Public Opinion

Public Opinion (239)

तो महाराष्ट्र की जनता ने नोटबंदी पर ही मोदी का समर्थन किया। क्या यूपी चुनाव पर पड़ेगा असर? ======================= 23 फरवरी को महाराष्ट्र की 25 जिला परिषद, 283 जिला पंचायत, 10 नगर निगम तथा मुम्बई महानगर पालिका का चुनाव परिणाम सामने आ गए। अधिकांश परिणाम भाजपा के पक्ष में गए हैं। इन परिणामों से साफ जाहिर है कि महाराष्ट्र के आम मतदाताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नोटबंदी योजना का समर्थन किया है। नोटबंदी की घोषणा के बाद पहली बार कोई चुनाव परिणाम सामने आया है। महाराष्ट्र के चुनावों में भी शिवसेना और कांग्रेस ने नोटबंदी को ही मुद्दा बनाया था, लेकिन निकाय चुनावों के परिणाम ने यह प्रदर्शित किया कि नोटबंदी से आम व्यक्ति पर कोई फर्क नहीं पड़ा। इसलिए यह सवाल उठ रहा है कि क्या महाराष्ट्र के परिणाम यूपी के चुनाव पर असर डालेंगे? 23 फरवरी को यूपी में चार चरणों के चुनाव हो गए हैं। अब तीन चरणों में मतदान शेष है। यदि महाराष्ट्र के मतदाताओं और यूपी के मतदाताओं का मूड एकसा है तो फिर यूपी के परिणाम भी महाराष्ट्र की तरह ही सामने आएंगे। यूपी में तो भाजपा को पहले से पता था कि उसे अकेले मैदान में उतरना है, लेकिन महाराष्ट्र में तो ऐन मौके पर शिवसेना से गठबंधन टूटा। शिवसेना से अलग होकर चुनाव लडऩे पर भी भाजपा को जो सफलता मिली है, उसका श्रेय नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडऩवीस को भी जाता है। फडऩवीस ने अकले ही पूरे महाराष्ट्र में प्रचार किया। फडऩवीस ने यह प्रदर्शित किया यदि आगामी विधानसभा का चुनाव भी भाजपा अकेले लड़ती है तो उसे ज्यादा फायदा होगा। अकेले मुम्बई महानगर पालिका के परिणाम से भाजपा की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। 227 वार्डों में से शिवसेना को भले ही 84 वार्डों में सफलता मिली हो, लेकिन भाजपा भी 81 वार्डों में जीती है, जबकि गत बार यहां मुश्किल से 31 वार्डों में ही भाजपा को सफलता मिली। महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में कांग्रेस का तो पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया। शरद पंवार की एनसीपी फिर भी एक नगर निगम में बहुमत पा सकती है,लेकिन कांग्रेस के खाते में तो एक भी नहीं है। इतनी बुरी दशा के बाद ही संजय निरुपम ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। सब जानते हैं कि यूपी चुनाव में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और मायावती ने भाजपा के खिलाफ नोटबंदी मुद्दा ही रखा है, लेकिन महाराष्ट्र के मतदाताओं ने जता दिया कि यह मुद्दा सिर्फ विपक्ष के नेता का है। नोटबंदी को लेकर विपक्ष ने जो भी हमले किए, उसका जवाब नरेन्द्र मोदी ने यही दिया कि इससे आम व्यक्ति को फायदा होगा। शायद अब यूपी में विपक्ष को अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी। मुम्बई तक सिमटी शिवसेना: निकाय चुनाव के परिणाम ने शिवसेना को भी सिर्फ मुम्बई महानगर तक ही सीमित कर दिया है। शिवसेना प्रमुख अद्भव ठाकरे जितना बढ़-चढ़ कर बोल रहे थे, उतना ही परिणाम ने ठाकरे को जमीन पर ला दिया है। अच्छा होता कि ठाकरे भाजपा के साथ रह कर शिवसेना का विस्तार सम्पूर्ण महाराष्ट्र में करते। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि अद्धव ठाकरे ने हालातों को सही आकंलन नहीं किया। अब महाराष्ट्र में भाजपा को शिवसेना की जरुरत नहीं है। ठाकरे ने यह घोषणा की थी कि निकाय चुनाव के बाद केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकारों से समर्थन वापस ले लिया जाएगा। लेकिन जो परिणाम आज सामने आए हैं उससे लगता है कि यदि समर्थन वापस लिया जाता है तो शिवसेना के सांसद और विधायक बगावत कर देंगे। शिवसेना के सांसद और विधायकों को अब अपना भविष्य भाजपा में ही नजर आ रहा है। एस.पी.मित्तल) (23-02-17)

जय श्री राम शुभ गुरुवार भारत माता की जय ॐ नमः भगवते वाशुदेवाय नमः महाशिवरात्रि पर्व की आप सभी को शुभकामनाएं 26 मई 2014 को हमारा पोस्ट था पेज पर की अगर भारत में दो मजबूत हिंदुत्व वादी हो जाय तो सभी धर्म निरपेक्ष मुस्लिम परस्त और जाति वादी राजनीति से सफाया हो जाय भारत में बीजेपी शिवसेना को छोड़कर सभी दल सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम वोट के पीछे पड़े रहते हैं कहि दंगा हो कहि हिन्दू भगाया जाय या देश में आतंकवाद पर मजबूत स्टैंड बीजेपी और शिवसेना ही लेती है महाराष्ट्र की जनता ने साबित कर दिया की अगर हिंदुत्व वादी बिकल्प हो तो जनता दूसरे दल को कभी न चुने महाराष्ट के सभी मतदाताओ का कोटि कोटि नमन सेकुलर दल मुम्बई का यह जरूर देखे 84 सीट शिवसेना जीती और 65 पर दूसरे स्थान पर रही और 81 सीट बीजेपी जीती 79 पर दूसरे स्थान पर यानि धर्म निरपेक्ष तीसरे चौथे के लिये लड़े हर हर महादेव बी एस त्रिपाठी राष्ट्रीय संयोजक तिरपाल से मन्दिर निर्माण मुहीम अयोध्या श्री राम मन्दिर निर्माण और हिंदुत्व की आवाज के लिए पेज से जुड़े अपने 10 दोस्तों को अवश्य जोड़े धन्यवाद जय श्री राम हर हर महादेव यह लेखक की व्यक्तिगत राय है गोरखपुर टाइम्स इस कथन से संबंध नहीं रखता है....

शुभः संध्या बीबीसी हिन्दी लिखता है कि, मोदी जी विकास से शमशान तक पहुँच गए। बीबीसी को मोदी जी की इस यात्रा से कष्ट है, और उसने उन लोगों का भी जिक्र किया है जो प्रधानमंत्री के शमशान और कब्रिस्तान वाले भाषण से आहत और हतप्रभ हैं। जहाँ तक प्रधानमंत्री के विकास से शमशान तक पहुँचने की यात्रा का सवाल है, तो अभी तक लोग उनको अंडरएस्टीमेट कर रहे हैं। क्योंकि उनके पहुँचने की कोई सीमा नहीं है। वे दरी उठाकर और जाजम बिछाकर यहाँ तक पहुंचे हैं, और वे आगे झोला भी उठा सकते हैं। दरअसल वे नायब हैं, अतुलनीय हैं, और अभूतपूर्व हैं। उनके कार्यकलापों पर अक्सर लोगों को आश्चर्य होता है। खासकर उनको जो देश की राजनीति को नेहरू और वाजपेयी की नीतियों की चासनी में पगा हुआ देखते रहे हैं। जबकि मेरा मानना है कि, मोदी बीते हुए किसी युग का विस्तार नहीं हैं, बल्कि वे अपने आप में स्वयं एक युग हैं, जिसकी तुलना करना बेमानी हैं, क्योंकि ऐसा कोई युग अभी तक हुआ ही नहीं है। वे पब्लिक में ठहाका मारकर हंस लेते हैं, वे जरूरत होने पर रो भी लेते हैं, वे विपक्ष को साथ लेकर चलने की बात करते हैं, वे अक्सर अपने ही लोगों की परवाह नहीं करते हैं, वे देश में अभी तक हुए, विकास का श्रेय अपने पूर्ववर्तियों को दे देते हैं, वे पिछले सत्तर साल में केवल विनाश होने की भी बात करते हैं। वे मेरे लिए एक दिन स्टाइल आइकॉन होते हैं, तो अगले दिन वे खुद को फ़कीर मानने को भी कह देते हैं। वे अपने होने को लेकर, अपने वजूद को लेकर किस कदर चौकस हैं, नोटबंदी उसका एक नमूना है। उस समय तक देश में एक बड़ा तबका ऐसा भी था, जो लगभग “कोऊ नृप होय, हमें का हानि” (अर्थात, कोई भी, किसी की भी, सरकार हो, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता) वाली मानसिकता में जी रहा था, लेकिन एक रात वे अचानक से टीवी पर प्रकट होते हैं, और गुजरात से अरुणांचल(2933किलोमीटर)और कश्मीर से कन्याकुमारी (3214 किलोमीटर) तक फैले हिंदुस्तान की 130 करोड़ की आबादी जान जाती है कि ‘नरेन्द्र मोदी’ क्या हैं ? मैं यहाँ एक व्यक्ति जिनको नरेन्द्र मोदी के नाम से जाना जाता है, न उसकी तारीफ़ करना चाहता हूँ न आलोचना। क्योंकि वह फिलहाल संभव ही नहीं है। जिस प्रकार मोदी जी ने संसद में नोटबंदी की समीक्षा को यह कहकर खारिज कर दिया था कि, दुनिया में पहली बार इस प्रकार के काम को अंजाम दिया गया है, इसलिए विपक्ष यह नहीं कह सकता कि, यह असफल हुआ है, क्योंकि इसका तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए हमारे पास न कोई केस है न अर्थव्यवस्था। उसी प्रकार मोदीराज को परखने के लिए हमारे पास कोई ऐसी विरासत उपलब्ध नहीं है। इस देश की जनता ने उनके कहने पर ब्रेक, क्लच और एक्सेलरेटर सब उनके हवाले कर दिए हैं, इसलिए अब जो भी होगा उसके एकमात्र उत्तरदायी वही होंगे। इस समय वे अपनी मर्जी से भारत भाग्य विधाता हैं, इसलिए जय भी उनको समर्पित की जायेंगी, और पराजय की प्रविष्टियाँ भी उसी शिद्दत से उनके खाते में दर्ज होंगीं । और वे स्वयं भी हर बात के लिए तैयार हैं, यही बात उनके विरोधियों को हज़म नहीं होती, कि कोई व्यक्ति कैसे इतनी आसानी से जय और पराजय दोनों स्वीकार कर सकता है। असल में यही तो भारतीय सभ्यता और संस्कृति सिखाती है, यही तो सनातन धर्म है, यही तो गीता ज्ञान है, कि सभी स्थितियों में सम रहें। इसीलिए मोदी जी एक योगी की तरह का जीवन जीते हैं, जो उनकी विशेषता है......। बाकी जो है, सो हइये है । मृत्युंजय प्रसाद

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन हुआ तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तस्वीरों के साथ एक नारा दिखाई दिया गया जिसमें कहा गया था कि ‘यूपी को ये साथ पसंद है’। जाहिर है ये नारा समाजवादी पार्टी या फिर कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकारों में से किसी एक के रचनात्मक दिमाग की उपज होगा और काफी सोच-विचार कर तैयार किया गया होगा। ये नारा प्रभावकारी भी दिखाई दे रहा है, लेकिन लगे हाथ समाजवादी पार्टी के नेता खुल कर तो नहीं लेकिन दबी जुबान से इस नारे में कुछ फेरबदल के साथ ये भी कह रहे हैं कि‘कांग्रेस से सोनिया-राहुल गांधी-प्रियंका के अलावा किसी और साथ पसंद नहीं है’। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की कांग्रेसियों के प्रति इस तरह की नापसंदगी खुल कर दिखाई भी दे रही है। कांग्रेस के लिए गांधी परिवार से उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी ही अभी तक अकेले मोर्चे पर डटे हुए हैं। प्रियंका और सोनिया गांधी के चुनाव प्रचार को लेकर अभी कुछ तय नहीं है। सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से चुनाव प्रचार से दूर हैं वहीं प्रियंका संभवत: रणनीतिक कार्यों की व्यसस्तता और अपनी साख की फिक्र को लेकर प्रचार से दूर हैं क्योंकि इस बार अमेठी-रायबरेली में भी कांग्रेस की जीत पक्की नहीं दिखाई दे रही है। जहां तक राहुल की बात है तो वो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों के ही उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं लेकिन बताया जा रहा है कि उनके अलावा कांग्रेस में दूसरी कतार के नेताओं के चुनाव प्रचार को लेकर समाजवादी पार्टी ही राजी नहीं है। समाजवादी पार्टी में उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि यूपीए सरकार में भ्रष्टाचार का मुद्दा अभी थमा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद से लेकर चुनावी सभाओं में यूपीए सरकार के समय हुए घोटालों को निशाना बना रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी निशाने पर हैं, इसलिए पार्टी ऐसे हालात में कोई जोखिम लेना नहीं चाहती। सत्ता से बाहर रहा गांधी परिवार निजी आरोपों से दूर है, इसीलिए वो तो चलेगा, लेकिन बाकी कांग्रेसी नेताओं से समाजवादी पार्टी दूरी बरत रही है। समाजवादी प्रियंका गांधी से प्रचार चाहती थी, बल्कि प्रचार के लिए प्रियंका के अभी तक नहीं उतरने से पार्टी में नाराजगी भी है। हालांकि समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल कहते हैं कि प्रियंका गांधी से चुनाव प्रचार करवाने का मामला कांग्रेस का अपना है, उसे इसके लिए बाध्य नहीं कर सकते। बहरहाल समाजवादी पार्टी के नेता इतनी रियायत जरूर बरत रहे हैं कि वो कांग्रेसी उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं, लेकिन अपने लिए उन्हें कांग्रेस के दूसरी कतार के नेताओं की जरा भी जरूरत नहीं है। यहां तक कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल और गुलाम नबी आजाद, सलमान खुर्शीद तक की समाजवादी पार्टी की ओर से कोई मांग नहीं है। पूर्व केंद्रीय मंत्रियों पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, जयराम रमेश, आनंद शर्मा, दिग्विजय सिंह, मनीष तिवारी जैसे नेताओं के प्रचार को लेकर भी सपा की तरफ से कोई मांग नहीं है, ये नेता कांग्रेसी उम्मीदवारों के लिए ही प्रचार कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेसी उम्मीदवार तक उनके प्रचार से बहुत उत्साहित नहीं हैं। यूपी के चुनावी समर में राहुल गांधी के बाद कांग्रेस की ओर से राज बब्बर ही चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं, कांग्रेसी उम्मीदवार भी बाकी नेताओं की तुलना में उनसे प्रचार चाहते हैं क्योंकि बॉलीवुड से जुड़ा होने की वजह से उनके साथ ग्लैमर भी है।

हिंदी अख़बार का बड़ा नाम दैनिक जागरण अब मुश्क़िलों में घिर गया है। अख़बार के ऑनलाइन एडिटर शेखर त्रिपाठी को आचार संहिता का उल्‍लंघन करने पर गिरफ्तार किया गया है। गाजियाबाद पुलिस ने सोमवार (13 जनवरी) रात को उन्‍हें गिरफ्तार किया। साथ ही लखनऊ और दिल्‍ली में संपादकों के ठिकानों पर छापेमारी भी की। पुलिस ने जागरण न्‍यू मीडिया सीईओ सुकीर्ति गुप्‍ता, जागरण इंग्लिश ऑनलाइन के डिप्‍टी एडिटर वरुण शर्मा और डिजीटल हैड पूजा सेठी के घरों पर छापे मारे। जागरण में प्रकाशित सर्वे में बीजेपी को साफ़ तौर पर बढ़त के साथ दिखाया गया जो कि एक पेड न्यूज़ का मामला है। जो कि दिखाता है कि किस तरह से जागरण ने बीजेपी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए इस तरह का सर्वे वोटरों को प्रभावित करने के लिए छापा। पत्रकारिता के नाम पर दैनिक जागरण को कलंक के रूप में देखा जा रहा है। इंडिया संवाद ने कल ही बताया था कि इनके संपादकों पर किस तरह से गिरफ़्तारी की तलवार लटक रही है और उसके बाद देर रात को ही संपादक की गिरफ़्तारी हो गई। दरअसल, इससे पहले चुनाव आयोग के आदेश पर पुलिस ने त्रिपाठी, अखबार के मैनेजिंग एडिटर और सर्वे करने वाली संस्‍था आरडीआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इनके खिलाफ उत्‍तर प्रदेश के पहले चरण के चुनाव के बाद एग्जिट पोल प्रकाशित करने का आरोप है। चुनाव आयोग ने पहले चरण के 15 जिला निर्वाचन अधिकारियों को सर्वे करने वाली संस्‍था ‘रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और दैनिक जागरण के मैनेजिंग एडिटर, एडिटर इन चीफ, एडिटर या चीफ एडिटर के खिलाफ तत्‍काल एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया था। आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल के मतदान बाद किये गये सर्वेक्षण के नतीजे का एक हिंदी दैनिक द्वारा प्रकाशन करना ‘‘जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा अनुच्छेद 126ए और बी का स्पष्ट उल्लंघन है और भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत चुनाव आयोग के कानून संबंधी निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं करना है।’’ अब सवाल तो यह भी उठ रहे हैं कि जिस तरह से चुनाव आयोग ने अपनी अवहेलना के चलते एक संपादक को गिरफ़्तार कराया है तो क्या उन नेताओं को भी चुनाव आयोग गिरफ़्तार करा पाएगा जो कि सरेआम कई बार आचारसंहिता और चुनाव आयोग का उल्लंघन करते हैं? उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में प्राप्त शक्तियों के तहत चुनाव पैनल ने मतदान बाद किये जाने वाले ऐसे सर्वेक्षणों के प्रकाशन और प्रसारण पर पाबंदी लगा रखी है ताकि इसके परिणाम मतदाताओं को प्रभावित ना कर सकें। वहीं इस बारे में दैनिक जागरण अखबार की ओर से कहा गया कि उत्तर प्रदेश के एग्जिट पोल के बारे में खबर अनजाने में उसकी अंग्रेजी वेबसाइट पर प्रकाशित हो गई थी और समूह के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इसकी जानकारी मिलते ही फौरन इसे हटा दिया गया था। अख़बार ने एक बयान में कहा, ‘‘ये साफ तौर पर कहा जा सकता है कि सिवाय अंग्रेजी डिजिटल माध्यम के एग्जिट पोल से जुड़ी कोई भी खबर दैनिक जागरण अखबार में प्रकाशित नहीं हुई। अंग्रेजी वेबसाइट पर एग्जिट पोल का जिक्र करते हुए अनजाने में एक खबर प्रकाशित हो गई। हालांकि, जैसे ही समूह के बड़े अधिकारियों के संज्ञान में ये खबर आई, गलती का खुद ही सुधार करते हुए इसे फौरन हटा दिया गया। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन करते हैं और चुनाव आयोग के सामने अपनी स्थिति साफ करने के लिए हम तथ्य आधारित विस्तृत जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया में हैं।’’ लेखक: अनूप श्रीवास्तव Email This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. twitter @theanoop18

उत्तर प्रदेश चुनाव के मध्य नजर देखते हुए अलग अलग पार्टियां अपने अपने तरीके से प्रचार प्रचार प्रचार प्रसार करने में जुट गई है अगर मीडिया के हिसाब से देखा जाए तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सबसे ज्यादा खर्च भारतीय जनता पार्टी कर रही है वहीं समाजवादी पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी साख बटोरने में तत्पर है ... प्रचार प्रसार का सबसे त्वरित माध्यम आधुनिक काल में फेसबुक और व्हाट्सऐप हो चुका है और भारतीय जनता पार्टी का खर्च प्रचार-प्रसार में सर्वाधिक देखने को मिल रहा है.... भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग द्वारा आचार संहिता लागू होने के बाद भी जितना खर्च कमल मेले और अन्य मदों पर कर रही है शायद ही कोई दल उत्तर प्रदेश में कर रहा हो... दैनिक जागरण पर चुनाव आयोग द्वारा fir कराना कहीं ना कहीं इस ओर इशारा कर रहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने पत्रकारिता पर अपना कब्जा पूरी तरह से जमा लिया है जिससे कहीं ना कहीं आने वाले समय में पत्रकारिता पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा... वही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी गठबंधन भी प्रचार प्रसार में लग गए हैं परंतु उनके प्रचार प्रसार का माध्यम जन-जन से मिलने का है जोकि परंपरागत तरीके से निभाया जा रहा है... बहुजन समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बहुत ही संयमित और अपने घाटी के वोटरों पर भरोसा कर चल रही है बसपा रैलियों में भी कम विश्वास कर जमीनी स्तर पर कार्य करने में जुट गई है....

इस्लामाबाद.पाकिस्तान में इस बार वेलेन्टाइन्स डे नहीं मनाया जा सकेगा। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने इस पर बैन लगा दिया। सोमवार को वेलेन्टाइन्स डे के खिलाफ जारी एक पिटीशन पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ये फैसला दिया। मीडिया के लिए भी सख्त गाइडलाइंस जारी की गई हैं।क्या है मामला.... -पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,हाईकोर्ट ने यह आदेश उस पिटीशन पर सुनवाई के दौरान दिया,जिसमें वेलेन्टाइन्स डे को इस्लाम विरोधी बताते हुए इस पर बैन की मांग की गई थी। -हाईकोर्ट ने मीडिया के लिए भी इस मसले पर सख्त गाइडलाइंस जारी कीं। कोर्ट ने कहा कि देश के न्यूज चैनल्स और अखबार भी वेलेन्टाइन्स डे से जुड़ी खबरें और फोटो पब्लिश न करें। -ऑर्डर में साफ कहा गया है कि किसी भी पब्लिक प्लेस पर वैलेंटाइन डे सेलिब्रेट नहीं किया जा सकेगा। पहले भी होता रहा है बवाल -हालांकि,ये पहला मौका नहीं है,जब पाकिस्तान में‘वेलेन्टाइन्स डे’पर बैन की मांग उठी हो,और मामला कोर्ट तक पहुंचा हो। -हाफिज सईद का संगठन जमात उद दावा और जमात-ए-इस्लाम इसका विरोध करते रहे हैं। -पहले भी कई लोग और संस्थाएं‘वेलेन्टाइन्स डे’को इस्लाम विरोधी बताते हुए इस पर बैन लगाने के लिए कोर्ट जा चुकी हैं। -हालांकि,ये पहली बार ही हुआ है कि इस पर सीधे हाईकोर्ट ने बैन लगाया है। -पिछले साल यूनियन होम मिनिस्टर निसार अली खान ने भी वैलेंटाइन डे’पर बैन लगा दिया गया था।

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Post by अंकिशा राय
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जी हां, यहां बात हो रही है दंगल गर्ल फातिमा सना शेख की। खबर है कि फातिमा को यशराज बैनर की फिल्म ठग्स ऑफ हिंदुस्तान के ...
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- Feb 23, 2017
हर किचन में कुछ ऐसी चीजें मौजूद होती है। जो कि आपकी सेहत के साथ-साथ सौंदर्य के लिए भी काफी फायदेमंद ...
Post by सत्य चरण राय (लक्की)
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दिल्ली: ATM से निकले 2 हजार के चूरन वाले नोट, आरोपी गिरफ्तार Feb 2017 नई दिल्ली [जेएनएन]। राजधानी में एटीएम से 2000 ...
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- Feb 09, 2017
लड़कियों का फेवरेट होता है मेकअप , मेकअप में भी लिपस्टिक होती है सब लड़कियों की फेवरेट । लेकिन क्‍या आप जानते हैं ...

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