Public Opinion

Public Opinion (273)

जय श्री राम शुभ रविवार भारत माता की जय ॐ सूर्याय नमः योगी जी गलत कर रहे हैं अब हमें भी लग रहा है क्योकि सेकुलर गिरोह एक धर्म को गम्भीर बीमारियों द्वारा खत्म करने का प्लान बनाए थे और योगी जी उनको बचा रहे अगर आप जानेंगे क्यों सर्वोच्च न्यायालय 2014 में यूपी सरकार को अवैध बूचड़खाने बन्द करने का आदेश दिया था क्योकि NGT बार बार यूपी सरकार चेता रही थी की अवैध बूचड़खाने से मांस खाने वाले 80 % से ज्यादा लोग गम्भीर बीमारियों के शिकार हो रहे है जिसमे हार्ट अटैक ।। हाई ब्लड प्रेशर ।। दमा ।। कैंसर पैरालाइज जैसे गम्भीर बीमारिया फ़ैल रही है फिर सर्वोच्च न्यायालय अवैध बूचड़खाने बन्द करने और वैध में जानवरों की जाँच के बाद ही कटाई और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखने का आदेश दिया था सही जानकारी तो हमे भी नही पता था क्योंकि हम लोग भी सिर्फ गऊ बंश कटने का अड्डा समझ रहे थे वैसे आपको बता दे की वैध बूचड़खाने में गऊ बंश प्रतिबंधित है बाकि आप खुद सोच लीजिये योगी जी उन्हें बचा रहे या बेरोजगार कर रहे क्योकि दाढ़ी बनाने का ब्लेड दोबारा खुद पर प्रयोग नही करते और कसाई एक ही औजार दिनभर बिना धोये चलाता है हर हर महादेव भीमसेन त्रिपाठी राष्ट्रीय संयोजक तिरपाल से मंदिर निर्माण मुहीम अयोध्या Bhimsen Tripathi Panditji श्री राम मंदिर निर्माण के लिए धन्यवाद जय श्री राम हर हर महादेव यह लेखक की व्यक्तिगत राय है ।।

हिंदुत्व की पहचान को स्थापित करने में लगे हुए सुदर्शन न्यूज़ चैनल के चेयरमैन सुरेश चौहानके को मालेगाव से धमकी मिली है ... , पढ़िए सुरेश जी का अगला कदम मिनी पाकिस्तान कहे जाने वाले मालेगांव में हिंदुस्तानी नव वर्ष को मनाने जा रहा हू। नमक हराम देशद्रोही औवैसि के कुत्तों ने भौंकना शुरू किया है और कई मुस्लिम संघटन मेरे आगमन का विरोध कर रहे है। ८०% मुस्लिम बने मालेगांव में मेरे साथ ५०,००० से ज़्यादा हिंदू स्वाभिमानी नववर्ष मनाने और वहाँ पर बचे हिंदूओ के मन में विश्वास पैदा करने आ रहे है। आप भी चलो मालेगांव! मैं २८ को सुबह १० बजे मुंबई एअरपोर्ट पहुँचूँगा। नासिक होते हुए ४ बजे मालेगांव पहुँचूँगा। (सचिन) से संपर्क कर मेरे साथ जुड़ जाए - 09822647166

आज का लेख.. विषय:- सराहनीय है योगी जी का प्रारंभिक कदम... मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही योगी आदित्यनाथ जी पुरे एक्शन में है!! जिस प्रकार लगातार वो फैसले,आदेश और नियम बना रहे वो सराहनीय है!! शिक्षा,सुरक्षा, स्वच्छता ,संस्कृति और सभ्यता तीनो के प्रति वो लगातार गंभीर एवम कठोर कदम उठा रहे!! एंटी रोमियो,बूचड़खाने,सस्पेंड,औचक निरीक्षण,प्रशाशन को कड़ा करना,आदि कई ऐसे महत्वपूर्ण कदम है जो समाज के लिए हितकर साबित साबित होगा!! आज देख कर ऐसा लगता है कि अगर कार्यवाही ऐसे ही होती रही तो जल्द ही उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश की ओर अग्रसर होगा!! अब देखना होगा की ये सरकार क्या अनवरत ऐसे ही फुल्लस्पीड से कार्य करेगी या फिर पिछली सरकारों की तरह चंद दिन ख्वाब दिखा पब्लिक को मत्भर्मित करेगी!!! द्वारा:- पुनीत पाण्डेय इलाहीबाग,गोरखपुर 9452246780

जय श्री राम शुभ शनिवार भारत माता की जय ॐ नमः शिवाय शनिप्रादोष ब्रत की शुभकामनाए मोदी सरकार पिछड़ा बर्ग आयोग का पुनर्गठन कर रही है अब हाय तौबा मचा है कि यादव को जनरल बनना पड़ेगा यह 2001 का सर्वोच्च न्यायालय का आदेश था कि जो भी जाति का पारिवारिक आय प्रति परिवार पति पत्नी और 2 बच्चे 15000 महीना से ज्यादा हो उनको आरक्षण से मुक्त किया जाय यादव 22000 जाट 26000 जाटव 16000 ब्राह्मण 9000 क्षत्रिय 9800 यह है टॉपपांच का रिजल्ट अब कह सकते है कि सभी यादव या जाटव ऐसे नही है वह तोमुलायम परिवार और मायावती के शामिल होने से एवरेज इतना दिख रहा तो दूसरे जातियों में से उद्योगपति निकाल दे तो उनका एवरेज 30 रूपये से नीचे हो जाएगा या तो जो सम्पन्न है स्वेक्षा से आरक्षण छोड़कर अपनी जाति का भला करे नही तो सवर्ण बने 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद मै लगातार पी एम ओ को समझा रहा था कि आज तक दलित आरक्षण का लाभ 80 % से ज्यादा मुस्लिम और ईसाई उठा रहे जबकि उनके धर्म में जातिगत भेदभाव नहीं होता आखिर 5 अप्रैल 2015 को ईसाई मुस्लिम का आरक्षण खत्म हुवा और 2 करोड़ लोग वापस हिन्दू बने आज मणिपुर गोवा में बीजेपी सरकार सम्भव हो पाई अब हिन्दुओ के बीच आपसी तालमेल क़ायम रहे तो सर्वोच्च न्यायालय के 2001 के आदेश का पालन हो बी एस त्रिपाठी गोरखपुर श्री राम मंदिर निर्माण https://m.facebook.com/Bhimsentripathiji/ यह लेखक की व्यक्तिगत राय

लगता है कि 2019 में होने वाले लोकसभाई चुनाव के पहले ही इस देश के नजारे में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते है। रामलला की जन्मभूमि अयोध्या में मंदिर निर्माण हो सकता है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रह्यमण्यम स्वामी ने कल ही कुछ ऐसा ही संकेत देने की कोशिश की है। इशारों में ही उन्होंने यह भी जता दिया है कि यदि दोनों समुदायों की आपसी बातचीत से यह मसला नहीं हल होता है, तो 2018 में राज्यसभा में भी भाजपा का बहुमत हो जाने पर कानून बनाकर अयोध्या में राममंदिर का निर्माण कराया जायेगा। देश में भाजपा की आज जैसी ‘अभी नहीं, तो कभी नहीं‘ वाली स्थिति पहले कभी नहीं रही है। इसलिये अब इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि मोदी सरकार के कदम भारत को हिंदूराष्ट्र बनाने की डगर पर बढ रहे हैं।

कल ही सुब्रह्यमण्यम स्वामी अयोध्या में राममंदिर के निर्माण को लेकर क्या क्या नहीं बोल गये हैं। किसके भरोसे? सिर्फ अपने बलबूते वह इतनी बडी बोल नहीं बोल सकते हैं। इसके पीछे जरूर किसी न किसी बडी ताकत का उन पर वरद हस्त हो सकता है। चाहे वह संघ का हो, भाजपा के किसी शीर्षपुरुष का हो अथवा इन दोनों का ही हो। ऐसे में लगता यह भी है कि ‘ऊपर‘ के ही इशारे पर उन्होंने शीर्ष अदालत में इस मामले की रोज सुनवाई होने के लिये याचिका दायर की थी। इस पर देश की सबसे बडी अदालत के दिये गये निर्देश का साधु, संतों, विहिप और भाजपा नेताओं ने तो स्वागत किया है। लेकिन, जिलानी जैसे मुस्लिम नेता कोई भी सुलह समझौता करने को तैयार नहीं है।

बहरहाल, ‘सुप्रीम‘ की अपेक्षा के अनुसार, अब इस मामले के दोनों पक्षकारों के बीच सुलह समझौते जरिये दोनों ही समुदायों के बीच सद्भावनापूर्ण सम्मनजनक समाधान ढूढने की कोशिशें शुरू हो गयी हैं। लेकिन, ये परवान पर चढ सकेंगी, ऐसा नहीं लगता। वजह साफ है। इस मामले को लेकर हिंदुओं की ओर से जूझने वाले पैरोकार दिगंबर अखाडे के महंत रामचंद्र परमहंस न रह गये हैं और न मुस्लिम समुदाय के पैरोकार हासिम अंसारी ही। इस मामले में एक दूसरे के विरोधी होते हुए भी निजीतौर पर इन दोनो के बीच बडे मधुर रिश्ते रहे हैं। ढाँचा ढहने के बाद हाशिम के घर में आग लगा दी गयी थी। उस समय परमहंस ने मौके पर पहुँच कर आग बुझाने और बाद में उनका मकान तक बनवाने में बडी मदद की थी। अब दोनों ही समुदायों में ऐसे पैरोकार नहीं रह गये हैं।

हासिम अंसारी का साफ कहना था कि ‘मस्जिद के मुद्दे पर लडने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें रामलला से दुश्मनी है। रामलला के बिना तो अयोध्या का कोई मतलब ही नहीं है। रामलला तो हम लोगों के घर के हैं। मुकदमा तो सिर्फ इस बात का है कि यह मंदिर था या मस्जिद? लेकिन, इसे लेकर यदि मुल्क के अमन पर खतरा मंडराया, तो छोड दूंगा इस मामले की पैरोकारी।‘ यही वजह है कि अपनी अंतिम साँस लेने के कुछ पहले ही उन्होंने कहा था कि ‘अब मैं रामलला को तिरपाल में नहीं देख सकता हॅू।

बहरहाल, अब इस मामले को दोनों समुदायों की सद्भावना से शांतिपूर्वक सुलझाने के इरादे से विहिप यह कह कर मुस्लिम समुदाय को रास्ते समझाने की कोशिश कर है कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही एक ही पुरखे की संतान हैं। मुगल शासन में हिंदुओं में से एक तबके को विवश होकर इस्लाम धर्म अपनाना पड गया था। अपनी जान बचाने के लिये उनके पास और कोई रास्ता भी नहीं रह गया था। लेकिन, दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने जैसे इस मामले को आपसी समझौते के जरिये न हल होने देने की जैसे कसम खा ली है। वे केवल अदालत की बात करते हैं, जहां पुश्त दर पुश्त तक पेजीदा मुकदमे चलते ही रहते हैं।

इस स्थिति में इन्हीं बातों और घटनाक्रमों आधार पर इस बात के भी संकेत मिलना शुरू हो गये हैं कि अयोध्या में रामलला का मंदिर बनने के साथ ही अब भारत हिंदूराष्ट्र घोषित कर दिये जाने की दिशा में भी आगे बढ रहा है। इसकी भी वजह बहुत साफ है। इसके लिये स्थिति ‘अभी नहीं, तो कभी नहीं‘ जैसी है। इस समय नरेंद्र मोदी जैसे हिंदूवादी लौह पुरुष का देश का प्रधान मंत्री रहना, उत्तर प्रदेश जैसे विशालतम राज्य में सरकार की बागडोर योगी आदित्य नाथ जैसे प्रखर राष्ट्रवादी के हाथ में होना, देश के प्रायः सभी राज्यों में कांग्रेस की सरकारों का सफाया होते रहना और उसकी जगह क्रमशः भाजपा की ही सरकारों का बनते जाना, अगले साल ही राज्य सभा में भी भाजपा का बहुमत हो जाना और योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व के उत्तर प्रदेश सरकार को ‘माडल‘ बनाकर देश के सामने पेश करने के लिये किये जा रहे प्रयासों सहित दूसरे अनेक कारणों से इसी संभावना को बल मिल रहा है।

इस संबंध में काबिलेगार बात यह है कि राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री रह चुके हैं। उस दौरान इन्हीं से प्रेरित होकर तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री रवींद्र शुक्ल ने सूबे के सभी प्राथमिक स्कूलों में बंदेमातरतम का गान अनिवार्य कर दिया था। इससे बौखलाये अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने लखनऊ के सांसद रहे तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिलकर इसके खिलाफ आवाज उठाकर रवींद्र शुक्ल की बर्खास्तगी तक की मांग की थी। इसके बाद ही उन्हें प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री के पद से तत्काल हटा कर सडक पर खडा कर दिया था। विवश कल्याण सिंह हाथ मलते ही रहे गये। ‘अटल भय‘ से वह बर्खास्त मंत्री की वह कोई भी मदद नहीं कर सके। लेकिन, इस चुनाव में पहली बार विधायक बने उनके पौत्र संदीप सिंह को राज्य मंत्री बनाकर योगी ने उनके हाथों में प्राथमिक शिक्षा विभाग की भी जिम्मेदारी सौंप दी है। नतीजतन, बचपन से ही बच्चों को राष्ट्रवादी विचारों के सांचे में ढाल देने का काम अब कहीं ज्यादा सुविधाजनक और आसान हो जायेगा।

जय श्री राम शुभ शुक्रवार भारत माता की जय ॐ कालिकाये नमः जैसे मोदी सरकार बनी थी तो अवार्ड वापसी गिरोह सक्रिय हुवा वैसे ही योगी जी के सी एम बनते ही मीडिया बिपक्ष एकजुट होकर ऐसे कह रहा है जैसे उनकी बहन बेटी बेटा भाई दिन भर पार्क में ही रहते है अभी किसी अपराधी को पकड़ने को नाकाबन्दी होती हैं तो पूरा शहर परेशानी उठा लेता है तो फिर पुरे प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के लिये हम पुलिस का साथ क्यों नहीं दे सकते है आप को लगता हैं कि योगी जी सही कर रहे हैं तो उनके साथ चट्टान बनकर खड़े हो जाइए हर हर महादेव भीमसेन त्रिपाठी राष्ट्रीय संयोजक तिरपाल से मंदिर निर्माण मुहीम अयोध्या धन्यवाद जय श्री राम हर हर महादेव.. यह लेखक की व्यक्तिगत राय है

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद लोगों में खुद को बीजेपी का समर्थक बताने और दिखाने की होड़ सी मच गई है. जिसका नतीजा है कि केसरिया गमछा खरीदने की होड़ मच गयी है. हर तरफ राजधानी लखनऊ में भगवा रंग में रंगे योगी समर्थक नजर आ रहे हैं.

बीजेपी कार्यालय में 10 साल से भी ज्यादा समय से दुकान लगाने वाले योगेश कुमार ने बताया कि, जब से यूपी में बीजेपी की सरकार बनी है. दुकानों पर प्रचार सामग्रियों की बिक्री में 5 से 10 फीसदी तक का इजाफा हुआ है.

वहीं दुकान पर बीजेपी का झंडा, सिल्क का पट्टा, गले पर रखने वाला भगवा रंग का गमछाऔर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तस्वीर वाले मोबाइल स्टिकर्स, चाभी रिंग जैसे सामान खरीदने वालों का ताता लगा हुआ है.

गौरतलब है कि रविवार को योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश के 21वें मुख्यमंत्री के रूप में लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल पर राज्यपाल राम नाइक ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

योगी के साथ ही राज्यपाल ने दो डिप्टी सीएम (केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा) सहित कुल 48 मंत्रियों को भी पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई. इनमें 24 कैबिनेट मंत्री, 9 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 13 राज्यमंत्री शामिल हैं.




46 साल के आदित्यनाथ योगी ने 19 मार्च को देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इसी के साथ यह भी नारा लगने लगा कि देश में मोदी, प्रदेश में योगी. अभी मोदी और योगी की तुलना करना जल्दबाजी तो है, पर सोशल मीडिया और बाकी जगह ये बहुत चल रहा है कि योगी मोदी का काम आसान करेंगे या रास्ता मुश्किल.

योगी की छवि एक कट्टर हिंदुत्व वाली रही है. अब वे एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं. लिहाजा देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने आप को कैसे बदलते हैं.

कम उम्र में यूपी का सीएम बनने से स्वाभाविक है कि अगले कुछ दशकों तक योगी की न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश की राजनीति में अहम भूमिका देखने को मिलेगी. भाजपा के टॉप लीडरशिप में योगी एक कद्दावर शख्सियत के तौर पर उभर कर सामने आ सकते हैं. जिसके बाद उनकी तुलना जल्द ही भाजपा आला कमान से होने लगेगी. इस बीच वे अपनी कार्यशैली और परफॉरमेंस से ही अपनी छवि को पार्टी में मजबूत कर पाएंगे.
योगी पांच बार सांसद रहे हैं और मुख्यमंत्री का कार्यभार अभी ग्रहण किया है. लेकिन उनकी प्रशासनिक क्षमता और विकास के एजेंडा की परख होनी बाकी है. वह कड़क स्वाभाव और कट्टर विचारधारा के माने जाते हैं. अब सरकार चलाने में उनका यह स्वाभाव कहां तक कारगर साबित होगा यह देखना दिलचस्प होगा.

उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा सूबा और राजनैतिक दृष्टिकोण से संवेदनशील और महत्वपूर्ण है. अगर सत्ता संभालते ही उन्होंने अपना प्रशासनिक कौशल, अधिकारीयों पर पकड़ और जल्द निर्णय लेने की क्षमता साबित नहीं कर पाए तो उनके राजनैतिक भविष्य पर सवाल भी उठने लगेंगे.

नरेन्द्र मोदी आज देश में विकास पुरुष और मजबूत नेतृत्व की वजह से खासे लोकप्रिय हैं. मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले करीब 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और वहां विकास कर देश के सामने विकास का एक नया मॉडल रखा. मोदी के विकास मॉडल में इंडस्ट्री के साथ-साथ सामाजिक विकास भी शामिल था. इसकी चर्चा न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी हुई. 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार में मोदी की विकास वाली छवि ही हावी रही, जिसकी बदौलत बीजेपी को दो तिहाई बहुमत मिला.

लेकिन मोदी भी जब पहली बार 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तो उनके पास भी योगी की तरह ही प्रशासनिक अनुभव नहीं था और न ही राष्ट्रीय स्तर की छवि थी. उस वक्त गुजरात भाजपा में काफी उथल-पुथल मची हुई थी. पर नरेन्द्र मोदी के पास संगठन के काम का खासा अनुभव था. वे लालकृष्ण आडवानी के करीब और नई भाजपा के उद्भव के वक्त सक्रिय बैकरूम बॉय थे, जिसमें प्रमोद महाजन से लेकर गोविंदाचार्य और सुषमा स्वराज से लेकर कल्याण सिंह शामिल थे. वे बहुत से राज्यों के प्रभारी रहे थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कामकाज का खासा अनुभव रखते थे.

सरकार चलाने में वे नये तो थे, पर गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके करियर ने नई ऊंचाइयां हासिल की. मोदी के राजनैतिक कौशल का लोहा बीजेपी आलाकमान को तब मानना पड़ा जब गुजरात दंगों के बाद भी उन्होंने पार्टी को चुनावों में जीत दिलवाया और 2014 तक लगातार तीन बार बीजेपी की गुजरात में सरकार बनवाई.

मोदी न सिर्फ कुशल प्रशासक हैं बल्कि एक मंजे हुए वक्ता भी हैं जिनकी हिंदी और गुजराती पर मजबूत पकड़ है. उन्हें बोलना और लोगों को मुग्ध करना आता है, जिनमें वे लोग शामिल हैं, जो पारम्परिक तौर पर भाजपा और हिंदूवादी समर्थक नहीं हैं. मोदी एक स्थापित रणनीतिकार हैं और जिस तरह से उन्होंने गुजरात की ब्रांड कॉरपोरेट जगत के बीच और विकास के नाम पर खड़ी की, वैसा कम ही मुख्यमंत्री कर पाये.

मोदी और भाजपा के दूसरे नेताओं के बीच एक बड़ा फर्क ये भी है कि जिस तरह से मोदी भविष्य और सपनों के जरिए लोगों का दिल जीत लेते हैं, ज्यादातर हिंदूवादी नेता अभी अतीत के बेड़ियों में ही फंसे हुए हैं. मोदी की बड़ी कामयाबी भाजपा के एजेंडे को सकारात्मक बनाने की है.

योगी मुख्यमंत्री बन तो गये हैं पर उनके पास उस तरह का न तो प्रशासनिक अनुभव है, न उस तरह की व्यापक पकड़. अगले कुछ महीनों में पता चलेगा कि यूपी में कौन सा मॉडल चलेगा और कितने काम का साबित होगा- गुजरात वाला या गोरखपुर का. लेकिन एक बड़े सूबे के मुख्यमंत्री की कमान मिल गई है. उनकी कार्य क्षमता पर लोगों की पैनी निगाहें होंगी. उनके पास अपनी छवि को बदलने की भी चुनौती रहेगी.


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