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Public Opinion (302)

*श्री हनुमत प्रकटोत्सव :-* हनुमान का जन्म *चैत्र मास* की *शुक्ल पूर्णिमा* के दिन हुआ था। हनुमान के जन्म स्थान के बारे में कुछ भी निश्चित नहीं है। मध्यप्रदेश के आदिवासियों का कहना है कि हनुमानजी का जन्म रांची जिले के गुमला परमंडल के ग्राम अंजन में हुआ था। कर्नाटकवासियों की धारणा है कि हनुमानजी कर्नाटक में पैदा हुए थे। कर्नाटक के पंपा और हम्पी में किष्किंधा के ध्वंसावशेष अब भी देखे जा सकते हैं। हनुमानजी का जन्म कैसे हुआ, इस विषय में भी भिन्न मत हैं। एक मान्यता है कि एक बार जब मारुति ने अंजनि को वन में देखा तो वे उस पर मोहित हो गए। उन्होंने अंजनि से संयोग किया और वे गर्भवती हो गईं। एक अन्य मान्यता है कि वायु ने अंजनि के शरीर में कान के माध्यम से प्रवेश किया और वे गर्भवती हो गईं। एक अन्य कथा के अनुसार महाराज दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ से प्राप्त जो हवि अपनी रानियों में बांटी थी उसका एक भाग गरूड़ उठाकर ले गया और उसे उस स्थान पर गिरा दिया, जहां अंजनि पुत्र प्राप्ति के लिए तपस्या कर रही थीं। हवि खा लेने से अंजनि गर्भवती हो गईं और कालांतर में उन्होंने हनुमानजी को जन्म दिया। एक अन्य कथा के अनुसार कपिराज केसरी अपनी पत्नी अंजना के साथ सुमेरु पर्वत पर रहते थे। अंजना के कोई संतान नहीं थी इसलिए उन्होंने पुत्र कामना हेतु वर्षों तक तपस्या की। उनके कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान देकर कहा था कि उनके एकादश रुद्रों में से एक अंश उन्हें पुत्र के रूप में प्राप्त होगा। शिवजी ने उन्हें जाप करने का लिए एक मंत्र देकर कहा कि उन्हें पवन देवता के प्रसाद के एक सर्वगुणसंपन्न पुत्र की प्राप्ति होगी। *हनुमान मंत्र -* *ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमित विक्रमाय प्रकटपराक्रमाय महाबलाय सूर्य कोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।।* आप सभी को अंजनीलाल,भगवान श्री राम के परम् भक्त हनुमान जी के प्रकटोत्सव पर हार्दिक शुभकामनाएं........ आपका सहयोगी:- पुनीत पाण्डेय"गोरखपुर" 9452246780,9818517498

रोज़ाना मैं अपनी शाम की शिफ्ट खत्म कर अपने घर के लिए निकलती हूं तो एक सुकून होता है। बहुत अच्छी फीलिंग होती है... सबकी ऑफिस की शिफ्ट खत्म होने के बाद। सबकी बॉडी language से पता चल जाता है "finally its over for the Day"...

मैं भी उस वक़्त को सबसे ज़्यादा एन्जॉय करती हूं क्योंकि वह मेरा अकेला ऐसा पल है जब मैं और मेरा म्यूजिक उसे ख़ास बनाते है। सुनसान सड़क पर बिना किसी ट्रैफिक के....पसंदीदा गानों के साथ गुज़रता वह पल बहुत बहुत अच्छा लगता है। लेकिन हर बार, हर रोज़ वो पल एक झटके में खत्म हो जाता है जब मुझे कोई देख लेता है कि यह लड़की रात को कहीं अकेले जा रही है...?

रोज़ाना चौराहे पर रेड लाइट की वजह से रूकती हूं और आस-पास खड़ी गाड़ियों के लोगों पर जब गुनगुनातें हुए नज़रे जाती हैं तो सिर्फ मेरी तरफ देखती नज़रे कई सवाल खड़े कर देती है....साफ़ झलकता है उनकी नज़रों से....ये लड़की...इस वक़्त...अकेले ???? फिर अपनी घड़ी में वक़्त देखते....oh ! अकेली लड़की....न जाने क्यों उस वक़्त उनकी गाड़ी स्पीड नहीं ले पाती !

और अगर मैंने तेज़ स्पीड कर कार आगे निकाल ली तो......abeey तेरी.... ये मुझे ओवरटेक करेगी ??? एक तो लड़की ??? ऊपर से अकेले ???? और मुझसे आगे ????
चलिये मान लिया मेरा perception है गलत भी हो सकता है ??? लेकिन ऐसा सिर्फ एक बार नहीं, रोज़ाना वो सवाल हर उस आस-पास की गाड़ी में बैठे ड्राइवर, परिवार के साथ बैठे आदमी या अकेले ड्राइव करते लड़के की नज़रों में नज़र आते ही है !

चलिए रेड लाइट पर तो किसी तरह 120 सेकंड बीत जाते है लेकिन अगर पुलिस चेकिंग और बैरिकेटिंग में आप गाड़ियों की कतार में है और आगे जा रही बस या टेम्पो ट्रैवलर में एम्प्लाइज या लड़के है तब तो ज़ुबान पे ताला लगाना बेहतर है। एक लड़का खड़ा था.... दिख गया जाम में कि पीछे की कार में अकेली लड़की है....उसके बाद लास्ट सीट पर बैठे लड़कों की नज़र घुमी और आगे बैठे लड़कों ने खड़े होकर अटेंडेंस दर्शायी... अरे भाई देखें तो सही कौन है ?? वो भी इस वक़्त ??? अकेले ???

और उसके बाद मुस्कुराते हुए, घूरते हुए चेहरे मजबूर करते है कि ज़ुबान खोलकर इन सबसे सिर्फ इतना पुछू की जनाब क्या हुआ....ऐसा क्या देख लिया....लेकिन मैं बेचारी अकली लड़की...मैं तो कुछ बोल के उन घूरती नज़रों को चुप भी नही करा सकती... लड़की हूं न इसलिए....क्या पता उसे लगे कि मैं उसे प्रोवोक कर रही हूं अरे भाई लड़का है कुछ भी सोच सकता है।

प्रॉब्‍लम सिर्फ सोच की है...क्या हुआ अगर अकेली लड़की जा रही है....वो अकेले इस वक़्त निकले तो बेचारा काम से लौट रहा होगा...वो लड़कों के साथ है तो घूमने टहलने निकला है...परिवार के साथ है तो ज़रूरी काम होगा और ड्राइवर है तो ड्यूटी पर तैनात है। लेकिन ये लड़की इस वक़्त अकेले क्यों ???

क्या वजह होगी ???


कहीं ये ???

तो फिर अकेले क्यों वो भी इतनी रात को ???

मैं नही जानती की आखिर क्यों मेरा नज़रिया ऐसे सवाल खड़ा करता है की रोज़ाना ये सफर मुझे असहज महसूस कराता हैं। क्यों आखिर में खुद को यकीन नही दिला पाती कि शायद इनकी सोच ऐसी न हो ??

एक बार कहीं पढ़ा था-

""दो आँखें है तुम्हारी....तकलीफ का उमड़ता हुआ समंदर..
इस दुनिया को जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए ""



ब्‍लॉग लेखिका सुरभि आर शर्मा चैनल इंडिया टीवी में न्‍यूज एंकर हैं

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न सीएम सुन रहे न पीएम, बाॅलीवुड स्टार सलमान की बीईंग ह्यूमन ने भी नहीं की मदद कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के गृह जिले के निवासी का सरकार में नहीं कोई मददगार… अमन पांडे, मोतिहारी। सुन रहा है ना तू, क्यों रो रही हूं मैं, मंजिलें रुसवा हैं खोया है रास्ता, कोई फरिश्ता मदद को आए… बस इतनी सी इल्तेजा… कर दे इधर भी तू निगाहें…. मोतिहारी की बहू जूली इतना कह फफक-फफकर रो पड़ती हैं। उनके पति रुपेश कुमार पाण्डेय मुंबई के ग्लोबल अस्पताल में मौत से जूझ रहे हैं। पैसे के आभाव में हर पल मौत की ओर बढ़ रहे हैं। उनका लिवर खराब हो चुका है। ट्रांसप्लांट के लिए 25 लाख रुपये की जरूरत है। नोटबंदी के इस दौर में न जमीन बिक रही न मकान…! उनके घर के जेवर व बचे-खुचे पैसे अब तक के इलाज में खर्च हो चुके हैं। कोई तो मेरे पति के ऑपरेशन के लिए मदद करे, क्योंकि सरकार चुप बैठी है। क्या मेरे पति का ऑपरेशन इसलिए नहीं होगा कि वह गरीब है? इंसानी जान की कीमत क्या कुछ भी नहीं…? जूली का दर्द उस बेजार व्यवस्था की पोल खोलता है, जिसमें अमीर-गरीब के बीच का फर्क साफ दिखता है। कहने को तो अनेक स्वयं सेवी संस्थाएं और सरकार के जनप्रतिनिधि गरीबों की मदद के लिए हर समय तैयार रहते हैं, लेकिन इससे बड़ा सच क्या हो सकता है कि इस गरीब का पैसे के अभाव में ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। घर परिवार के इकलौता कमाऊ सदस्य 41 साल के रुपेश की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। इस बीच प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बेबस इंसान की मदद से साफ इंकार कर दिया है। परिवार के अनुरोधों को नियमों का हवाला देकर नाकार दिया है। 16 दिसंबर को पत्र लिखकर पीएमओ ने मदद करने में असमर्थ जता दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री व मोतिहारी के सांसद राधामोहन सिंह ने इस परिवार की बेबसी पर तरस खाकर पीएमओ से मदद की सिफारिष की थी। उसके जवाब में 16 फरवरी को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री कार्यालय ने मदद करने में असमर्थता वाली बात कही है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने लिखा है कि रुपेश के आवेदन की जांच की गई और उसकी गुहार सही भी पाई गई लेकिन अर्जी स्वीकार नहीं की जा सकती। पीएमओ ने अपनी दलील में कहा है कि मरीज की परिस्थितियां चाहे जैसी हो, सरकार अपनी शर्तों पर मदद करती है। सरकार ने ये कारण गिनाए हैं और अर्जी लौटा दी है। कहा है कि मरीज सरकारी अस्पताल में इलाजरत होना चाहिए या प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से अनुमोदित पैनल में शामिल प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने के लिए ही सरकार अपने कोष से सहायता देती है। सरकार का यह जवाब सुनकर इस परिवार के पांव तले जमीन खिसक गई है। अब इस परिवार को किसी फरिष्ते का इंतजार है। परिवार ने हिंदुस्तान से मदद की गुहार लगाई है। सरकारें नहीं पिघलीं….क्या आप…..छोटी मदद बचा सकती है जिंदगी…! कहां-कहां न लगाई गुहार, राह ताकता रह गया परिवार… बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, विधानसभा अध्यक्ष विजय चैधरी समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, वित मंत्री अरूण जेटली, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और पीएमओ कार्यालय के अलावा फिल्म स्टार सलमान खान और उनकी संस्था वीईंग ह्यूमन, अक्षय कुमार, आमिर खान, शाहरुख खान और उद्योग पति मुकेश अंबानी से भी मदद की गुहार लगाई है। इन फिल्मी हस्तियों से ट्वीटर के जरिए मदद मांगी है। सलमान व शाहरुख के आवास पर मुंबई में 2 दिसंबर को रुपेश के परिजन मदद के लिए गुहार लगाने गया भी हुआ था लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। सलमान को अनगिनत बार ई-मेल भी किया गया पर कोई जवाब नहीं आ सका। इसके साथ ही देश की तमाम बड़ी हस्तियां यथा फिल्मी, उद्योगपति, धनाढ्यों, रईसों, राजनीतिज्ञों से भी मदद की गुहार लगाई। किस-किस को और कहां-कहां न गुहार लगाई, उन सबसे गुहार वाले प्रमाण भी इस परिवार के पास मौजूद हैं। सोशल साइट्स पर अनगिनत पोस्ट किए गए। रुपेश की फैमिली बहुत ही गरीब है तथा आॅपरेशन कराने में असमर्थ है। इस फैमिली को आप सबकी मदद की बहुत जरूरत है। मोतिहारी शहर के अंबिकानगर मुहल्ले का रहने वाला रूपेश मुंबई के ग्लोबल हाॅस्पीटल में मौत से जंग लड़ रहे हैं। गरीबों का हमदर्द कहलाने का दिखावा करने वाली पटना और दिल्ली की सरकारों का इस मामले में असली चेहरा सामने आ जाता है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के गृह जिले के निवासी रुपेश और उनके परिवार को कम से कम केंद्र से मदद की आस थी लेकिन अब तो…! हालातों का मारा रुपेश और उसका परिवार फरिश्ते के इंतजार में है। रुपेश के मां-बाप इस दुनिया में नहीं हैं। हाल ही में उनकी मृत्यु हुई है। इलाज के बगैर किसी को नहीं मरने देने का भरोसा दिलाने वाले रहनुमाओं की नियत और नीतियां इससे परिलक्षित होती हैं। इस बदनसीब इंसान की बेबसी और लाचारी सिस्टम पर करारा चोट करती है। भारत जैसे देश के लिए यह बडा सवाल है। नोटबंदी के इस दौर में इंसानी जान की कीमत क्या इतनी सस्ती हो गई है… क्रॉनिक लीवर डिजीज से ग्रस्त हैं रुपेश पांडेय… रुपेश पांडेय को क्रॉनिक लिवर डिजीज है। यह बीमारी हेपेटाइटिस बी से संबंधित है। वे मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल में एडमिट हैं। वहां के डिपार्टमेंट आॅफ हेपटोलॉजी के हेड डॉ. समीर आर शाह ने अविलंब लिवर ट्रांसप्लांट की एडवाइस दी है। कहा है कि मरीज की जान बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांटेशन ही एकमात्र विकल्प है। लिवर ट्रांसप्लांटेशन में 25 लाख से अधिक रूपये खर्च बताया है। अपने परिवार में इकलौता अर्निंग पर्सन हैं रुपेश… रूपेश की पत्नी जूली के मुताबिक वह घर के इकलौते कमाऊ मेंबर हैं। उन्हीं पर सारा दारोमदार है। घर में दो बच्चे राजा व निषा अभी मैट्रिक में हैं। पिता के इस हाल में होने से उनका भविष्य अंधकार में है। उनके बीमार रहने से आय के साधन तो पहले ही बंद हो गए हैं, उपर से घर की जमा पूंजी भी हाथ से निकल गई है। परिवार वाले बिहार से लेकर मुंबई तक इलाज करा कर थक चुके हैं। घर की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब है। अब तक के इलाज में ही सारे पैसे खत्म हो गये हैं। यहां तक सगे-संबंधियों से कर्ज लेकर भी इलाज कराया गया है। अब कोई कर्ज देने को तैयार नहीं। नोटबंदी के इस दौर में घर की जमीन-जायदाद बिकने से रही। ऐसे में लिवर ट्रांप्लांटेशन के लिए कहां से 25 लाख रुपये आएंगे। लिवर ट्रांसप्लांट में आप रुपेश की मदद करना चाहते हैं, तो यहां कर सकते हैं संपर्क। रुपेश के भाई: अमन पाण्डेय मोबाइल नंबर 09470285969 (ये लेखक के अपने विचार है।)

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शिक्षा के नाम पर हो रहीं धाँधली पर पवन सिंह से गोरखपुर टाइम्स की ख़ास बातचीत

प्रश्न: शिक्षा के नाम पर हो रही लूट की चर्चा तो बहुत लंबे समय से होतीं आयीं हैं, लेकिन इस बार सरकार ने भी संज्ञान में लेते हहुवे मौजूदा नीतियों में बदलाव के संकेत दे रहीं हैं। इस पर आपकी कोई प्रतिक्रिया ?

पवन सिंह : सर्वप्रथम मैं अपने लोकप्रिय मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करना चाहूँगा जो उन्होंने ने इतने मतवपूर्ण और गंभीर विषय पर सरकार में आते ही नज़र डालीं, ये एक शराहनिय क़दम हैं लेकिन इसमें अभी और सुधार की ज़रूरत हैं। अपने लोकप्रिय मुख्यमंत्री जी को कार्यवाही के लिए निवेदन करता हूँ।
पुरे देश मे एक संगठित गिरोह है जो खुले आम इस देश के मध्यम और गरीब वर्ग को सरकार के सामने लूट रही है।


प्रश्न: किस गिरोह की बात कर रहे हैं आप?

पवन सिंह: हम किसी और गिरोह की बात नहीं कर रहे है ये गिरोह प्राइवेट मे संचालित करने वाले शैक्षिक संस्थानों को संचालित करने वाले शिक्षा माफियाओ का है, पहले ये गिरोह शहरी इलाको तक सिमित था पर अब धीरे-धीरे अर्ध शहरी और ग्रामीण इलाको मे भी फैल गए है और अच्छी शिक्षा देने के नाम पर और तरह तरह की सुविधाये देने के नाम पर भारी भरकम राशि डोनेशन / वेलफेयर के नाम पर वसूल रहे है।

इसके बाद फीस के नाम पर अलग , किताबो और कापियो को खुद या किसी चिन्हित दुकानदार के वहा से उपलब्ध करवा रहे है जो की किसी विशेष प्रकाशक का होता है, उससे तो कमिशन ले ही रहे है और अभिवावको को मनमाना दाम पर बेचते है और भारी मुनाफा वसूली भी करते है तथा दूकानदार द्वारा बेचे जाने पर भी कमिशन लेते है, बच्चो के ड्रेस भी उनके चिन्हित दुकानों से ही अभिवावको को मनमाने दाम पर लेने पड़ते है और वह भी स्कूल का कमिशन निर्धारित होता है।

इन सब के बावजूद इनका पेट नहीं भरता है तो तरह-तरह के इवेंट और सांस्कृतिक कार्यक्रम करने के नाम पर समय-समय पर अभिवावको से रुपये वसूल ते है साथ ही रजिस्ट्रेशन फीस अलग तथा भारी भरकम एडमिशन फीस अलग वसूलते है.


प्रश्न: आपके आरोप गंभीर हैं लेकिन यही बात सारे लोग बोलते हैं, पर इसमें सचाई कितनी हैं और अगर ये सब सच हैं तो सरकार आजतक ख़ामोश क्यूँ रहीं?

पवन सिंह: इस बात की सचाई को ढूँढने के लिए आपको बहुत ज़्यादा दूर जाने की ज़रूरत नही हैं। आपके घर में भी बच्चे होंगे किसी ना किसी स्कूल में पढ़ते होंगे। बस एक नज़र उनपर हो रहे ख़र्चों पर डालिए, सिर्फ़ उन ख़र्चो पर जिनका वास्ता अच्छे पढ़ाई या सीधे तौर पर पढ़ाई से ना हों। बाक़ी आप ख़ुद समझ जाएँगे।

अगर आप लोगो के अगल बगल कोई शैक्षिक संस्थान चलने वाला हो तो उसकी तरक्की दिन दुनी और रात चौगुनी होती खुद देख और महसूस कर सकते है,

जो पहली बार शैक्षिक संस्थान खोलते है उनको देखेंगे की एक-दो साल बाद ही दूसरी-तीसरी और चौथी ब्रांच खोलने का प्रयास करने लगते है, इन शिक्षा माफियाओ की कमाई का अंदाजा आम लोग खुद ही लगा लेते है लेकिन अभी तक ये किसी को नहीं दिखता था. ये सभी संस्थान या तो फर्जी ट्रस्ट या गैर सरकारी संस्थान के रूप मे सोसायटी के माध्यम से संचालित की जाती है जिनका लेखा-जोखा पूरी तरह से फर्जी होता है लेकिन सरकारी ऑडिट विभाग को तो ये दिखाई नहीं देता क्युकी उनको भी भरी भरकम रकम सेवा भाव से शिक्षा माफियाओ द्वारा दे दी जाती है।

मुझे आपसे इस विषय पर खुल के बात करने में कोई परेशानी नही हैं और ना कोई व्यक्तिगत उद्देश्य है, मै एक जन सेवक के रूप मे अपनी भावनाओ को व्यक्त कर रहा हु, जो मेरे क्षेत्र के लोग महशुस कर रहे हैं, ये उन सब की पीड़ा हैं। मैं एक आम नागरिक के तौर पर अपनी ही सरकार से ये मांग करता हु की इस लूट खसोट को अविलम्ब बंद कराने के लिए कुछ ठोस क़दम उठाया जाय।

हम सिर्फ़ आवाज़ ही नहीं उठा रहे बल्कि अपने स्तर से वो बच्चे जिनको मदद की ज़रूरत हैं उनके लिए भी कार्य कर रहें हैं और ये मैं ख़ुद व्यक्तिगत तौर पर देखता हूँ, आपको तस्वीरें उपलब्ध करवा दी जाएँगी।

बातें बहुत है जो मेरे नज़र में हैं और मैं समय समय पर आवाज़ उठाता रहूँगा।

- पवन सिंह (भाजपा)

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कहते हैं..

इन्सान सपना देखता है
तो वो ज़रूर पूरा होता है.
मगर
किसान के सपने
कभी पूरे नहीं होते
बड़े अरमान और कड़ी मेहनत से फसल तैयार करता है और जब तैयार हुई फसल को बेचने मंडी जाता है.

बड़ा खुश होते हुए जाता है.

बच्चों से कहता है
आज तुम्हारे लिये नये कपड़े लाऊंगा फल और मिठाई भी लाऊंगा,

पत्नी से कहता है..
तुम्हारी साड़ी भी कितनी पुरानी हो गई है फटने भी लगी है आज एक साड़ी नई लेता आऊंगा.

पत्नी:–”अरे नही जी..!”
“ये तो अभी ठीक है..!”
“आप तो अपने लिये
जूते ही लेते आना कितने पुराने हो गये हैं और फट भी तो गये हैं..!”

जब
किसान मंडी पहुँचता है .

ये उसकी मजबूरी है
वो अपने माल की कीमत खुद नहीं लगा पाता.

व्यापारी
उसके माल की कीमत
अपने हिसाब से तय करते हैं.

एक
साबुन की टिकिया पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.

एक
माचिस की डिब्बी पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.

लेकिन किसान
अपने माल की कीमत खु़द नहीं कर पाता .

खैर..
माल बिक जाता है,
लेकिन कीमत
उसकी सोच अनुरूप नहीं मिल पाती.

माल तौलाई के बाद
जब पेमेन्ट मिलता है.

वो सोचता है
इसमें से दवाई वाले को देना है, खाद वाले को देना है, मज़दूर को देना है ,

अरे हाँ,
बिजली का बिल
भी तो जमा करना है.

सारा हिसाब
लगाने के बाद कुछ बचता ही नहीं.

वो मायूस हो
घर लौट आता है
बच्चे उसे बाहर ही इन्तज़ार करते हुए मिल जाते हैं.

“पिताजी..! पिताजी..!” कहते हुये उससे लिपट जाते हैं और पूछते हैं:-
“हमारे नये कपडे़ नहीं ला़ये..?”

पिता:–”वो क्या है बेटा..,
कि बाजार में अच्छे कपडे़ मिले ही नहीं,
दुकानदार कह रहा था

इस बार दिवाली पर अच्छे कपडे़ आयेंगे तब ले लेंगे..!”

पत्नी समझ जाती है, फसल
कम भाव में बिकी है,
वो बच्चों को समझा कर बाहर भेज देती है.

पति:–”अरे हाँ..!”
“तुम्हारी साड़ी भी नहीं ला पाया..!”

पत्नी:–”कोई बात नहीं जी, हम बाद में ले लेंगे लेकिन आप अपने जूते तो ले आते..!”

पति:– “अरे वो तो मैं भूल ही गया..!”

पत्नी भी पति के साथ सालों से है पति का मायूस चेहरा और बात करने के तरीके से ही उसकी परेशानी समझ जाती है
लेकिन फिर भी पति को दिलासा देती है .

और अपनी नम आँखों को साड़ी के पल्लू से छिपाती रसोई की ओर चली जाती है.

फिर अगले दिन
सुबह पूरा परिवार एक नयी उम्मीद ,
एक नई आशा एक नये सपने के साथ नई फसल की तैयारी के लिये जुट जाता है.
….

ये कहानी
हर छोटे और मध्यम किसान की ज़िन्दगी में हर साल दोहराई जाती है
…..

हम ये नहीं कहते
कि हर बार फसल के
सही दाम नहीं मिलते,

लेकिन
जब भी कभी दाम बढ़ें, मीडिया वाले कैमरा ले के मंडी पहुच जाते हैं और खबर को दिन में दस दस बार दिखाते हैं.

कैमरे के सामने शहरी महिलायें हाथ में बास्केट ले कर अपना मेकअप ठीक करती मुस्कराती हुई कहती हैं..
सब्जी के दाम बहुत बढ़ गये हैं हमारी रसोई का बजट ही बिगड़ गया.
………

कभी अपने बास्केट को कोने में रख कर किसी खेत में जा कर किसान की हालत तो देखिये.

वो किस तरह
फसल को पानी देता है.

१५ लीटर दवाई से भरी हुई टंकी पीठ पर लाद कर छिङ़काव करता है,

२० किलो खाद की
तगाड़ी उठा कर खेतों में घूम-घूम कर फसल को खाद देता है.

अघोषित बिजली कटौती के चलते रात-रात भर बिजली चालू होने के इन्तज़ार में जागता है.

चिलचिलाती धूप में
सिर का पसीना पैर तक बहाता है.

ज़हरीले जन्तुओं
का डर होते भी
खेतों में नंगे पैर घूमता है.
……

जिस दिन
ये वास्तविकता
आप अपनी आँखों से
देख लेंगे, उस दिन आपके
किचन में रखी हुई सब्ज़ी, प्याज़, गेहूँ, चावल, दाल, फल, मसाले, दूध
सब सस्ते लगने लगेंगे.


आइए मेरे साथ 'एक बार किसानो का दर्द महसूस करते हैं' थोड़ा सा हम भी बाँट लेंगे, उन्हें भी कोई अपना तो दिखें।

- पवन सिंह (भाजपा)

ॐ श्रीराम नवमी 04/04/ 2017 अब श्रीराम मंन्दिर के साथ काशी मथुरा भी कलंक मुक्त करे हिंदू क्या केवल राजनितिक पार्टी, नेता और न्यायालय मिलकर हिंदू बहूल राष्ट्र में हिंदुओ की आस्थाओ पर निर्णय लेंगे ? राष्ट्र का मान सन्मान विदेशी ताकतोद्वारा समय समय पर कलंकित हुआ है । जो भी विदेशी मूल के राजा यहाँ सत्ता स्थापित किए उन्होंने अपने अपने धर्ममान्यताओ का प्रचार प्रसार इस सनातन वैदिक संस्कृती के पालनहार राष्ट्र में किया । हर राजसत्ता के अपने अपने अलग तरीके थे जो यहाँ की भोली भाली जनता का आर्थिक मानसिक शारीरिक शोषण के साथ धर्मांतरण भी कर रहे थे । इनको रोकने की शक्ती उस समय भी हिंदुओ में थी और आज भी है । आज श्रीराम जन्म भूमी विवाद में उलझा हिंदू देश के 3 लाख से जादा उध्वस्त मंदिरो को भूल गया है जिन्हें गिराकर मस्जिद और चर्च बने है । काशीविश्वेश्वर भोलेनाथ बाबा और मथुरा में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण आज भी अपने सीने पर हिंदुओ की निष्क्रियता का कलंक लेकर बैठे है । समुचे देशभर में हर्षोल्लास में राम नवमी उत्सव मनाया गया । परम पवित्र भगवा ध्वज को साक्षी रख कर कोई शपथ लेनी है तो हर व्यक्ती यही शपथ ले की हम सब मिलकर केवल प्रभु श्रीरामजी को नही बल्की उनके साथ बाबा भोलेनाथ और बाकेबिहारी भगवान श्रीकृष्णजी को भी विदेशी आक्राँताको के कलंक से जल्द मुक्त करेंगे । Aditya Deshmukh यह लेखक के अपने विचार हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी की मुलाकात अगले कुछ दिनों में हो सकती है. दोनों नेताओं के बीच मुलाकात के दौरान अयोध्‍या के राम मंदिर का मामला भी उठ सकता है. इस संबंध में स्वामी ने कहा कि यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे लखनऊ आकर मिलने को कहा है. स्वामी ने कहा कि हां इस मुलाकात के दौरान मैं राम मंदिर मुद्दे पर भी चर्चा करूंगा लेकिन यह आधिकारिक बैठक नहीं है.

आपको बता दें कि सोमवार को उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर मुद्दे का समाधान निकालने के लिए सहयोग देने की पेशकश करते हुए कहा कि अच्छा होगा कि दोनों पक्ष बातचीत के माध्‍यम से सौहार्दपूर्ण तरीके से इस समस्या का समाधान निकालें. अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि के मसले पर एक सवाल के जवाब में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का स्वागत करुंगा.

गौर हो कि स्वामी ने राम मंदिर मामले पर रोजाना सुनवाई करने के लिए याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. पिछले दिनों याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि स्वामी इस मामले में पक्ष नहीं हैं, सारे पक्षकारों को और समय दिया जाएगा.
कोर्ट का फैसला आने के बाद स्वामी ने प्रतिक्रिया देते हुए का था कि वह इस मामले में दूसरा रास्ता अपनाएंगे.


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समाजवादी पार्टी क्रैक होने वाली है और अखिलेश से असंतुष्ट चल रहा आधा मुलायम परिवार जल्द ही बीजेपी में शामिल होने वाला है। इसके लिए अंतिम फॉर्मूला फाइनल हो चुका है। फॉर्मूले के तहत पहले अखिलेश की सौतेली मम्मी साधना गुप्ता, सौतेले भाई प्रतीक यादव, सौतेली भावज अपर्णा यादव, सगे चाचा शिवपाल यादव और इनके साथ खड़े परिवार के अन्य लोग बीजेपी में शामिल होंगे, फिर समाजवादी पार्टी को तोड़कर उसका भी बीजेपी में विलय कराया जाएगा।

समझा जा रहा है कि स्वयं मुलायम सिंह यादव ने इस डील को फाइनल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही यह रहस्य भी खुल गया है, योगी आदित्‍यनाथकि आदित्यनाथ योगी के शपथग्रहण समारोह में मोदी के कान में उन्होंने क्या कहा था। उन्होंने कहा था कि “साधना तो तैयार ही थी, अब शिप्पाल भी तैयार हो गया है।”

अपर्णा यादव और प्रतीक यादव भी वास्तव में इसी डील को फाइनल कराने के सिलसिले में योगी आदित्यनाथ से मिले थे। फिर बाद में मोदी की मुहर लगने के बाद ही योगी आदित्यनाथ उनकी गोशाला में गाय को चारा खिलाने पहुंचे। अखिलेश, करोड़पतिफॉर्मूले के तहत अभी यह तय हुआ है कि बीजेपी में शामिल होने जा रहे मुलायम परिवार के सदस्यों को पूरे उत्तर प्रदेश में गोशालाएं चलाने की ज़िम्मेदारी दी जाएगी और बूचड़खानों के ख़िलाफ़ छेड़े गए अभियान का उन्हें ब्रैंड एम्बेसडर बनाया जाएगा, ताकि मुस्लिम भाइयों-बहनों में जा रहे गलत मैसेज को सही किया जा सके।
इसके तहत वे जहां समाजवादी पार्टी अखिलेश के मार्गदर्शक मंडल में बने रहेंगे, वहीं बीजेपी के मूकदर्शक मंडल में भी उन्हें जगह दी जाएगी।

(वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार के फेसबुक वॉल से साभार, ये लेखक के निजी विचार हैं)

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Post by साकेत सिंह धोनी
- Apr 26, 2017
रवीना टंडन इन दिनों काफी चर्चा में हैं, वजह है उनकी हालिया रिलीज फिल्‍म मातृ द मदर। इस फिल्‍म में वो एक गैंग रेप शिकार ...
Post by साकेत सिंह धोनी
- Apr 25, 2017
यह सच है कि अभी तक कैंसर की कोई कारगर दवा तैयार नहीं हुई है। लेकिन कुछ बातों का हम पहले से ही ख्याल ...
Post by सत्य चरण राय (लक्की)
- Apr 26, 2017
क्या सच में हुआ योग गुरु बाबा रामदेव का एक्सीडेंट ? जानिए इस फोटो की सच्चाईयोग गुरु बाबा रामदेव के एक्सीडेंट की खबर इन ...
Post by साकेत सिंह धोनी
- Apr 24, 2017
कई फेयरनेस क्रीमों में पुरुषों के स्पर्म मिलाया जाता है। लेकिन एक महिला रोजाना तरह-तरह के ड्रिंक्स में पुरुषों का ...
Post by साकेत सिंह धोनी
- Apr 24, 2017
बेहतरीन पारी खेलकर फॉर्म में वापसी करने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी धैर्य बरकरार रखता है तो कोई भी ...
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