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Dharm (121)

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक का कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोड खुद ही अगले एक-डेढ साल में एक-साथ तीन बार तलाक बोलने की प्रथा को खत्म कर देगा और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

मौलाना ने मुसलमानों को बीफ खाने से बचने की भी सलाह दी. उन्होंने सोमवार रात यहां हजरत अली के जन्म दिन पर आयोजित मुशायरे से इतर जिला दीवानी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के आवास पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि एक-साथ तीन बार तलाक बोलने वाली प्रथा महिलाओं के पक्ष में गलत है. लेकिन यह समुदाय का निजी मसला है और वे खुद एक-डेढ साल के भीतर इसे सुलझा लेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

बीफ खाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि धार्मिक पुस्तकों को बीफ खाने की सलाह नही दी गयी है और मुसलमानों को यह नहीं खाना चाहिए. मौलाना ने कहा, यदि सरकार देश में गोवध और बीफ खाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए कोई कानून लाती है तो मुसलमान उसका स्वागत करेंगे. उन्होंने कथित गोरक्षकों की गैरकानूनी गतिविधियों की आलोचना करते हुए उन्हें बंद करने की मांग की.

राम मंदिर के मामले पर, उन्होंने कहा कि विवाद अब खत्म होना चाहिए और हिन्दुओं तथा मुसलमानों को एक आधार तैयार करना होगा ताकि कोई समझौता हो सके. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को वहां मस्जिद बनाने की जिद नहीं करनी चाहिए जहां मंदिर बनना है.

सादिक ने मुसलमानों की खराब हालत के लिए समुदाय के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि कश्मीरी युवाओं को अपनी आंखें खुली रखनी चाहिए और पाकिस्तान की खराब मंशा को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को समृद्ध बनने के लिए एकजुट रहना चाहिए.

हनुमान जी के जन्मदिवस पर विशेष : मंगल को जन्मे, मंगल ही करते* चैत्र पूर्णिमा पर भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार हनुमान का जन्म हुआ था और यह दिन हनुमान जयंती के रूप में धूमधाम से मनाया जाता। चैत्र पूर्णिमा पर भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार हनुमान का जन्म हुआ था और यह दिन हनुमान जयंती के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है, पहली चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन और दूसरी कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को। वाल्मीकि रामायण के अनुसान हनुमान का जन्म कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हुआ जबकि पुराणों में पवनसुत का जन्म चैत्र पूर्णिमा बताया गया है। वैसे अधिकांश जगहों पर चैत्र पूर्णिमा को ही मारुतिनंदन हनुमान की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। स्कंदपुराण में वर्णन है कि शिव के ग्यारहवें रुद्र ही विष्णु के अवतार श्रीराम की सहायता हेतु हनुमान रूप में अवतरित हुए। भगवान शंकर ने श्री विष्णु से दास्य का वरदान प्राप्त किया था, जिसे पूर्ण करने हेतु वह अवतार लेना चाहते थे। परंतु उनके समक्ष धर्मसंकट यह था कि जिस रावण के वध हेतु वह श्रीराम की सहायता करना चाहते थे वह उनका परम भक्त था। अपने परम भक्त के विरुद्ध राम की सहायता वह आखिर कैसे करते यह प्रश्न था। रावण ने अपने दस सिरों को अर्पित कर भगवान शंकर के दस रुद्रों को संतुष्ट कर रखा था। अत: हनुमान ग्यारहवें रुद्र के रूप में अवतरित हुए और राम के सहायक बने। कलियुग में भक्तों के कष्टों को हरने में हनुमान समान दूसरा कोई देव नहीं है। वे जल्दी कृपा करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास उनके बारे में लिखते हैं, 'संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बल बीरा।" सभी देवताओं के पास अपनी-अपनी शक्तियां हैं। जैसे विष्णु के पास लक्ष्मी, महेश के पास पार्वती और ब्रह्मा के पास सरस्वती लेकिन हनुमान खुद की शक्ति से संचालित देव हैं। वे सर्वशक्तिशाली हैं लेकिन अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पित हैं। अपूर्व बलशाली होते हुए भी वे भक्ति की अनुपम मिसाल हैं। उनकी भक्ति भावना से प्रसन्ना होकर श्रीराम ने ही उन्हें वरदान दिया था कि मुझसे भी ज्यादा तुम्हारे मंदिर होंगे और लोग अपने संकटों के निवारण के लिए तुम्हारी उपासना करेंगे। हनुमान भक्तों की पुकार पर तुरंत ही उनके कष्ट हरते हैं। कलियुग में हनुमान सभी तरह के कष्टों को दूर करते हैं। वे भक्तों का हर तरह से मंगल करते हैं। वेद पुराणों में हनुमानजी को अजर-अमर कहा गया है। शास्त्रों में सप्त चिरंजीवों में हनुमान, राजा बली, महामुनि व्यास, अंगद, अश्वत्थामा, कृपाचार्य और विभीषण सम्मिलित हैं। चूंकि हनुमान सदेह इस धरा पर मौजूद हैं तो उनकी उपासना किसी भी तरह से की जाए निश्चित फलदायी होती है। *मनोकामना पूर्ण करेंगे पवनसुत* तंत्र शास्त्र के अनुसार मंगलवार के दिन हनुमान को प्रसन्ना करने के लिए कुछ उपाय सार्थक सिद्ध होते हैं। ऐसे ही कुछ उपाय- मंगलवार को संध्याकाल में किसी हनुमान मंदिर में जाएं और एक सरसों तेल का और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। हनुमान चालीसा का पाठ करें। मंगलवार की सुबह पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं। उसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके राम नाम का जाप करें। यदि शनि दोष से पीड़ित हैं तो हनुमान चालीसा का पाठ करने पर शनिदेव व्यक्ति का बुरा नहीं करते हैं। *हनुमान जयंती पर करें ये उपाय* हनुमान जयंती के दिन रामायण और राम रक्षास्रोत का पाठ करने से आपको मानसिक और शारीरिक शक्ति मिलती है। हनुमान जयंती पर उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं। ऐसा करने से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। यदि व्यापार में गिरावट हो तो हनुमानजी को चोला चढ़ाने से फायदा मिलता है। हनुमान जयंती के दिन किसी हनुमान मंदिर की छत पर लाल झंडा लगाने से हर तरह के आकस्मिक संकट से मुक्ति मिलती है। *इसलिए चढ़ाते हैं हनुमान जी को सिंदूर*  रामायण में एक कथा प्रसिद्ध है कि हनुमानजी ने जानकी की मांग में सिंदूर लगा देख आश्चर्य से पूछा- माते, आपने यह लाल द्रव्य मस्तक पर क्यों लगाया है? माता जानकी ने हनुमान की इस उत्सुकता पर कहा, 'पुत्र, इसे लगाने से मेरे स्वामी की रक्षा होती है, वे दीर्घायु होते हैं और वे मुझ पर सदैव प्रसन्न रहते हैं। हनुमानजी ने यह सुना तो वे बहुत प्रसन्ना हुए और विचार किया कि जब अंगुलीभर सिंदूर से प्रभु की रक्षा होती है तो क्यों न पूरे शरीर पर सिंदूर लगाकर स्वामी को सुरक्षित कर दूं। उन्होंने वैसा ही किया। जब वे इस तरह श्रीराम के सामने पहुंचे तो प्रभु मुस्कुराए बिना न रह सके। हनुमान का विश्वास मां जानकी के वचनों में पक्का हो गया। तभी से हनुमान की भक्ति का स्मरण करते हुए उन्हें सिंदूर चढ़ाया जाने लगा। *शनि के प्रभाव से बचाते हैं हनुमान* रामायण से विदित होता है कि लंकापति रावण के सभी भ्राता व पुत्रों की जब मृत्यु हो रही थी तो अपने अमरत्व के लिए उसने सौरमंडल के सभी ग्रहों को अपने दरबार में कैद कर लिया था। रावण की कुंडली में शनि ही एकमात्र ऐसा ग्रह था जिसकी वक्रावस्था व योगों के कारण रावण के लिए मार्केश की स्थिति उत्पन्ना हो रही थी जिसे बदलने के लिए रावण ने शनि को दरबार में उलटा लटका दिया था और यातनाएं दी थीं परंतु शनि के व्यवहारों में कोई बदलाव नहीं आया था। जब विभीषण ने हनुमान को इस बारे में में बताया तो हनुमान ने शनि को रावण की कैद से मुक्त कराया था। तभी शनिदेव ने हनुमान को वरदान दिया था कि जो भी उनकी आराधना करेगा उसे वह कष्ट नहीं पहुंचाएंगे । *11 अप्रैल को हनुमान जयंती पर बन रहे विशेष योग* इस वर्ष हनुमान जयंती चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 11 अप्रैल मंगलवार को विशेष योग बन रहे हैं। चार साल बाद संकट मोचन की जयंती चंद्रग्रहण से मुक्त और 3 साल बाद मंगलवार के दिन मनेगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार हनुमान जयंती में राज योग के साथ ही शुक्र मीन राशि में उच्च का हो गए हैं जिसकी सूर्य के साथ युति रहेगी। द्वितीय स्थान पर मेष राशि का मंगल शुभ फलदायी रहेगा। विशेष योग होने के कारण हनुमान जयंती भक्तों के लिए विशेष फलदायी रहेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 2013 से लगातार हनुमान जयंती पर चंद्रग्रहण के योग बन रहे थे लेकिन इस बार चंद्रग्रहण से मुक्त रहेगी। इससे पूजा-अर्चना और आराधना में कोई संकट नहीं आएगा। विशेष संयोगों के कारण इस दिन हनुमानजी की आराधना से श्रद्धालुओं की मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य,मंगल शनि राहु के दोषों के निवारण हेतु हनुमान आराधना विशेष मानी जाती है। पूर्णिमा पर चित्रा नक्षत्र और राजयोग मिलने पर जयंती का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ गया है। *बजरंगबली को प्रसन्न करने के अचूक उपाय* किसी भी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ नारियल लेकर जाएं। आर्थिक तंगी की समस्या आ गई हो या फिर विवाह में देरी। ऐसी ही तमाम समस्याओं का निवारण सिर्फ हनुमानजी ही कर सकते हैं। यदि आप हनुमानजी के ये 5 उपाय आजमाते हैं तो संभव है। हनुमान जी आपका साथ जरूर देंगे। और वो सब कुछ आपके पास होगा जिसे पाने की ख्वाहिश आप रखते हैं। किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और 7 परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। पीपल के 11 पत्तों पर श्रीराम नाम लिख लें, उसके बाद राम श्रीनाम लिखे हुए इन पत्तों की एक माला बनाएं। इस माला को किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाकर वहां बजरंगबली को अर्पित करें। इस प्रकार यह उपाय करते रहें। कुछ समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। किसी भी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ नारियल लेकर जाएं। मंदिर में नारियल को अपने सिर पर 7 बार वार लें। इसके बाद यह नारियल हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी। हनुमानजी के सामने शनिवार की रात को चौमुखा दीपक लगाएं। यह एक बहुत ही छोटा लेकिन चमत्कारी उपाय है। ऐसा नियमित रूप से करने पर आपके घर-परिवार की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं। *सुनील झा 'मैथिल'*

लखनऊ। योगी सरकार के गठन के 17वें दिन सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के लिए रामनवमी का दिन चुना गया और इसी दिन नौं महत्वपूर्ण फैसलों पर मुख्यमन्त्री योगी ने अपनी मुहर लगा दी।

अधिकारी भी हैरान, योगी जैसा काम तो किसी सीएम ने नहीं किया

वैसे तो कैबिनट की पहली बैठक मंगलवार के दिन ही होती है, लेकिन इस बार साधारण नामक संवत् का राजा मंगल है, इसलिए इस बैठक में लिए गये फैसलों का खास महत्व है।
आईये जानते है कि क्या योगी जी मंगलवार को लिए गये अपने फैसलों से यूपी का मंगल कर पायेंगे।

सिद्धि योग
04 अप्रैल दिन मंगलवार को अपरान्ह 1 बजकर 05 से रामनवमी प्रारम्भ हो गई थी। इस दिन सिद्धि योग बन रहा है और चन्द्रमा अपनी कर्क राशि में बलवान होकर गोचर कर रहा है।

विक्रम संवत् 2074
विक्रम संवत् 2074 का राजा मंगल है, इसलिए मंगल के दिन ही लोकतन्त्र के राजा योगी जी की पहली कैबिनट विशेष महत्व रखती है। मंगल अक्रामक, पराक्रमी व साहस का कारक है। इस दिन लिये गये फैसलों में बाधायें न के बराबर आती है। मंगल राजा होने के कारण यूपी में योगी जी के द्वारा लिए गये निर्णय जनता के लिए मंगलकारी साबित होंगे।



मां दुर्गा के उपासक

योगी जी आदि शक्ति मॉ दुर्गा के उपासक है और पूरे नवरात्र उपवास करके मॉ जगदम्बा की आराधना करते है। नवरात्र में नौं दिन उपवास किया जाता है, इसलिए योगी जी ने पहली बैठक में 9 महत्पूर्ण फैसले लिए।


पूरे जग में प्रशंसा
ज्योतिष के अनुसार सिद्धि योग में लिए गये निर्णय सफल साबित होते है एंव उन निर्णयों की पूरे जग में प्रशंसा की जाती है। रामनवमी के दिन मन का कारक चन्द्रमा अपनी कर्क राशि में गोचर कर रहा है। किसी भी फैसले को लेने में मन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कहा गया है-मन के हारे हार है, मन के जीते जीत है। अर्थात यदि मन से हार गये तो समझो आपकी हार निश्चित है और अगर मन से जीत गये तो कोई आपको हरा नहीं सकता।

आपकी कीर्ति में वृद्धि
चन्द्रमा जब बलवान अवस्था में हो तो उस दौरान लिये गये फैसले कभी असफल नहीं होते है। उन फैसलों की सफलता के कारण आपकी कीर्ति में वृद्धि होती है।


श्रीराम की उपाधि
रामनवमी के दिन श्रीराम का जन्म हुआ था। श्रीराम ने त्याग, नैतिकता, साधना, समर्पण व पराक्रम के बल पर रावण का संहार करके मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम की उपाधि धारण की थी। राम ने जैसे अत्याचारी राक्षसों का बध किया था ठीक वैसे ही योगी जी उत्तर प्रदेश में अपराध, भ्रष्टाचार, अविकास, अत्याचार रूपी आदि राक्षसों का वध करके पूरे उत्तर प्रदेश का मंगल करेंगे।



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आज गुजरात सरकार ने विधानसभा में गौहत्या के खिलाफ नया बिल पास कर दिया बीजेपी सरकार ने अब गौहत्या पर उम्रकैद की सजा का कानून पास किया है, ये खबर हमने आपको दोपहर में ही दी थी, और ये खबर आपके पास होगी
पर आज गुजरात में एक और चीज हुई, जिसकी जानकारी किसी मीडिया ने नहीं दी दरअसल गौहत्या पर आज जो बीजेपी सरकार ने कानून बनाया, कांग्रेस ने उसका विरोध किया, और कांग्रेस ने विधानसभा से वाकआउट कर दिया इतना ही नहीं, गुजरात में कांग्रेस के नेता ने गौमांस खाने का समर्थन भी कर दिया

ये है शक्तिसिंह गोहिल, ये गुजरात विधानसभा में कांग्रेस का नेता है, मसलन ये विपक्ष दल का नेता है शक्तिसिंह गोहिल के नेतृत्व में कांग्रेस ने सरकार के फैसले का विरोध किया
शक्तिसिंह गोहिल ने कहा की, बीजेपी साम्प्रदायिकता कर रही है गौहत्या पर सख्त कानून को कांग्रेस ने साम्प्रदायिकता बता दिया, शक्तिसिंह गोहिल ने कहा की, गौमांस कहना किसी का निजी अधिकार है, बीजेपी अधिकारों का हनन कर रही है
आपको कांग्रेस पार्टी के एक और कारनामे के बारे में हम यहाँ बताना चाहते है, कर्णाटक में फिलहाल कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार है, उस से पहले वहां बीजेपी की सरकार थी बीजेपी ने गौहत्या पर रोक लगाई थी, कांग्रेस की जैसे ही सरकार आयी, कर्णाटक में गौहत्या को वैध कर दिया गया source

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मां ज्वाला का मंदिर हिमाचल प्रदेश में कांगडा घाटी से 30 किमी दक्षिण में स्थित है। यह मंदिर देवी के 51 शक्ति पीठों में से एक है। इस मंदिर को जोता वाली का मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। कहते हैं इस मंदिर की खोज पांडवो ने की थी।
ज्‍वाला देवी की उत्‍पत्‍ति
ज्वाला जी का मंदिर शक्ति पीठ मंदिरों मे से एक है। पूरे भारतवर्ष मे कुल 51 शक्तिपीठ है। इन सभी की उत्पत्ति कथा एक ही है, जो शिव और शक्ति से जुड़े हुई हैं। मान्‍यता है कि शिव के ससुर राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया जिसमे उन्होंने शिव और सती को आमंत्रित नही किया क्योंकि वह शिव को अपने बराबर का नही समझते थे। फिर भी सती बिना बुलाए यज्ञ में पहुंच गयी। यज्ञ स्‍थल पर शिव का काफी अपमान किया गया जिसे सती सहन न कर सकी और वह हवन कुण्ड में कूद गयीं। जब भगवान शंकर को यह बात पता चली तो वह आये और सती के शरीर को हवन कुण्ड से निकाल कर तांडव करने लगे। जिस कारण सारे ब्रह्माण्ड में हाहाकार मच गया। तब पूरे ब्रह्माण्ड को संकट से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सती के शरीर के सुदर्शन चक्र से 51 टुकड़े कर दिए। देवी के शरीर के अंग जहां जहां गिरे वहां शक्ति पीठ बन गया। मान्यता है कि ज्वालाजी मे माता सती की जीभ गिरी थी और इस स्‍थान को शक्ति पीठ की मान्‍यता मिली।
माता के 51 शक्तिपीठ, जानें दर्शन करने कहां-कहां जाना होगा

ज्‍वाला देवी की कहानी
ज्‍वाला जी मंदिर में माता के दर्शन ज्योति रूप में होते है। इस मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है। कहते है कि गोरखनाथ नाम का मां का एक अनन्य भक्त था। एक बार उन्‍हें भूख लगी तब उन्‍होंने माता से कहा कि आप आग जलाकर पानी गर्म करें, तब तक मैं भिक्षा मांगकर लाता हूं। मां आग जलाकर पानी गर्म करके अपने भक्‍त गोरखनाथ का इंतज़ार करने लगी पर वे आज तक लौट कर नहीं आए। गोरखनाथ की प्रतीक्षा में मां आज भी ज्वाला जला कर बैठी हैं। कहते हैं जब कलियुग ख़त्म होगा और सतयुग आएगा तब गोरखनाथ लौटकर मां के पास आएंगे। तब तक यह जोत इसी तरह जलती रहेगी। इस जोत को घी और तेल की जरुरत नहीं होती है। ज्वाला जी मंदिर के पास ही गोरखनाथ नाथ का मंदिर है। जिसे गोरख डिब्बी के नाम से जाना जाता है। इस स्‍थान पर एक जल कुंड है जिसका पानी देखने पर उबलता हुआ लगता है पर छूने पर एकदम ठंडा होता है।
मां की नौ जोत
सबसे पहले इस मंदिर का निर्माण राजा भूमि चंद के करवाया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने 1835 में इस मंदिर का पुनरुद्धार करवाया। मंदिर के अंदर माता की नौ ज्योतियां है जिन्हें, महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है।
नवरात्र में दुर्गा सप्‍तशती के इन 13 अध्‍यायों का पाठ करने से मिलता है अलग-अलग फल

जब अकबर भी हुआ मां का कायल
कहते हैं एक बार जब अकबर दिल्ली का राजा था। ध्यानुभक्त नाम का परम भक्त देवी के दर्शन के लिए अपने गांववासियों के साथ ज्वालाजी के लिए जा रहा था। जब वो लोग दिल्ली से गुजर रहे थे तो बादशाह अकबर के सिपाहियों ने उन्‍हें रोक लिया और दरबार में पेश किया। अकबर ने जब ध्यानु से पूछा कि वह अपने गांववासियों के साथ कहां जा रहा है तो उसने कहा वह जोतावाली के दर्शनो के लिए जा रहे है। अकबर ने कहा तेरी मां में क्या शक्ति है और वह क्या-क्या कर सकती है? ध्यानु ने उत्‍तर दिया कि वह पूरे संसार की रक्षा करने वाली हैं। ऐसा कोई भी कार्य नही है जो वह नहीं कर सकती, तब अकबर ने उसके घोड़े का सर कटवा दिया और कहा कि अगर तेरी मां में शक्ति है तो घोड़े के सर को जोड़कर उसे जीवित कर दें। तब ध्यानु देवी की स्तुति करने लगा और माता की शक्ति से घोड़े का सर जुड गया। ये चमत्‍कार देख अकबर को देवी की शक्ति का एहसास हुआ। उसने देवी के मंदिर में सोने का छत्र चढ़वाने का र्निणय किया किन्तु उसके मन मे अभिमान आ गया कि वो सोने का छत्र चढाने लाया है। तब माता ने उसके छत्र को अस्‍वीकार करके गिरा दिया। साथ उसे एक अजीब धातु में बदल दिया। ये छत्र आज भी मंदिर में मौजूद है और किस धातु का है ये आज तक एक रहस्य है।

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नवरात्र पूजन के प्रथम दिन कलश पूजा के साथ मां शैलपुत्री जी का पूजन किया जाता है। चैत्र नवरात्र 28 मार्च से शुरू होंगे और 05 अप्रैल को खत्म होंगे। शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है। मां शैलपुत्री दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प लिए हुए हैं। इनका वाहन वृषभ है। नवदुर्गाओं में मां शैलपुत्री का महत्व और शक्तियां अनन्त हैं। इस साल चैत्र नवरात्र 28 मार्च 2017 इस दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 08 बजकर 26 मिनट से लेकर 10 बजकर 24 मिनट तक का है। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

ऐसे करें प्रथम दिन की पूजा
नवरात्र के प्रथम दिन स्नान-ध्यान करके माता दुर्गा, भगवान गणेश, नवग्रह कुबेरादि की मूर्ति के साथ कलश स्थापन करें। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखें। कलश स्थापन के समय अपने पूजा गृह में पूर्व के कोण की तरफ अथवा घर के आंगन से पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज रखें। संभव हो, तो नदी की रेत रखें। फिर जौ भी डालें। इसके उपरांत कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी, रुपया, पुष्पादि डालें। फिर 'ॐ भूम्यै नमः' कहते हुए कलश को सात अनाजों सहित रेत के ऊपर स्थापित करें।अब कलश में थोड़ा और जल या गंगाजल डालते हुए 'ॐ वरुणाय नमः' कहें और जल से भर दें। इसके बाद आम का पल्लव कलश के ऊपर रखें। तत्पश्चात् जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे में भरकर कलश के ऊपर रखें। अब उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखें। हाथ में हल्दी, अक्षत पुष्प लेकर इच्छित संकल्प लें। इसके बाद 'ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दनः! दीपो हरतु मे पापं पूजा दीप नमोस्तु ते। मंत्र का जाप करते दीप पूजन करें।कलश पूजन के बाद नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे!' से सभी पूजन सामग्री अर्पण करते हुए मां शैलपुत्री की पूजा करें। मनोविकारों से बचने के लिए मां शैलपुत्री को सफेद कनेर का फूल भी चढ़ा सकती हैं। मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अथवा वन्दे वांछितलाभाय चन्दार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्। मंत्र का जाप करें।

आगमन व गमन
चैत्र नवरात्र 2017 में मां दुर्गा का आगमन नाव से होगा व गमन हाथी पर होगा। यह अति शुभ है। देवी पुराण में नवरात्र में भगवती के आगमन व प्रस्थान के लिए वार अनुसार वाहन बताए गए हैं।
इस बार माता का आगमन व गमन जनजीवन के लिए हर प्रकार की सिद्धि देने वाला है। दुर्गा जी मंगलवार को नाव पर सवार होकर आएंगी एवं विसर्जन होने पर हाथी पर बैठकर जाएंगी।
देवी पुराण के अनुसार: आगमन के लिए वाहन- रविवार व सोमवार को हाथी, शनिवार व मंगलवार को घोड़ा, गुरुवार व शुक्रवार को पालकी, बुधवार को नौका आगमन होता है।
आइये जाने नवरात्रि में कैसे माँ को प्रसन्न करके अपनी मनोकामनाये पूर्ण कर सकते है| यही एक ऐसा पर्व है जिसमे महाकाली, माँ सरस्वती, और माँ लक्ष्मी की साधना करके आप अपनी इच्छा पूर्ति कर सकते हो| इस बार 28 मार्च से शुरू होने वाले इस पवन पर्व पर आप इस तरह पूजा करके माँ को खुश कर सकते है|
नवरात्रि में पूजा विधि
– इन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें|
– ज्यादा से ज्यादा नर्वाण मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै का जप अवश्य करें|
– इन नौ दिनों में व्रत जरूर रखे| यदि सारे नहीं रख सकते तो पहला, चौथा और आखिरी दिन का उपवास जरूर करें|
– भूलकर भी तुलसी का पत्ता या दुर्बा घास न चढ़ाये| यह इन दिनों में निषिद्ध माना गया है|
– यदि हो सके तो पूजा के समय लाल वस्त्र धारण करें| लाल रंग का तिलक जरूर लगाए| लाल रंग आपको एक विशेष ऊर्जा प्रदान करता है|
– नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नाम की ज्योति अवश्य जलाये|
– माँ को प्रातकाल के समय शहद मिला दूध चढ़ाये| पूजा के पश्चात् इस दूध को पीने से शरीर में ऊर्जा और मन को शांति मिलती है|
– आखिरी दिन घर में राखी पुस्तकें, कलम, वाद्य यन्त्र की पूजा जरूर करें|
– अष्टमी या नवमी जो भी आपके घर होती है| उस दिन कन्याओ का पूजन करके उन्हें भोजन करवाये| उसके बाद ही भोजन प्राप्त करें|

उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी में हुई एक अद्भुत धार्मिक घटना से लोग अचंभित हैं। अखंड महाकाल कॉलोनी में स्थित 100 साल पुराने इमली के पेड़ के भीतर से एक शिवलिंग निकला है। यह घटना काफी पुराने इमली के पेड़ को काटे जाने के दौरान घटी। शिवलिंग दिखाई देते ही लोगों में हड़कंप मच यह खबर आग की तरह पूरे शहर में फैल गई। इसके बाद यहां पूजा पाठ शुरू हो गई। - जानकारी अनुसार जयसिंहपुरा अखंड कॉलोनी में टेंट हाउस संचालक लक्ष्मीनारायण के प्लॉट पर इमली का पुराना पेड़ था। - पेड़ की कटाई के दौरान इसकी जड़ में शिवलिंग दिखाई दिया। शिवलिंग के दर्शन हुए तो क्षेत्र में लोगों का हुजूम लग गया। - लोगों का कहना है कि यहां शिव मंदिर बनाया जाएगा। क्षेत्र के राजेश चौधरी ने बताया यह पेड़ काफी पुराना है, लेकिन इसकी जड़े सूख रही थी इसलिए इसे काटा जा रहा था। हवन पूजन हुआ शुरू - पेड़ का निचला हिस्सा काफी चौड़ा था। कटाई के दौरान यह फट गया और लोगों को बीच में एक पत्थर दिखाई दिया। - जब लोगों ने इसे ध्यान से देखा तो एक शिवलिंग नजर आया। शिवलिंग दिखते ही पेड़ को काटने का काम रोक दिया गया। - शिवलिंग निकले की सूचना मिलते ही काफी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचे और हवन-पूजन शुरू हो गया। - लोगों ने चंदन का टीका लगाकर भोले की भक्ति की। इसी के साथ यहां बड़े आयोजन की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

जय माता की आज का राशिफल 14/03/2017. ✍

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सनी लियोनी एक मॉडल और बॉलीवुड की ख़ास हसीना हैं. बॉलीवुड में आने से पहले वो एक पोर्नस्टार हुआ करती थी. सनी के हॉट फ़ोटोज़ ...
Post by साकेत सिंह धोनी
- May 23, 2017
आईपीएल का 10वां सीजन खत्म हो गया है. मुंबई इंडियंस तीसरी बार आईपीएल का खिताब जीतने में सफल रही. रोमांचक फाइनल में पुणे ...
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