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यह है प्रक्रिया टायर की हवा निकाल चेन चढ़ाते हैं। फिर हवा भरते ही टायर के साथ चेन टाइट हो जाती है। पंप पर गिरारी लगाते हैं। पंप में दो पाइप लगती हैं। एक से पानी खींचते हैं, दूसरी से पौधों में सिंचाई।3 एचपी मोटर जितनी क्षमता, लाइट की चिंता भी नहीं महेंद्र ने बताया कि हर मोटर की तरह एंपुलर लगाया। इस तरह सेट किया, जिससे कैपिसिटी डबल हो गई। हैड भी अलग से डिजायन किया ताकि हैड व पाइप फटे नहीं।बाइक को चार नंबर गियर डालकर छोड़ देने पर बिना रेस के टायर चलता है। इससे प्रति मिनट 2900 राउंड आ रहे हैं और पंप चलने लगता है। 100 फीट गहराई से पानी खींच लेता है। हर दिन 5 हजार लीटर पानी निकालते हैं। इसमें सिर्फ 20 रु. का पेट्रोल खर्च होता है। 45 असफलताओं के बाद हुआ सफल सबसे पहले सोलर पंप का आइडिया आया, जिसमें पहले डेढ़ लाख रुपए खर्चा था। इसमें हर साल बैट्री बदलने का 12 हजार रुपए खर्चा आता। इंजन का विचार आया। इसमें हर दिन 250 रुपए खर्चा और जनरेटर पर 35 हजार रुपए लगते थे। यह भी मुश्किल था। बिजली का हर महीने औसत 1500 रुपए का बिल आता। आखिरकार खुद ही पंप बनाकर बाइक से जोड़ने का आइडिया आ गया। चार महीने लगे और 46वीं बार में सफल हुए।

नई दिल्ली : देश की जानी मानी कानपुर आईआईटी ने 60 पीएचडी स्कालर्स सहित 98 छात्रों को अपने कैम्पस से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. निष्कासित होने वाले इन छात्रों पर मानक पूरे न करने और बीच में पढाई छोड़ देने का आरोप है. आईआईटी कानपुर की इस कार्यवाही को उसकी रैंकिंग सुधारने की कवायद बताया जा रहा है. कभी नंबर 1 रैंकिंग प्राप्त तकनीकी संस्थान का दर्जा रख चुके कानपुर के आईआईटी ने अपने छात्रों पर एक बड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही की है. उसने खराब परफार्मेंन्स और लापरवाह छात्रों को बड़े पैमाने पर निष्कासित कर दिया है. निष्कासन का फैसला सीनेट की मीटिंग में लिया गया. सीनेट चेयरमैन डा0 इन्द्रनिल मन्ना की अध्यक्षता में हुई बैठक में छात्रों की परफार्मेन्स पर चर्चा की गयी और इसके बाद साठ पीएचडी छात्रों को निष्कासित करने का फैसला लिया गया. बताया जाता है कि इन छात्रों में से अधिकांश छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ गये है या तो उन्होंने तय मानक पूरे नहीं किये हैं. इन छात्रों को अब दोबारा मौका नहीं दिया जायेगा. इसके अलावा पिछले सेमेस्टर में खराब परफार्मेन्स करने वाले 38 यूजी और पीजी छात्रों को एक सेमेस्टर के लिये सस्पेंड किया गया है. लेकिन इनके पास अपील करने का मौका होगा. अपील मान्य होने पर वे दोबारा पढ़ाई शुरू कर सकेगें. इन 98 छात्रों के निष्कासन के अलावा 138 छात्रों को सुधरने की चेतावनी भी दी गयी है. इस तरह आईआईटी ने पिछले सेमेस्टर की तुलना में इस सेमेस्टर में बड़ी कार्यवाही की है. इस अनुशासनात्मक कार्यवाही की बीच आईआईटी छात्र दबी जुबान से पीएचडी छात्र अलोक कुमार पाण्डे की मौत पर सीनेट में चर्चा न किये जाने पर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं. पिछली आठ अगस्त को मैटीरियल साईन्स में पीएचडी करने वाले छात्र आलोक की मौत बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में हो गयी थी, तब स्टूडेण्ट जिमखाना ने मौत की वजह संस्थान का तनावपूर्ण शैक्षिणिक माहौल बताते हुए जाॅच की माॅग की थी.

धारा 376 भारतीय दंड संहिता धारा 376 बलात्संग के लिए दण्ड का प्रावधान बताती है। इसके अन्तर्गत बताया गया है कि (1) द्वारा उपबन्धित मामलों के सिवाय बलात्संग करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिनकी अवधि सात वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन के लिए दस वर्ष के लिए हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, किंञ्तु यदि वह स्त्री जिससे बलात्संग किया गया है, उसकी पत्नी है और बारह वर्ष से कम आयु की नहीं है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी अथवा वह जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा। परंतु न्यायालय ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगे, सात वर्ष से कम की अवधि के कारावास का दण्ड दे सकेगा।    बलात्कार केस जिनमें अपराध साबित करने की जिम्मेदारी दोषी पर हो न कि पीडि़त स्त्री पर। यानि वे केस जिनमें दोषी व्यक्ति होने को अपने निर्दोष होने का सबूत देना हो।    उपधारा (2) के अन्तर्गत बताया गया है कि जो कोई  -पुलिस अधिकारी होते हुए- उस पुलिस थाने की सीमाओं के भीतर जिसमें वह नियक्त है, बलात्संग करेगा, या किसी थाने के परिसर में चाहे वह ऐसे पुलिस थाने में, जिसमें वह नियुक्त है, स्थित है या नहीं, बलात्संग करेगा या अपनी अभिरक्षा में या अपने अधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में किसी स्त्री से बलात्संग करेगा, या    - लोक सेवक होते हुए, अपनी शासकीय स्थिति का फायदा उठाकर किसी ऐसी स्त्री से, जो ऐसे लोक सेवक के रूप में उसकी अभिरक्षा में या उसकी अधीनस्थ किसी लोक सेवक की अभिरक्षा में है, बलात्संग करेगा, या    - तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा यह उसके अधी स्थापित किसी जेल, प्रतिप्रेषण गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान के या स्त्रियों या बालकों की किसी संस्था के प्रबंध या कर्मचारीवृंद में होते हुए अपनी शासकीय स्थिति का फायदा उठाकर ऐसी जेल, प्रतिपे्रषण गृह स्थान या संस्था के किसी निवासी से बलात्संग करेगा, या   - किसी अस्पताल के प्रबंध या कर्मचारीवृंद में होते हुए अपनी शासकीय स्थिति का लाभ उठाकर उस अस्पताल में किसी स्त्री से बलात्संग करेगा,या(ड.)किसी स्त्री से, यह जानते हुए कि वह गर्भवती है, बलात्संग करेगा या   - किसी स्त्री से, जो बारह वर्ष से कम आयु की है, बलात्संग करेगा या   - सामूहिक बलात्संग करेगा।   - जब गर्भवती महिला के साथ बलात्संग किया गया हो   वह कठोर कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन हो सकेगी दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा। परंतु न्यायालय ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से, जो निर्णय में उल्लिखित किये जाऐंगे, दोनों में से किसी भांति के कारावास को, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की हो सकेञ्गी दण्ड दे सकेगा।   इस धारा में तीन स्पष्टीकरण दिये गए है, प्रथम स्पष्टीकरण के अंतर्गत बताया गया है कि जिन व्यक्तियों के समूह में से एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा सबके सामान्य आशय को अग्रसर करने में किसी स्त्री से बलात्संग किया जाता है, वहां ऐसे व्यक्तियों में से हर व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने उस उपधारा के अर्थ में सामूहिक बलात्संग किया है।    द्वितीय स्पष्टीकरण के अंतर्गत बताया गया है कि स्त्रियों या बालकों को किसी संस्था से स्त्रियों और बालकों को ग्रहण करने और उनकी देखभाल करने के लिए स्थापित या अनुरक्षित कोई संस्था अभिप्रेत है, चाहे वह उसका नाम अनाथालय हो या उपेक्षित स्त्रियों या बालकों के लिए गृह हो या विधवाओं के लिए गृह या कोई भी अन्य नाम हों।   तृतीय स्पष्टीकरण के अन्तर्गत बताया गया है कि अस्पताल से अस्पताल का अहाता अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत ऐसी किसी संस्था का आहता है जो उल्लंघन(आरोग्य स्थापना) के दौरान व्यक्तियों को या चिकित्सीय ध्यान या पुर्नवास की अपेक्षा रखने वाले व्यक्तियों का ग्रहण करने और उनका आचार करने के लिए है।

जहां चाह होती है वहां राह होती है। यह कहावत देहा गांव की अखबार बेचने वाली शिवांगी ने सच कर दिखाया है। शिवांगी ने हाल ही IIT पास कर एक शानदार नौकरी हासिल कर ली है। उनकी इस उपलब्‍धि का बखान उनके टीचर व सुपर 30 के आनंद कुमार ने फेसबुक पोस्‍ट में किया है। शिवांगी के इस अचीवमेंट की स्‍टोरी को अब तक बड़ी संख्‍या में लोग शेयर और लाइक कर चुके हैं... वादा पूरा हो गया जी हां हाल ही में सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार ने फेसबुक पर एक पोस्‍ट किया है। जिसमें उन्‍होंने कानपुर से 60 किलोमीटर दूर देहा गांव की शिवांगी की कहानी बताई है। उनका कहना है कि आज उन्‍हें बड़ी खुशी हो रही है कि यह बच्‍ची इस मुकाम पर पहुंची है। कभी अखबार बेचने वाली शिवांगी ने हाल ही में IIT पास किया। इसके बाद वह आज एक प्रतिष्ठित कंपनी में अच्छे ओहदे पर नौकरी कर रही है। शिवांगी की इस उपलब्‍धि से आज उनकी मां और उनका पूरा परिवार बेहद खुश है। उन्‍हें भी लगता है कि आज शिवांगी के पिता से किया वादा पूरा हो गया। सेलेक्‍शन हो गया इसके साथ ही आनंद कुमार ने अपने पोस्‍ट में शिवांगी की मेहनत और लगन का जिक्र काफी बारीकी से किया है। जब शिवांगी काफी छोटी थी तब अपने पिता के साथ अखबार बेचती थी। वह एक सरकारी स्‍कूल में पढ़ती थी। इंटर तक की पढा़ई करने के बाद वह पिता के काम को पूरी तरह से संभाल चुकी थी। इस दौरान एक दिन उसे सुपर 30 के बारे में पता चला। वह अपने पिता के साथ सुपर 30 वाले आनंद कुमार से मिली। शिवांगी का सेलेक्‍शन सुपर 30 में हो गया। शिवांगी ने काफी मेहनत से पढा़ई की है। मां रो पड़ी जिसके बल पर उसने एक निर्धारित समय में आईआईटी पास कर लिया। इसके बाद उसे एक अच्‍छी कंपनी ने अपने यहां नौकरी दे दी। वह कहते हैं कि शिवांगी ने दिन रात मेहनत की। वह कभी पढा़ई से न घबराई न पीछे हटी। वह उनके परिवार के सदस्‍य की तरह रही है। शायद इसीलिए जिस दिन उसकी नौकरी लगी उसने सबसे पहले उनके घर पर कॉल की। उसकी नौकरी की बात सुनकर उनकी मां तो खुशी के मारे रो पड़ी। शिवांगी का सेलेक्‍शन होना उनके लिए एक गर्व की बात है। उन्‍हें भरोसा है कि शिवांगी आगे भी काफी अच्‍छा काम करेगी।

नई दिल्लीः एक कॉफी प्लीज...। जी सर अभी लाया...। हर रोज सुबह से शाम तक इसी अंदाज में फरमाश सुनने और पूरी करने वाले के जयगणेश ने सपने में नहीं सोचा था कि एक दिन वे वेटर से साहब बन जाएंगे। मगर सपने ऊंचे हों और कठिन मेहनत-पक्का इरादा हो तो रेत से भी तेल निकाला जा सकता है। यह साबित कर दिखाया गरीबी में पले-बढ़े जयगणेश ने। पैसे की कमी पूरी करने के लिए दिन भर होटल में नौकरी करते-करते भी पढ़ाई और तैयारी जारी रखी। मेहनत रंग लाई और किस्मत आखिरकार बुलंद हो ही गई। 2008 में आखिरकार सातवें प्रयास में जयगणेश सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफल रहे। आज तमिलनाडु काडर में बतौर आईएएस अफसर सेवा दे रहे। उस दिन का वाकया जयगणेश कैसे भूल सकते हैं। जब किसी का आर्डर लगा रहे जयणगेश को अचानक टोकते हुए दोस्त ने कहा- तुम अब वेटर नहीं रहे, साहब बन गए। लो मुंह मीठा करो। अब तो तुम्हारा आर्डर चलेगा, तुम्हारी फरमाइश चलेगी। जैसे ही दोस्त ने यह खुशखबरी सुनाई तो जयगणेश रो पड़े। पढ़िए संघर्ष की कहानी तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के विनावमंगलम गांव के गरीब परिवार में जन्मे जयगणेश चार भाई-बहनों में सबसे बड़े रहे। पिता एक कारखाने में मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पेट पालते थे। पढ़ने में के जयगणेश बचपन से ही अव्वल रहे। उन्होंने 91 प्रतिशत अंकों के साथ 12 वीं की परीक्षा पास की। अच्छे प्रतिशत से इंटरमीडिएट पास होने पर पिता को लगा कि बेटा उनकी गरीबी दूर कर सकता है। इसलिए उसे अच्छी पढ़ाई किसी भी कीमत पर दिलानी चाहिए। पिता ने इधर-उधर से कर्ज लेकर के जयगणेश का दाखिला तांथी पेरियर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कराया। जहां मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद जयगणेश की नौकरी एक कंपनी में लगी। महज ढाई हजार रुपये महीने में मिलते थे। सपने पूरा करने के लिए बन गए वेटर महज ढाई हजार रुपये में बाहर रहने का अपना खर्च पूरा ही नहीं हो पा रहा था तो परिवार की मदद की बात ही छोड़िए। जबकि जयगणेश के दिल में हमेशा यह बात थी कि उन्हें आईएएस बनना था। फिर जयगणेश एक होटल में वेटर की नौकरी करने लगे। ताकि कुछ पैसे मिलें तो आईएएस की तैयारी जारी रखने के साथ परिवार की भी मदद कर सकें। दिन में वेटर की नौकरी करते और रात में घर जाकर कठिन पढ़ाई करते। इस दौरान आईबी(इंटेलीजेंस ब्यूरो) की परीक्षा पास की। मगर जयगणेश की मंजिल सिर्फ आईएएस अफसर के सफर तक थी। इस पर उन्होंने आईबी की नौकरी नहीं की। फिर सातवीं बार सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास की। जब रिजल्ट आया तो जैसे आज मैं ऊपर आसमां नीचे वाला हाल रहा। वेटर की नौकरी करने वाले के जयगणेश का नाम सफल अभ्यर्थियों की ऑल इंडिया रैकिंग में 156 वें नंबर पर था। जब होटल के स्टाफ को जयगणेश के आईएएस बनने का पता चला तो सब अपने साथी के अफसर बनने पर खुशी से नाच उठे।

नई दिल्ली(22 अक्टूबर): रेलवे, पीडब्लुडी विभागों में वैकेंसी निकली है। रेलवे की वैकेंसी में 10वीं पास कैंडिडेट्स भी अप्लाई कर सकते हैं। इन दोनों विभागों में 200 से ज्यादा पदों पर नियुक्तियां की जाना हैं। कहां:पश्चिम मध्य रेलवे पोस्ट :प्रशिक्षु (Apprentices) के 145 पद > इलेक्ट्रीशियन/ फिटर (45) > वेल्डर (8) > तकनीशियन (39) > फिटर (53) क्वालिफिकेशन :10वीं/12वीं/ ITI एज लिमिट:15 से 24 साल कैसे करें आवेदन :रेलवे की वेबसाइट www.wcr.indiarailways.gov.in के जरिए 9 नवंबर तक आवेदन किया जा सकता है।

कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने नवंबर 2016 से अप्रैल 2018 तक होने वाली भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर मंगलवार को जारी कर दिया। इन 17 महीनों में आयोग छोटी-बड़ी 23 भर्ती परीक्षाएं आयोजित करेगा। आयोग की ज्यादातर भर्ती परीक्षाएं अब ऑन लाइन यानी कम्प्यूटर आधारित ही होंगी। एसएससी की दो बड़ी भर्ती परीक्षाओं में से एक संयुक्त स्नातक स्तरीय भर्ती (सीजीएल) 2016 के पहले चरण की परीक्षा हो चुकी है। आठ नवंबर को इसका परिणाम घोषित किया जाएगा। दूसरे चरण की परीक्षा तीस नवंबर से दो दिसंबर 2016 के बीच कम्प्यूटर आधारित होगी। जूनियर इंजीनियर भर्ती 2016 के लिए आवेदन लिए जा चुके हैं। इस भर्ती के पहले पेपर की परीक्षा आठ, नौ और 12 दिसंबर 2016 को कम्प्यूटर आधारित होगी। सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ), दिल्ली पुलिस एसआई और सीआईएसएफ एएसआई भर्ती 2016 के दूसरे पेपर की परीक्षा आठ दिसंबर 2016 को कम्प्यूटर आधारित करवाई जाएगी। एसएससी की दूसरी बड़ी भर्ती संयुक्त हायर सेकेंड्री स्तरीय (सीएचएसएल) 2016 के पहले चरण की परीक्षा सात जनवरी से पांच फरवरी 2017 के बीच कम्प्यूटर आधारित होगी। इस भर्ती के लिए इन दिनों ऑन लाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। सीजीएल 2016 की तीसरे चरण की दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों वाली परीक्षा 15 जनवरी 2017 को होगी जबकि इसकी चौथे चरण की परीक्षा 17 जनवरी से 17 फरवरी 2017 के बीच होगी। जूनियर इंजीनियर भर्ती 2016 के दूसरे पेपर की दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों वाली परीक्षा 19 फरवरी 2017 को होगी। दिल्ली पुलिस की सिपाही भर्ती 2016 के लिए आवेदन लिए जा चुके हैं। परीक्षा चार से सात मार्च 2017 के बीच कम्प्यूटर आधारित होगी। मल्टी टॉस्किंग स्टॉफ भर्ती यानी एमटीएस 2016 भर्ती का नोटिफिकेशन 24 दिसंबर 2016 को जारी होगा। 20 जनवरी तक ऑन लाइन आवेदन लिए जाएंगे। पहले पेपर की परीक्षा 16 और 30 अप्रैल तथा सात मई 2017 को ओएमआर आधारित कराई जाएगी। जबकि दूसरे पेपर की दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों वाली परीक्षा 17 दिसंबर 2017 को होगी। सीएचएसएल 2016 के दूसरे चरण की दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों वाली परीक्षा चार जून 2017 को होगी। सिपाही भर्ती परीक्षा 2016 के लिए ऑन लाइन आवेदन 12 नवंबर 2016 से शुरू होंगे और नौ दिसंबर तक लिए जाएंगे। परीक्षा 15 से 22 जुलाई 2017 तक कम्प्यूटर आधारित होगी।

हमारे देश में बच्चे की काबलियत उसके स्कूल और कॉलेज से लगाई जाती है. किसी बड़े और नामी कॉलेज या संस्थान में पढ़ने वाला बच्चा पढ़ाई में बहुत तेज़ होगा, अगर नहीं तो वो अपनी ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकता. लेकिन इस सोच को झंझोड़ देने वाले लड़के का नाम है मनीष भट्टाचार्या. अकसर बड़े कॉलेज या संस्थान में एडिमिशन नहीं मिल पाने को छात्र अपनी हार मान लेते हैं और इसे अपनी नाकामयाबी का कारण मान लेते हैं. लेकिन मनीष भट्टाचार्या की कहानी जानने के बाद हम सब मान लेंगे कि कोई भी कॉलेज या संस्थान हमारी नॉलेज और हमारे विश्वास को अच्छा या बुरा होने का सर्टिफ़िकेट नहीं दे सकता. बिहार का रहने वाला मनीष बचपन से ही इंजीनियर बनना चाहता था. हर बच्चे की तरह उसने भी इंजीनियरिंग के सबसे बेहतरीन संस्थान IIT के लिए परीक्षा दी. लेकिन वो फ़ेल हो गया. 2 कोशिशों के बाद भी उसका एडमिशन IIT में नहीं हो पाया. लेकिन उसे अपनी लाइफ़ का गोल पता था इसलिए उसने मेरठ के Tier-3 Engineering College में एडमीशन ले लिया. घर के हालात ऐसे नहीं थे वो मनीष की पढ़ाई का खर्च उठा सके, तो Loan ही एक मात्र साहारा बचा. अपने पहले साल में ही मनीष को Loan लिए पैसे को वापिस करने का डर सताने लगा. लेकिन मनीष की लाइफ़ में एक अहम मोड़ आने वाला था. हॉस्टल के कमरे में बैठे मनीष की नज़र Facebook पर आए अपने एक दोस्त की पोस्ट पर पड़ी. दुनिया की जानी-मानी कंपनी ने उसके दोस्त को पेज पर Bug (इंटरनेट वायरस) हटाने के लिए हटाने के लिए Thank You Mail लिखी थी. मनीष को अपने करियर का गोल नज़र आया और उसने Ethical Hacking और websites की Security Issues के बारे में पढ़ाई शुरू की. ये पढ़ाई मनीष के लिए लाइफ़ चेंजिंग बन कर आई. उसने Facebook पर Bug-Bounty Programme भी जीता. साथ ही उसे करीब 33 लाख रुपये मिले. इस जीत ने मनीष को अपने कॉलेज का हीरो बना दिया और जीत की रक़म से उसके Loan के पैसे भर गए. लेकिन मनीष इतने पर भी नहीं रुका. पढ़ाई के दौरान ही Ethical Hacking से उसने पैसे के साथ नाम कमाना भी शुरू कर दिया. आज मनीष अमेरिका की एक कंपनी के लिए Security Consultant के तौर पर काम करता है और लाखों रुपये हर महीने कमाता है. इतना ही नहीं Ethical Hacking के कारण उसके पास Freelance का भी काम है. मनीष आज किसी भी IIT या IIM के छात्र से ज़्यादा कमाता है. उसे Yahoo से भी नौकरी का ऑफ़र आ चुका है लेकिन मनीष ने उस ऑफ़र को ना कर के अमेरिका जाने का प्लान कर रहा है. मनीष हर उन छात्रों के लिए उदाहरण है, जो कॉलेज या संस्थान में एडमीशन नहीं मिल पाने के कारण निराश हो जाते हैं. कोई भी कॉलेज आपको डिग्री दे सकता है, लेकिन Talent पर सिर्फ़ कुछ बड़े कॉलेज का कॉपी राइट कतई नहीं होता.

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