Dharm

Dharm (94)

1 सितंबर 2016 गुरुवार को सूर्य ग्रहण लग रहा है। इसी दिन भाद्रपद माह की अमावस्या भी है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। दरअसल, ऐसी मान्यता है कि ग्रहण का सूतक वहीं माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर ग्रहण शुरू होगा और शाम 4 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगा। यह ग्रहण अफ्रीका, हिन्द महासागर, ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तटवर्ती इलाके और अन्टार्कटिका में दिखाई देगा। इस सूर्य ग्रहण का 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है- 1. मेष- कुछ लोगों को सामाजिक अपयश का सामना करना पड़ सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। काम-धंधे में अड़चन आ सकती है। 2. वृष- कार्यो में सफलता प्राप्त होगी। परिवार में सुखद वातावरण बना रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत हो सकती है। राय-मशविरा लेकर ही कार्य करें। 3. मिथुन- कुछ लोगों को आर्थिक लाभ हो सकता है। रोजमर्रा की वस्तुओं की खरीददारी कर सकते हैं। सोच-विचार के बाद ही कोई निर्णय लें। 4. कर्क- नये कार्यो में निवेश से बचें अन्यथा हानि हो सकती है। जीवन के प्रति आशावादी विचार रखने की जरूरत है। घर-गृहस्थी में खर्च बढ़ेगा। 5. सिंह- कुछ लोगों को शारीरिक व मानसिक पीड़ा हो सकती है। भाईयों से मनमुटाव हो सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। 6. कन्या- खर्च अधिक हो सकता है जिससे मानसिक परेशानी बढ़ सकती है। दोस्तों पर अधिक खर्च से बचें। घरेलू मामलों में स्थिति सामान्य रहेगी। 7. तुला- अवसरों को पहचानकर आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं। नए कार्यो को शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। बेवजह के झगड़ों से दूर रहें। 8. वृश्चिक- अच्छी तरह से विचार करने के बाद ही कहीं पैसा लगाएं अन्यथा नुकसान हो सकता है। कुछ लोग अपनी आजीविका को लेकर चिंतित हो सकते हैं। 9. धनु- घर-परिवार को लेकर चिंता बनी रह सकती है। जीवनसाथी का स्वास्थ्य भी परेशानी दे सकता है। बेवजह किसी पर शक करने से अपना ही मन परेशान होगा। 10. मकर- कुछ लोगों को भौतिक सुख की प्राप्ति होगी। परिवार में आपसी सहयोग से ही विकास होगा। आर्थिक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। 11. कुंभ- दाम्प्त्य जीवन में तालेमल बनाने से बड़ी से बड़ी मुसीबत भी टल सकती है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतना ठीक नहीं है। 12. मीन- खान-पान में सावधानी बरतें। कमाई और खर्च में समानता की स्थिति बनी रहेगी। क्रोध पर नियंत्रण रखें अन्यथा टकराव हो सकता है।

!!*******!! जन्माष्टमी पर्व 2016 !!*******!! जन्माष्टमी यानि भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिन का त्यौहार ” 25 अगस्त 2016 ” गुरुवार को मनाया जायेगा। इस वर्ष भगवान श्री कृष्ण का “5243 वां” जन्म दिन है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथी के दिन रोहिणी नक्षत्र में भगवान विष्णु के 8वें अवतार श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। इसी ख़ुशी में हर साल जन्माष्टमी हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। जन्मा ्टमी को श्रीकृष्ण जयंती और गोकुल अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। जन्माष्टमी का त्यौहार कैसे मनाते है *************** जन्माष्टमी के दिन मंदिरों को फूल , लाईटिंग आदि से सजाया जाता है। मंदिर में कई प्रकार की झांकिया बनाई जाती है। लोग इस दिन व्रत और उपवास करके बड़ी बेसब्री से उस क्षण का इंतजार करते है जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था यानि मध्य रात्रि रात के बारह बजे। इस इंतजार में लोग भजन गाते है , श्री कृष्ण की लीला आदि सुनी व सुनाई जाती है , श्रीकृष्ण को प्रिय रास आदि नृत्य किये जाते है । जैसे ही बारह बजते है,लोग खुशियाँ मनाते है। “हाथी घोड़ा पालकी , जय कन्हैया लाल की” , “नन्द के घर आनंद भयो , जय कन्हैया लाल की ” , ” बृज में आनंद भयो , जय यशोदा लाल की ” जैसे शब्दों से घर व मंदिर गूंजने लगते है। लोग एक दूसरे को कृष्ण जन्म की बधाइयाँ देते है। जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण की पूजा ************** श्री कृष्ण के अवतरित होने के बाद भगवान का अभिषेक किया जाता है। मंदिरों और घरों में भक्ति भाव के पूजा की जाती है। पूजा निशित काल में किया जाना श्रेष्ठ माना जाता है। इस वर्ष निशीत का समय ” 11 :58 से 12 :44 ” तक है। इस समय में पूजा कर लेनी चाहिए। पूजा के लिए श्रीकृष्ण को पंचामृत आदि से स्नान कराया जाता है , नए वस्त्र पहनाए जाते है। सुगंध , पुष्प , फल , मिष्ठान आदि अर्पित किये जाते है। श्रीकृष्ण को प्रिय माखन मिश्री ,पंजीरी , फल आदि का भोग लगाया जाता है। दीपक जला कर आरती की जाती है। मंदिरों में प्रसाद आदि वितरित किये जाते है। नंदोत्सव ********** जन्माष्टमी के दूसरे दिन नंदोत्सव मनाया जाता है जिसमे छोटे बच्चों की प्रिय वस्तुएं उछाल उछाल कर खुशियां मनाई जाती है। जिसमे टॉफियां बिस्किट , खिलोने , गुब्बारे , फूल , भगवान की पोशाक , बांसुरी , मालाएं , मोर पंख , बर्तन , फल , सिक्के आदि उछालते है। इन वस्तुओं को भक्त लोग श्रद्धा से प्रसाद के रूप में पाकर बड़े प्रसन्न होते है। इस दिन भजन आदि गाए जाते है। महिलाएं नृत्य आदि करके हर्ष का वातावरण बना देती है। एक दूसरे को बधाइयाँ दी जाती है। इसके साथ ही प्रसाद वितरित किया जाता है। जन्माष्टमी का व्रत खोलने का तरीका ********** जन्माष्टमी के दूसरे दिन सूर्योदय के बाद ही व्रत खोला जाता है। इस वर्ष यानि 2016 में व्रत खोलने ( पारणा ) समय 26 अगस्त सुबह 10:52 के बाद। क्योंकि अष्टमी तिथि तो सूर्योदय के पहले समाप्त हो जाएगी लेकिन रोहिणी नक्षत्र 10:52 तक रहेगा। कुछ लोग जब तक अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों समाप्त नहीं होते तब तक व्रत नहीं खोलते। कुछ लोग दोनों में से किसी एक के समाप्त होने पर व्रत खोल लेते है।

भगवान का वास कहाँ है – एक बार भगवान भी बड़ी दुविधा में फस गये क्योंकि लोगो की बढती आस्था और साधना वृति से वो प्रसन्न तो थे लेकिन फिर भी उन्हें उच्च व्यावहरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था क्योंकि जब भी कोई दुखी होता या मुश्किल में होता वो भगवान के पास भागा भागा आता और उन्हें अपनी परेशानिया दूर करने को कहता | उनके हर समय कुछ न कुछ मांगने की समस्या से दुखी और परेशान होकर उन्होंने इस समस्या के निराकरण के लिए सभी देवताओं की बैठक बुलाई और उनसे इस सम्बन्ध में अपनी राय मांगी | भगवान बोले कि ” मैं मनुष्य की रचना करके कष्ट में पड़ गया हूँ अब न तो मैं कंही शांति पूर्वक रह सकता हूँ और न ही कंही बैठकर ध्यान लगा सकता हूँ | आप लोग कोई ऐसा स्थान बताएं जहाँ मनुष्य कभी न पहुँच पायें |भगवान के विचारों का आदर करते करते देवताओं ने अपने अपने विचार प्रकट किये | गणेश जी बोले आप हिमालय की चोटी पर चले जाएँ |तो भगवांन ने कहा वह स्थान तो मनुष्य की पहुँच में है | उसे वंहा पहुँचने में अधिक समय नहीं लगेगा | इंद्र ने सलाह दी कि किसी महासागर में चले जाएँ | इस पर वरुण देव ने ये सलाह दी कि आप अन्तरिक्ष में चले जाएँ | भगवान ने कहा एक दिन मनुष्य वंहा भी पहुँच जायेगा | भगवान निराश होने लगे अंत: में सूर्यदेव ने कहा भगवान् आप एक काम करें आप मनुष्य के हृदय में बैठ जाएँ इस से मनुष्य हमेशा आपको बाहर ही तलाश करता रहेगा पर यहाँ अपने हृदय में कभी न तलाश करेगा और कुछ ही योग्य लोग होंगे जो आप तक पहुँच पाएंगे इस से आपको कोई परेशानी भी नहीं होगी | सूर्यदेव की बात भगवान को पसंद आई और भगवान उसी दिन मनुष्य के हृदय में बैठ गये उस दिन के बाद से मनुष्य हर बाहरी जगह में भगवान को तलाश कर रहा है लेकिन अपने हृदय में बैठे भगवान को नहीं देख पा रहा है जो उसके भीतर है |

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