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अधपका चिकन में पाये जाने वाले जीवाणु लकवा होने के कारण हो सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे गुलियन बैरे सिंड्रोम हो सकता है, यह मनुष्य में विकट न्यूरोमसक्यूलर लकवा होने का प्रमुख कारण है। शोध से न केवल यह पता लगा कि कैसे यह फूड बोर्न जीवाणु कैमप्लोबैक्टर जेजुनी गुलियन बैरे सिंड्रोम (GBS) को सक्रिय करता है बल्कि इसके इलाज के बारे में भी पता चला। अगर चिकन उचित तापमान पर सही तरीके से नहीं पका हो तो इसमें बैक्टिरिया जीवित रह सकता है। अमेरिका में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वेटनरी मेडिसिन कॉलेज के लिंडा मेन्सफिल्ड ने कहा कि हमारे शोध से हमें पता चला कि यह एक खास कैमप्लोबैक्टर स्ट्रैन के साथ एक खास जेनेटिक के कारण यह रोग होता है। मेन्सफिल्ड ने कहा, इससे जुड़ी बात यह है कि बहुत सारे स्ट्रेन्स एंटीबायोटिक्स के प्रतिरोधक है और हमारे शोध से पता चलता है कि कुछ एंटीबायोटिक्स से इलाज करने पर रोगी को और नुकसान पहुंचा सकता है। दुनिया भर में GBS विकट न्यूरोमसक्यूलर लकवा होने का प्रमुख कारण है।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर डिवाइस पर ज्यादा समय बिताने वाले बच्चों को ड्राइ आई यानी आंखों में सूखेपन की समस्या का जोखिम बहुत ज्यादा होता है। दक्षिण कोरिया के चुंग आंग यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक वीडियो डिस्प्ले टर्मिनल (वीडीटी) मसलन स्मार्टफोन या कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल का संबंध बच्चों में ऑक्यूलर सरफेस सिम्पटम्स (नेत्र संबंधी लक्षणों या समस्या) की बारंबारता से पाया गया है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि हमने 916 बच्चों का नेत्र परीक्षण किया था। बच्चों और उनके परिवार को प्रश्नावली दी गई थी जिसमें वीडीटी के इस्तेमाल, खेलकूद की गतिविधि, सीखने और ऑक्यूलर सरफेस डिसीज इनडेक्स में बदलाव से संबंधित स्कोर शामिल था। प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया था जिसमें 630 बच्चे शहरी इलाकों के और 286 ग्रामीण इलाकों से थे। शहरी समूह के कुल 8.3 फीसदी बच्चों में ड्राइ आई डिसीज (डीईडी) की समस्या मिली जबकि ग्रामीण समूह में ऐसे बच्चों का आंकड़ा 2.8 फीसदी था। शहरी समूह में स्मार्टफोन के इस्तेमाल की दर 61.3 फीसदी और ग्रामीण समूह में 51 फीसदी थी। बच्चों में स्मार्टफोन का इस्तेमाल का बाल्यावस्था डीईडी से है। यह शोध जर्नल बीएमसी ऑप्थेल्मोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

चावल के साथ आपने मसूर से चना और भी कई वेराइटी की दाल खाई होगी. प्रोटीन से भरी दाल आपके हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद होती है. इन्हीं दालों में से एक है उड़द दाल. आपको जानकर हैरानी होगी कि आपको पोषण देने के साथ ही ये दाल आपकी खूबसूरती निखारने में भी मदद करती हैं. जी हां, चाहे गोरापन पाना हो या चेहरे के दाग-धब्बे और टैनिंग खत्म करनी हो या फिर बालों को बनाना हो सॉफ्ट और शाइनी, ये दाल आपकी हर चाहत पूरी करेगी. तो अब से सिर्फ उड़द दाल न्यूट्रिशन के लिए, बल्कि अपनी खूबसूरती बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल करें. पिंपल्स के लिए अगर आए दिन पिंपल्स आपको भी परेशान करते रहते हैं, तो उड़द दाल इससे बाहर निकालने में मदद करेगी. इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल प्रोपर्टीज़ पिंपल्स को खत्म करने में असरदार होती है. आधा कटोरी उड़द दाल रातभर भिगो दें. सुबह इसे पीसकर इसमें 2 चम्मच गुलाब जल और 2 चम्मच बादाम का तेल मिलाकर पिंपल्स पर लगाएं. सूख जाने पर इसे पानी से धो लें. कुछ दिनों तक हर दूसरे दिन ऐसा करें और इस परेशानी से छुटकारा पाएं. सॉफ्ट और स्मूद बालों के लिए उड़द दाल ना सिर्फ आपकी बॉडी, बल्कि बालों को भी पोषण देकर उन्हें बनाती है सॉफ्ट और शाइनी. उड़द दाल को रात में भिगोकर सुबह पीस लें. अब इसमें 2 बड़े चम्मच दही मिलाकर बालों और स्कैल्प पर अच्छी तरह लगाएं. आधे घंटे बाद इसे धो लें. गोरेपन के लिए अपनी स्किन लाइटनिंग प्रोपर्टीज़ और एक नैचुरल ब्लीच होने की वजह से उड़द दाल रंगत निखारने में मदद करती है. आधी छोटी कटोरी उड़द दाल और 2-3 बादाम रातभर भिगोकर रखें. सुबह इनका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं. जब ये सूख जाए तो इसे हटा लें. हफ्ते में ऐसा दो बार करें और कुछ हफ्तों में ही पाएं गोरी रंगत. दाग-धब्बों के लिए अपनी एंटी-बैक्टीरियल प्रोपर्टीज़ के अलावा उड़द दाल नए सेल्स बनाने में मदद करती है. इसलिए ये आपके चेहरे पर किसी तरह के दाग-धब्बों को खत्म करने में असरदार होती है. रातभर एक चौथाई कटोरी उड़द दाल भिगोकर रखें. सुबह पीसकर पेस्ट बनाएं और इसमें आधा चम्मच चावल का आटा और नींबू का रस मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं. 15 मिनट बाद इसे ठंडे पानी से धो लें. अगर आपकी स्किन सेंसिटिव हो तो एक पैच टेस्ट लें,क्योंकि इसमें मौजूद नींबू की वजह से आपकी सेंसिटिव स्किन पर रैशेज़ हो सकते हैं. चेहरे की गहरी सफाई के लिए चेहरे की गहरी सफाई के लिए आपने स्क्रब तो बहुत इस्तेमाल किए होंगे, अब उड़द दाल की मदद लें. रातभर के लिए आधी कटोरी उड़द दाल भिगो दें. सुबह इसे पीसकर पेस्ट बनाएं. इसमें 2 चम्मच दूध और 2 चम्मच घी मिलाकर चेहरे पर लगाएं. जब ये सूख जाएं तो हल्के हाथ से रगड़ते हुए छुड़ाएं और गुनगुने पानी से चेहरा धो लें. हफ्ते में 3 बार ऐसा करें और पाएं क्लीयर स्किन. टैनिंग के लिए टैनिंग की परेशानी गर्मी हो या सर्दी किसी भी मौसम में हो सकती है. इससे बचने के लिए उड़द दाल की मदद लें. एक चौथाई कप उड़द दाल रात में भिगो लें. सुबह इसे पीसकर पेस्ट बनाएं. इसमें 3 चम्मच दही मिलाकर टैनिंग वाली जगह पर लगाएं और सूखने पर धो लें. हर दूसरे दिन ऐसा करें और जल्द ही इस परेशानी से राहत पाएं. Photos: Shutterstock

नई दिल्ली: वेटलिफ्टिंग यूं तो बहुत पॉपुलर है, लेकिन इस बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि इसमें थोड़ी सी भी लापरवाही होने पर एल्बो डिस्लोकेशन का खतरा बढ़ जाता है और ये एक ऐसी समस्या है जिसको नजरअंदाज करना सेहत के लिए बहुत ही घातक है. इसका ताजा उदाहरण रियो ओलंपिलक्स के दौरान एक वेटलिफ्टर की एल्बो डिस्लोकेट होने के मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थी और लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था की यह समस्या कितनी खतरनाक हो सकती है . इसके बारे में विस्तार से बता रहें हैं मैक्स सुपर स्पेशियलटी हॉस्पिटल के यूनिट हेड प्रमुख सलाहकार और सीनिया ऑर्थो एक्‍सपर्ट डॉ अनिल अरोड़ा. क्यों होती है ये समस्या? जो भी व्यक्ति वेटलिफ्टिंग करता है उसका सारा भार कन्धों के सामानांतर होना चाहिए ताकि जो भार मांसपेशियों पर पड़ता है वो व्यवस्थित रहे, क्योंकि थोड़ा सा भी असंतुलन एल्बो डिस्लोकेशन का कारण बन जाता है . एल्बो डिस्लोकेट होने पर क्या करें? ऐसी समस्या होने पर सबसे पहले किसी अच्छे ऑर्थो के डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि वो एल्बो को आसानी से रिलोकेट कर देते हैं . डॉक्टर समस्या को देखते हुए पूरी स्थिति को ठीक से समझने के लिए एक्स रे, एम आर आई और सी टी स्कैन कराते हैं. उसके बाद आपकी स्थिति समझते हुए आपको इलाज मुहैया कराते हैं. आप ऐसी समस्या होने पर आइस पैक्स का प्रयोग तुरंत रूप से कर सकते हैं . इसके अलावा कुछ सपोर्ट जैसे आर्म सीलिंग इत्यादि की सहायता भी ले सकते हैं. क्या ना करें? एल्बो डिस्लोकेट होने की स्थिति में कभी भी मसाज करने या करवाने की गलती ना करें . कभी भी फोर्सफुली हड्डी को उसकी जगह बिठाने की गलती ना करें इससे वो समस्या स्थाई रूप से आपको अपनी चपेट में ले सकती है.

Diabetes या मधुमेह कभी भी और किसी भी उम्र में हो सकता है पर अक्सर कोई भी बीमारी एकदम से नहीं होती है इसको पूरी तरह से बनने में समय लगता है कुछ विशेष मेडिकल परिस्थितियों को छोड़ दे तो “Diabetes symptoms” या लक्षण बहुत पहले से ही दिखने शुरू हो जाते है ! कुछ लोग इन शुरूआती लक्षणों को ना पहचान ने की वजह से लंबी अवधि तक Diabetes को अनियंत्रित होने का मौका देते है , अगर समय रहते ही किसी चिकित्सक से सम्पर्क कर लिया जाये तो इस बीमारी को बढ़ने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकता है ! तो आइये जानते है कुछ शुरूआती Diabetes symptoms :- Polyphagia – भूख का बढ़ना | अगर थकान, सामान्य कमजोरी तथा चिंतित रहना या बेवजह मानसिक तनाव हो तो ये Diabetes symptoms हो सकते है । Poly urea – पेशाब बार-बार आना | यह भी पढ़ें – शारीरिक थकान के कारण और दूर करने के उपाय Polydipsia –अधिक प्यास लगना- अत्यधिक मात्र में पेशाब के आने से तथा Tissues में इसको पूरा करने के कारण अधिक प्यास लगना । Urine के रूप में ज्यादा पानी निकलने के कारण (Dehydration) निर्जलीकरण जिसके कारण जीभ सूख जाती है और होंठ फटने लगते हैं। Weight loss – वज़न में कमी आना और घावों को भरने में अधिक समय लगना । बाह्य जननांगों (external genitalia) के Bacterial infection. बैक्टीरिया के रक्त और पेशाब में मौजूद अतिरिक्त ग्लूकोज़ पर पनपने के परिणामस्वरूप Skin में खुजली का रहना ये सभी शुरुवाती Diabetes symptoms हो सकते है इसलिए आपको तुरंत किसी चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए ! चिड़चिड़ापन ,मतली और उल्टी का अहसास होना ! उंगलियों में दर्द तथा उंगलियों का सुन्न पड़ जाना अथवा उनमें कपकपाहट का अहसास होना। आँखों की कोशिकाओं में high blood glucose के प्रभाव के कारण Retinopathy, नज़र में धुंधलापन एवं आंखों की अन्य समस्याएं। डायबिटीज़ की जाँच अगर किसी को ये Diabetes symptoms महसूस हो तो इसकी सही जाँच करवाना बेहद जरुरी है , इसके लिए रक्त परीक्षण Blood Test के माध्यम से पता किया जा सकता है! जो या तो खाली पेट या रैंडम आधार पर होता है। Fasting blood glucose की जांच उस स्थिति में की जाती है जब रोगी ने 10 से 12 घंटे से अधिक खाली पेट हो । रैंडम परीक्षण इस बात का ध्यान दिए बिना किया जाता है कि रोगी ने खाना खाया है या नहीं।

भारत में क्रॉनिक किडनी रोग यानी गुर्दे खराब होने की समस्या में तेजी से इजाफा हुआ है, यह बात कई सर्वे से ज्ञान हुआ है। बदलती खान-पान की आदतों और भाग-दौड़ की जिंदगी, प्रदूषित पानी और प्रदूषण की वजह से किडनी की बीमारियां बढ़ रही हैं। नियमित दिनचर्या और संतुलित खानपान को अपनाकर इन रोगों से बचा जा सकता है। लेकिन देश में बढ़ते फास्ट फूड के चलन की वजह से इन बीमारियों को रोकना कठिन हो रहा है। किडनी की बीमारी कोई भयंकर रूप न लेले, इसलिए शुरुआत में ही किडनी की बीमारी को पहचानना बहुत जरूरी है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में यह एक लाइलाज बीमारी बन सकती है। यदि आप नीचे दिए गए लक्षणों को पहचान लेते हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 1. किडनी के होने से शरीर से गंद तथा पेशाब बाहर निलते हैं। जब ऐसा नहीं हो पाता तो किडनी में भरे हुए गंद के कारण आपके हाथ, पैर, टखना एवं चेहरा सूज जाता है। 2. इस अवस्था में मूत्र का रंग गाढ़ा हो जाता है या फिर मूत्र की मात्रा या तो बढ़ जाती है या कम हो जाती है। इसके अलावा बार-बार मूत्र होने का एहसास होता है मगर करने पर नहीं होता है। इसके अन्य लक्षणों में मूत्र त्याग करने के वक्त दर्द, दबाव और जलन जैसा अनुभव होता हो। 3. जब मूत्र में रक्त आने लगे या फिर झाग जैसा मूत्र आए तो बिना सोचे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि यह किडनी के खराब होने का निश्चित ही संकेत होता है। 4. शरीर में कमजोरी, थकाम या हार्मोन का स्तर गिर जाए तो यह भी किडनी के बीमारी के लक्षण माने गए हैं। 5. ऑक्सीजन का कम होना और जिसके कारण चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी आए तो किडनी के बीमारी के लक्षण है। 6. यदि गर्मी में भी ठंडक महसूस हो तथा आपको बुखार हो तो यह किडनी खराब होने के लक्षण को दर्शाता है। 7. किडनी के खराब होने पर शरीर में विषाक्त पदार्थों जम जाते है, जिससे त्वचा में रैशेज और खुजली होने लगती है। हालांकि यह लक्षण कई तरह की बीमारियों में भी पाया जाता है। 8. बहुत कम लोग जातने हैं कि किडनी की बीमारी के कारण खून में युरिया का स्तर बढ़ जाता है। यह युरिया अमोनिया के रूप में उत्पन होता है। जिसके कारण मुंह से बदबू निकलने लगता है और जीभ का स्वाद भी बिगड़ जाता है। 9. गुर्दे खराब होने से शरीर में विषाक्त पदार्थों का स्तर बढ़ जाता है जिसके कारण मतली और उल्टी होने लगता है। 10. डॉक्टरों के मुताबिक शरीर में अनवांटेड पदार्थ जरूरत से ज़्यादा जम जाने के कारण यह लक्षण महसूस होने लगता है। 11. यदि पीठ का दर्द पीठ के नीचले भाग से होते हुए पेड़ू-जांघ के जोड़ तक फैल जाता है तो समझिए कि आप इस बीमारी के शिकार हो रहे हो। 12. अगर किडनी खराब है तो लंग्स में फ्लूइड जमने लगता है जिसके कारण साँस लेने में असुविधा होने लगती है। नोट: हालांकि इसमें से कई लक्षण अन्य दूसरी बीमारियों के भी हैं इसलिए लक्षण ज्ञात होने के बाद डॉक्टर से जरूर चेकअप कराएं। कैसे रखें अपनी किडनी को स्वस्थ्य वैसे स्वस्थ्य लाइफ जीने के लिए यह जरूरी है कि शरीर के सभी अंग स्वस्थ्य रहे और सही तरह से काम करे। आज के समय में किडनी की समस्या अधिकतर लोगों को होती है। यह समस्या तब ज्यादा हो जाती है जब कोई शरीर को लेकर लापरवाही बरतने लगता है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी किडनी की समस्या का निदान हो, तो न केवल आप हेल्दी फूड खाएं बल्कि शराब और स्मोकिंग जैसी आदतों को बाय कर दें। इसके अलावा आप नियमित रूप से व्यायाम करें, क्योंकि व्यायाम किडनी को स्वस्थ्य तो रखेगा ही साथ ही शरीर के बाकी अंग फिट रहेंगे। आप किडनी को दुरुस्त रखने के लिए अपने उच्च रक्तचाप को नियंत्रण में रखिए साथ ही ब्लड सुगर के लेवल का निरंतर जांच करवाते रहिए। जो लोग दवाई का सेवन ज्यादा करते हैं वह ध्यान दें कि इससे किडनी खराब होने की समस्या उत्पन हो सकती है। कई पिल्स और पेनकिलर तो आपके किडनी को सीधे नुकसान पहुंचाते हैं।

नई दिल्ली: अक्सर आपने देखा होगा कि लोग पतले होने के लिए बहुत से नुस्खे अपनाते हैं। कुछ लोग पतले होने के लिए जिम जाते हैं तो कुछ घरेलू तरीकों से पतला होने की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में उनसे जो कुछ भी बन पड़ता है वो करते हैं। लेकिन दुनिया में कई ऐसे लोग भी हैं जो बहुत पतले हैं और वो मोटे होने की तमन्ना रखते हैं। ऐसे लोग हरदम सोचते रहते हैं कि काश वो थोड़े मोटे हो जाए। आपको यह बात थोड़ी अटपटी लग सकती है, लेकिन यह एक गंभीर बात भी है। क्योंकि मोटे से पतला होने के 50 तरीके आपको हर कोई बता सकता है, लेकिन वजन बढ़ाने के किसी के पास भी देशी और विदेशी इलाज नहीं होता। ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं कि किस प्रकार शरीर के कम वजन को बढ़ाया जा सकता है और और इस स्थिति में किन चीजों का ज्यादा सेवन करना चाहिए। 1. केला: वजन बढाने के लिए केला सबसे मददगार होता है रोजाना एक केला खाने से आपका वजन बढ़ता है। यदि आप इसे दूध के साथ खाते हैं तो वजन तेजी से बढ़ता है। केले में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होते हैं जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं। अगर आप रोजाना केले का सेवन कर रहे हैं तो आपकी पाचन क्रिया अच्छी रहेगी। 2. शहद: शहद का इस्तेमाल ना सिर्फ वजन घटाने के लिए किया जाता है बल्कि इसका इस्तेमाल वजन बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। रात को सोते समय या सुबह एक गिलास दूध में एक चम्मच शहद डालकर खाने से आपका वजन बढ़ता है। शहद में विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, अमीनो एसिड और खनिज पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं जो कि सेहत कि लिए जरूरी होते हैं 3. खरबूज: मौसमी फल खरबूजा खाने से भी वजन बढ़ता है। ये आपको डिहाइड्रेशन से भी बचाता है। 4. खाली दूध पीने के बजाय यदि आप दूध में ड्राई फ्रूट्स मिलाकर पीते हैं तो यह आपके वजन को बढ़ाने में काफी लाभदायक साबित होता है। आप बादाम, खजूर और अंजीर के साथ गर्म दूध भी ले सकते हैं। 5. किशमिश: अगर आपका वजन बहुत कम है और आप वजन बढ़ाने को लेकर फिक्रमंद हैं तो किशमिश का सेवन आपके लिए फायदेमंद होगा। इसमें पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता है, जिससे ताकत तो मिलती है ही साथ ही इसमें मौजूद तत्व वजन बढ़ाने में सहायक होते हैं।

कैल्शियम को अतिरिक्त खुराक के तौर पर लेना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि एक नए अध्ययन के मुताबिक यह धमनियों में प्लेक (धमनियों का जाम होना) का कारण बन सकता है, जिससे हृदय को नुकसान पहुंचने का खतरा है.इस निष्कर्ष का उद्देश्य हालांकि आपको कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ लेने से रोकना नहीं है. रिसर्चर्स का कहना है कि इस तरह के आहार दिल के लिए फायदेमंद भी हैं.   मैरिलैंड के जान हॉपकिंस विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन बाल्टीमोर में सहायक प्रोफेसर इरिन मिचोस ने कहा, ‘हमारा अध्ययन बताता है कि शरीर में पूरक खुराक के रूप में अतिरिक्त कैल्शियम का सेवन दिल और नाड़ी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है.’ये रिसर्च ‘जर्नल ऑफ दी अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं. यह विश्लेषण अमेरिका में 2,700 लोगों पर 10 सालों तक किए गए अध्ययन के बाद आया है.अध्ययन के लिए चुने गए प्रतिभागियों की उम्र 45 से 84 साल के बीच थी. इसमें करीब 51 प्रतिशत महिलाएं थीं.रिसर्चर्स ने पाया कि जो प्रतिभागी भोजन में कैल्श्यिम की अधिकतम मात्रा प्रतिदिन करीब 1,022 मिलीग्राम लेते थे, उनमें 10 सालों के अध्ययन के दौरान हृदय रोग होने का जोखिम सामने नहीं आया.लेकिन कैल्शियम को पूरक खुराक के रूप में सेवन करने वाले प्रतिभागियों के कोरोनरी धमनी में इन 10 वर्षो के दौरान 22 फीसदी तक प्लेक जमने का खतरा देखा गया. यह 10 सालों में शून्य से तेजी से बढ़ा. इससे दिल के रोग होने का संकेत मिलता है.नॉर्थ कैरोलिना विश्वविद्यालय के चेपल हिल्स ग्लिनिंग्स स्कूल के सह लेखक जान एंडरसन ने कहा कि इस अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि भोजन के रूप में लिया गया कैल्शियम और पूरक खुराक के तौर पर लिया गया कैल्शियम किस प्रकार हृदय को प्रभावित करता है.

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