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*सालों से तैनात बूढ़े कंधो पर चुनाव की भारी जिम्मेदारी* गोरखपुर/पिपराईच- जिले का संवेदनशील माना जाने वाला पिपराइच थाना आजकल पूरी तरह से संवेदनहीन हो गया है । यह संवेदनहीनता यहां पर तैनात कुछ सिपाही  व दरोगाओं की देन है जो विगत कई वर्षों से यहाँ तैनात हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि इस थाने पर तैनात सभी पुलिसकर्मी एक जैसे हैं, लेकिन कुछ मुट्ठीभर बदनाम पुलिस कर्मियों ने इस पूरे थाने का माहौल बिगाड़ कर रख दिया है । अपने ऊंचे रसूख के बल पर नियम कानून के विरुद्ध यह लोग एक ही हल्के में कई वर्षों से तैनात हैं । प्राप्त जानकारी के अनुसार पिपराइच थाना अंतर्गत यदि किसी को अपने पासपोर्ट की रिपोर्ट लगवानी हो तो उसे पासपोर्ट की सरकारी फीस के बराबर रकम नज़राने के तौर पर देनी होती है या फिर कोई बहुत ठोस शिफारिश ही उनको नज़राना अदा करने से बचा सकता है वरना इसकी गारंटी है कि संबंधित व्यक्ति का पासपोर्ट नहीं बन पाएगा । इसके अलावा क्षेत्र के दुकानदार खास तौर पर ठेले और फुटपाथ पर दुकान सजाने वाले दुकानदार इन भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की अवैध वसूली से तंग आ चुके हैं।  वही दूसरी ओर थाने पर तैनात कई दरोगा अपने रिटायरमेंट के आखरी पड़ाव पर हैं और इनके झुके हुए उन्हें कंधों पर चुनाव के साथ कानून व्यवस्था की भारी जिम्मेदारी है। इनकी अवस्था और स्वास्थ्य के मद्देनजर क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इलाके की व्यवस्था अब भगवान भरोसे है। *दरोगा के उत्पीड़न का शिकार हुआ गरीब* गोरखपुर। पिपराइच थाना क्षेत्र के ग्राम बैलों निवासी वसी मोहम्मद उर्फ गरीब (40) शुक्रवार को क्षेत्रीय दरोगा के उत्पीड़न से परेशान होकर बेहोश हो गया जिसे 108 नंबर की एंबुलेंस से भटहट सीएचसी पर इलाज के लिए पहुंचाया गया जहां इलाज के पश्चात  हालत सामान्य होने पर घर भेज दिया गया गरीब ने बताया कि पिपरईच थाने पर तैनात एक दरोगा कुछ दिनों से उससे विदेशी टार्च व पेन की मांग कर रहे थे जिसे वह दे नहीं पा रहा था । ग्रामीणों का कहना है कि दरोगा जी गुरुवार की शाम को गांव के चौराहे पर पहुंचे तो वहाँ मौजूद गरीब को डिमांड पूरी नहीं होने पर जेल भेजने की धमकी देने लगे । दरोगा जी की धमकी सुन गरीब सहम गया, परिजनों का कहना है कि शाम से ही वह परेशान थे सुबह लगभग नौ बजे गरीब नूरहसन के घर गया था और वहीं बेहोश होकर गिर गया। ग्रामीणों की मदद से उसे भटहट सीएचसी पर एम्बुलेंस से पहुँचाया गया। जहाँ उपचार के बाद हालत सामान्य होने पर उन्हें घर भेज दिया गया। ग्रामीण इसहाक , परवेज , अब्दुल , अमानुल हक , अशलम , उदयभान सिंह , संजय सिंह आदि लोगों ने दरोगा के रवैये के प्रति आक्रोश जताया है।

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यूपी विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के नामांकन प्र​क्रिया की शुरुआत हो चुकी है और अभी तक बसपा को छोड़ कोई भी दल सभी प्रत्याशी नहीं दे सका है. एक तरफ सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर रस्साकशी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ कई साल बाद यूपी की सत्ता में आने के सपने बुन रही बीजेपी भी गठबंधन के फेर में प्रत्याशियों की घोषणा नहीं कर पा रही है. यही नहीं बीजेपी में शामिल हुए बाहरी नेता भी प्रत्याशी चयन में भारी रोड़ा बने हुए हैं. दरअसल बीजेपी की सहयोगी अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) ने 50 से ज्यादा सीटों पर दावा जता दिया है. वहीं बीजेपी इन दोनों ही दलों को एक दर्जन से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं है. कारण ये है कि बिहार में गठबंधन दलों ने सीटें काफी बढ़-चढ़कर ली थीं लेकिन उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था, इसलिए इस बार बीजेपी कोई भी रिस्क लेना नहीं चाहती. पार्टी की रणनीति पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुर्मी और इसकी समकक्ष जातियों को साधने की है. इसी रणनीति के तहत पार्टी ने न सिर्फ इसी बिरादरी के केशव प्रसाद मौर्य को अध्यक्ष बनाया, बल्कि उज्जवला योजना आदि की शुरुआत भी पूर्वी उत्तर प्रदेश से ही की. 2007 में सोनेलाल पटेल के रहते भाजपा ने अपना दल को 38 सीटें दी थी. वैसे अपना दल में भी बहुत कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पार्टी में वर्चस्व की जंग को लेकर अनुप्रिया पटेल एक तरफ हैं, जबकि उनकी बहन पल्लवी पटेल दूसरी तरफ, इनमें मां कृष्णा पटेल पल्लवी की तरफ हैं. इनके बीच पार्टी पर कब्जे की लड़ाई काफी समय से चुनाव आयोग में चल रही थी. अब पिछले दिनों चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि मामले का निपटारा दोनों पक्ष जाकर निचली अदालत में कराएं. इधर चुनावों का ऐलान हो चुका है और ऐसे में अदालत जाने पर चुनाव तैयारियां पूरी तरह से धुल जाएंगे. इसी को लेकर अनुप्रिया पटेल की तरफ से मां कृष्णा पटेल से समझौते को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं. अपना दल में अनुप्रिया पटेल गुट के राष्ट्रीय प्रवक्ता बृजेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहती है इसके लिए कृष्णा पटेल पक्ष को राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ रोहनिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया है. हम दूसरे पक्ष से लगातार बात करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनकी तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिला. उधर लखनऊ की शहरी और ग्रामीण सीटों पर कई बाहरी नेताओं को शामिल करने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी से भी गठबंधन की खबरें आ रही हैं. मामले मे पार्ट के संस्थापक आरके चौधरी का कहना है कि उनकी तरफ से आधा दर्जन सीटें मांगी जा रही हैं लेकिन बीजेपी अभी दो सीटें देने को कह रही है. आरके चौधरी की मोहनलालगंज सीट पर अच्छी पकड़ मानी जाती है. ये वो सीट हैं, जहां से बीजेपी को कभी जीत ​नहीं मिली है. यूपी में सात चरणों में चुनाव उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के अखिलेश धड़े के बीच गठबंध के बावजूद बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा. केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर दांव खेला है. इसका कितना फायदा उसे इन चुनावों में मिलेगा वह 11 मार्च को सामने आ ही जाएगा. ये होंगे चुनावी मुद्दे इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के अलावा प्रदेश की कानून व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है. जहां एक ओर बीजेपी और बसपा प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश सरकार को घेर रही हैं, वहीँ विपक्ष नोटबंदी के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है. यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 224 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. पिछले चुनावों में बसपा को 80, बीजेपी को 47, कांग्रेस को 28, रालोद को 9 और अन्य को 24 सीटें मिलीं थीं.

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सेक्स के समय कंडोम का इस्तेमाल एड्स समेत STD (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिज़ीज़) से तो बचाव करता ही है, इसके साथ ही अनचाही प्रेग्नेंसी के खतरे को भी कम करता है. इसके बावजूद कंडोम को ले कर कई लोगों में भ्रम है कि ये सेक्स सेंसेशन की फीलिंग को कम कर देता है. लोगों की इस शिकायत को दूर करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर्स ने एक ऐसे कंडोम की खोज की है, जो बालों से भी पतला पर पहले की तरह ही मजबूत है.

स्पिनिफेक्स ग्रास' के रेशों से बना यह कंडोम 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ क्वींसलैंड' के वैज्ञानिकों द्वारा खोजा गया है. इसमें घास से निकले नैनो सेल्लुलोस के रेशों के साथ latex का इस्तेमाल करके बनाया गया है. घास में मौजूद सेल्यूलोस इसे खड़ा रहने में मजबूती प्रदान करता है. इससे पहले भी इसका इस्तेमाल कई पदार्थों में किया जा चुका है.

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क्वींसलैंड इंस्टिट्यूट फॉर बायोइंजीनियरिंग एंड नैनोटेक्नोलाजी के प्रोफेसर डैरेन मार्टिन का कहना है कि "हम पतले से पतले पदार्थ की खोज में जुटे थे, जो मजबूत भी हो". 2015 के अंत तक वैज्ञानिक 45 मिक्रोंस पतले तत्व की खोज कर चुके थे. इसके बाद वैज्ञानिकों को इससे कंडोम बनाने का ख्याल आया.

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