकी के वचनों में पक्का हो गया। तभी से हनुमान की भक्ति का स्मरण करते हुए उन्हें सिंदूर चढ़ाया जाने लगा। *शनि के प्रभाव से बचाते हैं हनुमान* रामायण से विदित होता है कि लंकापति रावण के सभी भ्राता व पुत्रों की जब मृत्यु हो रही थी तो अपने अमरत्व के लिए उसने सौरमंडल के सभी ग्रहों को अपने दरबार में कैद कर लिया था। रावण की कुंडली में शनि ही एकमात्र ऐसा ग्रह था जिसकी वक्रावस्था व योगों के कारण रावण के लिए मार्केश की स्थिति उत्पन्ना हो रही थी जिसे बदलने के लिए रावण ने शनि को दरबार में उलटा लटका दिया था और यातनाएं दी थीं परंतु शनि के व्यवहारों में कोई बदलाव नहीं आया था। जब विभीषण ने हनुमान को इस बारे में में बताया तो हनुमान ने शनि को रावण की कैद से मुक्त कराया था। तभी शनिदेव ने हनुमान को वरदान दिया था कि जो भी उनकी आराधना करेगा उसे वह कष्ट नहीं पहुंचाएंगे । *11 अप्रैल को हनुमान जयंती पर बन रहे विशेष योग* इस वर्ष हनुमान जयंती चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 11 अप्रैल मंगलवार को विशेष योग बन रहे हैं। चार साल बाद संकट मोचन की जयंती चंद्रग्रहण से मुक्त और 3 साल बाद मंगलवार के दिन मनेगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार हनुमान जयंती में राज योग के साथ ही शुक्र मीन राशि में उच्च का हो गए हैं जिसकी सूर्य के साथ युति रहेगी। द्वितीय स्थान पर मेष राशि का मंगल शुभ फलदायी रहेगा। विशेष योग होने के कारण हनुमान जयंती भक्तों के लिए विशेष फलदायी रहेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 2013 से लगातार हनुमान जयंती पर चंद्रग्रहण के योग बन रहे थे लेकिन इस बार चंद्रग्रहण से मुक्त रहेगी। इससे पूजा-अर्चना और आराधना में कोई संकट नहीं आएगा। विशेष संयोगों के कारण इस दिन हनुमानजी की आराधना से श्रद्धालुओं की मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य,मंगल शनि राहु के दोषों के निवारण हेतु हनुमान आराधना विशेष मानी जाती है। पूर्णिमा पर चित्रा नक्षत्र और राजयोग मिलने पर जयंती का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ गया है। *बजरंगबली को प्रसन्न करने के अचूक उपाय* किसी भी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ नारियल लेकर जाएं। आर्थिक तंगी की समस्या आ गई हो या फिर विवाह में देरी। ऐसी ही तमाम समस्याओं का निवारण सिर्फ हनुमानजी ही कर सकते हैं। यदि आप हनुमानजी के ये 5 उपाय आजमाते हैं तो संभव है। हनुमान जी आपका साथ जरूर देंगे। और वो सब कुछ आपके पास होगा जिसे पाने की ख्वाहिश आप रखते हैं। किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और 7 परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। पीपल के 11 पत्तों पर श्रीराम नाम लिख लें, उसके बाद राम श्रीनाम लिखे हुए इन पत्तों की एक माला बनाएं। इस माला को किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाकर वहां बजरंगबली को अर्पित करें। इस प्रकार यह उपाय करते रहें। कुछ समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। किसी भी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ नारियल लेकर जाएं। मंदिर में नारियल को अपने सिर पर 7 बार वार लें। इसके बाद यह नारियल हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी। हनुमानजी के सामने शनिवार की रात को चौमुखा दीपक लगाएं। यह एक बहुत ही छोटा लेकिन चमत्कारी उपाय है। ऐसा नियमित रूप से करने पर आपके घर-परिवार की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं। *सुनील झा 'मैथिल'*

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