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पितृ पक्ष श्राद्ध 2016 हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद श्राद्ध करना बेहद जरूरी माना जाता है। मान्यतानुसार अगर किसी मनुष्य का विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण ना किया जाए तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती और वह भूत के रूप में इस संसार में ही रह जाता है। पितृ पक्ष का महत्त्व - ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पितरों यानि पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहिए। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार भी पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली दोषों में से एक माना जाता है। पितरों की शांति के लिए हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक के काल को पितृ पक्ष श्राद्ध होते हैं। मान्यता है कि इस दौरान कुछ समय के लिए यमराज पितरों को आजाद कर देते हैं ताकि वह अपने परिजनों से श्राद्ध ग्रहण कर सकें। पितृ पक्ष श्राद्ध 2016 - वर्ष 2016 में पितृ पक्ष श्राद्ध की तिथियां निम्न हैं: तारीख दिन श्राद्ध तिथियाँ 16 सितंबर शुक्रवार पूर्णिमा श्राद्ध 17 सितंबर शनिवार प्रतिपदा 18 सितंबर रविवार द्वितीया तिथि 19 सितंबर सोमवार तृतीया - चतुर्थी (एक साथ) 20 सितंबर मंगलवार पंचमी तिथि 21 सितंबर बुधवार षष्ठी तिथि 22 सितंबर गुरुवार सप्तमी तिथि 23 सितंबर शुक्रवार अष्टमी तिथि 24 सितंबर शनिवार नवमी तिथि 25 सितंबर रविवार दशमी तिथि 26 सितंबर सोमवार एकादशी तिथि 27 सितंबर मंगलवार द्वादशी तिथि 28 सितंबर बुधवार त्रयोदशी तिथि 29 सितंबर गुरुवार अमावस्या व सर्वपितृ श्राद्ध श्राद्ध क्या है? ब्रह्म पुराण के अनुसार जो भी वस्तु उचित काल या स्थान पर पितरों के नाम उचित विधि द्वारा ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक दिया जाए वह श्राद्ध कहलाता है। श्राद्ध के माध्यम से पितरों को तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है। पिण्ड रूप में पितरों को दिया गया भोजन श्राद्ध का अहम हिस्सा होता है। क्यों जरूरी है श्राद्ध देना? मान्यता है कि अगर पितर रुष्ट हो जाए तो मनुष्य को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पितरों की अशांति के कारण धन हानि और संतान पक्ष से समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। संतान-हीनता के मामलों में ज्योतिषी पितृ दोष को अवश्य देखते हैं। ऐसे लोगों को पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। क्या दिया जाता है श्राद्ध में? श्राद्ध में तिल, चावल, जौ आदि को अधिक महत्त्व दिया जाता है। साथ ही पुराणों में इस बात का भी जिक्र है कि श्राद्ध का अधिकार केवल योग्य ब्राह्मणों को है। श्राद्ध में तिल और कुशा का सर्वाधिक महत्त्व होता है। श्राद्ध में पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोज्य पदार्थ को पिंडी रूप में अर्पित करना चाहिए। श्राद्ध का अधिकार पुत्र, भाई, पौत्र, प्रपौत्र समेत महिलाओं को भी होता है। श्राद्ध में कौओं का महत्त्व कौए को पितरों का रूप माना जाता है। मान्यता है कि श्राद्ध ग्रहण करने के लिए हमारे पितर कौए का रूप धारण कर नियत तिथि पर दोपहर के समय हमारे घर आते हैं। अगर उन्हें श्राद्ध नहीं मिलता तो वह रुष्ट हो जाते हैं। इस कारण श्राद्ध का प्रथम अंश कौओं को दिया जाता है। किस तारीख में करना चाहिए श्राद्ध? सरल शब्दों में समझा जाए तो श्राद्ध दिवंगत परिजनों को उनकी मृत्यु की तिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया जाना है। अगर किसी परिजन की मृत्यु प्रतिपदा को हुई हो तो उनका श्राद्ध प्रतिपदा के दिन ही किया जाता है। इसी प्रकार अन्य दिनों में भी ऐसा ही किया जाता है। इस विषय में कुछ विशेष मान्यता भी है जो निम्न हैं: * पिता का श्राद्ध अष्टमी के दिन और माता का नवमी के दिन किया जाता है। * जिन परिजनों की अकाल मृत्यु हुई जो यानि किसी दुर्घटना या आत्महत्या के कारण हुई हो उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है। * साधु और संन्यासियों का श्राद्ध द्वाद्वशी के दिन किया जाता है। * जिन पितरों के मरने की तिथि याद नहीं है, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जाता है। इस दिन को सर्व पितृ श्राद्ध कहा जाता है।..

=========================== एक बार देवर्षि नारद ने भगवान विष्णु से पूछा, भगवान आप का सबसे बड़ा भक्त कौन है। भगवान विष्णु नारद के मन की बात समझ गए। उन्होंने कहां, अमुक गांव का अमुक किसान हमारा सबसे प्रिय भक्त है। भगवान विष्णु का उत्तर सुन कर नारद जी को निराशा हुई। वह बोले, भगवान आप का प्रिय भक्त तो मैं भी हूं फिर सबसे प्रिय क्यों नहीं। भगवान विष्णु ने कहा, तुम उस किसान के यहां जाकर उसकी दिन भर की दिनचर्या देख कर मुझे आकर बताओ फिर मैं बताऊंगा। नारद उस विष्णु भक्त किसान के घर पहुंचे। उन्होंने देखा कि किसान सुबह उठ कर कुछ देर भगवान विष्णु का स्मरण किया फिर रूखी सूखी रोटी खा कर हल बैल लेकर खेत जोतने चला गया। शाम को लौटा तो बैलों को चारा पानी दिया। उसके बाद थोड़ी देर के लिए भगवान का नाम लिया और रात को खाना खाकर सो गया। एक दिन उस किसान के घर रह कर नारद जी भगवान विष्णु के पास आए और उसकी आंखों देखी दिनचर्या के बारे में बताया। अंत में नारद ने कहा, प्रभु उसके पास तो आप का नाम लेने का समय भी नहीं है फिर वह आप का सबसे प्रिय भक्त कैसे बन गया। मैं तो दिन रात आप का नाम जपने के सिवाय कोई काम करता ही नहीं फिर भला वह किसान कैसे आप का सबसे प्रिय भक्त बन गया। भगवान विष्णु उस बात को टालते हुए नारद को एक लबालब भरा अमृत कलश देते हुए कहा, देवर्षि तुम इस कलश को लेकर त्रैलोक्य की परिक्रमा करो। लेकिन यह ध्यान रखना कि इसकी एक बूंद भी छलकने न पाए। यदि एक बूंद भी नीचे गिरी तो तुम्हारा अब तक का किया गया सारा पुण्य खत्म हो जाएगा। नारद अमृत कलश लेकर तीनों लोको की यात्रा पर निकल गए और यात्रा पूरी करके वह भगवान विष्णु को कलश देते हुए कहा, प्रभु कलश से एक बूंद भी अमृत नहीं छलकने पाई। भगवान विष्णु ने कहा- नारद, परिक्रमा के दौरान तुमने कितनी बार मेरा नाम स्मरण किया था। नारद ने कहा, प्रभु परिक्रमा के दौरान तो मेरा ध्यान इस कलश पर केंद्रित था इसलिए एक बार भी आप का स्मरण नहीं कर पाया। भगवान विष्णु ने हंस कर कहा, जब तुम परिक्रमा के दौरान एक बार भी अपना ध्यान कलश से हटा कर मेरा स्मरण नहीं कर सके जब कि वह किसान अपने सभी काम करते हुए भी कम से कम दो बार नियमित रूप से मेरा स्मरण करना नहीं भूलता तो वह सबसे बड़ा भक्त हुआ या आप। सबसे प्रिय भक्त वो होता है जो अपना कर्म करते हुए प्रेम से मेरा श्रद्धापूर्वक स्मरण भी करता है। नारद जी को सबसे प्रिय भक्त होने का अहंकार खत्म हो गया ...!!! =========================== जय श्री हरी सुनील झा " मैथिल "

रामायण और महाभारत की कथाओँ को मिथ कहने वाले लोगों को अब अपने शब्द वापस लेने होंगे। क्यों कि अमेरिकी वैज्ञानिकों ने उस स्थान को खोज निकाला का है जिसका उल्लेख रामायण में पाताल लोक के रूप में है। कहा जाता है कि हनुमानजी ने यहीं से भगवान राम व लक्ष्मण को पातालपुरी के राजा अहिरावण के चंगुल से मुक्त कराया था।

अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा - "मिथ नहीं सत्य हैं राम-रावण और हनुमान"
अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा – “मिथ नहीं सत्य हैं राम-रावण और हनुमान”

ये स्थान मध्य अमेरिकी महाद्वीप में पूर्वोत्तर होंडुरास के जंगलों के नीचे दफन है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने लाइडर तकनीकी से इस स्थान का 3-डी नक्शा तैयार किया है, जिसमें जमीन की गहराइयों में गदा जैसा हथियार लिये वानर देवता की मूर्ति होने की पुष्टि हुई है।

अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा - "मिथ नहीं सत्य हैं राम-रावण और हनुमान"
अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा – “मिथ नहीं सत्य हैं राम-रावण और हनुमान”
 

स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज के निदेशक और वैदिक विज्ञान केन्द्र के प्रभारी प्रो. भरत राज सिंह ने बताया है कि पहले विश्व युद्ध के बाद एक अमेरिकी पायलट ने होंडुरास के जंगलों में कुछ अवशेष देखे थे। अमेरिकी पत्रिका ‘डेली टाइम्स गज़ट’ के मुताबिक इस शहर की पहली जानकारी अमेरिकी खोजकर्ता थिंयोडोर मोर्ड ने 1940 में दी थी। एक अमेरिकी पत्रिका में उसने उस प्राचीन शहर में वानर देवता की पूजा होने की बात भी लिखी थी, लेकिन उसने जगह का खुलासा नहीं किया था। बाद में रहस्यमय तरीके से थियोडोर की मौत हो गई और जगह का रहस्य बरकरार रहा।

1 सितंबर 2016 गुरुवार को सूर्य ग्रहण लग रहा है। इसी दिन भाद्रपद माह की अमावस्या भी है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। दरअसल, ऐसी मान्यता है कि ग्रहण का सूतक वहीं माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर ग्रहण शुरू होगा और शाम 4 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगा। यह ग्रहण अफ्रीका, हिन्द महासागर, ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तटवर्ती इलाके और अन्टार्कटिका में दिखाई देगा। इस सूर्य ग्रहण का 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है- 1. मेष- कुछ लोगों को सामाजिक अपयश का सामना करना पड़ सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। काम-धंधे में अड़चन आ सकती है। 2. वृष- कार्यो में सफलता प्राप्त होगी। परिवार में सुखद वातावरण बना रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत हो सकती है। राय-मशविरा लेकर ही कार्य करें। 3. मिथुन- कुछ लोगों को आर्थिक लाभ हो सकता है। रोजमर्रा की वस्तुओं की खरीददारी कर सकते हैं। सोच-विचार के बाद ही कोई निर्णय लें। 4. कर्क- नये कार्यो में निवेश से बचें अन्यथा हानि हो सकती है। जीवन के प्रति आशावादी विचार रखने की जरूरत है। घर-गृहस्थी में खर्च बढ़ेगा। 5. सिंह- कुछ लोगों को शारीरिक व मानसिक पीड़ा हो सकती है। भाईयों से मनमुटाव हो सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। 6. कन्या- खर्च अधिक हो सकता है जिससे मानसिक परेशानी बढ़ सकती है। दोस्तों पर अधिक खर्च से बचें। घरेलू मामलों में स्थिति सामान्य रहेगी। 7. तुला- अवसरों को पहचानकर आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं। नए कार्यो को शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। बेवजह के झगड़ों से दूर रहें। 8. वृश्चिक- अच्छी तरह से विचार करने के बाद ही कहीं पैसा लगाएं अन्यथा नुकसान हो सकता है। कुछ लोग अपनी आजीविका को लेकर चिंतित हो सकते हैं। 9. धनु- घर-परिवार को लेकर चिंता बनी रह सकती है। जीवनसाथी का स्वास्थ्य भी परेशानी दे सकता है। बेवजह किसी पर शक करने से अपना ही मन परेशान होगा। 10. मकर- कुछ लोगों को भौतिक सुख की प्राप्ति होगी। परिवार में आपसी सहयोग से ही विकास होगा। आर्थिक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। 11. कुंभ- दाम्प्त्य जीवन में तालेमल बनाने से बड़ी से बड़ी मुसीबत भी टल सकती है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतना ठीक नहीं है। 12. मीन- खान-पान में सावधानी बरतें। कमाई और खर्च में समानता की स्थिति बनी रहेगी। क्रोध पर नियंत्रण रखें अन्यथा टकराव हो सकता है।

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