शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक और गोहत्या रोकने को सरकार से मांगा कड़ा कानून लखनऊ। देशभर में गोकशी  को लेकर एक ओर जहां कुछ लोग नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने भारत में गोकशी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार से कानून बनाकर दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। आज बोर्ड ने कार्यकारिणी बैठक में ईराक के विश्वविख्यात शिया धर्मगुरु आयतुल्लाह शेख बशीर नजफी (विश्व में शिया समुदाय के सर्वश्रेष्ठ धर्मगुरुओं में एक) के फतवे का हवाला देते हुए कहा कि भारत में गोकशी मुसलमानों के लिए हराम है। इसलिए जो लोग नफरत फैलाने के लिए ऐसा कर रहे हैं उनको सरकार कड़ी सजा दिलाए।  कार्यकारिणी की खास बातें तीन तलाक और गोहत्या रोकने पर जोर​​​​​गोकशी करना मुसलमानों के लिए हराम समुदाय समस्या पर चर्चा कर रखे प्रस्तावआबादी के हिसाब से सरकार से मांगी हिस्सेदारी अयोध्या मसले पर बातचीत की राह सुझायी पिछली सरकारों में खुद को उपेक्षित महसूस करने के बाद पर्सनल लॉ बोर्ड ने आबादी के हिसाब से शिया समुदाय की हिस्सेदारी मांगी। राजधानी के विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित शिया पीजी कॉलेज में हुई कार्यकारिणी बैठक में बोर्ड ने समुदाय की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा कर कई प्रस्ताव पारित किए। अपने इन प्रस्ताव को पूरा कराने के लिए बोर्ड जल्द ही प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। बोर्ड अध्यक्ष मौलाना मिर्जा मुहम्मद अशफाक ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि कुछ लोगों की नादानी और गलत फतवों ने इस्लाम की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। इसलिए बोर्ड देशभर में जलसे कर इन गलतफहमियों को दूर करने का काम करेगा। साथ ही बोर्ड जनरल मेम्बरशिप अभियान चलाकर भारी संख्या में लोगों को जोड़ेगा। नायब सदर मौलाना कायम मेहंदी ने कहा कि तीन तलाक मुसलमानों का नहीं सुन्नी मुसलमानों का मसला है। तीन तलाक के जरिए इस्लाम की छवि खराब की जा रही है। इसलिए सरकार तीन तलाक के खिलाफ कड़ा कानून बनाए जाने की जरूरत है। मौलाना सदफ जौनपुरी की निजामत में पर्सनल लॉ बोर्ड के संयुक्त सचिव मौलाना जहीर अहमद इफ्तेखारी, मौलाना जाफर अब्बास, मौलाना अबु इफ्तेखार, मौलाना मुहम्मद अली रजानी, मौलाना अली हुसैन व नवाब जाफर मीर अबदुल्लाह सहित कई लोग शामिल रहे।  यह प्रस्ताव पास  अयोध्या मामले का हल अदालत के बाहर आपसी बातचीत ने निकालने की पहल की जाएगी इस्लाम के मुताबिक देश में गोहत्या हराम है। ईराक के बशीर नजफी का फतवा आम होगातीन तलाक पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सरकार से सख्त कानून बनाने की अपील। समुदाय के लोगों को सरकार में और सरकारी विभागों में हिस्सेदारी दी जाए। अल्पसंख्यक योजनाओं में शिया समुदाय का लाभ निर्धारित किया जाए। देश में शिया समुदाय की वास्तविक स्थिति जानने के लिए कमेटी बनाई जाए। राज्य हज कमेटी में शिया का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए साथ ही शिया मोअल्लिम रखा जाए।  मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात  समुदाय की समस्याओं से अवगत कराने के लिए जल्द ही शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेगा। साथ ही कार्यकारिणी में पास प्रस्ताव प्रदेश के मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। बोर्ड ने बताया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगा गया है, समय मिलते ही पर्सनल लॉ बोर्ड का प्रतिनिधि मंडल मुलाकात कर अपनी मांगें रखेगा।   चलाएंगे जनरल मेम्बरशिप अभियान  समुदाय के लोगों को एक धागे में पिरोने के लिए जल्द ही पर्सनल लॉ बोर्ड देशभर में जरनल मेम्बरशिप अभियान शुरू करेगा। पहली बार बोर्ड द्वारा आम लोगों को अपने साथ जोडऩे के लिए यह अभियान चलाया जाएगा। बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि शहर-शहर जनसभाएं कर लोगों को जोडऩे का काम किया जाएगा। ताकि न केवल उनकी समस्याओं से रूबरू हो सकें, बल्कि सरकार तक उनकी समस्याएं पहुंचाकर उनका हल भी किया जा सके।  सपा-बसपा पर लगाया उपेक्षा का आरोप  आरोप लगाते हुए बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि सपा-बसपा सरकार में शिया समुदाय के अधिकारों की उपेक्षा हुई है। पिछले दस सालों में शिया मुसलमानों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया। मदरसा बोर्ड व हज कमेटी सहित अल्पसंख्यक विभागों में शिया समुदाय की नुमाइंदगी शून्य हो गई। केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिला। शिया समुदाय को प्रदेश की नई सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। अयोध्या विवाद सुलझाने को आगे आया पर्सनल लॉ बोर्ड अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए शिया पर्सनल लॉ बोर्ड आगे आया। बोर्ड के आपसी सहमति से मामले का हल निकालने के उच्चतम न्यायालय के सुझाव का स्वागत किया। बोर्ड प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि मस्जिद-मंदिर मामले का हल अल्लाह हो अकबर और जय श्री राम के नारे लगाकर नहीं निकाला जा सकता। आपसी बातचीत से इस मसले को सुझाया जा सकता है। बोर्ड दोनों ही पक्षों से मुलाकात कर उनको आपसी बातचीत में हल निकाले का प्रयास करेगा। मौलाना ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड कोर्ट में तीन तलाक को लेकर अपना पक्ष रखेगा। इस्लाम में पुरुषों की तरह ही महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया है। मुहम्मद साहब की जिंदगी में एक भी तीन तलाक के मामले नहीं हुए। इसलिए बोर्ड तीन तलाक के विरोध हैं। तीन तलाक के खिलाफ कड़ा कानून बनाकर हजारों महिलाओं की जिंदगी को उजडऩे से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में शिया समुदाय को नजरअंदाज किया गया। इसलिए केंद्र सरकार शिया समुदाय की वास्तविक स्थिति जानने के लिए एक नई कमेटी गठित करे। शंभू

जय श्री राम शुभ गुरुवार भारत माता की जय ॐ नमः भगवते वाशुदेवाय नमः महाशिवरात्रि पर्व की आप सभी को शुभकामनाएं 26 मई 2014 को हमारा पोस्ट था पेज पर की अगर भारत में दो मजबूत हिंदुत्व वादी हो जाय तो सभी धर्म निरपेक्ष मुस्लिम परस्त और जाति वादी राजनीति से सफाया हो जाय भारत में बीजेपी शिवसेना को छोड़कर सभी दल सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम वोट के पीछे पड़े रहते हैं कहि दंगा हो कहि हिन्दू भगाया जाय या देश में आतंकवाद पर मजबूत स्टैंड बीजेपी और शिवसेना ही लेती है महाराष्ट्र की जनता ने साबित कर दिया की अगर हिंदुत्व वादी बिकल्प हो तो जनता दूसरे दल को कभी न चुने महाराष्ट के सभी मतदाताओ का कोटि कोटि नमन सेकुलर दल मुम्बई का यह जरूर देखे 84 सीट शिवसेना जीती और 65 पर दूसरे स्थान पर रही और 81 सीट बीजेपी जीती 79 पर दूसरे स्थान पर यानि धर्म निरपेक्ष तीसरे चौथे के लिये लड़े हर हर महादेव बी एस त्रिपाठी राष्ट्रीय संयोजक तिरपाल से मन्दिर निर्माण मुहीम अयोध्या श्री राम मन्दिर निर्माण और हिंदुत्व की आवाज के लिए पेज से जुड़े अपने 10 दोस्तों को अवश्य जोड़े धन्यवाद जय श्री राम हर हर महादेव यह लेखक की व्यक्तिगत राय है गोरखपुर टाइम्स इस कथन से संबंध नहीं रखता है....

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आल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा ने दलितों व मुस्लिमो से बसपा को समर्थन करने की अपील रायबरेली।आल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा ने एक प्रेस कांफ्रेंस के कहा अपराध मुक्त, दंगा मुक्त सरकार के लिए बसपा को करेगें समर्थन। पिछले पांच वर्षों में 500 सौ से अधिक हो चुके है दंगे। कार्यवाही न होने से साम्प्रदायिक शक्तियों और दंगाइयो के हौसले है बुलंद। मोर्चा की सोच है कि साम्प्रदायिक तनाव को ख़त्म करने के लिए दलित व मुस्लिम शक्तियों को होना पड़ेगा एक। (बीएन) सपा गठबंन्धन के बाद सपा के आपसी कलह से यादव भी बटे दो भागों में बटते नजर आ रहे है। ऐसी स्थित में अगर मुस्लिम वोट सपा में गया तो उसका लाभ भाजपा को होगा। इसी के मद्देनजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश मोर्चा के आह्वाहन पर पहले व दूसरे चरण के चुनाव दलित व मुस्लिम एक होकर बसपा का करेगा समर्थन। ताकि भाजपा जैसी सांप्रदायिक ताकतों को रोका जा सके। L24

आजकल ये बहुत देखने को मिल रहा है कि मुस्लिम महिलायें इस्लाम छोड़कर हिन्दू धर्म अपना रही है। आखिर ऐसा क्या है इस्लाम में जो उन्हें धर्म परिवर्तन अपनाने के लिए मजबूर कर रहा है। हाल ही में गाजियाबाद की शबनम नाम की मुस्लिम महिला हिन्दू धर्म अपनाकर दामिनी बन गई। दामिनी के बाद अब और भी पीड़ित मुस्लिम महिलाओं का हौसला बढ़ा है और वे हिन्दू धर्म कि ओर बढ़ रही है। तीन तलाक और हलाला के नियम से दुखी शबनम ने हिंदू धर्म अपना कर दामिनी बन गई। दामिनी इस्लाम धर्म के नाम पर हो रही महिलाओं की दुर्दशा पर खुलकर उद्गार व्यक्त किए। 25 वर्षीय दामिनी ने कहा कि इस्लाम धर्म के नाम पर लगभग सभी मुस्लिम महिलाएं किसी न किसी प्रकार से यातनाएं झेल रही हैं। कम उम्र में उनका निकाह कर दिया जाता है, फिर उन पर जल्दी जल्दी बच्चे पैदा करने का दबाव दिया जाता है। बच्चा न पैदा होने पर उन्हें तमाम शारीरिक यातनाएं दी जाती हैं और छोटी छोटी बातों पर तलाक दे दिया जाता है। तलाक देने के बाद महिलाओं की स्थिति और भी बदतर हो जाती है।  दामिनी का कहना है कि तलाक के बाद शौहर से दोबारा निकाह करने के लिए मुस्लिम समाज द्वारा चलाई गई प्रथा हलाला से गुजरना होता है। उसने बताया कि तलाक के बाद उसके शौहर ने फिर से साथ रहने के लिए उसका हलाला भी कराया और दोस्त के हवाले कर दिया। तीन महीने बाद जब वह पति के पास पहुंची तो उसे स्वीकार करने के बजाय पति ने वेश्यावृत्ति में धकेल दिया।  क्या है हलाला  तलाक होने के बाद महिला को तीन माह तक पर्दे में रहकर इद्दत करनी होती है। इसके बाद उसे किसी अन्य व्यक्ति के साथ निकाह करना होता है। यह व्यक्ति महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाकर तलाक देगा। अब महिला को तीन माह की दोबारा से पर्दे में रहकर इद्दत करनी होगी। इसके बाद ही वह अपने पति से निकाह कर सकती है। इन सब अत्याचारों से परेशान आकर शबनम ने हिन्दू अपना लिया और दामिनी बन गई।  क्या है हलाला  तलाक होने के बाद महिला को तीन माह तक पर्दे में रहकर इद्दत करनी होती है। इसके बाद उसे किसी अन्य व्यक्ति के साथ निकाह करना होता है। यह व्यक्ति महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाकर तलाक देगा। अब महिला को तीन माह की दोबारा से पर्दे में रहकर इद्दत करनी होगी। इसके बाद ही वह अपने पति से निकाह कर सकती है। इन सब अत्याचारों से परेशान आकर शबनम ने हिन्दू अपना लिया और दामिनी बन गई।  क्या है हलाला  तलाक होने के बाद महिला को तीन माह तक पर्दे में रहकर इद्दत करनी होती है। इसके बाद उसे किसी अन्य व्यक्ति के साथ निकाह करना होता है। यह व्यक्ति महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाकर तलाक देगा। अब महिला को तीन माह की दोबारा से पर्दे में रहकर इद्दत करनी होगी। इसके बाद ही वह अपने पति से निकाह कर सकती है। इन सब अत्याचारों से परेशान आकर शबनम ने हिन्दू अपना लिया और दामिनी बन गई।  क्या है हलाला  तलाक होने के बाद महिला को तीन माह तक पर्दे में रहकर इद्दत करनी होती है। इसके बाद उसे किसी अन्य व्यक्ति के साथ निकाह करना होता है। यह व्यक्ति महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाकर तलाक देगा। अब महिला को तीन माह की दोबारा से पर्दे में रहकर इद्दत करनी होगी। इसके बाद ही वह अपने पति से निकाह कर सकती है। इन सब अत्याचारों से परेशान आकर शबनम ने हिन्दू अपना लिया और दामिनी बन गई।  तीन मुस्लिम महिलायें भी अपना सकती है हिन्दू धर्म  दामिनी के बाद तीन अन्य पीड़ित मुस्लिम महिलाएं भी तीन तलाक और हलाला के विरोध में सामने आई हैं। इनमें से दो महिलाओं को तो उनके पति ने बहुत ही मामूली सी बात पर तलाक दे दिया। उन्होंने तीन तलाक के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद करते हुए चेतावनी भी दे डाली कि अगर उनके साथ न्याय नहीं हुआ तो वो भी हिन्दू धर्म अपना लेगी।  मुरादनगर की रहने वाली सलमा, नगमा और अफसाना (बदले हुए नाम) ने अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि बहुत ही मामूली बात पर उनके पतियों ने उन्हें तलाक दे दिया और उनके बच्चे भी अपने पास रख लिए। उनका कहना है कि तीन तलाक की यह कुप्रथा मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी बर्बाद कर देती है। मुस्लिम समाज की यह कुप्रथा महिलाओं की जिंदगी नर्क बना रही है। तलाक होने के बाद अब अपने घर रह रही हैं, मगर वहां पर सम्मान नहीं मिल रहा।  क्या थी तीन तलाक देने कि वजहें  पीड़ित महिलाओं में एक का कहना है कि वह मायके से ससुराल आने में एक दिन लेट हो गई तो इसी बात पर उसे तलाक दे दिया गया। दूसरी महिला ने बताया कि वह नौकरी करती थी। उसके पति ने उसे बदचलन कह कर तलाक दिया। तीसरी युवती अपनी दास्तान नहीं सुना सकी और यह कह कर फूट फूट कर रोनी लगी कि उसके हालात बहुत बुरे रहे हैं। बयां नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि वे इसके खिलाफ शीघ्र ही अभियान चलाएगी और इसका विरोध करेगी। उनके विरोध के बाद भी यदि यह बुराई समाप्त नहीं होती है तो वह दामिनी की तरह धर्म परिवर्तन कर हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेंगी। मुस्लिम चाहते है इस्लामीकरण बढ़ाना  इस्लामीकरण क लिए मुस्लिम समुदाय महिलाओं क साथ अत्याचार कर रहा है। वे ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए एक से ज्यादा शादी करते है। वे तीन तलाक का सहारा लेकर अपनी बीवियों को छोड़ देते है और दूसरी शादी कर देते है। ये क्रम चलता रहता है। ये सब करने क पीछे उनका मकसद इस्लामीकरण को बढ़ाना है। मुस्लिम महिलाएं मात्र बच्चे पैदा करने कि मशीने बन कर रह गई है। सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है मामला  आपको बता दे कि काफी लंबे समय से तीन तलाक मामले पर बहस चल रही है। जहां एक तरफ केन्द्र सरकार इसे महिलाओं के अधिकारों का हनन बता रही है, वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी यह मामला चल रहा है। महिलाओं के हक के लिए कई मुस्लिम महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में एकतरफा तीन तलाक व बहुविवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई है। तश्वीरें काल्पनिक स्वस्तिक से

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्‍यक्ष ममता बनर्जी को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया में एक मैसेज खूब वायरल हो रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्‍यक्ष ममता बनर्जी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर इन दिनों ममता बनर्जी को लेकर एक मैसेज खूब वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस मैसेज में लिखा है कि क्‍या ममता बनर्जी मुसलमान हैं ? क्‍या उनका असली नाम मुमताज मासामा खातून है। वायरल हो रहे इस मैसेज को लेकर अब सोशल मीडिया पर उनके विरोधियों और समर्थकों के बीच जंग छिड़ गई है। जबकि दूसरी ओर उनके जानकारी और तमाम लोगों का कहना है कि व्‍हाट्सअप ग्रुप पर वायरल हो रहा ये मैसेज कोरी अफवाह। उन्‍हें बदनाम करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। जबकि इस बात की किसी के पास कोई पुख्‍ता जानकारी नहीं है जो ये दावा कर सके कि ममता मुसलमान हैं। लेकिन, ममता बनर्जी को लेकर ये मैसेज तेजी से सोशल मीडिया में हर ग्रुप, हर शख्‍स के पास पहुंचता जा रहा है। इसमें उनके मुसलमान होने और उनके असली नाम मुमताज मासामा खातून के अलावा ये भी सवाल किया जा रहा है कि क्या उन्होंने जानबूझकर रेल मंत्री पद पर रहते हुए हिन्दू तीर्थ स्थानों पर जाने वाली ट्रेनों को बंद कराने की कोशिश की थी। हालांकि कई मीडिया ग्रुप ने इस वायरल मैसेज की पड़ताल की है जिसमें ये कहा गया है कि उनकी पड़ताल में ये वायरल हो रहा है ये मैसेज पूरी तरह झूठ पर आधारित है। जिसके जरिए लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी भड़काने की कोशिश की जा रही है। आईटीएन भी वायरल हो रहे इस मैसेज की कोई पुष्टि नहीं करता है। साथ ही लोगों को ये हिदायत भी देता है कि इस तरह के मैसेज से खुद को बचाएं। ममता बनर्जी को लेकर वायरल हो रहे मैसेज में ये बताया गया है कि उन्‍हें जितनी अच्‍छी बांग्‍ला आती है उतनी अच्‍छी ही उर्दू भी वो बोल लेती हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के राज में हिंदुओं के कथित अत्‍याचार का भी आरोप लगाया गया है। ममता बनर्जी को मुसलमान बताते हुए मैसेज में कहा गया है कि वो रोज नमाज पढ़ती हैं। लेकिन, पड़ताल में पाया गया है कि ये मैसेज पूरी तरह फर्जी है और सिर्फ लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काने के लिए ही प्रसारित किया जा रहा है। इस मैसेज में उनकी जो फोटो को इस्‍तेमाल किया गया है उस तरह की कई फोटो गूगल पर पहले से ही मौजूद हैं। ये फोटो ममता बनर्जी के तमाम मुस्लिम कार्यक्रमों में शरीक होने की हैं। जिसमें कुछ फोटो का इस्‍तेमाल वायरल हो रहे मैसेज में किया गया है। रेलवे बोर्ड के मौजूदा अ‍फसर और पूर्व अफसर भी इस बात को कोरी अफवाह बता रहे हैं कि ममता बनर्जी ने रेलमंत्री के पद पर रहते हुए हिन्दू तीर्थ स्थान पर जाने वाली ट्रेन को रोकने की कोशिश की थी। हालांकि इस मैसेज को लेकर सोशल मीडिया में खूब राजनीति भी रही है। वहीं दूसरी ओर लोगों से ये भी अपील की जा रही है कि वो इस तरह के मैसेज से परहेज करें। हालांकि मैसेज को लेकर ममता बनर्जी की जमकर खिंचाई भी की जा रही है। दरअसल, नोटबंदी और चिटफंड घोटाले में टीएमसी के सांसदों की गिरफ्तारी के बाद से ममता बनर्जी बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमला कर रही हैं। जबकि उनके इन हमलों को देश का एक बड़ा वर्ग उनकी फ्रस्‍ट्रेशन करार दे रहा है।

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