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Public Opinion (273)

तो गायत्री प्रजापति पहुंच ही गए जेल। तो अब मोदी के वायदे के अनुसार यूपी में होने लगा है शासन। 15 मार्च को सुबह-सुबह ही यूपी के पुलिस महानिदेशक जावेद ने टीवी चैनलों पर कहा कि गैंगरेप के आरोपी पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को लखनऊ स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया है। दोपहर होते-होते प्रजापति को अदालत में पेश करने के बाद 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। यह वही यूपी पुलिस है, जिसे 27 फरवरी के बाद से ही प्रजापति नहीं मिले थे। हालांकि अभी यूपी में भाजपा की सरकार ने शासन नहीं संभाला है, लेकिन चुनाव के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी ने सुशासन का जो वायदा किया था, उसका असर अब होने लगा है। यूपी के डीजी जावेद भले ही गायत्री प्रजापति की गिरफ्तारी का दावा करंे, लेकिन हकीकत यह है कि 14 मार्च को जब पुलिस ने प्रजापति के बेटे अनुराग और भतीजे सुरेन्द्र को थाने बुलाकर पूछताछ की तो प्रजापति ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। भले ही पुलिस ने कागजों में 15 मार्च की सुबह गिरफ्तारी दिखाई हो। अब यह बात भी सामने आ गई है कि पूर्व सीएम अखिलेख यादव के दबाव की वजह से ही पुलिस प्रजापति को गिरफ्तार नहीं कर रही थी। चूंकि अब यूपी पुलिस को यह पता है कि अगले दो-तीन दिन में भाजपा की सरकार बन जाएगी, इसलिए पुलिस ने अभी से ही पीएम मोदी के वायदे के अनुरूप काम करना शुरू कर दिया है। इस पूरे मामले में पीडि़ता का बयान बेहद गंभीर है। पीडि़ता का कहना है कि प्रजापति और उसके साथियों द्वारा बलात्कार किए जाने तक को वह बर्दाश्त कर रही थी, लेकिन जब इन बलात्कारियों ने मेरी 14 साल की नाबालिग बेटी पर बुरी निगाह डाली तो मुझे मजबूरन पुलिस के पास जाना पड़ा। मैं नहीं चाहती थी कि मेरी बेटी भी इन दरिंदों की हवस का शिकार बने। सब जानते हैं कि अखिलेश के शासन में पीडि़ता की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हुई और जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी तो प्रजापति को गिरफ्तार नहीं किया गया। यदि यूपी में भाजपा की सरकार नहीं बनती तो प्रजापति की गिरफ्तारी भी नहीं होती। एस.पी.मित्तल) (15-03-17)

यूपी में भाजपा को मुसलमानों के वोट मिलने पर सवाल क्यों? ======================= बसपा प्रमुख मायावती और सपा के पूर्व सीएम अखिलेश यादव को अपनी पार्टी की हार से ज्यादा इस बात की चिंता है कि यूपी में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा की जीत कैसे हो गई? चुनाव परिणाम से पहले इन दोनों नेताओं का यही मानना था कि मुसलमान कभी भी भाजपा को वोट नहीं देगा। इसीलिए प्रचार के दौरान मायावती और अखिलेश ने बार-बार कहा कि भाजपा ने एक भी मुसलमान को उम्मीदवार नहीं बनाया है। यह दोनों नेता सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि देवबंद जैसे सौ प्रतिशत मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में भाजपा के उम्मीदवार चुनाव जीत जाएंगे। इसलिए चुनाव परिणाम घोषित हो जाने के बाद भी यह नेता भाजपा की जीत को सही नहीं मान रहे हैं। मायावती और अखिलेश का कहना कि ईवीएम में गड़बड़ी हुई है। यानि मुसलमानों ने बसपा और सपा को वोट दिया, लेकिन ईवीएम में भाजपा उम्मीदवार को चला गया। इसलिए इन दोनों ही नेताओं ने चुनाव आयोग से जांच की मांग की है। समझ में नहीं आता कि परिणाम की घोषणा के बाद चुनाव आयोग किसकी जांच करेगा? लेकिन सवाल उठता है कि भाजपा को मुसलमानों के वोट मिलने पर सवाल क्यों उठाया जा रहा है? असल में भाजपा को सम्प्रदायिक पार्टी बताकर सपा, बसपा जैसे क्षेत्रीय दल मुसलमानों के वोट लेते रहे। लेकिन इस बार ऐसे दलों का भ्रम टूट गया। हालांकि यह भ्रम तो 2014 के लोकसभा चुनाव में ही टूट गया था। लेकिन मायावती और अखिलेश यादव का यह मानना रहा कि विधानसभा चुनाव में तो मुसलमान कभी भी भाजपा को वोट नहीं देंगे, क्योंकि मुसलमानों के सामने हमदर्द मायावती और अखिलेश यादव का चेहरा होगा। लेकिन यूपी के मुस्लिम मतदाताओं ने लोकसभा से भी ज्यादा विधानसभा में भाजपा को वोट दिए। असल में अब मुस्लिम मतदाताओं को भी लगने लगा है कि क्षेत्रीय दल सिर्फ इस्तेमाल करने के लिए ही वोट हासिल करते हैं। संभवतया भाजपा को वोट देने में मुस्लिम महिलाओं की भी सकारात्मक सोच रही है। मुस्लिम महिलाएं भले ही तीन तलाक के मुददे पर अपनी जुबान नहीं खोल सकती हों। लेकिन इस प्रथा से उन्हें भी परेशान होना पड़ता है। मायावती और अखिलेश यादव को यह समझना चाहिए कि देश दुनिया के वर्तमान माहौल में किसी भी जाति की महिला दुखी और परेशान नहीं होना चाहती। पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान दो टूक शब्दों में कहा कि तीन तलाक सामाजिक बुराई है। मुस्लिम मतदाताओं ने मोदी के इस नारे पर भी भरोसा किया, सबका साथ, सबका विकास। यूपी चुनाव के परिणाम से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और बिहार में लालू यादव को भी सावधान हो जाना चाहिए। (एस.पी.मित्तल) (14-03-17)

चुनाव परिणाम और ईबीएम मशीन पर विशेष- साथियों, चुनाव में जिस राजनेता या दल की हार हो जाती है उसे अपने कर्म व करनी याद नहीं आती है बल्कि उसे चुनाव में बेइमानी याद आने लगती है।वह जनादेश पर अंगुली उठाकर अपने को जनप्रिय साबित करने में जुट जाता है। राजनेता कभी अपने को हार का जिम्मेदार नहीं मानता है और बिना सोचे समझे आरोप लगाना शुरू कर देता है।इस बार के सम्पन्न चुनाव में जनता द्वारा दिये गये अभूतपूर्व अकल्पनीय जनादेश को लेकर तरह तरह की बातें करके चुनाव आयोग की ईमानदारी पर अंगुली उठने लगी है।इस चुनाव में बसपा प्रमुख मायावती जी का सूपड़ा साफ हो गया और उनकी सोशल इन्जीनियरिग फेल हो गयी। उन्हें अपनी चुनावी कार्यशैली मे दोष नहीं नजर आ रहा है बल्कि अब उन्हें ईबीएम मशीन में घपला नजर आने लगा है। उनका तर्क भी बौखलाहट का प्रतीक लग रहा है और उनका कहना है कि जहाँ पर मुस्लिम मतदाता अधिक हैं वहाँ पर भाजपा कैसे जीत गयी? लगता है कि मुस्लिम मतों का उन्होंने ठेका ले रखा है जो उनके अलावा किसी को वोट नहीं देंगे। बहन जी भूल रही है कि भाजपा का मुस्लिम प्रेम नया नहीं बल्कि पुराना है और उसके साथ भी आज से नहीं बल्कि अटल बिहारी बाजपेई के जमाने से मुस्लिमो का एक वर्ग समर्थक रहा है और मुसलमान आज भी उनके जमाने के कई कार्यों की तारीफ और याद दोनों आज भी करता है। वह भूल रही हैं कि जब जनता अगडाई लेती है तो सारे मानक अपने आप ध्वस्त हो जाते हैं और एक नयी इबारत लिख देते हैं। सपा बसपा के कथित मुस्लिम प्रेम और उनकी कार्यशैली ने उन्हें आज यह दिन दिखाये हैं। उन्हें जनादेश को सिरमाथे पर लेकर आत्म मंथन करने की जरूरत है। वैसे भी लोकतंत्र में सरकार का बदलना अनिवार्य माना जाता है और समाजवाद के जनक डा राममनोहर लोहिया ने भी कहा था कि जिस तरह से तवे की रोटी को न पलटने से वह खाने योग्य नहीं रह जाती है उसी तरह से लोकतंत्र में बदलाव न होने से तानाशाही का जन्म हो जाता है जो लोकतंत्र के लिये घातक होती है। प्रदेश में जिस तरह जाति पात धर्म सम्प्रदाय की राजनीति शुरू हुयी थी उसका अंत होना लोकतंत्र के लिये अति आवश्यक था क्योंकि इससे समाजिक समरसता एकता भाईचारा समाप्त होने की कगार पर पहुँच गया है। राजनीति के चलते प्रदेश में आतंकवादियों के पैर फैलने लगे हैं और उसका खामियाजा बेगुनाह जनता को भुगतना पड़ रहा है। चुनाव में पराजित नेताओं को ईबीएम मशीन में दोष ढूँढने की जगह खुद अपनी कमी देखकर उसे ठीक करना चाहिए। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। *अनिल राठौर* संवाददाता

जय श्री राम शुभ मंगलवार भारत माता की जय ॐ हनुमते नमः वो कत्ल करते रहे और हमने पूछ दिया तो हमे ही दंगाई बना दिए पिछले 15 साल में कल की होली थी की यूपी में कहि साम्प्रदयिक तनाव नही हुवा जबकि यूपी में अभी तक बीजेपी सरकार शपथ ग्रहण भी नही किया है कभी डी जे का प्रतिबन्ध कभी आजमखान को कुम्भ का प्रबन्धन कभी कावड़ियों पर रोक कभी 84 कोशी परिक्रमा पर प्रतिबन्ध राम जुलुस नही निकाल सकते कल चाहे हिन्दू इलाका हो या मुस्लिम लाइट नही कटी अगर कहि फाल्ट न रहा हो तो अगर माता पिता अपने बच्चों का सम्मान में भेदभाव करे तो उस परिवार में माता पिता का ही धीरे सम्मान कम हो जाता हैं और सरकार जनता के साथ यह करके कैसे बची रह सकती हैं । बीजेपी सरकार क्या करती हैं या नही करती है यह तो समय बताएगा पर यूपी की जनता अपने दम पर आजादी पा ली अब मन्दिर से लाउड स्पीकर नही उतारा जायेगा हिन्दू त्योहारों पर प्रतिबन्ध नही लगेगा ला एन्ड ऑर्डर भी सही होगा और कोई नेता आपकी जमीन कब्जा नही करेगा और अगर बीजेपी अपने घोषणा पत्र पूरा कर दी तो बोनस होगा बस यूपी का सी यम हिंदुत्व वादी हो हर हर महादेव बी एस त्रिपाठी राष्ट्रीय संयोजक तिरपाल से मन्दिर निर्माण मुहीम अयोध्या

जय श्री राम शुभ रविवार भारत माता की जय ॐ हनुमते नमः केशरिया होली की शुभकामनाएं 2012 में 68 मुस्लिम विधायक सपा के थे और टोटल विधानसभा में 80 प्लस यही से मायावती 103 टिकट दे दी पर तीन तलाक पर सपा बसपा कांग्रेस तीनो मुस्लिम पुरुषो के साथ खड़ी थी और 10 % मुस्लिम वोट बीजेपी ले उडी यह निश्चित ही मुस्लिम महिलाए ही वोट दी होगी क्योकि मुस्लिम तो फतवा जारी करते रहे की महिलाओं को वोटिंग से दूर रखे तभी तो देवबन्द और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी दोनों लगभग 70 % से ज्यादा आबादी वाली सीट बीजेपी जीत गई खैर मीडिया से लेकर हर पार्टी सिर्फ 18 % मुस्लिम वोट के पीछे भागती रही और बीजेपी 80 % हिन्दू हक के साथ 10 % मुस्लिम महिलाओं का हित उठाकर इमोशनल उनके घर में घुश गई । वैसे जिसदिन एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किये थे उसी दिन हमारा पोस्ट था की अखिलेश मायावती दोनों 2017 में मुख्यमंत्री नही बनेगे क्योकि जो जो क्रूर शाशक जनता को दुखी रखकर आगरा को विश्वप्रसिद्ध किया उसका शाशन गया शाहजहा के बाद मुगल शाशन अंत की शुरुआत हुवा दिल्ली आगरा एक्सप्रेसवे के बाद माया गई 14 में जीरो अब राज्यसभा भी नही जा सकती हैं और अखिलेश भी अब वापसी बड़ी मुश्किल है हा किसी और के नाम पर लड़े तो बात अलग और अंत में 1947 में सिर्फ भारत आजाद हुवा था 2017 में हिंदुत्व को आजादी मिली हर हर महादेव बी एस त्रिपाठी राष्ट्रीय संयोजक तिरपाल से मन्दिर निर्माण मुहीम अयोध्या

मुझे बीजेपी के जीतने से कोई परेशानी नहीं, बस समाजवादी पार्टी के हारने की ख़ुशी जरूर है।* * *मुसलमान गुजरात के एक दंगे को याद करके मोदी को कोसते रहते हैं और छोटे-छोटे सैकड़ो दंगे कराने वाली पार्टियों के झंडे ढोते रहते और उन्हें सर पर बैठाए रहते हैं! मुझे यकीन है, यूपी में अब दंगे नहीं होंगे! बीजेपी हिंदुओं को इकठ्ठा और एकजुट करके वोट पाती है या पाने की कोशिश करती हैं लेकिन बाकि पार्टियां मुस्लिम समाज को डराकर उनका वोट छीन लेती है! मुसलमान कभी भी आज़ादी से अपनी मांग को पूरी करवाने के लिए वोट नहीं दे पाए! वो हमेशा डर के चादर में सिमटकर अपनी जान को महफूज़ रखने भर के लिए अपना वोट किसी को भी दे आते हैं! सारी पार्टियां मुस्लिम को बीजेपी से ऐसे डराती है जैसे बीजेपी आ जायेगी तो मुस्लिमो को खा जएंगी! अखिलेश की ये हार जरुरी थी, राहुल का हारना तय था! और मुस्लिमों के अंदर बीजेपी के डर वाले भ्रम का भी टूटना बहुत जरुरी था! सबसे बड़ा सच जो हर क्षेत्र मे लागू होता वह यह है कि जो मेहनत करेगा वही फल पायेगा! मोदीजी पीएम रहते हुए भी अपनी पार्टी के लिए जी-जान लगा दिए, बड़े-बड़े कैबिनेट मंत्री ने जमीनी तौर पर मेहनत किया और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया जीत हासिल करने के लिए! ये जीत एकबार फिर से पीएम मोदी की जीत है! इसलिए क़तराइये मत, मोदीजी को बधाई दीजिये, क्योंकि वो बधाई के पात्र हैं .. महताब खान रायबरेली..

जय श्री राम शुभ शनिवार भारत माता की जय ॐ हनुमते नमः आज का दिन भारत की राजनीति का परिवर्तन का दिन होगा आजादी से आज तक हिंदुत्व को राजनितिक अछूत मानने वाले दल भी अब हिन्दू के बिना राजनीति नही होगी और यह बहुसंख्यक के समाज के हित में होगा और यह उन दलो के लिये अगर शुरुआत में किसी जाति और धर्म की बजाय भारत और भारतीय विकास और गरीबी पर चुनाव लड़े होते तो आज कांग्रेस इस हाल में नही होती और न ही देश का यह हाल होता सभी हिन्दू मतदाताओ का सही निर्णय लेने के लिये बहुत बहुत बधाई हर हर महादेव बी एस त्रिपाठी राष्ट्रीय संयोजक तिरपाल से मन्दिर निर्माण मुहीम अयोध्या

जय श्री राम शुभ शुक्रवार भारत माता की जय ॐ कालिकायै नमः बिहार के चुनाव परिणाम के बाद हमने लिखा था भले बीजेपी हारी पर जीता हिंदुत्व क्योकि बिहार चुनाव से पूर्व हर चुनाव में सिर्फ जालीदार टोपी दिखाई या पहनी जाती थी पर पुरे बिहार चुनाव के दौरान नितीश कुमार बार बार मन्दिर जाते दिखे और लालू यादव गाय को चारा खिलाते दिखे मतलब वह यह साबित करने में सफल रहे हम हिन्दू ही है अगर कहि वह केवल यादव मुस्लिम या पटेल मुस्लिम किये होते तो शायद रिजल्ट वैसा ही होता जैसा कल यूपी का होगा कल से सोशल मिडिया पर चमचागिरी का नया ग्रुप सक्रिय हो जायेगा 2014 जैसा 2014 में जो 100 बार लिखकर दे रहे थे की मोदी कभी पी यम नही बन पायेगे वह 26 मई के बाद बड़े वाले भक्त बन गए मोदी के प्रचार करने वाले तो सच बात पर सरकार के खिलाफ भी लिख देते थे पर 16 मई 2014 के बाद बने अंधभक्त तो गलत बात में भी हा जी हा जी करने लगे और कल से यही होगा जो सुबह से शाम तक पूछते थे राम मन्दिर बना क्या वह जय श्री राम करते नजर आयेगे और इतना चिल्लायेगे की हर जगह वही नजर आयेगे खैर यूपी को सही में विकसित करना है तो मोदी और योगी जी की जोड़ी बनानी होगी तभी यहाँ बीजेपी लगातार बीजेपी की स्थिर सरकार रह सकता हैं इसलिये भविष्य को सुरक्षित रखने के लिये योगी के समर्थन बनाए हर हर महादेव बी एस त्रिपाठी राष्ट्रीय संयोजक तिरपाल से मन्दिर निर्माण मुहीम अयोध्या

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