Dharm

Dharm (94)

श्राद्ध पक्ष, यानि पितरों के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने का समय. इसके लिए वर्ष में 15 दिन निर्धारित किए गए हैं, क्योंकि इस दौरान कुछ समय के लिए यमराज पितरों को अपने प्रियजनों द्वारा दिया गया तर्पण ग्रहण करने के लिए मुक्त कर देते हैं. इस दौरान कई बातों का विशेष महत्व है. आज हम आपको ऐसी ही कुछ बातों से वाकिफ़ करवाएंगे, जिनको पितृ पक्ष में जानना और ध्यान रखना महत्वपूर्ण है. पितृ पक्ष में इन सपनों और घटनाओं का है महत्त्व पूर्वजों को सपने में देखना: अगर आप सपने में अपने पूर्वजों को देखते हैं, तो इसका मतलब यह है कि वे आपको अपने होने का एहसास दिला रहे हैं. सपने में सांप दिखाई देना: अगर सपने में आपको सांप दिखाई दे, तो समझ जाइए कि आपके पितर आपसे कुछ कहने की कोशिश कर रहे हैं. अकसर ये तब होता है, जब वे आपसे बात करने की कोशिश करते हैं. किसी के होने का अहसास होना: आप घर में अकेले हों, या आपके पास कोई न हो, फिर भी अगर आपको किसी के होने का अहसास होता है, तो समझ जाइए कि आपके आस-पास आपके पितरों की आत्मा वास कर रही है. ऐसा तभी होता है, जब वे आपको अपने होने का एहसास दिलाना चाहते हों या आपके साथ समय बिताने के इच्छुक हों. रात में बर्तनों का गिरना: अगर रात में बिना किसी वजह के बर्तन गिरते हैं, तो समझ जाइए कि आपके पितर आपसे कुछ कहने की कोशिश कर रहे हैं. घर में लोगों का बीमार होना: अगर श्राद्ध पक्ष में आपके घर के लोग बीमार होते हैं, तो समझना चाहिए कि आपके पितर आपसे नाराज़ हैं. ऐसे में आपको प‌ितरों की पूजा करनी चाह‌िए और गरीबों, ब्राह्मणों को भोजन कराना चाह‌िए. पितृ पक्ष में क्यों शुभ काम नहीं करते? कहते हैं कि ये समय ऐसा होता है, जब परिवार वाले शोक में रहते हैं और शोक के दौरान शुभ काम कैसे किया जा सकता है? खरीददारी करने से इसलिए मना करते हैं कि ये काम ख़ुशी वाले हैं और घर में शोक होता है. इस दौरान नया घर लेने की मनाही के पीछे वजह है कि पितरों की जहां मृत्यु हुई होती है, वे श्राद्ध के समय तर्पण लेने वहीं आते हैं. नई जगह चले जाने पर पितरों को तकलीफ होती है. श्राद्ध में कौओं का महत्व मान्यता है कि श्राद्ध ग्रहण करने के लिए हमारे पितर कौवे का रूप धारण कर नियत तिथि पर हमारे घर आते हैं. अगर उन्हें श्राद्ध नहीं मिलता, तो वे रुष्ट हो जाते हैं. इस कारण श्राद्ध का प्रथम अंश कौओं को दिया जाता है. क्या आप जानते हैं कि डेड बॉडी जाने के बाद पानी क्यों डालते हैं? जब भी किसी की मृत्यु के बाद बॉडी को श्मशान ले जाया जाता है, तो घर को पानी से धोये जाने की परम्परा है. यही नहीं, लोग दाह-संस्कार के बाद वापस आकर नहाते हैं. कहते हैं कि नहाने से मृतक की आत्मा को शांति मिलती है. इसके पीछे एक गहरा लॉजिक है. पहले स्मॉल पॉक्स और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के लिए वैक्सिनेशन की सुविधा नहीं थी. पानी डालने या नहाने से डेड बॉडी से निकले कीटाणु नष्ट हो जाते हैं.

....एक सामान्य गृहस्थ व्यक्ति कैसे करें मां का पूजन..... सर्वप्रथम पवित्र होकर आशन पर बैठें पति पत्नि हैं तो पत्नि अपने पति के दाहिने बैठे अपने ऊपर कुश से या आम के पत्ते से जल छिडकें, ऊं नारायणाय नम:,केशवाय नम:,माधवाय नम:कह कर तीन बार आचमन करें, ह्रषीकेशाय नम:कहकर हांथ धुलें दुपटटे से पति के गमझे से एक सुपारी चावल हल्दी, सिक्का रखकर गांठ बांध लें ,आशन के नीचे जल छोंडे, अक्षत पुष्प लेकर गौरी गणेश का ध्यान करके पुष्प चढा दें, सर्वप्रथम गौरी गणेश का पूजन करें ,फिर कलश का पूजन फिर नवग्रह यदि स्थापित हों या जो देवी देवता पूजन कक्षमें हों उनका पूजन करें ,कोई भी वस्तु सर्वप्रथम गौरी गणेश में अर्पित करके फिर सभी स्थापित देवी देवताओं का एक साथ पूजन कर सकतें हैं ,फिर मां जगदम्बा का पूजन करें पाठ जप आदि करें ..पूजा किस विधान से करें?........ पहले ध्यान करके चावल फूल चढायें, फिर जल,वस्त्र ,आचमन के लिये जल, जनेऊ फिर आचमन का जल, चन्दन, रोली आदि, अक्षत ,फूलमाला, सिन्दूर, इत्र ,आदि सामग्री ,धूप, दीपक, प्रसाद, जल, फल, आचमन, पान सुपारी लौंग इलायची, दक्षिणा,पाठ, जप आदि, फिर आरती ,क्षमा प्रार्थना करें, अपने स्थान पर तीन बार घूम जायें परिक्रमा के लिये ,आशन के नीचे जल छोडकर ऊं इन्द्राय नम:कहकर तीन बार मस्तक में लगाकर उठें , आचार्य... संजय कुमार मिश्र, इलाहाबाद, ☎9452014657

कथा के अनुसार लंका का राजा रावण एक तपस्वी, महायोद्धा, मायावी था । वह  भगवान शिव का परम भक्त भी था । एक बार उसने तपस्या करके ब्रहमा जी से वरदान प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु मानव व वानरों के अतिरिक्त किसी के हाथों न हो। वरदान पाकर वह अहंकारी हो गया अवसर पाकर उसने शनि लोक पर चढ़़ाई कर दी और शनिदेव को महाकाल सहित बंदी बना लिया । उसने दोनों को अपने कारावास में उलटा लटका दिया। वे दोनों अश्रु्धारा बहाते हुए अपने प्रभु शिव का स्मरण करने लगे तब भगवान शिव अपने भक्तों की करुण पुकार सुनकर प्रकट हुए और दोनों को आश्वस्त किया कि वे शीघ्र ही हनुमान के रुप में उनका उद्धार करने आएगें । इ्धर जब रावण का अत्याचार बढ़ने लगा तो भगवान विष्णु ने उसका संहार करने के लिए राम के रुप में और लक्ष्मी ने पृथ्वीपुत्री सीता के रुप में अवतार लिया । कालांतर में जब राम ने अपने पिता की आज्ञा का पालन करने हेतु वनवास लिया तो उनके साथ पृथ्वीपुत्री सीता व अनुज लक्ष्मण वन में रहने लगे । एक दिन रावण की बहन शूर्पनखा वहां आई और अपनी राक्षसी माया फैला कर राम- लक्ष्मण को यु़द्ध के लिए प्रेरित किया ।  यु़द्ध में रावण के खर, दुषण व त्रिशिरा जैसे शुरमा मारे गए। बदले की भावना से रावण ने सीता का छल से अपहरण कर लिया और लंका में अशोक वाटिका में छुपाकर रख दिया। उन्हीं दिनों राम- लक्ष्मण की भेंट रुद्रावतार हनुमान से हुई और फिर सीता की खोज शुरु हुई। हनुमान सीता की खोज के लिए समुद्र पार करके लंका में प्रवेश किया और अशोक वाटिका में छुपाकर रखी सीता को खोज निकाला । सीता  से मिलने के बाद हनुमान ने अशोक वाटिका फल खाने लगे और विनाश मचा दिया । हनुमान को रोकने के लिए रावण ने अपने पुत्र अक्षय कुमार को भेजा । लेकिन हनुमान ने अक्षय कुमार को मार डाला । अंत में मेघनाद ने हनुमान को ब्रह्रापाश में जकड़कर रावण के समक्ष उपसिथत कर दिया और रावण ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी । हनुमान जी ने अपनी पूंछ से लंका का वि्ध्वंस कर दिया । लेकिन हनुमान जी ने देखा लंका जलने पर भी श्याम वर्ण नहीं हुई । तभी उनकी दॄष्टि रावण के कारावास में उलटे लटके शनिदेव पर पड़ी । तब शनिदेव ने अपनी व्यथा हनुमान जी को सुनाई और रावण ने उनकी शक्ति को भी कीलित कर दिया है।  हनुमान जी ने शनिदेव को मुक्त कर दिया  और उनकी शकित का भी उत्कीलन कर दिया ।  फिर तो हनुमान जी के प्रताप व शनिदेव की दॄष्टि पड़ने पर लंका जल कर राख हो गई। इसके बाद राम- रावण यु़द्ध में रावण का अपने वंश सहित विनाश हो गया । बाद में हनुमान जी ने महाकाल को भी मुक्त करा दिया। तब शनिदेव हनुमान जी से बोले , “हे महावीर ! मैं आपका सदा ऋणी रहुंगा।” तब हनुमान जी ने शनिदेव दिव्य दॄष्टि प्रदान कर अपने रुद्र रुप के दर्शन कराये। उस समय शनिदेव ने हनुमान जी के चरण पकड़ लिए और प्रेम के अश्रु बहाने लगे। शनिदेव ने हनुमान जी से कहा कि प्रभु मैं आपके भक्तों को कभी भी पीडि़त नहीं करुंगा । जो मनुष्य इस कथा को पढ़ेगा या श्रवण करेगा, मैं सदा उसकी रक्षा करूँगा ।। सुनील झा के लेख

जय माता की आज का राशिफल 20/09/2016. मेष (Aries): आज का दिन आपके लिए शुभ हैं। परिवारजन, स्नेहीजन तथा मित्रों के साथ स्नेह-मिलन समारोह में उपस्थित रह सकते हैं। नए कार्य का प्रारंभ करने के लिए उत्साह रहेगा, लेकिन अति उत्साह से हानि न हो इसका ध्यान रखिएगा। शारीरिक तथा मानसिक स्वस्थता का भी ध्यान रखिएगा। आज धनप्राप्ति का योग हैं। वृषभ (Taurus): शारीरिक तथा मानसिक रूप से आज आप व्यग्र रहेंगे। चिंताओं के कारण मानसिक भार रह सकता है, जो कि आपको मानसिक रूप से अस्वस्थ रख सकता है। परिवारजनों के साथ भी मनमुटाव होने का प्रसंग बन सकता है, जिससे घर का वातावरण बिगड़ सकता है। परिश्रम की अपेक्षा सफलता की प्राप्ति कम होने से आर्थिक संकट की चिंता रहेगी। बिना सोचे समझे निर्णय न लेने की सलाह देते हैं। मिथुन (Gemini): व्यापारीवर्ग के लिए आज का दिन शुभफलदायी है। व्यापार में तथा आय में वृद्धि होगी। मित्रों से लाभ होगा। नौकरी में उच्चाधिकारियों की कृपादृष्टि से आपके लिए पदोन्नति भी संभव है। विवाह ईच्छुक व्यक्तियों को जीवनसाथी मिलने का योग है। परिवार में पत्नी और पुत्र से अच्छे समाचार मिलेंगे। कर्क (Cancer): आज का दिन आपके लिए शुभ है। व्यापारियों पर अधिकारी खुश रहेंगे। नौकरी करने वालों के लिए पदोन्नति का योग है। परिवार में मैत्रीपूर्ण वातावरण बना रहेगा। नई साज-सजावट से घर की शोभा में अभिवृद्धि करेंगे। माता से भी लाभ मिलेगा। शारीरिक रूप से स्वस्थ और मानसिक रूप से प्रसन्न रहेंगे। धन और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। सिंह (Leo): आज का दिन आलस्य तथा थकान में बीतेगा। उग्र स्वभाव में मानसिक रूप से व्यग्रता रहेगी। पेट से सम्बंधित दर्द से परेशानी होगी। सफलता प्राप्त करने के लिए परिश्रम अधिक करना पड़े‍गा। संकटजनक विचार, वर्तन और आयोजन से दूर रहिएगा। धार्मिक यात्रा या प्रवास की संभावना है। क्रोध पर संयम बरतिएगा। कन्या (Virgo): खान-पान में विशेषरूप से ध्यान रखने का सलाह देते हैं। आवेश और क्रोध की मात्रा अधिक रहेगी, इसलिए स्वास्थ्य के प्रति ध्यान दीजिएगा। साथ में वाणी पर भी संयम बरतिएगा। अनैतिक कृत्यों से दूर रहिएगा। सरकार-विरोधी प्रवृत्तियों के कारण परेशानी खड़ी न हो इसका ध्यान रखिएगा। खर्च की मात्रा बढ़ेगी। तुला (Libra): आज सांसारिक जीवन का आनंद विशेषरूप से मना सकते हैं। परिवारजनों के साथ सामाजिक हेतु से बाहर जा सकते हैं। छोटे से प्रवास का आयोजन होगा। व्यापारीगण व्यापार में वृद्धि कर सकते हैं। सामाजिक क्षेत्र में आपको सफलता और यश कीर्ति मिलने का भी योग है। आकस्मिक धनलाभ की संभावना है। वृश्चिक (Scorpio): आज का दिन सब तरह से सुखमय बीतेगा। परिवारजनों के साथ आनंदपूर्वक समय बिताएंगे। शारीरिक स्वस्थता तथा मानसिक प्रफुल्लिता का अनुभव होगा। नौकरी करने वालों को साथी-कर्मचारियों का सहयोग मिलेगा। मायके से आपको अच्छे समाचार मिलेंगे। धनलाभ होगा। अधूरे कार्य आज पूरे होंगे। धनु (Sagittarius): आज आप को क्रोध पर संयम बरतने के लिए कहते हैं। पेट सम्बंधित बीमारियों की समस्या रहेगी। किसी भी कार्य में सफलता न मिलने से निराशा आने की संभावना है। साहित्य या अन्य किसी सृजनात्मक कला के प्रति रुचि रहेगी। संतानों के प्रति चिंता रहने से मन में व्यग्रता रहेगी। प्रवास को संभव हो तो टालिएगा। मकर (Capricorn): आज का दिन प्रतिकूलताओं से भरा रहेगा। आज आप में स्फूर्ति का अभाव रहेगा। परिवारजनों के साथ झगड़े-टंटे के अथवा तो निरर्थक चर्चा के प्रसंग बनेंगे। इससे आप का मन व्यथित रह सकता है। अपकीर्ति, अपयश मिलने की संभावना है। निद्रा संपूर्ण न मिलने से आपका स्वास्थ्य बिगड़ेगा। कुंभ (Acquarius): आज आप के मन से चिंता का भार हल्का हो जाएगा और आप मानसिक रूप से प्रफुल्लिता का अनुभव करेंगे। साथ में शारीरिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। पारिवारिक वातावरण आनंदित रहेगा। विशेष कर भाई-बहनों के साथ संबंधों में मधुरता का अनुभव करेंगे। छोटे से प्रवास की भी संभावना है। मीन (Pisces): नकारात्मक विचारों को अपने मन से हटाइएगा। क्रोध और वाणी पर संयम बरतना होगा। किसी से वाद-विवाद या झगड़े-टंटे को संभव हो तो टाल दीजिएगा। खान-पान पर संयम रखिएगा। शारीरिक स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। ✍आचार्य. संजय कुमार मिश्र, इलाहाबाद ☎9452014657

चंद्र ग्रहण बचें चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभाव से, आज लग रहा है 2016 का अंतिम चंद्र ग्रहण -------------------------------------------------------------------------------------------------- खगोलीय दृष्टि से चंद्र ग्रहण के समय पृथ्वी अपनी धूरी पर भ्रमण करते हुए चंद्रमा व सूर्य के बीच आ जाती है। ऐसी स्थिति में चंद्रमा का पूरा या आधा भाग ढ़क जाता है। इसी को चंद्र ग्रहण कहते हैं। भारतीय राजधानी नई दिल्ली के रेखांश-अक्षांश अनुसार भाद्रपद, पूर्णिमा, शनिवार दिनांक 17.09.16 को मीन राशि और पूर्वाभद्रपद नक्षत्र में चंद्रग्रहण पड़ रहा है। ग्रहण की उपच्छाया से पहला स्पर्श शुक्रवार दिनांक 16.09.16 को रात्री 10 बजकर 27 मिनट और 22 सेकंड पर होगा। चंद्रग्रहण का परमग्रास शनिवार दिनांक 17.09.16 रात 12 बजकर 25 मिनट व 48 सेकंड पर होगा। चंद्रग्रहण का उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श रात 02 बजकर 24 मिनट व 15 सेकंड पर होगा। इसकी अवधि 03 घण्टे 56 मिनट 52 सैकण्ड रहेगी। इस ग्रहण की उपच्छाया आंखों से नहीं दिखाई देगी। अतः भारत में चंद्रग्रहण की छाया व प्रच्छाया मान्य नहीं है अर्थात इसका कोई धार्मिक अस्तित्व नहीं पड़ेगा। यह चंद्रग्रहण आंशिक रूप से यूरोप, दक्ष‍िण अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका में दिखाई देगा। सनातन धर्म में चंद्रग्रहण को अशुभ माना जाता है। सनातन धर्म की मान्यतानुसार चंद्र ग्रहण के समय खान-पान वर्जित माना जाता है। मत्स्य पुराण, भविष्य पुराण व नारद पुराण में चंद्रग्रहण के समय वर्जित बातों का उल्लेख है। चंद्रग्रहण कुंवारों के लिए अशुभ माना जाता है क्योंकि चंद्रमा का संबंध शीतलता व सुंदरता से होता है ग्रहण काल में चंद्रमा उग्र हो जाता है जिसका बुरा असर कुवांरे लड़के-लड़कियों पर पड़ता है अतः श्रापित होने पर जो भी कुंवारा लड़का या लड़की उसे देखता है तो उसकी शादी या तो रूक जाती है या बहुत मुश्किलों से तय होती है। मत्स्य पुराण के अनुसार ग्रहण काल में मंत्र सिद्धि व आराधना का विशिष्ट स्थान है। मान्यतानुसार गर्भवती महिला को ग्रहण के समय बाहर नही निकलना चाहिए । इस काल में राहु व केतु का दुष्प्रभाव बढने से गर्भ मेंं पल रहे बच्चें को कई तरह की समस्याएं हो सकती है व गर्भ मेंं पल रहे बच्चें पर बुरा प्रभाव पड़ता है । मान्यतानुसार इस काल में तेल लगाना, खानपान, बालों मेंं कंघी, ब्रश आदि कार्य वर्जित है । Dr. Meenaakshi Sharma www.astromeenaakshi.com

चन्द्र ग्रहण पूरे भारत मे दृश्य होगा ! 16 सितंबर 2016 भाद्रपद पूर्णिमा को पूर्ण चन्द्रग्रहण है, यह सारे भारतवर्ष में दिखाई देगा ! ग्रहण प्रारंभ होने का समय : सुक्रवार रात्री 10:24 ग्रहण समाप्त होने का समय : शनिवार रात्री 02:23 ग्रहण पर्वकाल : 04 घंटे नोट : चन्द्रग्रहण का सूतक 16 सितंबर को प्रात: 11 बजे से प्रारंभ हो जायेगा !

पितृ पक्ष श्राद्ध 2016 हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद श्राद्ध करना बेहद जरूरी माना जाता है। मान्यतानुसार अगर किसी मनुष्य का विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण ना किया जाए तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती और वह भूत के रूप में इस संसार में ही रह जाता है। पितृ पक्ष का महत्त्व - ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पितरों यानि पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहिए। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार भी पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली दोषों में से एक माना जाता है। पितरों की शांति के लिए हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक के काल को पितृ पक्ष श्राद्ध होते हैं। मान्यता है कि इस दौरान कुछ समय के लिए यमराज पितरों को आजाद कर देते हैं ताकि वह अपने परिजनों से श्राद्ध ग्रहण कर सकें। पितृ पक्ष श्राद्ध 2016 - वर्ष 2016 में पितृ पक्ष श्राद्ध की तिथियां निम्न हैं: तारीख दिन श्राद्ध तिथियाँ 16 सितंबर शुक्रवार पूर्णिमा श्राद्ध 17 सितंबर शनिवार प्रतिपदा 18 सितंबर रविवार द्वितीया तिथि 19 सितंबर सोमवार तृतीया - चतुर्थी (एक साथ) 20 सितंबर मंगलवार पंचमी तिथि 21 सितंबर बुधवार षष्ठी तिथि 22 सितंबर गुरुवार सप्तमी तिथि 23 सितंबर शुक्रवार अष्टमी तिथि 24 सितंबर शनिवार नवमी तिथि 25 सितंबर रविवार दशमी तिथि 26 सितंबर सोमवार एकादशी तिथि 27 सितंबर मंगलवार द्वादशी तिथि 28 सितंबर बुधवार त्रयोदशी तिथि 29 सितंबर गुरुवार अमावस्या व सर्वपितृ श्राद्ध श्राद्ध क्या है? ब्रह्म पुराण के अनुसार जो भी वस्तु उचित काल या स्थान पर पितरों के नाम उचित विधि द्वारा ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक दिया जाए वह श्राद्ध कहलाता है। श्राद्ध के माध्यम से पितरों को तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है। पिण्ड रूप में पितरों को दिया गया भोजन श्राद्ध का अहम हिस्सा होता है। क्यों जरूरी है श्राद्ध देना? मान्यता है कि अगर पितर रुष्ट हो जाए तो मनुष्य को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पितरों की अशांति के कारण धन हानि और संतान पक्ष से समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। संतान-हीनता के मामलों में ज्योतिषी पितृ दोष को अवश्य देखते हैं। ऐसे लोगों को पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। क्या दिया जाता है श्राद्ध में? श्राद्ध में तिल, चावल, जौ आदि को अधिक महत्त्व दिया जाता है। साथ ही पुराणों में इस बात का भी जिक्र है कि श्राद्ध का अधिकार केवल योग्य ब्राह्मणों को है। श्राद्ध में तिल और कुशा का सर्वाधिक महत्त्व होता है। श्राद्ध में पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोज्य पदार्थ को पिंडी रूप में अर्पित करना चाहिए। श्राद्ध का अधिकार पुत्र, भाई, पौत्र, प्रपौत्र समेत महिलाओं को भी होता है। श्राद्ध में कौओं का महत्त्व कौए को पितरों का रूप माना जाता है। मान्यता है कि श्राद्ध ग्रहण करने के लिए हमारे पितर कौए का रूप धारण कर नियत तिथि पर दोपहर के समय हमारे घर आते हैं। अगर उन्हें श्राद्ध नहीं मिलता तो वह रुष्ट हो जाते हैं। इस कारण श्राद्ध का प्रथम अंश कौओं को दिया जाता है। किस तारीख में करना चाहिए श्राद्ध? सरल शब्दों में समझा जाए तो श्राद्ध दिवंगत परिजनों को उनकी मृत्यु की तिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया जाना है। अगर किसी परिजन की मृत्यु प्रतिपदा को हुई हो तो उनका श्राद्ध प्रतिपदा के दिन ही किया जाता है। इसी प्रकार अन्य दिनों में भी ऐसा ही किया जाता है। इस विषय में कुछ विशेष मान्यता भी है जो निम्न हैं: * पिता का श्राद्ध अष्टमी के दिन और माता का नवमी के दिन किया जाता है। * जिन परिजनों की अकाल मृत्यु हुई जो यानि किसी दुर्घटना या आत्महत्या के कारण हुई हो उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है। * साधु और संन्यासियों का श्राद्ध द्वाद्वशी के दिन किया जाता है। * जिन पितरों के मरने की तिथि याद नहीं है, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जाता है। इस दिन को सर्व पितृ श्राद्ध कहा जाता है।..

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