Public Opinion

Public Opinion (214)

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश चुनाव में एक नए 4G प्लान के साथ कूदने का मन बना लिया है. बीजेपी का नए 4G मंत्रा में शामिल होंगे गांव, गौ, गंगा और गीता. हालांकि बीजेपी के एजेंडा का केंद्र बिंदू किसान रहेंगे. मेल टुडे के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बीजेपी किसान मोर्चा के नवनियुक्त प्रमुख वीरेंद्र सिंह ने बीजेपी के 4G प्लान की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि पार्टी का मकसद उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के समय मिली जीत को दोहराना है. जब सब बीजेपी के सामने पस्त नजर आए थे. उत्तर प्रदेश के भदोई से सांसद वीरेंद्र सिंह ने ये भी बताया कि बीजेपी का चुनावी घोषणापत्र किसानों को ध्यान में रख कर तैयार किया जा रहा है. जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 दिसंबर को दिए संबोधन में साफ कर ही चुके हैं कि इस बार बजट में किसानों को लाभांवित करने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे. वीरेंद्र ने बताया कि 4G प्लान ये ध्यान में रखकर बनाया गया है कि 'गांवो के बिना देश का विकास संभव नहीं, गांव के लोगों खासकर किसानों के लिए गाय का बड़ा महत्व है. वैसे ही गंगा गावों की लाइफलाइन मानी जाती है वहीं गीता हमारी संस्कृति का प्रतिबिंब है.' समाजवादी पार्टी में घमासान और अपने पिता मुलायम सिंह से चुनाव चिन्ह की लड़ाई जीतने के बाद अखिलेश यादव ने बीजेपी की चिंता बढ़ा दी है. बीजेपी ने उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए अब कमर कस ली है जो अखिलेश के उदय के बाद ज्यादा मुश्किल होने की संभावना बढ़ गई है. बीजेपी 2002 के बाद से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर है. कांग्रेस और सपा के गठबंधन की पुष्टि होने के बाद से बीजेपी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. लेकिन वीरेंद्र सिंह के इस 4G फॉर्मूले से किसानों को साधकर केसरिया पार्टी जाति से ऊपर की राजनीति करने को तैयार है.

अच्छा हुआ दबंग बरी हो गया। फिर आना होगा 25 जनवरी को जोधपुर में। 18 जनवरी को राजस्थान के जोधपुर की अदालत ने मुम्बईया फिल्मों के दबंग अभिनेता सलमान खान को बरी कर दिया। सलमान पर 18 वर्ष पूर्व काले हिरण के शिकार का आरोप है। सलमान और अन्य अभिनेत्रियों के विरुद्ध चार मुकदमे दर्ज हुए थे। दो मुकदमों में सलमान पहले ही बरी हो चुके हैें जबकि तीसरे मुकदमे में आज बरी हो गए। चौथे मुकदमे का फैसला 25 जनवरी को आने की उम्मीद है इसलिए सलमान को एक बार फिर 25 जनवरी को जोधपुर की अदालत में हाजिर होना पड़ेगा। सलमान के खिलाफ जो चार मुकदमे दर्ज हुए, उनमें से दो में निचली अदालत में सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में सलमान खान हाईकोर्ट से बरी हो गए। हाईकोर्ट ने जब बरी किया तो कहा गया कि यह न्याय हुआ है, लेकिन जब निचली अदालत ने सजा सुनाई तो कहा गया कि सलमान सेलिब्रिटी हैं इसलिए सजा हुई है। यह भी कहा गया कि सलमान मुसलमान हैं इसलिए जेल जाना पड़ा। लेकिन 18 जनवरी को जोधपुर की उसी अदालत ने सलमान को बरी कर दिया, जिसने पूर्व में दो मुकदमों में सजा सुनाई थी। असल में अदालत सबूतों के आधार पर अपना फैसला देती है। देश की न्याय व्यवस्था में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि निचली अदालत के फैसले से संतुष्टि न मिले तो ऊपरी अदालत में अपील की जाए। हाईकोर्ट ने जिन दो मुकदमों में सलमान को बरी किया है उसके विरूद्ध राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर रखी है। फिलहाल तीसरे मुकदमें में निचली अदालत से ही बरी हो जाने पर सलमान को राहत मिली है। अब उनके फैन्स जम कर जश्न मना सकते हंै। सुनील मित्तल

समाजवादी पार्टी का चुनाव निशान साइकिल अखिलेश यादव गुट को मिलने के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का पूरा स्वरूप ही बदलता दिख रहा है। समाजवादी पार्टी में अखिलेश और मुलायम गुट के झगड़े की वजह से ऐसी परिस्थितियां बन रहीं थीं कि ये चुनाव अब तक बीजेपी के लिए walkover माना जा रहा था । इस झगड़े का सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को मिलता दिखाई दे रहा था । हालांकि चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलते नज़र आ रहे हैं । उत्तर प्रदेश का चुनाव अब त्रिकोणीय ना होकर Bipolar होता नज़र आ रहा है । यही नहीं अगर अखिलेश यादव अगर राहुल गांधी और अजित सिंह के साथ मिलकर मजबूत महागठबंधन बना लेते हैं तो संभावित गठबंधन की भूमिका उत्तर प्रदेश में ठीक वैसी ही होगी जैसी बिहार चुनाव में नीतीश के नेतृत्व में बने महागठबंधन की थी । साइकिल का चुनाव निशान अखिलेश यादव को मिलने का समाजवादी पार्टी पर तो असर पड़ा ही है साथ ही साथ इसका सीधा असर भारतीय जनता पार्टी पर भी पड़ने जा रहा है । समाजवादी पार्टी और यादव परिवार के झगड़े से फायदा उठाने की ताक में बैठी बीजेपी को अब पूरी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा । माना जा रहा है कि संभावित गठबंधन का एजेंडा caste और Communal मुद्दों से अलग government और development का होगा । संभावित महागठबंधन गरीबी, बेरोज़गारी, भुखमरी, क्षेत्रीय असंतुलन और नोटबंदी से पैदा हुई दुश्वारियों को लेकर जनता के बीच जाएगा। राजनैतिक समीकरण के बदलने के साथ ही ये चुनाव अब किसी के लिए cakewalk नहीं रह गया है, बल्कि अब लड़ाई बराबर की है । अब प्रत्याशियों का चयन बेहद खास और महत्वपूर्ण हो गया है, चाहे बीजेपी हो या फिर संभावित महागठबंधन, किसी ने भी प्रत्याशियों के चयन में थोड़ी भी लापरवाही बरती तो इन दलों को इसका सीधा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए अब सभी दलों के लिए प्रत्याशियों का चयन सबसे बड़ी चुनौती है। अगर प्रत्याशियों के चयन की प्रतिक्रिया में आंतरिक विद्रोह बढ़ा, तो विद्रोही प्रत्याशी उन दलों के political propects को बुरी तरह प्रभावित करेंगे।

लखनऊ. इलेक्शन कमीशन ने समाजवादी पार्टी के सिंबल साइकिल के विवाद पर सोमवार को अखिलेश यादव के पक्ष में फैसला सुनाया। अखिलेश को साइकिल और समाजवादी पार्टी, दोनों मिल गई। इस फैसले के बाद DainikBhaskar.com ने CSDS से जुड़े पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर एके वर्मा, सीनियर जर्नलिस्ट प्रदीप कपूर, योगेश श्रीवास्तव और श्रीधर अग्निहोत्री से बात कर जाना कि किन स्थितियों में मुलायम-अखिलेश नुकसान में रह सकते हैं। 5 प्वाइंट में समझें... 1. इस कदम से अपनी इमेज को नुकसान पहुंचाएंगे मुलायम - मुलायम के पास दूसरा रास्ता ये है कि वह नए सिंबल पर चुनाव में उतरें। हालांकि, वे खुद चुनाव लड़ने जैसा खतरनाक कदम नहीं उठाएंगे। शिवपाल गुट के नेताओं को लेकर वे चुनाव में जा सकते हैं। - हालांकि, इससे उन्हें कुछ खास फायदा नहीं होगा, क्योंकि यूपी में मुलायम की पकड़ वाले 10 जिले हैं। इसमें इटावा, मैनपुरी, एटा, कासगंज, बदायूं, कन्नौज, औरैया, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद और आजमगढ़ जैसे जिले शामिल हैं। 2012 में सपा ने इन 10 जिलों की 42 सीटों में से 36 सीटें जीती थीं। - इस समय अखिलेश का ग्राफ बढ़ा है। ऐसे में, इन सीटों पर मुलायम सिंह ज्यादा से ज्यादा 8 से 10 सीट जीत सकते हैं। वहीं, बाकी सीटें अखिलेश के ही खाते में जाएंगी। - अगर मुलायम लोकदल के सिंबल पर चुनाव में जाते हैं तो भी उनके नाम पर ज्यादा से ज्यादा 3 से 5 सीटें मिल सकती हैं। - दरअसल, लोकदल कभी वेस्‍ट यूपी की प्रभावी पार्टी थी, लेकिन अब अजीत सिंह की रालोद के आगे उसका दबदबा खत्म हो गया है। 2. यादव वोट आ सकता है अखिलेश के साथ, मुस्लिम वोटों पर रहेगी नजर - प्रदेश में 8 से 10 फीसदी यादव वोट है, जो अब अखिलेश यादव के साथ आ सकता है। - दरअसल, 2012 में सपा को 66 फीसदी यादव वोट मिला था, इसलिए अभी भी ये कयास लगाए जा रहे हैं कि टकराव खत्म होने के बाद ये वोट फिर से सपा के पास आएगा। - इसी तरह प्रदेश में लगभग 19 फीसदी मुस्लिम वोटर्स हैं, जो अब तक कशमकश की स्थिति में थे। 2012 में सपा को सबसे ज्यादा 39 फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे। हालांकि, सोमवार को ही मुलायम सिंह ने कहा कि अखिलेश ने जो किया, उससे मुस्लिमों के बीच पार्टी की छवि खराब हुई। 3. कांग्रेस-आरएलडी से गठबंधन नहीं किया तो अखिलेश को नुकसान - वेस्‍ट यूपी में सपा कमजोर है, लेकिन कांग्रेस और आरएलडी से गठबंधन होने के बाद सपा यहां मजबूत हो सकती है। दरअसल, यहां 24 सीट सपा के पास है, जबकि अन्य दलों के पास 49 सीटें हैं। इसमें से कांग्रेस के पास 5, जबकि रालोद के पास 7 सीट है। - ऐसे में, तीनों के साथ आने से अखिलेश को फायदा मिल सकता है। अगर गठबंधन नहीं हुआ तो अखिलेश नुकसान में रह सकते हैं। 4. इस तरह बनी रह सकती है मुलायम की इमेज - एक्सपर्ट्स का कहना है कि इलेक्शन कमीशन के इस फैसले के बाद मुलायम को अपने 6 दशक के पॉलिटिकल करियर में सबसे बड़ा झटका लगा है। - उनके पास एक रास्ता है कि अब वे अपने समर्थकों से कहें कि वे बूढ़े हो गए हैं। पार्टी और सिंबल अखिलेश को मिल गया है। - ऐसे में समर्थक अखिलेश को सपोर्ट करें, ताकि पार्टी भारी बहुमत से जीतकर सत्ता में वापस आए। - ये हो सकता है कि अब मुलायम खुद को पार्टी के मार्गदर्शक मंडल दल का अध्यक्ष मानकर अखिलेश के साथ चुनाव में जाएं। 5. अखिलेश को किस तरह फायदा मिल सकता है - अखिलेश को सबसे बड़ा फायदा ये मिलेगा कि सपा का जो परंपरागत वोटर है, उसका कन्फ्यूजन खत्म हो गया है। ऐसे में, वह साइकिल के सिंबल को ही देखकर वोट करेगा। - अखिलेश सरकार की 5 साल की जो नाकामियां हैं, अब उसका ठीकरा सीएम पार्टी के अंदर अपने विरोधियों पर फोड़ेंगे, जबकि विकास का सेहरा अपने सिर बांधेंगे। - जिस तरह से कभी मुलायम धरतीपुत्र बनकर उभरे थे, उसी तरह अखिलेश की इमेज भी एक मजबूत लीडर के रूप में उभरकर सामने आई है। - अखिलेश के कार्यकाल में उन पर साढ़े चार सीएम का आरोप लगता रहा है। विवाद के बाद वह उस इमेज से बाहर आ गए हैं। साभार : भास्कर

समाजवादी पार्टी पर वर्चस्व की लड़ाई का फैसला हो चुका है। जीत अखिलेश की हुई है. दुनिया तो ये जानती है कि चुनाव आयोग में साइकिल के निशान के लिए मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लड़ रहे थे लेकिन अब चुनाव आयोग के फैसले में खुलासा हो रहा है कि साइकिल निशान के लिए मुलायम सिंह यादव ने अपनी ओर से चुनाव आयोग के मांगने पर हलफनामा दिया ही नहीं। एक हलफनामा मुलायम की ओर से दिया गया लेकिन न तो शिवपाल यादव ने, न ही अमर सिंह ने मुलायम के लिए हलफनामा पेश किया। साइकिल निशान के लिए अखिलेश ने 4 हजार 716 हलफनामा पेश किए जिससे साफ था कि पार्टी पर अखिलेश की जबर्दस्त पकड़ बनी हुई है। अखिलेश के समर्थन में 228 में से 205 विधायकों ने, 68 में से 56 विधान पार्षदों ने, 24 में से 15 सांसदों ने, 46 में से 28 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों ने, 5731 में से 4400 प्रतिनिधियों ने अखिलेश के समर्थन में हलफनामा दिया जिससे पार्टी पर अखिलेश का दबदबा चुनाव आयोग में साबित हुआ। ऐसा नहीं है कि मुलायम सरेंडर के मूड में थे। अखिलेश कैंप की ओर से पेश हलफनामों में नुक्ताचीनी मुलायम ने चुनाव आयोग के सामने रखकर साइकिल पर अखिलेश का दावा कमजोर करने की कोशिश की। चुनाव आयोग के सामने उन्होंने ये भी कहा कि पार्टी में कोई विवाद नहीं है। ऐसा नहीं है कि मुलायम सरेंडर के मूड में थे। अखिलेश कैंप की ओर से पेश हलफनामों में नुक्ताचीनी मुलायम ने चुनाव आयोग के सामने रखकर साइकिल पर अखिलेश का दावा कमजोर करने की कोशिश की। चुनाव आयोग के सामने उन्होंने ये भी कहा कि पार्टी में कोई विवाद नहीं है। रामगोपाल यादव ने कहा, ”मैं चुनाव आयोग को बधाई देना चाहूंगा. आयोग ने बहुत सही और न्यायसंगत फैसला दिया है. देश में जहां भी समाजवादी पार्टी है सभी अखिलेश के पक्ष में हैं. इससे साफ हो गया है कि अखिलेश एक बार फिर सीएम बनेंगे। जब तक चुनाव हैं तब तक मुलायम सिंह के बारे में कुछ नहीं बोलूंगा। हमारे बीच फूट थी इसीलिए चुनाव आयोग में दो गुट बैठे थे। नेता जी को इस वजह से कुछ समझ नहीं आया क्योंकि कुछ ऐसे लोग उनके साथ हैं जो पार्टी को बर्बाद करना चाहते हैं। मेरी मुख्यमंत्री से बात हुई है, वे बहुत खुश हैं.” कांग्रेस के साथ गठबंधन पर रामगोपाल यादव ने कहा, ”उम्मीद है.”

विषय:- स्वामी विवेकानन्द- एक युवा संत एवं विचारक प्रेरणास्रोत प्रखर वक्ता,विचारक युवाओं के प्रेरणास्रोत,समाज सुधारक स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती 12 जनवरी को युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है!! किसी भी देश के युवा उस् देश के भविष्य होते हैं और युवाओं के हाथों में देश की तरक्की की बागडोर होती है!! आज के समय में जहां हर तरफ भ्रष्टाचार, बुराई, अपराध का बोलबाला है, ऐसे में देश की युवा शक्ति को जगाना और उन्हें देश के प्रति अपने कर्तव्यों का अहसास कराना अतिआवश्यक है!! स्वामी जी ने अपने विचारों के क्रांति और तेज से सारे युवाओं को नई उमंग से भरकर उन्हें निरन्तर सही कार्य करने की प्रेरणा देते हुए उनमें नई ऊर्जा और सकरात्मकता का संचार करते है!! अपने जीवनकाल में स्वामी जी ने न केवल पूरे भारत का भ्रमण किया, बल्कि लाखों लोगों से मिले उनके बीच गए और उनका दुख-दर्द भी बांटा!! स्वामी जी ने कहा था कि जब तक देश की रीढ़ 'युवा' अशिक्षित रहेंगे, तब तक देश को उन्नति की ओर ले जाना असंभव होगा!! इसलिए उन्होंने अपनी ओजपूर्ण वाणी से सोए हुए युवकों को जगाने का काम शुरू कर दिया!! 39 वर्ष की अल्पायु में ही स्वामी जी लीन हो गए परन्तु आज भी उनके द्वारा कहे गए शब्द विश्व के प्रेरणादायी है!! उनके द्वारा कहे गए शब्द इंसान के निराशा एवं हताशा होने पर उत्साही,ओजस्वी एवं अनन्त ऊर्जा देने वाला विचार बनता है!! अंतिम में स्वामी विवेकानन्द जी को नमन करते हुए उनके 154वे जन्मदिवस पर उन्हें शत शत वंदन करता हु !! "जिनके ओजस्वी बचनों से, गूँज उठा था विश्व गगन" "वही प्रेरणा स्रोत हमारे ,स्वामी पूज्य विवेकानन्द" द्वारा:-पुनीत पांडेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरखपुर

संपूर्ण विश्व में भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जिसे ‘भारत माता’ के नाम से संबोधित किया जाता है क्योकि इस धरा ने समय-समय पर अपनी और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए अनेकों महापुरुषों और वीरों को जन्म दिया है. उन्हीं महापुरुषों में एक नाम है ‘स्वामी वेवेकानंद’, इनके नाम में ही अखिल भारतीय संस्कृति का समावेश है. महान विचारक स्वामी विवेकानंद के जन्म से यह धरती भी गौरवान्वित हुई. स्वामी जी का जन्म उस समय हुआ जब यह धरती माँ गुलामी की जंज़ीरों में जकड़ी हुई थी. हमारी विरासत, संस्कृति, धर्म, शिक्षा, भाषा, सभ्यता सब कुछ इस धरा से लुप्त हो रहा था. हम इस लेख के माध्यम से महान विचारक स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर कुछ रोशनी डालने की कोशिश करेंगे: 12 जनवरी 1863 की सुबह सूर्योदय से ठीक छः मिनट पूर्व विवेकानंद जी का जन्म हुआ. ऐसे महापुरुष का स्वागत खुद प्रकृति ने मंगल बेला में मंगल शंख और मंगल ध्वनि से किया. आपका जन्म कोलकात्ता की पावन भूमि में हुआ. आपके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त तथा माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था. बाल्यकाल में आपको नरेंद्र दत्त के नाम से और आगे चलके स्वामी विवेकानंद के नाम से जाना गया. नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद तक का सफ़र बहुत ही प्रेरणादायक था. पाँच वर्ष की उम्र में ही नरेंद्र को शिक्षा के लिए पाठशाला में दाखिला करा दिया गया. 1879 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण कर कोलकात्ता के जनरल असेम्बली कॉलेज से बी. ए. की परीक्षा भी उत्तीर्ण की. आप पर आपके पिता के पाश्चात्य सभ्यता और अंग्रेज़ी शिक्षा के विचारों का तो असर नही हुआ. अपितु आपकी माताजी के धार्मिक आचार-विचारों का अविश्वसनीय प्रभाव पड़ा, जिस कारण आपका बचपन से ही धार्मिक प्रवृति में रुझान रहा. आपके अंदर बचपन से ही परमात्मा को जानने और देखने की प्रबल इच्छा रही. इसी उत्सुकतावश नरेंद्र ने अपनी तलाश जारी रखी और इसी तलाश में उन्होंने सन् 1881 में सर्व प्रथम रामकृष्ण परमहंस से मुलाकात की और अपनी जिज्ञासा को शांत करने हेतु वही आश्रम में शरण ली. कुछ ही दिनों में परमहंस जी ने नरेंद्र की योग्यता को भाप लिया और उनके गुणों को परखने के बाद कहां कि ”नियती ने कुछ खास कार्य हेतु तुम्हें भेजा है, तुम्हें समस्त मानव जाति का कल्याण करना है, तुम सिर्फ़ अपने देश तक ही सीमित नही रहोगें बल्कि विदेशों में भी भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना है. जिससे हमारे देश के हताश हुए नौजवानों को तुमसे अपने देश व धर्म के प्रति प्रेरणा मिलेगी.” स्वामी परमहंस की सारी बातें सुनकर नरेंद्र ने अपना सारा जीवन भक्ति, धर्म और देश को समर्पित करना ही अपना परम कर्तव्य समझा और परमहंस जी को अपना गुरु बनाया. नरेंद्र बहुत जल्द परमहंस के प्रिय और अनुयायी शिष्य बने. नरेंद्र के सन्यास लेने के निर्णय पर परमहंस ने सन्यास का विरोध करते हुए कहां ”अगर तू अपनी मुक्ति की इच्छा हेतु सन्यास ले रहा है तो यह विचार त्याग दें क्योकि दुनिया में लाखों लोग दुख से पीड़ित है, उनका दुख दूर करने कौन आयेगा.” तत्पश्चात नरेंद्र ने परमहंस से वेद-वेदांत, ग्रंथों की शिक्षा ग्रहण कर महारथ हासिल की और कहा ”सन्यास का वास्तविक अर्थ, मुक्त होकर जन सेवा’ करना ही असली सन्यास है. सिर्फ़ स्वयं के मोक्ष की कामना से जो सन्यास लेता है वो स्वार्थ है.” इसलिए समस्त मानव जाती के कल्याण व उनके मोक्ष हेतु नरेंद्र ने स्वयं के लिए सन्यास का मार्ग चुना. जिसके बाद से वे नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद कहलाये. स्वामी जी काली माँ के परम भक्त थे. सन् 1886 में गुरु परमहंस की मृत्यु के पश्चात स्वामी जी ने कोलकात्ता से प्रस्थान किया और उत्तर में वराद नगर के आश्रम में रह कर दर्शन व अन्य शास्त्रों का गंभीर अध्ययन किया और दो वर्ष की कठोर तपस्या के बाद 25 वर्ष की आयु में ही स्वामी जी ने गेरुवेवस्त्र को धारण किया और देश-विदेश की यात्रा पर निकल पड़े. स्वामी जी ने सारे जगत को आत्म-रूप बताया और अपने उपदेशों में कहा ”आत्मा को हम देख नही सकते किंतु अनुभव कर सकते है. सारे जगत का निर्माण आत्मा से होता है और उसी में विलीन हो जाता है. मनुष्य धर्म के लिए नही है बल्कि धर्म मनुष्य के लिए है.” भारत में विशेषकर युवाओं के लिए उनका यह विचार बहुत ही प्रसिद्ध हुआ- ”उठो, जागों और लक्ष्य की प्राप्ति होने तक रूको मत.” अपने संबोधन से उन्होंने सम्मेलन में एक अलग पहचान कायम की. यूरोपीय देशों के अतिरिक्त स्वामी जी ने अपना अधिकतम समय अमेरिका और इंग्लैंड के लोगों को दिया. वहाँ रहकर उन्होंने भाषण, वाद-विवादों और लेखों द्वारा हिंदुत्व को फिर से जीवंत किया और कहा हिंदू धर्म भी श्रेष्ठ है, इसमें सभी धर्मो को समाहित करने की क्षमता है. 11 सितंबर, 1883 में शिकागों के विश्व धर्म सम्मेलन में अपना ऐसा ओजस्वी भाषण दिया कि सभी मंत्र-मुग्ध होकर तालियां बजाते हुए सुनते रहे. स्वामी विवेकानंद जी को अपने भाषण के लिए 20 मिनट की समय अवधि दी गई थी. लेकिन स्वामी जी भाषण देते गये और निर्धारित समय कब समाप्त हुआ किसी को पता नही चला. अपनी इसी ओजस्वी वाणी के कारण भाषण के पश्चात हज़ारों लोग स्वामी जी के शिष्य बन गये. शिकागों में भाषण देना उनके लिए कतई आसान नही था. स्वामी जी के सामने कई चुनौतियाँ और परेशानियां भी आई, लेकिन उगते सूरज को भला कौन रोक सकता है. इस तरह अनेकों विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए विवेकानंद जी ने सात समंदर पार विदेशों में भी भारतीय संस्कृति का परचम लहराया. ये कहना कतई गलत नही होगा कि भारतीय संस्कृति को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने का एक मात्र श्रेय स्वामी विवेकानंद जी को ही जाता है. स्वामी जी ने चार वर्षो तक विदेशों में घूम-घूम कर सभी धर्मो का सम्मान करते हुए हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार किया और भारत को विश्व के नक्शे में स्थान दिलवाया. जिसके बाद से भारत को एक गरीब देश के रूप में नही बल्कि सुसंस्कृत देश के रूप में पहचान मिली. सन् 1887 में स्वामी जी स्वदेश लौट आयें. वे अपने भाषण से पराधीन भारतीय समाज को स्वार्थ, भय और कायरता की नींद से झंझोर कर जगाया और कहा- ”मैं हज़ार बार नरक में जाने को तैयार हूँ यदि मैं अपने सोये हुये देशवासियों का जीवन-स्तर थोड़ा सा भी उठा सकु.” अपनी ओजपूर्ण वाणी द्वारा वे सदा ही भारतीय युवाओं को प्रेरित और उत्साहित करते रहे. स्वामी जी एक महान देशभक्त भी थे. उन्होंने अशिक्षा, अज्ञान, भूख, बिमारी और ग़रीबी से लड़ने के लिए राष्ट्र में नई चेतना भरी और कहा ‘मानवता सर्वोपरि’ है. सन् 1899, कोलकात्ता में भीषण प्लेग फैला था. अस्वस्थ होते हुये भी स्वामी जी ने तन-मन और धन से बिमार लोगों की सेवा कर इंसानियत की मिशाल कायम की. एक मई, 1897 में स्वामी विवेकानंद जी ने ‘राम-कृष्ण परमहंस’ मिशन की स्थापना की. यह मिशन मानव सेवा और परोपकार को ही कर्मयोग व एकमात्र लक्ष्य मानता है. स्वामी जी के यह अनमोल शब्द आज भी याद आते है:- ”हमें किसी भी परिस्थिति में अपने लक्ष्य से भटकना नही चाहिये.” अपने इन्हीं महान विचारों के कारण स्वामी जी संपूर्ण विश्व के ‘जननायक’ बन गये. बिमारी के कारण 39 वर्ष की अल्प आयु में 4 जुलाई, 1902 की रात वे हमेशा के लिए भारत माता की गोद में चिर-निद्रा में सो गये. छोटी सी उम्र में ही उन्होंने अपने जीवन को इतना प्रेरणादायक बनाया की वे आज हमारे बीच ना होते हुए भी युग युगांतर तक अमर हो गये. जब-जब मानवता हताश-निराश होगी, तब-तब स्वामी विवेकानंद जी के विचार, भाषण और उपदेश विश्व में उर्जा प्रदान करेंगे और प्रेरणा देते रहेंगे. जिससे आने वाली पिढियो का सदा मार्ग दर्शन होता रहेगा. स्वामी विवेकानंद जी का जन्मदिन ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. उनकी शिक्षा में सबसे महान शिक्षा है – ”मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है.” जब-जब भारत माँ को अपनी विरासत की रक्षा और मानव कल्याण हेतु आवश्यकता होती है, तब-तब यह जननी युग अवतारी पुरुष को जन्म देती है और फिर यह युग अवतारी समाज को अपनी वाणी सुनने के लिए बाध्य कर देते है. जिससे इस समाज की आत्मा फिर से जागृत होकर अपने देश व धर्म की रक्षा करती है. विश्व का इतिहास इसका साक्षी है- रामकृष्ण, बुद्ध, महावीर, गुरुनानक, ईसा मसीह, पैगंबर आदि अनेक महान आत्मायें इसका विशाल और ज्वलंत उदाहरण है. विवेकानंद जी का जीवन काल इतना अद्भुत था कि पूरा विश्व, आने वाली कई सदियों तक यूही याद और नमन करता रहेगा ऐसे युग पुरुष को. इनके जीवन से हमें शिक्षा लेनी चाहिये, इनके आदर्शो को हम अपने जीवन में धारण करे तभी सच्चें अर्थो में ऐसे महापुरुष को हमारी तरफ से सच्ची श्रद्धांजलि होगी. अपने अद्भुत विचारों के कारण आज भी युवा पीढ़ी के लिए वे प्रेरणा के स्त्रोत है. उनके महान कार्यो और अखिल भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए स्वामी विवेकानंद जी को सदा याद किया जायेगा. 12 जनवर2017 को स्वामी विवेकानंद जी के 154 वीं जयंती पर हम सब उन्हें भावविभोर श्रद्धांजलि देते हुये शत-शत नमन करते है. धन्यवाद !

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