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लखनऊ राजधानी पुलिस चेकिंग अभियान मे पकड़े गाये 5 लाख पुरानी करेंसी वाहन चेकिंग के दौरान बाजारखाला पुलिस ने रु 5 लाख पुरानी करेंसी दो बाइक सवारों से बरामद की। एक्टिवा न. UP32 DY 0168 की डिग्गी से बरामद।

परखा जायेगा तीन युवराजों का दम-खम उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, सपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती और प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक कौशल का इम्तहान तो होगा ही, राजनीति का ककहरा सीख चुके तीन युवराजों की लोकप्रियता और क्षमता की भी परीक्षा होगी. इनमें सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र राहुल गांधी हैं, जिनके नेतृत्व में कांग्रेस यूपी में दूसरा विधानसभा चुनाव लड़ रही है. राहुल के ही साथ यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और रालोद मुखिया के बेटे जयंत चौधरी जैसे युवा चेहरे भी हैं. अखिलेश और जयंत पहली बार पिता की छाया से बाहर निकल कर चुनाव मैदान में अपने-अपने दल का नेतृत्व करेंगे. अब नतीजा बतायेगा कि युवराजों की दौड़भाग का नतीजा उनके दल के पक्ष में कितना आता है. राहुल, अखिलेश और जयंत अपने दल में चुनाव लड़ रहे हर उम्मीदवार के हीरो हैं. देश में इनकी अपनी एक पहचान है. यूपी में यह पहला मौका होगा, जब तीन प्रमुख दलों के युवा नेता चुनाव की कमान संभालेंगे. पहली बार तीनों अपने वरिष्ठों की छत्रछाया से बाहर आकर चुनाव प्रचार करेंगे. तीनों नेताओं का युवाओं में क्रेज भी है. अखिलेश ने पिता मुलायम सिंह की देखरेख में सालों तक खाटी समाजवादी शैली में राजनीति सीखी. कन्नौज से सांसद और यूपी के मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभाल संभालते हुए अखिलेश राजनीति के ऊंचे-नीचे रास्ते से गुजरे हैं. वर्ष 2012 के चुनावों में पिता मुलायम सिंह यादव की देखरेख में अखिलेश की ही धुआंधार प्रचार रणनीति से सपा पहली बार यूपी में पूर्णबहुमत की सरकार बनाने में सफल रही. अब इस बार के चुनावों में सपा उन्हीं के भरोसे है. यह भी तय है कि सपा से उनकी ही पसंद का उम्मीदवार ही चुनाव लड़ेगा. पहली बार यूपी की जनता उनके प्रचार स्टाइल से रूबरू होगी. मायावती और पीएम मोदी पर कैसे चुनावी हमला करेंगे, यह भी देखनेवाली बात होगी. इन दो युवराजों के मुकाबले जयंत चौधरी भी चर्चा में हैं. उन्हें राजनीति में आये आठ वर्ष ही हुए हैं. वर्ष 2008 में राजनीति में आने के बाद जयंत ने मथुरा तक ही खुद को सीमित रखा था. इस बार वह पूरे पश्चिमी यूपी की जनता के बीच में जायेंगे. तीन युवा राहुल गांधी : अभी कांग्रेस उपाध्यक्ष हैं. तीन बार से अमेठी से सांसद हैं. अगला कांग्रेस अध्यक्ष बनने जा रहे हैं. अखिलेश यादव : पांच साल पहले सीएम बने अखिलेश पिता को हटाकर खुद सपा मुखिया बने हैं. जयंत चौधरी : यूपीए-2 सरकार का हिस्सा रही रालोद के राष्ट्रीय महासचिव हैं. 2009 में वह मथुरा से सांसद थे

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महागठबंधन बनाने की कवायद के बीच सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) ने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के साथ तालमेल ना करने का फैसला किया है। सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नन्दा ने आज यहां भाषा को बताया कि उनकी पार्टी अजित सिंह की अगुवाई वाले रालोद के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने काफी विचार-मंथन के बाद यह फैसला किया है। उन्होंने कहा कि सपा ने कांग्रेस के साथ तालमेल के लिये खुद बात की थी। कांग्रेस से कहा गया था कि वह रालोद से गठबंधन की बात करे। नन्दा ने कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ तालमेल करके कुल 403 में से करीब 300 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। प्रत्याशियों की सूची के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सपा ने चुनाव के पहले और दूसरे चरण के लिये अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर लिये हैं। अब कांग्रेस को अपने प्रत्याशी तय करने हैं। सीटों के आंकड़े के बारे में विस्तार से पूछे जाने पर नन्दा ने कहा कि इस बारे में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही तय करेंगे। पार्टी जल्द ही अपना घोषणापत्र भी जारी करेगी। सूत्रों के अनुसार खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जनाधार रखने वाला रालोद गठबंधन के तहत ज्यादा सीटें मांग रहा था, मगर सपा इसके लिये तैयार नहीं थी। रालोद के वरिष्ठ नेता अनिल दुबे ने कहा हम अपनी पसंद की सीटें मांग रहे हैं, लेकिन उस पर बात बन नहीं रही है। नन्दा ने विश्वास जताया कि चुनाव बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन फिर सत्ता में आएगा और अखिलेश यादव एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।

भाजपा केन्द्रीय समिति की बैठक हुई, उप्र के लिए तय किए गए उम्मीदवार नयी दिल्ली, 19 जनवरी :: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा प्रमुख अमित शाह सहित विभिन्न शीर्ष नेताओं ने आज रात हुई पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति में हिस्सा लिया, जिसमें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बची हुई अधिकतर सीटों के लिए पार्टी उम्मीदवारों के नाम तय किए गए।आज आ सकती है बीजेपी की नयी सूचि।।

इलाहाबाद  बारा थाना क्षेत्र के मिश्रा पुरवा नहर के पास से चेकिंग के दौरान 50 लाख कार से बरामत प्राइवेट गाडी से इलाहाबाद शहर से बांदा की तरफ जा रही एक कार को रोकने पर चालक ने गाडी नहीं रोकी जिसपर सख्ती से गाडी को रोका गया जिसमें जांच करने पर तलासी के दौरान एक बॉक्स में 50 लाख कैश बरामत हुआ। जिसमे 23 लाख के करंसी दो हजार के नए नोट से शेष 18 लाख 100 व् 50 के नोट के रूप में थे।

एक तरफ वोटर को लुभाने, उनकी सोच पर असर डालने के लिए राजनीतिक पार्टियां तरह-तरह के आॅनलाइन अभियान चलाए हुए हैं, दूसरी तरफ पूरी चुनाव प्रक्रिया को अधिक से अधिक पारदर्शी बनाए रखने की कोशिश में चुनाव आयोग ने भी हाईटेक अभियान छेड़ने की तैयारी कर ली है. जल्द ही चुनाव आयोग आम जनता के लिए एक मोबाइल एप 'एमवोटर' के नाम से जारी करने जा रहा है. इसके माध्यम से यूपी का कोई भी मतदाता अपने विधानसभा क्षेत्र के सभी प्रत्याशियों के बारे में जानकारी के साथ ही तमाम सुविधाओं का लाभ उठा सकता है. आमजनता के लिए जारी इस एप के माध्यम से आयोग मतदान के दिन एसएमएस करके जानकारी देगा. इस एप को व्यक्ति को अपने मोबाइल पर डाउनलोड करना होगा. इसके माध्यम से वोटर सर्च, अपने प्रत्याशी के बारे में जानकारी, बूथ के बारे में जानकारी और मैप के साथ नोटिफिकेशन रजिस्टर भी किया जा सकता है. एप को डाउनलोड करने के बाद वोटर को अपना वोटर आईडी नंबर और मोबाइल नंबर एप पर रजिस्टर करवाना होगा. रजिस्ट्रेशन के बाद मतदाता किसी भी वोटर के बारे में जानकरी ले सकेंगे. अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिल गर्ग के अनुसार इस एप पर उन सभी प्रत्याशियों की जानकारी उपलब्ध होगी, जिनकी नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी होगी. मतदाता इसी एप पर मैप के जरिए अपना बूथ भी ढूंढ़ सकता है. साथ ही वोटर पर्ची भी यहीं से डाउनलोड की जा सकती है. यही नहीं बूथ की मतदाता सूची भी इसी एप पर दिखेगी.

भारतीय जनता पार्टी में टिकट को लेकर घमासान मचा हुआ है. सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए घोषित की गई 149 प्रत्याशियों की सूची के बाद से ही पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में रोष व्याप्त है. इसी क्रम में बुधवार को शाहजहांपुर के रहने वापे भाजपा कार्यकर्ता राकेश दुबे ने लखनऊ पार्टी ऑफिस के बाहर आत्मदाह करने की कोशिश की. राकेश दुबे पार्टी से टिकट चाहता था, लेकिन पहली लिस्ट में उसका नाम नहीं था. जिस वजह से नाराज राकेश ने आज आत्मदाह की कोशिश की. बता दें पुरे प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं का यही आलम है. बीजेपी में टिकट के लिए एक-एक सीट पर सैकड़ों प्रत्याशी अपनी दावेदारी ठोंक रहे हैं. इतना ही नहीं कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कई सालों से पार्टी की सेवा कर रहे कार्यकर्ताओं को अनदेखा करते हुए दल-बदलुओं को टिकट दिया गया है. इससे पहले मंगलवार को कासगंज में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने ही नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह आदि की तस्वीर पर कालिख पोत डाली और चप्पल चलाए. यही नहीं बरेली में भी टिकट बंटवारे से नाखुश नेता ने संगठन के पद से इस्तीफा दे दिया. कासगंज में पटियाली सीट से बीजेपी ने ममतेश शाक्य को प्रत्याशी घोषित किया है. ममतेश 2012 में बसपा के टिकट पर अमापुर से विधायक बने थे. हाल ही में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की है. इस सीट से पार्टी के श्याम सुंदर गुप्ता अपनी दावेदारी कर रहे थे. टिकट की घोषणा के बाद श्याम सुंदर के समर्थकों की तरफ से मंगलवार को पार्टी के पोस्टर पर पीएम मोदी के चेहरे पर कालिख पोती गई. तस्वीर में साफ दिख रहा है कि कार्यकर्ता हाथ में चप्पल लेकर अपना रोष व्यक्त कर रहे हैं. उधर इस संबंध में श्याम सुंदर गुप्ता की तरफ से साफ कहा गया है कि उनका इस विरोध से कोई लेना देना नहीं है, ये कार्यकर्ता हैं जो अपना रोष व्यक्त कर रहे हैं. उधर बरेली में टिकट बंटवारे को लेकर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के साले वीरेंद्र ने बीजेपी महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है. बरेली में ही प्रत्याशियों की सूची जारी होते ही बीजेपी के जिला महामंत्री धीरेंद्र सिंह वीरू ने पद से इस्तीफा दे दिया है. धीरेंद्र बसपा छोड़ बीजेपी में पिछले दिनों आए केसर सिंह को नवाजगंज से टिकट दिए जाने से क्षुब्ध हैं. उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के अखिलेश धड़े के बीच गठबंध के बावजूद बहुकोणीय मुकाबला देखने कोमिलेगा. केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त कासामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर दांव खेला है. इसका कितना फायदाउसे इन चुनावों में मिलेगा वह 11 मार्च को सामने आ ही जाएगा. इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के अलावा प्रदेश की कानून व्यवस्था, सर्जिकलस्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है. जहां एक ओर बीजेपी और बसपा प्रदेश की कानून व्यवस्थाको लेकर अखिलेश सरकार को घेर रही हैं, वहीँ विपक्ष नोटबंदी के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है. यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 224 सीट जीतकर पूर्ण बहुमतकी सरकार बनाई थी. पिछले चुनावों में बसपा को 80, बीजेपी को 47, कांग्रेस को 28, रालोद को 9 और अन्य को 24 सीटेंमिलीं थीं. ​

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की घोषणा में हो रही देरी की वजह कुछ मुद्दों पर असहमति बताई जा रही है. दरअसल, समाजवादी पार्टी कांग्रेस और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) को ज्यादा सीटें नहीं देना चाहती. वैसे भी सियासी मजबूरी कांग्रेस और रालोद की ज्यादा है, लिहाजा दोनों ही राजनीतिक दल दबाव में हैं. सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व सपा हाइकमान से इस बात पर चर्चा कर रहा है कि अगर उसे डिप्टी सीएम का पद दिया जाए तो वह झुकने को तैयार है. अखिलेश के खेमे में उत्साह बता दें अखिलेश खेमे की ओर से समाजवादी पार्टी और साइकिल सिंबल जीतने के बाद गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है. यही वजह है कि सपा कांग्रेस के साथ उनके शर्तों पर नहीं, बल्कि अपने शर्तों पर गठबंधन करना चाहती है. सूत्रों के मुताबिक सपा ने पहले 100 से 125 सीटें छोड़ने का संकेत दिया था, लेकिन बुधवार को उसके रुख में सख्ती देखने को मिली. अखिलेश यादव के चाचा और सपा के कद्दावर नेता रामगोपाल यादव यादव ज्यादा सीट देने के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना है कि 2012 चुनावों में कांग्रेस को 28 सीटें मिली थी और 32 सीटों पर उसके प्रत्याशी दूसरे नंबर पर थे. इस फ़ॉर्मूले के मुताबिक उसे 60 सीटें ही मिलनी चाहिए, जबकि उन्हें इससे ज्यादा सीटें दी जा रही हैं. इससे पहले रामगोपाल यादव ने अखिलेश यादव से मुलाकात कर प्रत्याशियों और गठबंधन की सूरत में दी जाने वाली सीटों पर चर्चा की. उम्मीद लगाई जा रही है कि गुरुवार को इसका एलान भी हो सकता है. यूपी में सात चरणों में चुनाव उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के अखिलेश धड़े के बीच गठबंध के बावजूद बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा. केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर दांव खेला है. इसका कितना फायदा उसे इन चुनावों में मिलेगा वह 11 मार्च को सामने आ ही जाएगा. ये होंगे चुनाव में मुद्दे इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के अलावा प्रदेश की कानून व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है. जहां एक ओर बीजेपी और बसपा प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश सरकार को घेर रही हैं, वहीँ विपक्ष नोटबंदी के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है. यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 224 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. पिछले चुनावों में बसपा को 80, बीजेपी को 47, कांग्रेस को 28, रालोद को 9 और अन्य को 24 सीटें मिलीं थीं.

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