Category

Health (159)

1493113970 Image 1493113954851

यह सच है कि अभी तक कैंसर की कोई कारगर दवा तैयार नहीं हुई है। लेकिन कुछ बातों का हम पहले से ही ख्याल रखें तो यह रोग हमारे शरीर को छू भी नहीं पाएगा। आईए जानते हैं ऐसी ही कुछ सावधानियों के बारे में-
1. अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बना रहे हैं जो पैपिलॉमा वायरस से प्रभावित है तो आप भी इसकी चपेट में आ सकते हैं क्योंकि यह वायरस फैलने वाला होता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाने से बचें।
2. ज्यादा से ज्यादा पत्तेदार सब्जियाँ, चना और फल खाने की कोशिश करें। सब्जियों और फलों में फाइबर मौजूद होता है जो रोगों से लड़ने की क्षमता रखता है। यह कई प्रकार के कैंसर से लड़ने में मददगार होता है।फूलगोभी, पत्तागोभी,टमाटर, एवोकाडो, गाजर जैसे फल और सब्जियां जरूर खाएं।
3. शक्कर का सेवन कम-से-कम करें। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि महिलाओं में कोलोरेक्टल कैंसर की सम्भावना शक्कर के सेवन से काफी बढ़ जाती है।
4. खाने का तेल इस्तेमाल करने से पहले यह देख लें कि आप जो तेल खाने जा रहे हैं वह स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है। ऑलिव ऑयल या फिर कोकोनट ऑयल का इस्तेमाल भोजन पकाने में करें।
5. जहाँ तक संभव हो इलेक्ट्रॉनिक चीजों का इस्तेमाल कम ही करें।
6. गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल लम्बे समय तक न करें। गर्भनिरोधक के ज्यादा लम्बे समय तक प्रयोग करने से औरतों में स्तन कैंसर या लीवर कैंसर होने का खतरा रहता है। साथ ही यह हृदयघात की सम्भावना को भी बढ़ाता है।हॉर्मोन से संबंधित थेरेपी का प्रयोग करें।

7. अपने शरीर के वजन को संतुलित रखें। मोटापे से स्तन कैंसर और मलाशय कैंसर का डर बना रहता है।
8. वातावरण में फैल रहे प्रदूषण से खुद को यथासंभव बचाने का प्रयास करें।
9. भरपूर नींद लें। सामान्यतः 8-10 घंटे सोना पर्याप्त माना जाता है।
10. धूम्रपान न करें। न किसी प्रकार के नशे का सेवन करें।
11. शारीरिक काम करते रहें । खुद को व्यस्त रखें। रोजाना व्यायाम करें तो और भी बेहतर परिणाम होंगे।
12. नमक का सेवन संतुलित मात्रा में करें। ज्यादा नमक खाने से पेट का कैंसर हो सकता है।
13. सबसे महत्पूर्ण बात कि अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखें। ज्यादा भावुक होना भी कैंसर को न्यौता देना है। आप अगर पौष्टिक आहार ले भी रहे हैं और आप भावनात्मक रूप से कमजोर हैं तो पौष्टिक आहार भी अपना प्रभाव नहीं दिखा पाएगा।

1493049560 Image

प्याज के रस में गंजो के घने बाल, झड़ते बालो को जड़ से मजबूत और सफ़ेद बालो को काला करने का चमत्कारीक गुण पाया जाता है।

खुबसूरत बाल हर कोई चाहता है लेकिन व्यस्त दिनचर्या के चलते बालों का ख्याल रखना नामुकिन होता जा रहा है. घर पर बालों को धोना ही कई महिलाओं को अखरता है जिसके लिए वह महंगे पार्लर में जा कर हेयर स्पा आदि लेती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं बालों की समस्याओं के लिए आपके घर में एक रामबाण इलाज मौजूद है।

बालों का झड़ना, असमय सफेदी, रूसी की समस्या तो आम हो गई है. बालों की इन उलझनों के लिए प्याज एक वरदान है! जी हाँ, प्याज आपके बालों को झड़ने, रुसी, सफेदी और गंजे होते सिर की समस्याओं को दूर करती है।
प्याज वैसे तो भारत में बहुत आम वरतों में होने वाला पदार्थ है। प्याज में सल्फर (Sulfur) नामक मिनरल भरपूर मात्र में होता है , जो के बालों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। एक आम सा प्याज आपके बालों के बढ़ने की रफ़्तार को दोगुना तक बढ़ा सकता है।

जानते है कैसे काम आता है प्याज, हमारे बालों को घना और लम्बा करने में :

इस प्रक्रिया में हम आपको बतायेंगे के केसे एक लाल रंग का प्याज भूरे रंग के बालों का उगना और बालों का झडना रोक सकता है। हमारे बालों का विकास हमारे जींस (Genes) पर निर्भर करता है , लेकिन कई कारणों की वजेह से हमारे बालों का विकास रुक जाता है या कम हो जाता है। यह विधि आप के लिए लाभदायक तो होगी ही बल्कि आगे चल कर आपके बचों को भी लाभ देगी।

प्रयोग करने की विधि :

बालों को झड़ने से रोकने के लिए बालों पर प्याज़ के प्रयोग का सबसे बेहतरीन तरीका प्याज का रस के रूप में प्रयोग करना है।
3-5 प्याज छीलें और उन्हें अच्छे से पीस लें।
इस पेस्ट को अपने हाथों से निचोड़कर इसका रस निकाल लें।
अब इस रस को अपने सिर पर तथा बालों पर लगाएं।
अब इस रस को सिर पर आधे घंटे तक रहने दें एवं
एक हलके शैम्पू का प्रयोग करके इसे धो दें।
हफ्ते में 3 बार इस पद्दति का इस्तेमाल करने से मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होगी। तुरंत अच्छे परिणाम पाने की आशा ना करें क्योंकि प्राकृतिक उपचारों में काफी समय लगता है।
अधिक जानकारी के लिए वीडियो देखें

दोबारा से बालों को उगाए प्याज का रस और शहद का उपचार :

एक कटोरी में 2 चम्मच शहद लें और
इसमें एक चौथाई कप प्याज का रस डालें।
इन दोनों को अच्छे से मिलाएं एवं सिर पर मसाज करते हुए धीरे धीरे लगाएं।

बेहतरीन परिणामों के लिए इस प्रक्रिया का प्रयोग हफ्ते में 3 बार करें।

प्याज, ऑलिव ऑयल और नारियल तेल पैक :

इस पैक को बनाने के लिये कुछ प्याज ले कर पीस लीजिये और उसका रस निकाल लीजिये। उसमें चम्मच ऑलिव ऑयल और नारियल तेल मिलाइये।
इस मिश्रण को बालों में लगाइये, जड़ों में इस तेल को न लगाएं।
इसे 2 घंटे तक लगा रहने के बाद शैंपू से धो लें। इस पैक को आप रोज लगा सकते हैं।

प्याज़, बियर और नारियल तेल :

बियर और नारियल तेल के साथ प्याज के गूदे को मिलाइये और बालों में लगा लीजिये।
इस मिश्रण को 1 घंटे तक बालों में रखना है इसके बाद शैंपू कर लेना है।
इससे बलों में शाइन आएगी और वह घने दिखेगें।


1493027032 Image 1493027011400

युवतियों और महिलाओं को गर्भवती होते तो आपने देखा ही होगा, लेकिन हम जो तस्वीर दिखा रहे हैं वह एक ऐसे लड़के की है जो गर्भ से है।
गर्भ वाले लड़के की यह फोटो किसी के लिए भी बेहद चौंका देने वाली हो सकती है।
लेकिन हैरान न हों, इसे फोटोशॉप की मदद से बनाया गया है।
शिकागो शहर में टीनएज प्रेग्नेंसी की दर को कम करने लिए एक अ‌भियान चलाया जा रहा है। यह फोटो इसी अभियान का हिस्सा है।

शिकागो डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्‍थ का कहना है कि इस तरह के फोटो का प्रयोग इस अभियान में इसलिए किया गया है जिससे की लड़के समझ सकें कि टीन एज प्रेग्नेंसी के लिए केवल लड़कियां ही जिम्मेदार नहीं हैं।
इस तरह के पोस्टरों को यातायात के साधनों में तो चिपकाया ही गया है, साथ ही शहर में जगह-जगह इस तरह के होर्डिंग भी लगाए गए हैं।
हालांकि यह इस तरह का पहला अभियान नहीं है। इससे पहले ऐसा अभियान मिलवॉकी शहर में भी चलाया गया था।

1492969731 Image 1492969720445

अगर आपको जंक फूड बेहद पसंद हैं और किसी न किसी बहाने जंक फूड खा ही लेते हैं तो आप जरा सावधान हो जाएं. क्योंकि इससे मेटाबोलिज्म के साथ-साथ आपके घुटनों की सेहत भी प्रभावित हो सकती है.
खानपान पर आधारित एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में कुछ ऐसा ही दावा किया गया है. अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार जंक फूड खाना जोड़ों में दर्द के खतरे को बढ़ा सकता है.
यह अध्ययन क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है. शोधकर्ताओं के अनुसार जंक फूड मसलन पिज्जा, बर्गर, चिप्स, फ्रेंच फ्राइज, हॉट डॉग आदि में संतृप्त वसा का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी वजह से जोड़ों में दर्द का खतरा बढ़ता है.
शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन चूहों पर किया और पाया कि जंक फूड खाने वाले चूहों का जहां मोटापा बढ़ गया, वहीं उनमें लीवर से संबंधित परेशानियां भी देखने को मिलीं. वैज्ञानिकों ने कहा कि मोटापा और लीवर की परेशानी के अलावा शोध में पाया गया कि फैटी एसिड में मौजूद संतृप्त फैटी एसिड धीरे-धीरे शरीर में जमा हो जाता है और कॉर्टिलेज को कमजोर बना देता है. ऑस्ट‍ियोआर्थराइटिस का कारण भी यही बनता है.
शोधकर्ताओं के मुताबिक मक्खन, पशु चर्बी और पाम तेल में सबसे ज्यादा संतृप्त फैटी एसिड पाया जाता है.

1492931578 Image 1492931569714

देश के मेडिकल रेग्युलेटर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने डॉक्टरों को आगाह किया है। उसका कहना है कि अगर डॉक्टरों ने प्रिस्क्रिप्शन में सिर्फ सस्ती जेनेरिक दवाए लिखने की उसकी गाइडलाइन का पालन नहीं किया तो उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा
- एमसीआई ने डॉक्टरों से कहा कि प्रिसक्रिप्शन साफ और बड़े अक्षरों में होने चाहिए, साथ ही दवाओं के इस्तेमाल सही होने चाहिए। एमसीआई ने ऐसा नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। - एमसीआई के सर्कुलर के मुताबिक, एमसीआई एक्ट के तहत रजिस्टर्ड सभी डॉक्टरों को ऑर्डर दिया जाता है कि रेग्युलेशन के प्रोविजन्स को जरूर मानें। - यह सर्कुलर मेडिकल कॉलेजों के सभी डीन, प्रिंसिपल, हॉस्टपिटल्स के डायरेक्टर्स और सभी स्टेट मेडिकल काउंसिल्स के प्रेसिडेंट्स को जारी किया गया है। 
*पिछले साल MCI के नियमों में हुआ था बदलाव*
- एमसीआई ने डॉक्टरों से कहा कि उसके 2016 के नोटिफिकेशन का पालन करें, जिसमें उसने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (प्रोफेशनल कंडक्ट, एटीकेट एंड इथिक्स) रेग्युलेशन, 2002 की इससे संबंधित धारा 1.5 में बदलाव किया है।
जरूरी दवाओं की लिस्ट में हो रहा सुधार - सरकार भी 2015 की इसेंशियल दवाओं की लिस्ट में सुधार कर रही है, ताकि ज्यादा दवाओं को इसमें शामिल किया जा सके। - जन औषधि कार्यक्रम को भी बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत सरकार सही कीमत पर जरूरी दवाएं मुहैया कराती है।
*PM ने भी कहा था- जेनेरिक मेडिसन लिखें डॉक्टर* - बता दें कि पिछले हफ्ते पीएम ने गुजरात दौरे के वक्त कतारगांव में एक मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का इनॉगरेशन किया था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि "देश के डॉक्टर्स जेनेरिक दवाएं लिखें, इसके लिए जल्द कानून बनेगा।" - मोदी ने यह भी कहा था कि डॉक्टर इस तरह से पर्ची लिखते हैं कि गरीब लोग उनकी लिखाई समझ नहीं पाते और वे ऊंचे दामों पर प्राइवेट शॉप्स से दवाएं खरीदते हैं।
*क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं?*
- जब किसी बीमारी के इलाज के लिए कोई दवा तैयार होती है तो डब्ल्युएचओ उसे एक नाम देता है। यह उसका जेनेरिक नाम होता है। यह नाम दुनियाभर में एक जैसा होता है।
- जो कंपनी इस दवा को तैयार करती है, उस पर कुछ साल तक उसका पेटेंट रहता है, इसके बाद इसे दूसरी कंपनियां भी बना सकती हैं। 
- अलग-अलग कंपनियां एक ही दवा को अलग-अलग ब्रांड और नाम से बेचती हैं। ब्रांड वैल्यु के हिसाब से इनके दाम भी तय होते हैं। कई बार इनकी कीमत लागत से कई गुना ज्यादा होती हैं, लेकिन इसकी जेनेरिक मेडिसन बहुत सस्ती होती है।
- उदाहरण के लिए बुखार और दर्द की एक दवा पैरासिटामॉल है। यह इसका जेनेरिक नाम है। इसे अलग-अलग कंपनियों अलग-अलग नाम से बेचती हैं। एमसीआई का कहना है कि डॉक्टर अपने पर्चे पर सिर्फ पैरासिटामॉल लिखें। किसी खास कंपनी के ब्रांड वाली दवा न लिखें। 

1492860637 Image 1492860619160

लड़कियों के चेहरे पर बाल होना या सामान्य से थोड़े ज्यादा बाल तो अक्सर देखने को मिल जाते हैं. लेकिन कई बार ऐसी महिलाएं भी दिख जाती हैं, जिनके चेहरे पर दाढ़ी या मूछें उगी हों. अचानक से ऐसी लड़कियां भीड़ में चर्चा का केंद्र बन जाती हैं और आसपास खड़े लोग उन्‍हीं की तरफ इशारा करने लगते हैं. कुछ औरतें इन बालों को शेव करा लेती हैं, तो कुछ लेजर ट्रीटमेंट को चुनती हैं. लेकिन कुछ औरतें ऐसी भी होती हैं, जो चेहरे पर उगे बालों को वैसे का वैसा रहने देती हैं. अब सवाल यह है कि औरतों को दाढ़ी उग कैसे जाती है. 
क्यों लड़कों को ही आती है दाढ़ी: 
11 से 13 साल की उम्र में लड़के और लड़कियों दोनों के शरीर में काफी बदलाव होते हैं. इस उम्र में सेक्स ग्रन्थियों का विकास होता है. इस उम्र में दोनों में ही कई ग्रंथियां और हारमोंस बनते हैं, जिनसे शरीर में बलाव आता है. इन्हें एंड्रोजेंस कहते हैं. लड़कों में एंड्रोजेंस की वजह से ही दाढ़ी-मूंछ आती है, तो वहीं लड़कियों में जो हारमोंस बनने हैं उन्हें एस्ट्रोजेंस कहते है. लड़कों में एंड्रोजेंस ही उनकी आवाज को भारी भी बना देते हैं. एंड्रोजेंस और एस्ट्रोजेंस ही दोनों के शरीर में कई बड़ें अंतर पैदा करते हैं. एक और जहां एस्ट्रोजेंस लड़कियों को कोमलता देता है, वहीं दूसरी और एंड्रोजेंस लड़कों को सख्त बनाता है. 
फिर लड़कियों को कैसे आ जाती है दाढ़ी  इसका कारण है हारमोंस में होने वाला डिसऑडर. जिसे पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम कहते हैं. हारमोंस में होने वाला यह बदलाव महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम को ठेस पहुंचाता है. जिससे औरतों को भी दाढ़ी या मूछें उग आती हैं. डॉक्टर का कहना है कि हारमोंस में होने वाले इन बदलावों के पीछे कई आनुवांशिक कारण भी हो सकते हैं. 
डॉक्टर बताते हैं कि अक्सर जब हारमोनल डिसऑर्डस की वजह से महिलाओं की ओवरी कमजोर हो जाती है और ओवरी से अंडे नहीं निकलते तो सिस्ट, जो कि एक तरह की गांठ होती है, का निर्माण होता है. सिस्ट में बेसिकली एक तरल पदार्थ होता है, जो एंड्रोजेन हॉर्मोन को बनाता है. इसी से पीसीओएस बनने लगता है और महिलाओं को चेहरे पर भी बाल उग आते हैं. 
क्या हैं वजह औरतों के चहरे पर उगने वाले बालों की समस्या को डॉक्टरी भाषा में हरसुटिज्म कहा जाता है. इसके पीछे 3 प्रमुख वजह होती हैं. 
अनुवांशिक- इसके पीछे फैमिली हिस्ट्री और परिवार में इस तरह की बीमारी कारण हो सकती है. 
हार्मोनल- जब हारमोंस असंतुलित होते हैं, तो औरत के शरीर में मेल सेक्स हारमोंस ज्यादा हो जाते हैं. हारमोंस असंतुलन के भी बहुत सारे कारण होते हैं. जैसे- लाइफस्टाइल डिस्ऑर्डर, सेडनेट्री लाइफ यानी शारीरिक व्यायाम या कसरत न करना, पीसीओडी, थाइराइड वगैरह. 
मेडिकेशन- कई बार किसी दूसरी बीमारी के लिए ली जा रही दवाएं हारमोंस पर असर ड़ाल देती हैं. जिससे की पीसीओडी हो जाता है. पीसीओडी का यह सबसे आम कारण है. 

1492788507 Image 1492788500918

गर्मी का मौसम व्यायाम के लिए अच्छा होता है। वजन कम करने के लिए यह मौसम बेहतर होता है, क्योंकि इस मौसम में पसीना अधिक आने के कारण कैलरी आसानी से बर्न हो जाती है। यही नहीं, अगर तनाव काफी बढ़ जाता है या गुस्सा अधिक आता है तो व्यायाम करें। व्यायाम के दौरान पसीना आने से दिमाग को आराम मिलता है, तनाव कम हो जाता है । पर कई बार गर्मियों में वर्कआउट करना खतरनाक भी हो सकता है। इसलिए इससे जुड़ी कुछ बातों को जानकर सावधानी बरतना जरूरी है।  
रक्तचाप को रखें नियंत्रित  गर्मियों में रक्तचाप कम होने या हार्टबीट रेट बहुत ज्यादा बढ़ जाने की समस्या अधिक होती है। वर्कआउट से यह बहुत अधिक प्रभावित होती है। इसलिए कोई भी व्यायाम या वर्कआउट करते समय इन पर नजर रखना आवश्यक है। व्यायाम की ऐसी मशीनें भी होती हैं, जिनसे व्यायाम करते समय इन्हें जांच सकते हैं। चक्कर महसूस हो रहा हो  या आपको पसीना बहुत आ रहा है तो भी तुरंत इनकी जांच करवा लें। अधिक पसीना आने वाले व्यायाम जैसे रनिंग, कार्डिओ, स्टंट ट्रेनिंग ज्यादा करने से बचे या फिर उसे ध्यान से करें।
ये चीजें रखें अपने साथ गर्मियों के मौसम में जब व्यायाम करें तो ध्यान रखें कि कुछ चीजें आपके पास जरूर होनी चाहिए, ताकि अगर मौसम का दुष्प्रभाव आपकी सेहत पर पड़े तो आप उससे बच सकें। व्यायाम या हैवी वर्कआउट के समय गर्मियों में आपके पास ग्लूकोज और चॉकलेट जरूर होनी चाहिए। अपने साथ टावल भी जरूर रखें।
खान-पान गर्मियों के मौसम में व्यायाम करते समय खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए अपने आहार  पर जरूर ध्यान दें। इसके लिए अगर आपको वजन कम करने की चिंता नहीं है तो खाली पेट ग्लूकोज का सेवन जरूर करें।  500 मिलीलीटर पानी में 20 या 30 ग्राम ग्लूकोज मिलाकर पी  सकते हैं। वजन कम करना है तो नीबू पानी या पानी में नीबू और शहद मिलाकर खाली पेट ही पिएं। इस मौसम में दिन में भी लिक्विड डाइट को ज्यादा शामिल करें। इसके लिए लस्सी, नारियल पानी, बिना छाना हुआ जूस पीना भी काफी फायदेमंद रहता है। बिना छाना हुआ जूस पीने से फाइबर काफी मात्रा में मिलता है, जो गर्मियों में स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। ऐसे जूस से पौष्टिकता भी अधिक मिलती  है और पेट भरे होने का एहसास अधिक होता है।  तो दही चावल खाएं अगर वजन कम करने की चिंता नहीं है तो गर्मियों में वर्कआउट करने वालों के लिए दही चावल और आलू खाना भी बहुत फायदेमंद रहता है।  अगर आप वजन कम करने के प्रति सजग हैं तो कम काबार्ेहाइड्रेट्स वाला आहार लें और हो सके तो रात को खाना खाने से बचें।
सबसे खास बात गर्मियों के मौसम में व्यायाम करते समय अधिक पसीने और डीहाइड्रेशन से बचने के लिए ध्यान रखें कि आप वर्क-आउट करते समय एसी, कूलर या पंखे के एकदम नीचे न हों। इनसे बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। खासकर अगर आप वजन कम करने के लिए व्यायाम कर रहे हैं तो पंखे की हवा के नीचे भी बिल्कुल न आएं। बहुत ज्यादा गर्मी के समय खुले में व्यायाम या वर्क-आउट करना भी स्वास्थ्य के लिए  नुकसानदेह हो सकता है।   
ऐसा हो पहनावा  खासकर गर्मियों के मौसम में आपका पहनावा भी आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। वर्कआउट के समय आप आरामदायक और हल्के रंग के कपड़े पहनें। यह आपके शरीर के लिए बेहतर होंगे। आजकल ड्राइ फिट वाली पोशाकें भी आ रही हैं। गर्मियों के मौसम में व्यायाम के समय पहनने के लिए ड्राईफिट वाली पोशाकें बेहतर रहती हैं।

1492787373 Image 1492787368161

कई लोग कोल्ड ड्रिंक के दुष्प्रभावों से बचने के लिए उसकी जगह डायट सोडा लेते हैं। लेकिन एक नए अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने चेताया है कि डायट सोडा भी याददाश्त के लिए घातक हो सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा, कई लोग सोचते हैं कि कोल्ड ड्रिंक में काफी चीनी होती है इसलिए वे हानिकारक होती हैं। ऐसे लोग कोल्ड ड्रिंक की बजाय डायट सोडा लेते हैं। यह सच है कि रोज-रोज शुगरयुक्त पेय लेने से याददाश्त खराब हो सकती है। लेकिन रोज रोज डायट सोडा पीना भी सुरक्षित नहीं है। इससे डिमेंशिया और आघात का खतरा काफी बढ़ सकता है। 
लत से बचना जरूरी : ‘जर्नल ऑफ अल्जाइमर्स एंड डिमेंशिया’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, जो लोग शुगर युक्त कोल्ड ड्रिंक ज्यादा पीते हैं उनकी याददाश्त खराब हो जाने की आशंका ज्यादा होती है। ऐसे लोगों के मस्तिष्क का आयतन अपेक्षाकृत छोटा हो सकता है। उनका हिप्पोकैंपस भी अपेक्षाकृत छोटा हो सकता है। हिप्पोकैंपस मस्तिष्क का याददाश्त और सीखने की क्षमता से जुड़ा हिस्सा है। 
डायट सोडा विकल्प नहीं :  शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के बाद एक और अध्ययन किया, जिसमें पाया गया कि शुगर युक्त कोल्ड ड्रिंक के दुष्प्रभाव से बचने के लिए डायट सोडा अपनाना भी खतरनाक हो सकता है। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ता मैथ्यू पेस ने कहा, हमारे नतीजों ने दिखाया कि अत्यधिक शुगर वाले या कृत्रिम मिठास वाले, दोनों तरह के पेयों और मस्तिष्क के क्षय में गहरा संबंध है। इनके ज्यादा उपभोग से उपापचय संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिनसे डिमेंशिया और मस्तिष्क और रक्तवाहिनियों से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।  ज्यादा सेवन, ज्यादा खतरा :  पेस ने कहा, हमने पाया कि जो लोग प्रति दिन तीन बार डायट सोडा लेते हैं उनके डिमेंशिया और आघात की चपेट में आने का खतरा ज्यादा था। शोधकर्ताओं के अनुसार इसमें अल्जाइमर्स बीमारी और इस्कीमिक आघात का खतरा भी शामिल है। इस्कीमिक आघात में मस्तिष्क की रक्त वाहिनियां बाधित हो जाती हैं। जबकि अल्जाइमर्स डिमेंशिया का सबसे आम रूप है, जिसमें याददाश्त का क्षरण हो जाता है। 
शोधकर्ताओं ने चार हजार से भी ज्यादा लोगों का अध्ययन कर यह नतीजा निकाला है। ये सभी लोग 30 साल से अधिक उम्र के थे। शोधकर्ताओं ने एमआरआई तकनीक से इन प्रतिभागियों के मस्तिष्क की स्कैनिंग की तथा इनकी दिमागी क्षमता का परीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने इन प्रतिभागियों पर करीब दस साल तक नजर रखी। पता चला कि जो प्रतिभागी रोज रोज और ज्यादा मात्रा में डायट सोडा लेते थे उनमें डिमेंशिया और आघात का खतरा ऐसा नहीं करने वालों के मुकाबले ज्यादा था। उनके मधुमेह की चपेट में आने की संभावना भी ज्यादा पाई गई।  

Page 1 of 14

Media News

  • Bollywood
  • Life Style
  • Trending
  • +18
  • IPL 2017
Post by साकेत सिंह धोनी
- Apr 26, 2017
रवीना टंडन इन दिनों काफी चर्चा में हैं, वजह है उनकी हालिया रिलीज फिल्‍म मातृ द मदर। इस फिल्‍म में वो एक गैंग रेप शिकार ...
Post by साकेत सिंह धोनी
- Apr 25, 2017
यह सच है कि अभी तक कैंसर की कोई कारगर दवा तैयार नहीं हुई है। लेकिन कुछ बातों का हम पहले से ही ख्याल ...
Post by सत्य चरण राय (लक्की)
- Apr 26, 2017
क्या सच में हुआ योग गुरु बाबा रामदेव का एक्सीडेंट ? जानिए इस फोटो की सच्चाईयोग गुरु बाबा रामदेव के एक्सीडेंट की खबर इन ...
Post by साकेत सिंह धोनी
- Apr 24, 2017
कई फेयरनेस क्रीमों में पुरुषों के स्पर्म मिलाया जाता है। लेकिन एक महिला रोजाना तरह-तरह के ड्रिंक्स में पुरुषों का ...
Post by साकेत सिंह धोनी
- Apr 24, 2017
बेहतरीन पारी खेलकर फॉर्म में वापसी करने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी धैर्य बरकरार रखता है तो कोई भी ...
Top
We use cookies to improve our website. By continuing to use this website, you are giving consent to cookies being used. More details…