कैल्शियम को अतिरिक्त खुराक के तौर पर लेना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि एक नए अध्ययन के मुताबिक यह धमनियों में प्लेक (धमनियों का जाम होना) का कारण बन सकता है, जिससे हृदय को नुकसान पहुंचने का खतरा है.इस निष्कर्ष का उद्देश्य हालांकि आपको कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ लेने से रोकना नहीं है. रिसर्चर्स का कहना है कि इस तरह के आहार दिल के लिए फायदेमंद भी हैं.   मैरिलैंड के जान हॉपकिंस विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन बाल्टीमोर में सहायक प्रोफेसर इरिन मिचोस ने कहा, ‘हमारा अध्ययन बताता है कि शरीर में पूरक खुराक के रूप में अतिरिक्त कैल्शियम का सेवन दिल और नाड़ी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है.’ये रिसर्च ‘जर्नल ऑफ दी अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं. यह विश्लेषण अमेरिका में 2,700 लोगों पर 10 सालों तक किए गए अध्ययन के बाद आया है.अध्ययन के लिए चुने गए प्रतिभागियों की उम्र 45 से 84 साल के बीच थी. इसमें करीब 51 प्रतिशत महिलाएं थीं.रिसर्चर्स ने पाया कि जो प्रतिभागी भोजन में कैल्श्यिम की अधिकतम मात्रा प्रतिदिन करीब 1,022 मिलीग्राम लेते थे, उनमें 10 सालों के अध्ययन के दौरान हृदय रोग होने का जोखिम सामने नहीं आया.लेकिन कैल्शियम को पूरक खुराक के रूप में सेवन करने वाले प्रतिभागियों के कोरोनरी धमनी में इन 10 वर्षो के दौरान 22 फीसदी तक प्लेक जमने का खतरा देखा गया. यह 10 सालों में शून्य से तेजी से बढ़ा. इससे दिल के रोग होने का संकेत मिलता है.नॉर्थ कैरोलिना विश्वविद्यालय के चेपल हिल्स ग्लिनिंग्स स्कूल के सह लेखक जान एंडरसन ने कहा कि इस अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि भोजन के रूप में लिया गया कैल्शियम और पूरक खुराक के तौर पर लिया गया कैल्शियम किस प्रकार हृदय को प्रभावित करता है.

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आजकल हमारे रसोईघरों में ज़्यादातर बर्तन एल्युमीनियम से बने हुए होते हैं। आज विश्व के लगभग ६०% बर्तन अल्यूमीनियम से बनाए जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक तो ये दूसरी धातुओं के मुकाबले सस्ते और टिकाऊ होते हैं, ऊष्मा के अच्छे सुचालक होते हैं। भले ही एल्युमीनियम के बर्तन सस्ते पड़ते हों लेकिन हमारे स्वास्थ्य पर इनका बहुत बुरा असर पड़ता है। इन बर्तनों में पके हुए भोजन के कारन एक औसतन मनुष्य प्रतिदिन 4 से 5 मिलीग्राम एल्युमीनियम अपने शरीर में ग्रहण करता है। मानव शरीर इतने एल्युमीनियम को शरीर से बाहर करने में समर्थ नहीं होता है। एक तरह से हम रोज़ इन एल्युमीनियम के बर्तनों के बहाने धीमा ज़हर खा रहे हैं। गौर से देखने पर आप पाएंगे कि एल्युमीनियम के बर्तनों में बने भोजन का रंग कुछ बदल जाता है ऐसा इसलिए होता है कि यह भोजन एल्युमीनियम से दूषित हो जाता है। स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव इसलिए पड़ता है क्योंकि एल्युमीनियम भोजन से प्रतिक्रिया करता है, विशेष रूप से एसिडिक पदार्थों से जैसे टमाटर आदि। प्रतिक्रिया कर यह एल्युमीनियम हमारे शरीर में पहुँच जाता है। सालों तक यदि हम एल्युमीनियम में पका खाना खाते रहते हैं तो यह एल्युमीनियम हमारी मांसपेशियों, किडनी, लीवर और हड्डियों में जमा हो जाता है जिसके कारण कई गंभीर बीमारीयां घर कर जाती हैं। एल्युमीनियम पोइज़निंग के लक्षण एल्युमीनियम पोइज़निंग का मुख्य लक्षण है पेट का दर्द। हो सकता है आपके पेट में अक्सर रहने वाला दर्द एल्युमीनियम के कारण हो। इसके अलावा कमज़ोर याददाश्त और चिंता इसके दूसरे प्रमुख लक्षण हैं। एल्युमीनियम के कारण होने वाली बीमारियां कमज़ोर याददाश्त और डिप्रेशन मुंह के छाले दमा अपेंडिक्स किडनी का फेल होना अल्ज़ाइमर आँखों की समस्याएं डायरिया या अतिसार

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प्रकृति के नियमानुसार हर लड़की को 10-15 वर्ष की आयु के बीच एक बड़े परिवर्तन से गुजरना पड़ता है जिसे मासिक धर्म कहा जाता है। इन दिनों लड़की के अंडाशय हर महिनें एक विकसित डिम्ब(अण्डा) उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। जब अंडा गर्भ में पहुंचता है तब उसका स्‍तर खून और तरल पदार्थ से मिलकर गाढ़ा होता है। यह मासिक धर्म के रूप में बाहर निकलता है। - इन जगहों को छूने मात्र से सम्भोग के लिए लड़की हो जाती है बैचैन इस दौरान लड़कियों को पेट के असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। अज्ञानतावश हो या फिर शर्म के कारण वह इस समस्या से जूझती रहती हैं। हालांकि इस दर्द से निजात पाने के लिये पेन किलर जैसे कई विकल्प हैं लेकिन इससे होने वाले साइडइफेक्ट के डर से इन दवाओं का उपयोग करने में ज्यादातर महिलायें डरती हैं। इस पीड़ा को कम उपाय: शरीर को गर्मी दें: दर्द को कम करने के लिये गर्म पानी का उपयोग करना बेहतर है। यह दर्द को कम करने के साथ, मासिक धर्म के रक्त को बिना रुकावट के प्रवाह की सुविधा देकर कब्ज की समस्या को कम करेगा। प्राकृतिक उपचार: ज्यादातर महिलाऐं इस समस्या से निजात पाने के लिए ऐसे कई उपाय करती हैं। तेज दर्द में अजवाइन का काढ़ा, तुलसी का काढ़ा और अदरक का सेवन भी तुरंत राहत पहुंचाता है। इस तरह लेटने से मिलेगा फायदा: पेट के दर्द से निजात पाने के लिये आप नीचे लेटने पर अपनी टांगे ऊंची करके रखें या घुटनों को मोड़कर किसी एक ओर सोयें। ऐसा करने से भी आपके दर्द में आराम मिल सकता है। उदर की मालिश: मासिक दर्द के समय जब दर्द अधिक बढ़ जाता है उस समय पेट की मालिश करने से या पेट की सिकाई करने से काफी राहत मिलती है। निचले उदर के आसपास अपनी अंगुलियों के पोरों से गोल गोल हल्की मालिश करें।

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मच्छर काटने से हुई मौत तो मिलेगा दुर्घटना बीमा   : अब रेल या सड़क हादसा में हुई मौत सिर्फ दुर्घटना नहीं कहलाएगा. बल्कि अब यदि आपको मच्छर काट ले और आप बीमार पड़ गये  और इस बीमारी से जूझते हुए आपकी मौत हो गई तो यह एक दुर्घटना कहा जाएगा. सो, यदि आपने इंश्योरेंस कराया है तो आपको दुर्घटना बीमा अवश्य मिलेगा.मच्छर काटने से मलेरिया के चलते होने वाली मौत पर बीमा राशि देने से अब सरकारी और निजी क्षेत्र की इंश्योरेंस कंपनियां आनाकानी नहीं कर सकेंगी. इस बारे में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने एक अहम फैसला सुनाया है. उसने मच्छर काटने से हुई मौत को एक दुर्घटना करार दिया है.इस फैसले से जीवन बीमा कराने वाले लोगों के परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी. आयोग के सदस्य जस्टिस वीके जैन ने उपरोक्त फैसला सुनाया. उन्होंने कहा, ‘हमें यह स्वीकार करने में कठिनाई हो रही है कि मच्छर काटने से हुई मौत को हादसे के चलते मौत नहीं माना जाएगा.’ बकौल जस्टिस जैन, ‘मच्छर का काटना कुछ वैसा ही है, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं रहती है, यह अचानक हो जाता है. इस कारण इससे हुई मौत एक हादसा है.’ आयोग ने यह फैसला पश्चिम बंगाल की मौसमी भट्टाचार्य द्वारा दाखिल दावा याचिका पर सुनाया. दरअसल, मौसमी के पति की मौत मच्छर के काटने से हो गई थी. मौसमी ने जनवरी, 2012 में अपने पति देबाशीष के मौत मामले में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ दावा दाखिल कर रखा है. फैसले में जस्टिस जैन ने कहा, ‘इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर सांप, कुत्ता काटने और ठंड लगने से हुई मौत को दुर्घटना माना गया है.लिहाजा इस दलील को माना नहीं जा सकता कि मच्छर के काटने से मलेरिया का होना एक रोग है, दुर्घटना नहीं.’ क्या है मामला याचिकाकर्ता मौसमी के पति देबाशीष ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आवास ऋण लिया था. उन्होंने इसका बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था. मौत होने की स्थिति में बीमा राशि प्रदान किए जाने की बात थी.जनवरी 2012 में देबाशीष की मौत हो जाने पर जब मौसमी ने बीमा कंपनी का दरवाजा खटखटा कर आवास ऋण की राशि खत्म कराने की गुजारिश की तो उसकी अर्जी ठुकरा दी गई. इसके खिलाफ 2014 में वह जिला उपभोक्ता अदालत गई. यहां बीमा कंपनी की ओर कहा गया कि देबाशीष की मौत किसी दुर्घटना नहीं बल्कि मच्छर काटने से हुई है. लेकिन अदालत ने मौसमी के पक्ष में निर्णय सुनाया. बीमा कंपनी फिर पश्चिम बंगाल उपभोक्ता आयोग पहुंची, लेकिन यहां भी उसकी अपील खारिज कर दी गई. अंत में यह मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग पहुंचा. साभार

मुंह से बदबू आने की समस्या अक्सर शर्मिंदगी का कारण बनती है। इसके कई कारण हैं। कुछ उपायों को अपनाकर इनसे राहत पा सकते हैं। ऑयली फूड भी कारण तलाभुना व तेलयुक्त खाने के बाद मुंह साफ न करना भी एक कारण हो सकता है। ऐसे में कुछ भी खाने के बाद पानी से मुंह जरूर साफ करें। पानी पीते रहें पानी की कमी न होने दें। पानी की कमी होने पर अक्सर मुंह की सफाई ठीक तरह से नहीं हो पाती और दांतों में खाद्य पदार्थ के फंसे रेशे सडऩ का कारण बन बदबू बढ़ाते हैं। मीठी नीम चबाएं एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर मीठी नीम (कढ़ीपत्ता) की पत्ती मुंह में मौजूद कीटाणुओं को नष्ट करने का काम करती है। रोजाना मीठी नीम के 5 पत्ते चबाएं, मुंह की दुर्गंध दूर होगी। दांतों की सफाई दांतों और मुंह की ठीक तरह से सफाई न होना मुंह से बदबू आने की सबसे बड़ी वजह है। ऐसे में जरूरी है कि दांतों को दिन में दो बार यानी सुबह और सोने से पहले अच्छे से साफ करें। इसके अलावा कुछ खास रोग जैसे डायबिटीज भी इसका एक कारण है।

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