Dharm

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पटना. लोकआस्था के महापर्व छठ की छटा बिहार में छाने लगी है। हर गली-मोहल्ले में ‘कांचहि बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए..., दर्शन दीहीं ना अपन ये छठी मइया...’ जैसे गीत गूंज रहे हैं। हर साल की तरह इस साल भी छठ पूजा में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले बिहारियों के आने का सिलसिला जारी है। छठ पूजा में शामिल होने के लिए हर साल पांच-छह लाख लोग बिहार आते हैं। अकेले रेलवे ने इस साल 24 स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। इस बार एक करोड़ घरों में व्रत होगा। पर्व के दौरान पांच दिनों तक करीब 300 करोड़ रुपए के कारोबार का भी अनुमान है। बता दें शुक्रवार से नहाय-खाय के साथ छठ पर्व की शुरुआत हो रही है। जानिए कहां से ज्यादा जाते हैं बिहारी... - में 70 से 80 फीसदी घरों में लोग छठ पूजा करते हैं। इसके अलावा देश के उन सभी राज्यों और दूसरे देशों में जहां भी बिहार के लोग रहते हैं, छठ पूजा हाेती है। - इस दौरान बिहार में प्रसाद, पूजन-सामग्री, फल आदि मिलाकर करीब 300 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होता है। पटना के बहादुरपुर बाजार समिति में दीपावली के अगले दिन ही छठ के लिए फलों की बिक्री शुरू हो जाती है। - फल कारोबारी शहजाद आलम ने बताया कि पहले तीन दिन बाहर के लोग और व्यवसायी फल खरीदते हैं। पहले अर्घ्य से दो दिन पहले लोकल बिजनेसमैन और जिनके यहां छठ होती है, वे फल खरीदने आते हैं। - वहीं काम करने वाले सरफू खान बताते हैं कि 6 महीने के बराबर फल छठ में 5 दिनों में बिक जाते हैं। अकेले सेब की बिक्री इतनी होती है कि 150 से 175 ट्रक सेब कश्मीर से मंगाए जाते हैं। 24 पूजा स्पेशल ट्रेनें, ज्यादातर में नो रूम; फ्लाइट का किराया 68 हजार रु. तक - देशभर से 246 ट्रेनें पटना जाती हैं। इसके बावजूद छठ के लिए पूर्व मध्य रेल के पांचों मंडलों में 24 पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाने का एलान किया गया है। - फिलहाल ज्यादातर ट्रेनों में 355 से 400 तक की वेटिंग चल रही है या नो रूम है। यानी इनमें वेटिंग का टिकट भी नहीं बचा है। - पटना के लिए 20 फ्लाइट्स हैं, लेकिन दिल्ली से पटना के लिए 7 से 22 हजार रुपए तक का किराया लग रहा है। मुंबई-पटना का किराया 68 हजार रुपए तक है। दिल्ली से पटना तक किराया (रु. में) डेट मिनिमम मैक्सिमम 03 नवंबर 7011 26155 04 नवंबर 9460 22000 05 नवंबर 7446 22000 मुंबई से पटना तक किराया (रु. में) डेट मिनिमम मैक्सिमम 03 नवंबर 11900 21254 04 नवंबर 11957 33013 05 नवंबर 9566 68166 यहां से जाते हैं ज्यादातर बिहारी - छठ पर सबसे ज्यादा लोग दिल्ली से जाते हैं। इसके बाद मुंबई, लखनऊ का नंबर है। कोलकाता, रांची से भी बड़ी तादाद में लोग पहुंचते हैं। - मध्य प्रदेश में इंदौर से पटना जाने वालों की तादाद सबसे ज्यादा रहती है।

उज्जैन. आज दिवाली है। इस दिन श्रीमहालक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है। उज्जैन के ज्योतिषी पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, इस बार अमावस्या 29 अक्टूबर, शनिवार की रात करीब 8.45 से शुरू होकर रविवार रात 11 बजे तक रहेगी। दिवाली पर प्रीति और बुधादित्य दो बहुत ही विशेष योग बन रहा है। इन योगों में की गई लक्ष्मी पूजा से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति संभव है। ये योग धन लाभ के लिए भी बहुत शुभ माने गए हैं। अनाज, किराना, धातु और राजनीति से जुड़े लोगों के लिए ये योग बहुत खास रहेंगे। ऐसे सजाएं मां लक्ष्मी की चौकी... - दिवाली पूजा के लिए मां लक्ष्मी की चौकी विधि-विधान से सजाई जानी चाहिए। - चौकी पर लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियां इस तरह रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। लक्ष्मीजी और गणेशजी की मूर्तियां स्थापित करें। - कलश को लक्ष्मीजी के पास चावल पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का आगे का भाग दिखाई दे और इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुणदेव का प्रतीक है। - अब दो बड़े दीपक रखें। एक में घी और दूसरे में तेल का दीपक लगाएं। एक दीपक चौकी के दाहिनी ओर रखें और दूसरी मूर्तियों के चरणों में। - इनके अतिरिक्त एक दीपक गणेशजी के पास रखें। ऐसे सजाएं पूजा की थाली - पूजा की थाली के संबंध में शास्त्रों में उल्लेख किया गया है कि लक्ष्मी पूजन में तीन थालियां सजानी चाहिए। - पहली थाली में 11 दीपक समान दूरी पर रख कर सजाएं। दूसरी थाली में पूजन सामग्री इस क्रम से सजाएं- सबसे पहले धानी (खील), बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चंदन का लेप, सिंदूर कुमकुम, सुपारी और थाली के बीच में पान रखें। - तीसरी थाली में इस क्रम में सामग्री सजाएं- सबसे पहले फूल, दूर्वा, चावल, लौंग, इलाइची, केसर-कपूर, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक। - इस तरह थाली सजा कर लक्ष्मी पूजन करें।

२०१६ धनतेरस पूजा, धनत्रयोदशी पूजा धनत्रयोदशी या धनतेरस के दौरान लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और लगभग २ घण्टे २४ मिनट तक रहता है। धनतेरस पूजा को करने के लिए हम चौघड़िया मुहूर्त को देखने की सलाह नहीं देते हैं क्योंकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं। धनतेरस पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान होता है जब स्थिर लग्न प्रचलित होती है। ऐसा माना जाता है कि अगर स्थिर लग्न के दौरान धनतेरस पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है। इसीलिए धनतेरस पूजन के लिए यह समय सबसे उपयुक्त होता है। वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होता है। धनतेरस पूजा के लिए हम यथार्थ समय उपलब्ध कराते हैं। हमारे दर्शाये गए मुहूर्त के समय में त्रयोदशी तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न सम्मिलित होते हैं। हम स्थान के अनुसार मुहूर्त उपलब्ध कराते हैं इसीलिए आपको धनतेरस पूजा का शुभ समय देखने से पहले अपने शहर का चयन कर लेना चाहिए। धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस का दिन धन्वन्तरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयन्ती, जो कि आयुर्वेद के देवता का जन्म दिवस है, के रूप में भी मनाया जाता है। इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है और इस धार्मिक संस्कार को त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है। आपको धनत्रयोदशी की हार्दिक शुभकामनायें।

ऐसे पहुंचे शनि महाराज शिंगणापुर - पूरे भारत में शनि महाराज के दो प्रमुख निवास स्थान हैं जिनमें एक मथुरा के पास स्थित कोकिला वन है और दूसरा महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित शिंगणापुर धाम। इनमें शिंगणापुर का विशेष महत्व है। यहां पर शनि महाराज की कोई मूर्ति नहीं है बल्कि एक बड़ा सा काला पत्थर है जिसे शनि का विग्रह माना जाता है। शनि के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए देश विदेश से लोग यहां आते हैं और शनि विग्रह की पूजा करके शनि के कुप्रभाव से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। माना जाता है कि यहां पर शनि महाराज का तैलाभिषेक करने वाले को शनि कभी कष्ट नहीं देते। शनि मराहाज के शिंगणापुर पहुंचने की कहानी बड़ी ही रोचक है। सदियों पहले शिंगणापुर में खूब वर्षा हुई। वर्षा के कारण यहां बाढ़ की स्थिति आ गई। लोगों को वर्षा प्रलय के समान लगने लग रही थी। इसी बीच एक रात शनि महाराज एक गांव वासी के सपने में आए। शनि महाराज ने कहा कि मैं पानस नाले में विग्रह रूप में मौजूद हूं। मेरे विग्रह को उठाकर गांव में लाकर स्थापित करो। सुबह इस व्यक्ति ने गांव वालों को यह बात बताई। सभी लोग पानस नाले पर गए और वहां मौजूद शनि का विग्रह देखकर सभी हैरान रह गये। गांव वाले मिलकर उस विग्रह का उठाने लगे लेकिन विग्रह हिला तक नहीं, सभी हारकर वापस लौट आए। शनि महाराज फिर उस रात उसी व्यक्ति के सपने में आये और बताया कि कोई मामा भांजा मिलकर मुझे उठाएं तो ही मैं उस स्थान से उठूंगा। मुझे उस बैलगाड़ी में बैठाकर लाना जिसमे लगे बैल भी मामा-भांजा हो । अगले दिन उस व्यक्ति ने जब यह बात बताई तब एक मामा- भांजे ने मिलकर विग्रह को उठाया । बैलगाड़ी पर बिठाकर शनि महाराज को गाँव में लाया गया और उस स्थान पर स्थापित किया जहां वर्तमान में शनि विग्रह मौजूद हैं । इस विग्रह की स्थापना के बाद गाँव की समृधी और खुशहाली बढ़ने लगी । सुनील झ

करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी। शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज चतुर्थी व्रत है करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूंकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है। सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चांद उदित हो रहा हो। इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है। वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है। उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है। एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियां करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है। इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूंकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह कर वह चली जाती है। सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है। अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अंगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुंह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश- मां गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।मुखय रुप से यह गणेश चतुर्थी का व्रत था इसीलिये इस व्रत में गणेश पूजन आवश्यक है किन्तु एक करवा नाम की सती के कारण यह व्रत उसी के नाम से करवाचौथ कहा जाने लगा ,इस महान देश में सतियों की महत्ता सदैव सर्वोपरि रही है आचार्य... संजय कुमार मिश्र, इलाहाबाद, ☎9452014657 जानिये क्यों देखते है चलनी से चांद ...........? चतुर्थी रिक्ता तिथि होती है इस तिथि को चन्द्र दर्शन निषेध होता है भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी सर्वाधिक वर्जित होती है किन्तु कृष्ण पक्ष में गणेश पूजन चन्द्र उदय के बाद होता है, अत:चन्द्रमा का दर्शन नीचे नजर करके या चलनी से दर्शन करके अर्घ देना चाहिये , गणेश पूजन से चन्द्र दर्शन का दोष भी मिट जाता है लोग परम्परा अनुशार पति का भी दर्शन भी चलनी से किया जाता है ✍आचार्य संजय कुमार मिश्र, प्रयागराज, इलाहाबाद ☎9452014657 करवा चौथ में चंद्र उदय का मुहूर्त दिल्ली में रात 8:29 बजे चंडीगढ़ में रात 8:46 बजे जयपुर में रात 8:58 बजे जोधपुर में रात 9:10 बजे मुंबई में रात 9:22 बजे बंगलुरु में रात 9:12 बजे हैदराबाद में 9:22 बजे देहरादून में रात 8:44 पटियाला और लुधियाना में रात 8:50 बजे पटना में रात 8:46 बजे लखनऊ और वाराणसी में रात 8:37 बजे और कोलकाता में रात 8:13 बजे होंगे चंद्रमा के दर्शन.

श्री गणेश जी की पूजा में तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती है ? भगवान गणेश की पूजा के बिना दुनिया का कोई भी कार्य पूरा नहीं होता. श्री गणेश का पूर्ण जीवन ही रोचक घटनाओं से भरा है और इसी में से एक है कि आखिर क्यूं श्री गणेश जी की पूजा पर तुलसी अर्पित नहीं की जाती. प्राय: पूजा-अर्चना में भगवान को तुलसी चढ़ाना बहुत पवित्र माना जाता है। व्यावहारिक दृष्टि से भी तुलसी को औषधीय गुणों वाला पौधा माना जाता है। किंतु भगवान गणेश की पूजा में पवित्र तुलसी का प्रयोग निषेध माना गया है। इस संबंध में एक पौराणिक कथा है - एक बार श्री गणेश गंगा किनारे तप कर रहे थे। तभी विवाह की इच्छा से तीर्थ यात्रा पर निकली देवी तुलसी वहां पहुंची। वह श्री गणेश के रुप पर मोहित हो गई। तुलसी ने विवाह की इच्छा से उनका ध्यान भंग किया। तब भगवान श्री गणेश ने तुलसी द्वारा तप भंग करने को अशुभ बताया और तुलसी की मंशा जानकर स्वयं को ब्रह्मचारी बताकर उसके विवाह प्रस्ताव को नकार दिया। इस बात से दु:खी तुलसी ने श्री गणेश के दो विवाह होने का शाप दिया। इस श्री गणेश ने भी तुलसी को शाप दे दिया कि तुम्हारी संतान असुर होगी। एक राक्षस की मां होने का शाप सुनकर तुलसी ने श्री गणेश से माफी मांगी। तब श्री गणेश ने तुलसी से कहा कि तुम्हारी संतान शंखचूर्ण राक्षस होगा। किंतु फिर तुम भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को प्रिय होने के साथ ही कलयुग में जगत के लिए जीवन और मोक्ष देने वाली होगी। पर मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना शुभ नहीं माना जाएगा। तब से ही भगवान श्री गणेश जी की पूजा में तुलसी वर्जित मानी जाती है।

नई दिल्ली. तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सरकार के रवैये पर एतराज जताया है। बोर्ड से जुड़े हजरत मौलाना वली रहमानी ने गुरुवार को कहा- 'हम यूनिफॉर्म सिविल कोड का बायकॉट करेंगे। ये सोच मुल्क को तोड़ने वाली, गैरवाजिब और नामुनासिब है।' रहमानी ने यह भी कहा, 'मोदी ने ढाई साल की नाकामी और असल मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए लिए ये शोशा छोड़ा है। हम इसका विरोध करेंगे।' बता दें कि पिछले हफ्ते शुक्रवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर तीन तलाक और बहु विवाह को खत्म करने के लिए यूनिफॉर्म सिविल लॉ की वकालत की थी। केंद्र ने हलफनामे में क्या कहा था... - तीन तलाक पर हलफनामा मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस की एडिशनल सेक्रेट्री मुकुलिता विजयवर्गीय ने दायर किया है। - सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा है- 'भारत में जारी तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु विवाह का इस्लाम में रिवाज नहीं है। तीन बार तलाक कहना महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है। सच तो ये है कि कई मुस्लिम देशों में इस बारे में बड़े सुधार किए जा चुके हैं।' - देश की कॉन्स्टिट्यूशनल हिस्ट्री में पहली बार सरकार ने महिला-पुरुष में बराबरी और सेकुलरिज्म के आधार पर इन पर फिर से विचार करने की अपील की है। - हलफनामे में तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु विवाह की वैधता का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि लैंगिक भेदभाव खत्म करने, गरिमा और समानता के सिद्धांत के आधार पर इन पर विचार किया जाना चाहिए। ये ऐसी चीजें हैं जिनसे समझौता नहीं किया जा सकता। - सरकार की तरफ से ये भी कहा गया है कि भारत में महिलाओं को उनके कानूनी अधिकार देने से इनकार नहीं किया जा सकता। इन मुस्लिम देशों के कानूनों का किया जिक्र - हलफनामा में केंद्र सरकार कहा है- 'मुस्लिम देशों में इसमें पहले ही बदलाव किया जा चुका है।' - केंद्र ने ईरान, इजिप्ट, इंडोनेशिया, तुर्की, ट्यूनीशिया, मोरक्को, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में निकाह कानून में हुए बदलाव का एग्जाम्पल दिया है। - साथ ही कहा है- 'तीन तलाक के मुताबिक, हसबेंड अपनी बीवी को तीन बार तलाक बोलकर ही तलाक दे देता है। निकाल हलाल के मुताबिक, तलाकशुदा कपल तब तक शादी नहीं कर सकते, जब तक कि महिला दोबारा शादी करने के बाद तलाक लेकर या फिर सेकेंड हसबेंड की मौत होने के बाद सिंगल नहीं हो जाती।' सरकार ने क्यों दायर किया हलफनामा? - शायरा बानो समेत कई लोगों की तरफ से दायर पिटीशन में मुस्लिमों में जारी इन प्रथाओं की वैधता को चुनौती दी गई थी। - मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इन पिटीशन को खारिज करने की मांग की थी। कहा था-'इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए।' - जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था। पिछले दिनों केंद्र ने जवाब देने के लिए कोर्ट से 4 हफ्तों का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मान लिया था।

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