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हममें से ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत चाय से ही करते हैं. कोई अदरक वाली चाय पीकर दिन की शुरू करता है तो कोई ग्रीन टी पीकर. किसी को ब्लैक टी पीना पसंद होता है तो किसी को लेमन टी लेकिन क्या आपने कभी लौंग वाली चाय पी है?

अगर आप चाय पीने के शौकीन हैं और उन लोगों में से हैं जिनकी सुबह चाय के प्याले के बिना शुरू ही नहीं होती है तो एकबार लौंग वाली चाय जरूर पीजिए. लौंग वाली चाय सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है. आसान शब्दों में कहें तो लौंग वाली चाय एक औषधि है.

लौंग वाली चाय पीने के फायदे:

1. अगर आपको ओरल प्रॉब्लम है तो लौंग वाली चाय पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद होगी. लौंग वाली चाय के नियमित सेवन से मसूड़ों और दांतों से जुड़ी लगभग सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं. इससे मुंह में मौजूद बैक्टीरिया भी साफ हो जाते हैं.

2. अगर आपको सर्दी है और सीने में जकड़न है तो भी लौंग वाली चाय पीना फायदेमंद रहेगा. इससे कफ साफ होता है और जकड़न दूर होती है.

3. लौंग में मैग्नीशियम पाया जाता है जिससे बैक्टीरियल इंफेक्शन में फायदा होता है. साथ ही इम्यूनिटी पावर भी बढ़ती है.

4. लौंग की चाय उन लोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद है जिन्हें अक्सर पेट से जुड़ी परेशानियां रहती हैं. अगर आपको अक्सर एसिडिटी और पेट दर्द की शिकायत रहती है तो आज से ही लौंग वाली चाय पीना शुरू कर दें.

5. स्क‍िन के लिए भी लौंग बहुत फायदेमंद है. नियमित रूप से लौंग की चाय पीने पर स्क‍िन से जुड़ी कई तरह की प्रॉब्लम नहीं होती है. 

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क्या आप है बार बार छीक से परेशान तो ऐसे करे उपचार,तुरन्त मिलेगा फायदा....
पिपरमिंट तेल :- अगर आपको भी बार-बार छींक आने की समस्या है तो इससे निजात पाने के लिए आप पिपरमिंट तेल का प्रयोग कर सकते है , इसमें पाए जाने वाले anti bacterial गन आपकी इस समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद करेंगे । इसके लिए किसी बड़े बर्तन में पानी को उबाल लें , अब इसमें 5 बून्द पिपरमिंट तेल डालें , किसी तौलिये की मदद से अपने सर को ढक लें और इस पानी की भाप लें , यकीन मानिये इस उपचार से आपको छींक आने की समस्या में आराम मिलेगा ।
.सौंफ की चाय :- छींक के साथ-साथ श्वास संबंधी अन्य समस्यायों में भी फायदेमंद मानी जाती है सौंफ , प्रकृति की इस देन में भी कई एंटीबायोटिक और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो आपकी समस्या को ठीक करने में मदद करते है । बार-बार छींक आने की समस्या में इसका प्रयोग करने के लिए एक कप पानी को उबालकर उसमे दो चम्मच सौंफ पीसकर डालें. लगभग 10 मिनट तक पानी को ढक कर रखे और बाद में छानकर पी लें । इस चाय का सेवन दिन में दो बार करें , आपकी समस्या चुटकियो में हल हो जाएगी ।
काली मिर्च :- ये केवल दिखने में ही अजीब होती है लेकिन स्वास्थ्य के प्रति इसके फायदों को जानकर आप हैरान हो जायेंगे , जी हां, आपके खाने को स्वादिष्ट बनने वाली काली मिर्च आपकी बिमारियों को ठीक करने में भी सक्षम है । यदि आपको बार-बार छींक आने की समस्या से ग्रसित है तो गुनगुने पानी में आधा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण डालकर उसे मिला लें , अब इस मिश्रण को दिन में कम से कम दो से तीन बार पियें , आप चाहे तो काली मिर्च के पाउडर को पानी में उबालकर गरारे भी कर सकते है ।

अदरक :- न केवल छींक बल्कि सर्दी जुखाम और खासी की समस्या में भी यह एक अच्छा उपाय है , विशेषकर नाक से सम्बंधित समस्याएं , यदि आपको भी छींक बहुत परेशान करती है तो एक कप पानी में थोड़ा सा अदरक डालकर उबाल लें , हल्का गुनगुना रह जाने पर इसमें शहद मिलाकर पियें , आप चाहे तो कच्ची अदरक या अदरक की चाय का भी सेवन कर सकते है ।
लहसुन :- लहसुन में पाए जाने वाले एंटीबायोटिक और एंटीवायरल गुण न केवल आपको श्वास संबंधी बिमारियों से बचाते है अपितु उसे ठीक करने में भी मदद करते है , इसके अलावा स्वाश संबंधी संक्रमण होने पर भी ये बहुत लाभकारी होता है । यदि आपको भी बहुत छींके आती है तो लहुसन आपकी इस समस्या को हल करने में आपकी मदद कर सकता है , इसके लिए पाच से छह लहसुन की कलियों को पीसकर उनका पेस्ट बना लें और उन्हें सूंघे , इसके साथ ही दाल और सब्जी बनाने में भी लहसुन का प्रयोग करें ।
अजवाइन :- अजवाइन की पत्तियों के तेल में बैक्टीरिया और विषाणुओ से लड़ने की तेज़ क्षमता पायी जाती है , इसके साथ ही ये एलर्जी को ठीक करने में भी बेहद मददगार उपाय है । इसके लिए अजवाइन के तेल की दो से तीन बूंद का रोजाना इस्तेमाल करें , समस्या में आराम मिलेगा ।
मेथी की बीज :- मेथी में पाए जाने वाले एंटी बैक्टीरियल गुण आपकी लगातार छींको का उपचार करने में मददगार हो सकते है , क्योकि ये छींक का उपचार कर श्लेष्मा झिल्ली को शांत करता है । इसके लिए पानी में दो चम्मच मेथी दाने मिलाकर उसे उबाले., अब इस मिश्रण का सेवन करें , समस्या ठीक न होने तक दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करते रहे फ़ायदा मिलेगा ।

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"आंखों की रोशनी बढ़ाने के उपाय, चश्मा हटाने (उतारने) के उपाय, आंखों की रोशनी बढ़ाने के उपाय जो आपकी आंखों को करँगे रोशन-
आँखों की रोशनी -
दृष्टि कमजोर होना आज की जीवन शैली की एक आम समस्या है। 
- यहाँ तक कि निविदा आयु वर्ग के स्कूल जाने वाले बच्चों को भी कमजोर आंखों के कारण चश्मे का उपयोग करते  देखा जा सकता है। 
- गर्मी और मस्तिष्क की कमजोरी कमजोर दृष्टि का एक मुख्य कारण है।  
- एक शक्तिशाली प्रकाश में निरंतर पढ़ना, पाचन विकार, असंतुलित खाने और भोजन में विटामिन ए की कमी भी कमजोर दृष्टि के लिए जिम्मेदार हैं। 
- शराब के सेवन से भी आँखों पर प्रभाव पड़ता है । 

- कमजोर दृष्टि विशेष रूप से बच्चों और युवा लोगों में से कई मामलों में चुंबक चिकित्सा के लिए अच्छी तरह से प्रतिक्रिया व्यक्त की है। 
- शुद्ध शहद को आंख में बूंद के रूप में आहार के भाग के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।


कमजोर दृष्टि के लक्षण    वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करते वक़्त आंख की मांसपेशियों में तनाव   आंखों पर अत्यधिक तनाव मांसपेशियों कोकमजोर करते हैं    कमजोर आंख की मांसपेशिया दृष्टि मेंसमस्याओं का कारण बनती है   आंखों से धुंधला दिखना    लघु दृष्टि और लंबे दृष्टि. लंबी दूरी की वस्तुओं को देखने में सक्षम न होना. पास की वस्तुओं को देखने में सक्षम न होना   लंबी दूरी की वस्तुओं को देखने में परेशानी  आंखों में जलन  आंखों में पानी आना अध्ययन के दौरान सिर में भारीपन   लगातार आम सर्दी होना  कारण - आंख पर जोर का सबसे सामान्य कारण आंख पर बढ़ता काम का तनाव है। दुनिया में अधिकतर लोगो की आँखे लगातार किताबें पढ़ने से, स्मार्टफोन या कंप्यूटर स्क्रीन पर  तीव्र और लंबे समय तक एकाग्रता से देखने से आसानी से थक जाती है।बहुत लंबे समय के लिए कंप्यूटर स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करना भी आंख में तनाव पैदा कर सकता है। यह सच है कि टीवी और कंप्यूटर स्क्रीन को लगातार घूरना आंखों के लिए अच्छा नहीं है।स्क्रीन को लगातार न देखना पड़े ऐसी कोशिश करो और हर 20 मिनट बाद २० सेकंड के लिए २० फ़ीट दूर किसी वस्तु को देखो। इसके अलावा आप चमक को कम करने के लिए अपने स्क्रीन सेटिंग्स समायोजित कर सकते हैं। लगातार अध्ययन करना पड़े तो बीच में समय निकालकर एक बार टहलने के लिए उठे और आसपास की किसी वस्तु पर या अपनी आँखें किसी अलग कार्य पर केंद्रित करे,इससे आँखों को आराम  रहेगा । अत्यधिक समय टीवी देखने में खर्च करना  कंप्यूटर स्क्रीन पर पास से लगातार काम करना  अत्यधिक पढ़ते रहने से  हवा में हानिकारक प्रदूषकों के संपर्क में आने से   नेत्र समस्याओं के लिए घरेलू उपचार -
 1. सौंफ पाउडर और धनिया बीज पाउडर लेकर बराबर अनुपात का एक मिश्रण तैयार करें।फिर बराबर मात्रा में चीनी मिला ले। 12 ग्राम हर सुबह और शाम की खुराक में ले लो।यह मोतियाबिंद के साथ साथ कमजोर आँखों के लिए भी फायदेमंद है। 
2. कमजोर दृष्टि के लोगों को हर रोज गाजर के जूस का सेवन करना चाहिए ,यह महान लाभ प्रदान करेगा।
 3. धनिया के तीन भागों के साथ चीनी के एक भाग का मिश्रण तैयार करे। उन्हें पीस लें और उबलते पानी में इस संयोजन को डालें और एक घंटे के लिए इसे ढककर रखें। फिर एक साफ कपड़े से इसे छानकर प्रयोग करे । यह नेत्रश्लेष्मलाशोथ के लिए एक अमोघ इलाज है।
 4. दूध में बादाम को भिगोकर उन्हें रात भर रखा रहने दे ।सुबह इसमें चंदन भी मिलाये। इसे पलकों पर लगाये । यह नुस्खा आंखों की लालिमा को बिलकुल कम कर देता है।  
 6. इलायची के दो छोटे टुकड़े ले लो। उन्हें पीसकर दूध में डाले और  दूध को उबाल कर रात में इसे पिये। यह आंखों को स्वस्थ बनाता है।
7 .आँखों की देखभाल के लिए आहार में विटामिन ए का शामिल होना अनिवार्य है। विटामिन 'ए' गाजर, संतरे और कद्दू , आम, पपीता और संतरे, नारंगी और पीले रंग की सब्जियों में निहित है। पालक, धनिया आलु और हरी पत्तेदार सब्जियों,डेयरी उत्पादों तथा मांसाहारी खाद्य पदार्थ, मछली, जिगर,अंडे में विटामिन ए की एक उचित मात्रा विद्यमान होती है।
8. मोतियाबिंद का खतरा आहार में विटामिन सी लेने से कम हो जाता है। इसलिए अमरूद, संतरे, नींबू और टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी, आदि के रूप में विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ आहार में शामिल किया जाना चाहिए।   
9 ब्लूबेरी दृष्टि बढ़ाने के लिए और नेत्र हीन के लिए एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है। यह रात के समय की दृष्टि में सुधार करने में मदद कर सकते हैं क्योंकि यह रेटिना के दृश्य बैंगनी घटक के उत्थानको उत्तेजित करता है। साथ ही, यह धब्बेदार अध: पतन, मोतियाबिंदऔर मोतियाबिंद के खिलाफ सुरक्षा करता है। पका हुआ फल ब्लूबेरी हर रोज आधा कप खाओ।
10.  बादाम भी ओमेगा -    3 फैटी एसिड, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट सामग्री की वजह से दृष्टि में सुधार के लिए बहुत लाभदायक हैं। यह स्मृति और एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करता है। रात भर पानी में 5 से 10 बादाम भिगो दे। अगली सुबहछिलका उतारकर बादाम पीस ले। एक गिलास गर्म दूध के साथ इस पेस्ट को खाए। कम से कम कुछ महीनों के लिए इसे प्रयोग करो।
11.   1 कप गर्म दूध मे आधा चम्मच मुलेठी पाउडर, ¼ छोटा चम्मच मक्खन और 1 चम्मच शहद अच्छी तरह मिक्स करकेसोते समय इसे पिये। आँखों की रोशनी बढ़ाने में यह बहुत लाभदायक है।  

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रात के वक्त यानी नाइट शिफ्ट में काम करना आपके स्वास्थय के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है. एक शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नाइट शिफ्ट में जिगर यानी लीवर बुरी तरह प्रभावित होता है. लिवर 24 घंटों में दिन और रात के हिसाब से भोजन और भूख के चक्र का आदी हो जाता है.

रात की ड्यूटी यानी नाइट शिफ्ट के चलते आप समय पर भोजन नहीं कर पाते, जिसका सीधा असर आपके लिवर पर पड़ता है. शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग कर पाया कि लिवर का आकार रात में बढ़ता है और वह खुद को ज्यादा खुराक के लिए तैयार करता है, लेकिन उसे समय पर उतनी खुराक नहीं मिल पाती.

जैविक क्रिया की लय उलटने पर लिवर के घटने-बढ़ने की प्रक्रिया प्रभावित होती है
सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित एक रिसर्च आधारित लेख में शोधकर्ताओं ने बताया है कि जब सामान्य जैविक क्रिया की लय उलट जाती है तो लिवर के घटने-बढ़ने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि व्यावसायिक बाधाओं या निजी आदतों के चलते हमारी जैविक घड़ी यानी बायोलॉजिकल क्लॉक और दिनचर्या बिगड़ती है. जिसका सीधा असर लिवर के महत्वपूर्ण कामकाज पर पड़ता है. प्रयोग के दौरान चूहों को रात में चारा दिया गया, जबकि दिन में आराम करने दिया गया.

इस मामले में जिनेवा यूनिवर्सिटी के शोध प्रमुख फ्लोर सिंटूरल ने कहा कि हमने देखा कि रात में सक्रिय चरण यानी एक्टिव फेज़ के दौरान लिवर 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ता है और दिन के दौरान यह शुरुआती आकार में वापस आ जाता है. बायोलॉजिकल क्लॉक में बदलाव से यह प्रक्रिया प्रभावित होती है.

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कोलेस्ट्रोल, वसा और शर्करा की उच्च मात्रा वाला पाश्चात्य आहार न्यूडीजनरेटिव रोग से जुड़े एपोई4 जीन वाले लोगों में अल्जाइमर के विकास पर असर डाल सकता है. एपोई4 और एपोई3 जीन के दो प्रकार प्रोटीन और एपोलिपोप्रोटीन के कोड हैं, जो वसा और कोलेस्ट्रॉल को बांधते हैं. एपोई4 सूजन, अल्जाइमर और कार्डियोवैस्कुलर रोग की वृद्धि से जुड़ा हुआ है, जबकि एपोई3 रोग के जोखिम में वृद्धि नहीं करता है, और यह बहुत अधिक सामान्य प्रकार है.

शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि जब एपोई4 जीन वाले चूहों को पश्चिमी आहार से प्रेरित भोजन दिया गया तो इनमें बीटा एम्लॉइड प्रोटीन प्लेक की वृद्धि देखी गई, जो उनके दिमाग में सूजन का संकेत देती है.
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के प्रोफेसर व इस अध्ययन के मुख्य लेखक क्रिस्चियन पाइक ने कहा, "इस शोध से प्राप्त निष्कर्ष बताते हैं कि यह जोखिम हर किसी को समान रूप से प्रभावित नहीं करता है, लेकिन अधिक जोखिम कारकों में यह अपना प्रभाव डाल सकता है."

पाइक ने कहा, "आपके साथ क्या होता है, इसमें आपके जीन्स की बहुत बड़ी भूमिका होती है. लेकिन इसमें आपके वातावरण और परिवर्तनीय जीवनशैली की भी भूमिका होती है. आप कितना व्यायाम करते हैं और क्या खाते हैं, यह सब भी महत्वपूर्ण है.

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आज कल की बिजी लाइफस्टाइल और दिन भर ऑफिस में भागदौड़ से इंसान इतना परेशान हो जाता है कि रात में उसे ठीक से नींद नहीं आती है. ठीक से ना सो पाने के कारण आगे चलकर यह अनिद्रा नामक गंभीर बीमारी का रूप धारण कर लेता है. अनिद्रा की समस्या होने पर शरीर को और भी कई तरह के नुकसान होने लगते हैं जैसे कि इम्युनिटी का कमजोर होना, मोटापा बढ़ जाना इत्यादि. इसके अलावा रोजाना ठीक से ना सो पाने के कारण आपके दिमाग पर भी बुरा असर पड़ता है.

अगर आप नींद न आने से परेशान हैं तो इसका सबसे प्रमुख असर आपके व्यवहार में दिखने लगता है. थोड़ी थोड़ी देर में मूड बदलना किसी पर गुस्सा करना ये सब आम लक्षण है. अगर आपको ऐसे लक्षण दिखने लगे तो बिना देरी किये डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करवाएं.

स्लीप डिसऑर्डर होने से आपकी फोकस और कंसन्ट्रेट करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होने लगती है. इसका सीधा असर आपकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ पर पड़ने लगता है. जब आप रात में भरपूर 8 घंटे की नींद पूरी करते हैं तो अगले पूरे दिन आप एकदम अलर्ट और ऊर्जा से भरपूर रहते हैं. लेकिन जब आप ठीक से सो नहीं पाते हैं तो ना आप घर के काम ठीक से कर पाते हैं ना ही ऑफिस के.
कम सोने की वजह से आपके सोचने समझने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है. सबसे पहले आपकी फोकस करने की क्षमता और किसी समस्या को हल करने के लिए ज़रूरी तार्किक क्षमता कमजोर होने लगती है और उसके बाद धीरे धीरे आपको चीजें टाइम पर याद नहीं आती है. जिससे आगे चलकर आपकी याद्दाश्त कमजोर पड़ने लगती है. जिससे आप कोई भी नयी चीज को सीखने में खुद को असमर्थ पाते हैं.

जब आप कई दिनों तक ऐसे ही ठीक से सो नहीं पाते हैं तो धीरे धीरे आप मानसिक रोग की चपेट में आने लगते हैं. अगर आपने समय रहते इसका इलाज नहीं करवाया तो आपको हलूसनैशन, पैरोनिया जैसे गंभीर मानसिक रोग के शिकार हो सकते हैं. इसलिए बेहतर यही होगा कि अगर आपको नींद नहीं आ रही है तो डॉक्टर से जांच कराएं और घर पर मेडिटेशन और योग करें.

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रूखे बालों के लिए घरेलू नुस्खे
कौन नहीं चाहता कि हमारे सर पर सुंदर काले, घने बाल हों? मुझे लगता है आज हर औरत व पुरुष चाहता है कि उसके सर पर घने बाल हों। इंसान चाहें छोटा, लंबा, मोटा, काला, गोरा चाहे जैसा भी हो पर घने बालों को लेकर सभी संजीदा रहते हैं। सर पर अगर घने बाल हों तो आप अपनी उम्र से दस गुना कम और जवान दिखने लगते 

घरेलू नुस्खे
जिन व्यक्तियों के पतले बाल होते हैं वे उन्हें मोटा करने के लिए हजारों रुपये के उत्पाद खरीदकर लगाते हैं। कई सर्जरी तक करवा लेते हैं। लेकिन फायदा उनको मिलता है निल बट्टे सन्नटा। इसलिए डॉक्टर्स हमेशा बालों पर गैर हानिकारक चीजों के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। और घरेलू उपाय एक मात्र ऐसी औषिधि है जिससे साइड इफेक्ट नहीं होता।
बालों को नुकसान क्यों होता है?
बालों को मोटा करने के बारे में अगर आप सोच रहें हैं तो पहले ये सोचिए कि आखिर बाल क्यों झड़ रहें, क्यों पतले हो रहें हैं? क्योंकि कहते हैं हमें समस्या की जड़ तक जाना चाहिए फिर हल ढूंढना चाहिए।
आमतौर पर घरों में अंडा खाने में इस्तेमाल किया जाता है। अंडा शरीर में प्रोटीन की कमी पूरी करता है। प्रोटीन से बाल स्वस्थ रहते हैं। एक या दो अंडे अपने बालों के अनुसार लें और उसे अच्छे से मिक्स कर लें। अपने बालों को गीला करके अंडे को सर पर लगाएं और 30 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद बालों को गुनगुने पानी से धो लिया। ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें। इससे आपके बाल जल्दी ही घने और लंबे होने लगेंगे। अंडे से बालों का डैंड्रफ भी खत्म होता है जिससे बाल झड़ते नहीं है। जैतून का तेल
अक्सर हमारे घरों में जैतून का तेल मिल जाता है क्योंकि यह खाना बनाने के काम भी आता है। जैतून के तेल से सर की मालिश करें 30 से 45 मिनट बाद शैम्पू से धो लें। अगर आप चाहें तो अगली सुबह भी बाल धो सकते हैं। ऐसा करने से आपके बाल जल्दी घने हो जाएं।
मेथी के दाने
अक्सर मेथी का प्रयोग खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है । लेकिन क्या आपको मालूम है कि मेथी बालों के लिए भी बहुत उपयोगी है। अगर आप एक कप मेथी दो कप पानी के साथ रात को भिगों देतें हैं और पीसकर पेस्ट बना लेते और सर पर लगाते हैं। और इस पेस्ट को 30 से 45 मिनट के लिए छोड़ दे।
आंवला
प्राचीन काल से ही आंवले का इस्तेमाल बालों को घना करने के लिए होता आया है। आंवला केवल बालों के लिए ही उपयोगी नही है बल्कि पूरे शरीर के लिए भी उपयोगी है। सूखे आंवले को रात में पानी में भूगों दें सुबह पानी को तब तक उबालें जब तक आंवला नरम ना हो जाए। फिर पानी को ठंडा होने दें। उसके बाद बालों को शैम्पू से धो लें। यह पेस्ट आपके बालों को झड़ने से रोकता है और बालों को घना बनाता है।
मेहंदी का पाउडर
मेहंदी का इस्तेमाल अक्सर बालों को रंगने में किया जाता है। लेकिन मेंहन्दी से बालों को झड़ने से भी बचाया जा सकता है और बाल घने भी होते हैं। मेहंदी के पाउडर में पानी मिलामर एक घण्टे के लिए रख दें ताकि दोनों अच्छे से मिल पाएं। फिर इसमें एक अंडा मिलाकर अच्छे से मिक्स कर ले। इस पेस्ट को बालों में अच्छे से लगाएं और अगर बाल लंबे हैं तो पेस्ट लगाकर जूड़ा बना लें। थोड़े समय बाद बालों को शैम्पू से धो लें। अगर आप बालों को रंगना भी चाहते हैं तो इसे कुछ घण्टों बाद भी धो सकते हैं। यह वह घरेलू उपाय है जो आसानी से हो जाता है और कोई साइड इफेक्ट भी नही देता है। इस पेस्ट को बालों में अच्छे से लगाएं और अगर बाल लंबे हैं तो पेस्ट लगाकर जूड़ा बना लें। थोड़े समय बाद बालों को शैम्पू से धो लें। अगर आप बालों को रंगना भी चाहते हैं तो इसे कुछ घण्टों बाद भी धो सकते हैं। यह वह घरेलू उपाय है जो आसानी से हो जाता है और कोई साइड इफेक्ट भी नहीं देता।

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युवावस्था के दौरान प्यूबर्टी (यौवन से संबंधित) हॉर्मोन सीखने की क्षमता को बाधित करते हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस तरह का बदलाव ये हॉर्मोन मस्तिष्क के एक खास हिस्से को प्रभावित करते हैं.

बार्कले स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में एसोसिएट प्रोफेसर व अध्ययन की मुख्य लेखक लिंडा विलब्रेख्त ने कहा,'हमने पाया है कि यौवन से संबंधित हॉर्मोन मस्तिष्क के फ्रंटल कॉर्टेक्स के लिए एक 'स्वीच' की तरह काम करता है, जो सीखने की क्षमता में बाधा पैदा करता है. 

विलब्रेख्त ने कहा, 'आधुनिक शहरी परिवेश में लड़कियां तनाव और मोटापे की समस्या के कारण समय से पहले जवान हो रही हैं, जो स्कूलों में उनके खराब प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है. 
चुहिया में जब प्यूबर्टी से संबंधित हॉर्मोन इंजेक्ट किया गया, तो शोधकर्ताओं ने उनके फ्रंटल कॉर्टेक्स के तंत्रिका संचार में महत्वपूर्ण बदलाव देखा. ये बदलाव फ्रंटल मस्तिष्क में हुए, जो सीखने, ध्यान देने तथा स्वभाव के नियंत्रण से जु़ड़ा है. 

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले लेखक डेविड पाइकस्र्की ने कहा, 'हमारी जानकारी में यह पहला अध्ययन है, जो यह दर्शाने में कामयाब हुआ है कि यौवन से संबंधित हॉर्मोन कॉर्टेक्स के तंत्रिका संचार में बदलाव लाते हैं. अध्ययन पत्रिका 'करेंट बायोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है.

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