Thursday, 05 January 2017 05:30

कोर्ट,चुनाव आयोग से गम्भीर प्रश्न:जब धर्म और जाति पर वोट नही तो आरक्षित सीटें क्यो??

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विषय:- एक युवा का कोर्ट और चुनाव आयोग से गम्भीर प्रश्न:-जब धर्म और जाति पर वोट नही मांग सकते तो आरक्षित सीटें क्यो?? अभी दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक आदेश पारित हुआ की कोई भी पार्टी या प्रत्याशी धर्म जाती एवं भाषा के आधार पर वोट नही मांग सकता और अगर ऐसा करता है तो उसको दण्ड दिया जायेगा!! मै पुनीत पांडेय सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए सम्मान करता हु!! जनहित में ये फैसला बहुत ही अच्छा साबित होगा!! पर मेरी आपत्ति चुनाव आयोग और कोर्ट दोनों से है जब कोई व्यक्ति धर्म या जाति के नाम पर वोट नही मांग सकता तो वो धर्म या जाति के नाम पर चुनाव लड़ कैसे सकता है?? कल हुए चुनावी समर की घोषणा में चुनाव आयुक्त जी ने कहा कि लगभग 600 सीटो पर चुनाव एक साथ होंगे जिसमे से 133 सीट आरक्षित सीट घोषित किये गए है!! इन आरक्षित सीटो पर सिर्फ आरक्षित व्यक्ति यानी किसी विशेष सम्प्रदाय या जाति का ही व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है!! क्या चुनाव आयोग को इस पर रोक नही लगानी चाहिए थी ?? क्या सुप्रीम कोर्ट को इस पर ध्यान नही देना चाहिए और इस प्रकार के आदेश को निरस्त करना चाहिए?? क्या ये प्रक्रिया धर्म और जाति के राजनीति को बढ़ावा नही देगा!! द्वारा:-पुनीत पांडेय युवा नेता ,गोरखपुर

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