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दसवीं में बोर्ड परीक्षा शुरू कराने के फैसले के बाद स्कूलों में चल रहा कन्टिन्युअस एंड कॉम्प्रिहेंसिव इवेल्युएशन (सीसीई) खत्म कर दिया गया है। नए सत्र से छात्रों को अंक एक्टिविटी के साथ परीक्षा में परफॉरमेंस के आधार पर दिए जाएंगे। साल में दो बार परीक्षा और तीन यूनिट टेस्ट होंगे। नए सिस्टम से बच्चों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी।

सीबीएसई ने सीसीई की शुरुआत 2009 में की थी। कक्षा एक से नौ तक के लिए लागू इस पैटर्न में पढ़ाई को लेकर किसी तरह की सख्ती नहीं थी। पूरा पाठ्यक्रम दो भागों में विभाजित रहता था। इसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों से जोड़ना था। जिस उद्देश्य से सीसीई की शुरुआत की गई थी, कुछ ही समय में उसका नकारात्मक परिणाम सामने आने लगे। छात्र पढ़ाई के बजाय एक्टिविटीज पर ज्यादा केंद्रित रहते थे जिससे शिक्षा का स्तर गिरने लगा। छात्रों को मूल्यपरक शिक्षा नहीं मिल रही थी। एक्टिविटीज के आधार पर ही उन्हें नंबर दिए जाते थे।

दसवीं में पास करना जरूरी था
आरटीई के तरह बच्चों को आठवीं तक फेल नहीं किया जाता। नवीं में सीसीई और दसवीं में होम बोर्ड की च्वाइस होने के कारण छात्र पढ़ाई को लेकर कतई गंभीर नहीं थे। परीक्षा के 100 मा‌र्क्स साल भर में होने वाले चार फॉरमेटिव और और दो सबमिटिव असेसमेंट में बंट जाते थे। बोर्ड का निर्देश था कि एफए में बच्चों को उन गतिविधियों से जोड़ा जाए जिसमें वह अच्छा है। इस कारण बच्चों को अच्छे नंबर देना अध्यापकों को मजबूरी बन जाती थी। बोर्ड के निर्देश थे कि बच्चों को फेल न किया जाए। अगर बच्चा फेल होता है तो उसके अगली कक्षा में प्रमोट कर उसका री-एग्जाम कराया जाए। इस पैटर्न के खत्म होने के बाद कक्षा छह से नौ तक एक ही फॉर्मेट रहेगा।

ग्यारहवीं में फेल हो रहे थे छात्र
सेंट एंड्रूज स्कूल के एमडी डॉ. गिरधर शर्मा कहते हैं कि सीसीई में एक्सपीरियंस, एसयूपीडब्ल्यू और एक्सट्रा करिक्यूलर एक्टिविटी के आधार पर नंबर दिए जाते हैं। कक्षा ग्यारह में पढ़ाई किताबों पर आधारित होती है। ग्यारहवीं में आते ही बच्चों को पढ़ाई कठिन लगने लगती थी। जो छात्र दसवीं में नौ-दस सीजीपीएस लाते थे, वे भी ग्यारहवीं में फेल हो जाते थे। सीसीई का विरोध चारों तरफ से हो रहा था।

दो बार होगी परीक्षा
अप्सा के अध्यक्ष संजय तोमर के अनुसार बोर्ड द्वारा हाल ही में भेजे गए सर्कुलर के अनुसार कक्षा छह से नौ तक दो बार परीक्षा होंगी। तीन यूनिट टेस्ट होंगे। एक परीक्षा सितंबर में, दूसरी मार्च में होगी। एक समान परीक्षा पैटर्न से बच्चों को बोर्ड की तैयारी करने में मदद मिलेगी। होम बोर्ड खत्म होने से छात्रों पढ़ाई पर अधिक ध्यान देंगे।

गोरखपुर: सीबीएसई 12वीं का गणित का पेपर देखकर स्टूडेंट्स खुश तो हुए लेकिन लेंदी होने की वजह से पूरा पेपर अटेम्पट नहीं कर पाए। छात्रों के मुताबिक, सेट टू काफी लेंदी था। सर पदमपत सिंहानिया एजूकेशन सेंटर के गणित के टीचर एसएस द्विवेदी ने बताया कि पैटर्न चेंज होने की वजह से पेपर थोड़ा लेंदी हो गया। लास्ट इयर 26 क्वेश्चन आए थे जबकि इस बार 29 क्वेश्चन गए। स्टूडेंट कार्तिकेय ने कहा कि पेपर देखकर अच्छा लगा लेकिन पूरा पेपर नहीं कर पाया। अमन अग्रवाल व मलिका अरोड़ा ने कहा कि पेपर लेंदी होने की वजह से परेशानी हुई। बॉक्स 4668 ने परीक्षा छोड़ी यूपी बोर्ड में सोमवार को हाईस्कूल मैथ्स का पेपर था। जिसमें जीएनके इंटर कॉलेज मे एक छात्र को नकल करते हुए दबोच लिया। डीआईओएस डॉ। विनय मोहन वन ने बताया कि हाईस्कूल गणित व प्रारंभिक गणित की परीक्षा 3497 स्टूडेंट्स ने छोड़ दी। वहीं शाम की पाली में इंटर की परीक्षा में 1171 स्टूडेंट्स गैरहाजिर रहे।

राजस्थान की भाजपा सरकार अब मुख्यमंत्री निशुल्क कोचिंग योजना के तहत एक हजार प्रतिभावान बच्चों को सालाना 60 हजार रुपए की सहायत देगी. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने सोमवार को बताया कि सरकार छात्रों को आई.आई.टी., आई.आई.एम., विधि, राष्ट्रीय स्तर के मेडिकल कॉलेज एवं राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान के लिए निशुल्क कोचिंग कराएगी. उन्होंने कहा कि विभाग के छात्रावासों में आवासरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व विशेष पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियों को अनुप्रति योजनान्तर्गत सूचीबद्ध इन संस्थाओं में प्रवेश लेने के लिए निःशुल्क कोचिंग कराएगी जाएगी. डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि इन वर्गों के प्रति वर्ष एक हजार बच्चों को आई.आई.टी., आई.आई.एम., विधि, राष्ट्रीय स्तर के मेडिकल कॉलेज एवं राष्ट्रीय तकनीकी सूचीबद्ध संस्थानों में प्रवेश के लिए जयपुर एवं कोटा में कार्यरत प्रतिष्ठित चयनित कोचिंग संस्थानों का चयन कर उनमें कोचिंग कराई जाएगी. उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा बजट घोषणा 2016-17 के अनुसरण में, प्रतिभावान विद्यार्थियों को कोचिंग की निःशुल्क सुविधा के सम्बन्ध में दिनांक 10 फरवरी, 2017 को मुख्यमंत्री निःशुल्क कोचिंग योजना के दिशा-निर्देश जारी किए गए. डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री निःशुल्क कोचिंग योजना के दिशा-निर्देश 2016 के अंतर्गत इस निःशुल्क कोचिंग योजना का मुख्य उद्देश्य कमजोर वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभावान विद्यार्थियों को ऐसे संस्थानों में प्रवेश के लिए समर्थ बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है. डॉ. चतुर्वेदी द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों से अपेक्षा की गई है कि राज्य में प्रतिभावान विद्यार्थियों की निःशुल्क कोचिंग योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु अधिकाधिक प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रेरित करें. उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग, मेडिकल पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं के लिए दो वर्ष एवं विधि और प्रबंधन पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं के लिए एक वर्ष कोचिंग सुविधा दी जाएगी. कोटा में पढ़ेंगे सभी वर्गों के 500-500 छात्र मंत्री डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार कोटा एवं जयपुर में सभी वर्गों के 500-500 विद्यार्थियों का प्रतिवर्ष चयन किया जाएगा. इसमें 30 प्रतिशत संस्थान संबंधित श्रेणी की छात्राओं के लिए आरक्षित होंगे. उक्त वर्ग की छात्रायें नहीं मिलने पर रिक्त स्थान उसी वर्ग के छात्रों से भरे जाएंगे. डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि कोचिंग प्रवेश के लिए विद्यार्थियों के लिए कोई भी परीक्षाओं के अंक को मापदण्ड बनाया जाएगा. उन्होंने बताया कि कोचिंग संस्थानों के चयन के लिए निदेशालय स्तर निदेशक की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया। जो कमेटी कोचिंग संस्थान का दो साल के लिए अनुबंध किया जाएगा. 60 हजार रुपए सालाना देगी सरकार चयनित कोचिंग संस्थान को कोचिंग के लिए प्रथम वर्ष में अधिकतम राशि 60 हजार रुपये प्रति विद्यार्थी स्वीकृत की जाएगी. इसके बाद आगामी वर्षों में प्रतिवर्ष की वृद्धि की जा सकेगी.

फरवरी यानी प्रेमियों का महीना। भारत में हर प्रेमी-युगल इसे लेकर काफी उत्साहित रहता है। लेकिन उनके साथ ही बजरंग दल और गुलाबी गैंग जैसे ग्रुप्स भी एक्टिव हो जाते हैं। कह सकते हैं कि इनके होते हुए वेलेंटाइन्स डे पर प्रेमियों का मिल पाना काफी मुश्किल है। किस की जगह मिल सकते हैं चांटे... खुद को भारतीय संस्कृति के रक्षक कहने वाले इन सोशल ग्रुप्स को किसने ये हक दिया कि वो खुलेआम प्रेमियों को सजा दें, ये तो आज तक पता नहीं चल पाया। लेकिन हर साल 14 फरवरी को ये सुप्त प्राणी जाग उठते हैं। जिसका पुरा खामियाजा उठाना पड़ता है बेचारे प्रेमी-जोड़ों को। पार्क हो या मॉल, इन प्रेमियों के लिए इस दिन कोई भी जगह सुरक्षित नहीं होती। कई जगह तो ये लोग लड़कों के अलावा लड़कियों पर भी हाथ उठाते दिख जाते हैं। लेकिन कुछ जगहों पर तो पुलिस भी आपको एक्टिव नजर आएगी। जो कपल पार्क में कुछ रोमांटिक पल बिताने आए थे, उन्हें इस दिन चांटे भी खाने पड़ जाते हैं।

केंद्र की मोदी सरकार ने युवाओं को नौकरी का वादा किया था। नई नौकरियों के सृजन में अभी तक उनतनी कामयाबी नहीं मिल पाई है। जिसको लेकर विरोधी केंद्र सरकार पर हमला करते रहते हैं। वो ढाई साल का हिसाब मांगते हुए कहते हैं कि कितनी नई नौकरियां युवाओं को मिली। फिलहाल अब केंद्र सरकार इस फ्रंट पर तेजी से काम कर रही है। बेरोजगारों के लिए अब बहुत बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है। केंद्र सरकार अगले वित्त वर्ष में 2.83 लाख नई नौकरियां निकालेगी। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट के बाद ये अनुमान निकाला जा रहा है। अगर ये अनुमान सही होता है तो युवाओं के लिए पीएम मोदी का शानदार तोहफा साबित होगा। अब आपको बताते हैं कि किस क्षेत्र में कितनी नौकरियां निकल सकती हैं। बजट के बाद जो अनुमान लगाया जा रहा है उसके मुताबिक केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2017-18 में ये नौकरियां निकालेगी। बजट केे दस्तावेजों के मुताबिक साल 2016 में केंद्रीय प्रतिष्ठानों में 32.84 लाख कर्मचारी काम करते थे। साल 2018 तक इसे बढ़ाकर 35.67 लाख करने की योजना है। अभी गृह मंत्रालय में 6,076 नए कर्मचारियों की भर्ती होनी है। इसी के साथ 2018 तक मंत्रालय में कुल कर्मचारियों की संख्या 24,778 तक पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। जाहिर है कि कर्मचारियों की संख्या अपने आप नहीं बढ़ेगी। इसके लिए नौकरियां निकाली जाएंगी जिन पर भर्ती होगी। ये खबर देश के बेरोजगार युवाओं के लिए खुशखबरी से कम नहीं है। नौकरी की तलाश में न जाने कितने युवा हताश हो जाते हैं। ऐसे में सरकार की ये कोशिश उनके लिए वरदान से कम नहीं है। आपको बता दें कि इन नौकरियों के अलावा पुलिस विभागों में भी 1.06 लाख कर्मचारी बढ़ाने की योजना है। अनुमान के मुताबिक पुलिस बल की संख्या 11,13,689 हो जाएगी। केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले पुलिस कर्मियों की संख्या 2016 में 10,07,366 थी। बजट दस्तावेजों के मुताबिक विदेश मंत्रालय में फिलहाल 9,294 कर्मचारी काम करते हैं। इनमें अगले वित्त वर्ष में 2,109 कर्मचारियों का इजाफा किया जाएगा। साफ है कि मोदी सरकार तेजी से नौकरियों के सृजन की तरफ काम कर रही है। आपको बता दें कि नए गठित किए गए स्किल डिवेलपमेंट ऐंड एंटरप्रोन्योरशिप मिनिस्ट्री में भी साल 2018 तक 2027 कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना है। पिछले साल 2016 में इस मंत्रालय में केवल 53 कर्मचारी ही काम करते थे। इस मामले में केंद्र सरकार के कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि एक्स्ट्रा वर्कफोर्स के जरिए केंद्र सरकार जनता से जुड़ी योजनाओं को तेजी से लागू करेगी। जनता तक सरकार की योजनाओं का फायदा जल्दी पहुंचेगा। कुल मिलाकर अगले वित्त वर्ष में मोदी सरकार 2.83 नई नौकरियों की बारिश करने वाली है। तो तैयार हो जाइए कि आप को किस क्षेत्र में नौकरी चाहिए। सरकार की तरफ से आई इस खबर के बीद बीजेपी ने कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार लगातार युवाओं के लिए नौकरियों का सृजन कर रही है। विपक्ष केवल जनता को गुमराह करता है। बता दें कि प्रधानमंत्री मन की बात कार्यक्रम के जरिए युवाओं से जुड़ते रहे हैं। वो उन्हे भरोसा दिलाते रहे हैं कि नौकरियां जल्द ही मिलेंगी।

वाराणसी सरकारी विद्यालय में बच्चो के भविष्य से हो रहा है।खिलवाड़ देखिये यह तस्वीर। क्लास के बच्चो को बाहर बैठाकर क्या करते है।बंद दरवाजा के अंदर ये प्रधानाध्यापक शैलेंद्र। वाराणसी आदमपुर थानाक्षेत्र इलाके के राजघाट काशी स्टेशन रोड स्थित एक प्राथमिक विद्यालय है जहां आये दिन दर्जनों बच्चो को प्रधानाध्यापक शैलेंद्र द्वारा क्लास से बाहर निकालकर गंदे गैलरी के जमीन पर बच्चो को बैठा दिया जाता है ।यह बच्चो के भविष्य से खिलवाड़ है ।आप इस तस्वीर में देख सकते है कि अगर ये बच्चे पढ़ने वाले है तो इन्हें बाहर इस तरह से आखिर क्यों बैठाया गया है ।और बाहर बैठाकर आये दिन क्लास रूम को अंदर से दरवाजा बंद करके क्या करते है।प्रधानाध्यापक शैलेंद्र वही विद्यालय परिसर के अंदर कुछ टीचरों का कहना है कि प्रधानाध्यापक शैलेंद्र पहले सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे अभी लगभग 15 दिनों से बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा इन्हें प्रधानाध्यापक बनाया गया है।और इनका इनके पत्नी से न्यायलय में मुकदमा विचाराधीन है।और मामला न्यायलय में विचाराधिन होते हुए एक सहायक अध्यापक को प्रधानाध्यापक कैसे बना दिया गया ये तो अधिकारी से बात करने पर ही पता चलेगा अधिकारी कैमरे के सामने कुछ बोलने को तैयार नहीं है।और इसी विद्यालय में एक महिला शिक्षामित्र है। नांम गोपनीय उनका उनसे पति से विवाद के कारण दोनों पति पत्नी अलग अलग हो गए है । तो विद्यालय में लोगो का कहना है।कि यह दोनों हमेशा इस बच्चो के साथ ऐसा करते है।कोई बोल नहीं पाता मना करने पर भी अपने मन के ही करते है।इस परिसर में लगभग काम करने वाले लगभग 15 सरकारी कर्मचारी है।मगर प्रधानाध्यापक शैलेंद्र किसी की भी नहीं सुनते है।

कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए सिपाही भर्ती परीक्षा-2015 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। लिखित परीक्षा, मेडिकल परीक्षण के बाद घोषित रिजल्ट में 57014 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। इनमें 51678 पुरुष एवं 5336 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं। एसएससी की ओर से कांस्टेबल जीडी के तहत सीएपीएफ, असम राइफल, एनआईए, एसएसएफ सहित कई अन्य केंद्रीय बलों के लिए सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा में कुल 11 लाख 65 हजार से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए थे। आयोग की ओर से लिखित परीक्षा पहली बार चार अक्तूबर 2015 को हुई थी। आयोग की ओर से परीक्षा निरस्त करने के बाद दोबारा परीक्षा 22 नवंबर 2015 को हुई। लिखित परीक्षा का रिजल्ट 14 मार्च और सात अप्रैल 2016 को घोषित किया गया। लिखित परीक्षा में एक लाख 44 हजार सफल हुए। इसमें 1.29 लाख पुरुष एवं 15 हजार महिला अभ्यर्थी शामिल रहीं। इन सफल अभ्यर्थियों के मेडिकल परीक्षण के बाद अंतिम परिणाम घोषित कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उनकी ओर से घोषित मेरिट प्रोविजनल है, इसमें अभ्यर्थी के प्रमाण पत्रों की जांच के बाद ही अंतिम नियुक्ति दी जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा परिणाम न्यायालय के आदेश के अधीन होगा

दून स्‍कूल इसे दून वैली में 1929 में खोला गया था. ये ब्‍वायज स्‍कूल है. यहां देश के अमीर परिवारों के बच्‍चे पढ़े हैं. राहुल गांधी, राजीव गांधी, हीरो ग्रुप के सुनील मुंजाल और पवन मुंजाल इसमें शामिल हैं. फीस यहां की फीस 9,70,000 रुपए सालाना है. 25 हजार प्रति टर्म फीस है. एडमिशन के समय यहां पर 3,50,000 रुपए सिक्‍योरिटी के तौर पर जमा कराने होते हैं जो रिफेंडबल होते हैं. वनटाइम एडमिशन फीस 3,50,000 रुपए देनी होती है.

सिंधिया स्‍कूल इसे 1897 में खोला गया था. इसे उस समय के महाराजा माधवराव सिंधिया ने खोला था. ये ग्‍वालियर में है. यहां से मुकेश अंबानी, सलमान खान और अनुराग कश्‍यप पढ़े हैं. फीस यहां सालान फीस 7,70,800 रुपए है.

मायो कॉलेज राजस्‍थान के अजमेर में मायो कॉलेज है. यह ब्‍वॉयज रेसिडेंशनल पब्लिक स्‍कूल है. इसे 1875 में बनाया गया है. यह भारत के सबसे पुराने बोर्डिंग स्‍कूलों में से एक है. यहां गोल्‍फ कोर्स, पोलो ग्राउंड, हॉर्स राइडिाग, 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग रेंज है. यहां से पत्रकार वीर सांघवी, जसवंत सिंह आदि पढ़े हैं. फीस यहां की फीस सालाना 5,14,000 रुपए है.

इकोल मोंडिएल वर्ल्‍ड स्‍कूल ये IB प्राइमरी ईयर्स प्रोग्राम, मिडल ईयर्स प्रोग्राम और डिप्‍लोमा प्रोग्राम के लिए है. ये ग्रेड 9 और 10 के लिए IGCSE भी ऑफर करता है. फीस यहां की सालाना फीस करीब 10,90,000 रुपए है.

वुडस्‍टॉक स्‍कूल ये को-एड बोर्डिंग सकूल मसूरी में है. यहां से नयनतारा सहगल पढ़ चुकी हैं. फीस यहां कक्षा 12 की सालाना फीस 15,90,000 रुपए है. साथ ही एडमिशन के समय 4 लाख रुपए देने होते हैं जो नॉन-रिफेंडबल फीस है.

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