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मुलेठी (यष्टीमधु ) - मुलेठी से हम सब परिचित हैं | भारतवर्ष में इसका उत्पादन कम ही होता है | यह अधिकांश रूप से विदेशों से आयातित की जाती है| मुलेठी की जड़ एवं सत सर्वत्र बाज़ारों में पंसारियों के यहाँ मिलता है | चरकसंहिता में रसायनार्थ यष्टीमधु का प्रयोग विशेष रूप से वर्णित है | सुश्रुत संहिता में यष्टिमधु फल का प्रयोग विरेचनार्थ मिलता है | मुलेठी रेशेदार,गंधयुक्त तथा बहुत ही उपयोगी होती है | यह ही एक ऐसी वस्तु है जिसका सेवन किसी भी मौसम में किया जा सकता है | मुलेठी वातपित्तशामक है | यह खाने में ठंडी होती है | इसमें ५० प्रतिशत पानी होता है | इसका मुख्य घटक ग्लीसराइज़ीन है जिसके कारण ये खाने में मीठा होता है | इसके अतिरिक्त इसमें घावों को भरने वाले विभिन्न घटक भी मौजूद हैं | मुलेठी खांसी,जुकाम,उल्टी व पित्त को बंद करती है | यह पेट की जलन व दर्द,पेप्टिक अलसर तथा इससे होने वाली खून की उल्टी में भी बहुत उपयोगी है | आज हम आपको मुलेठी के कुछ औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे -
१- मुलेठी चूर्ण और आंवला चूर्ण २-२ ग्राम की मात्रा में मिला लें | इस चूर्ण को दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह- शाम चाटने से खांसी में बहुत लाभ होता है |
२- मुलेठी-१० ग्राम काली मिर्च -१० ग्राम लौंग -०५ ग्राम हरड़ -०५ ग्राम मिश्री - २० ग्राम ऊपर दी गयी सारी सामग्री को मिलाकर पीस लें | इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण सुबह शहद के साथ चाटने से पुरानी खांसी और जुकाम,गले की खराबी,सिर दर्द आदि रोग दूर हो जाते हैं |
३- एक चम्मच मुलेठी का चूर्ण एक कप दूध के साथ लेने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है |

४- मुलेठी को मुहं में रखकर चूंसने से मुहँ के छाले मिटते हैं तथा स्वर भंग (गला बैठना) में लाभ होता है |
५- एक चम्मच मुलेठी चूर्ण में शहद मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से पेट और आँतों की ऐंठन व दर्द का शमन होता है |
६- फोड़ों पर मुलेठी का लेप लगाने से वो जल्दी पक कर फूट जाते हैं |

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केंद्र सरकार ने आज बताया कि इस साल अभी तक 600 लोगों की स्वाइन फ्लू से मौत हुई है. यह पिछले साल की तुलना में करीब दोगुनी हैं. केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आज एक सवाल के जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि नौ जुलाई तक सामने आये 2324 मामलों में 284 लोगों की मौतें करीब महाराष्ट्र में हुई.

जेपी नड्डा ने बताया कि गुजरात में 289 संक्रमण मामलों में से 75 की मौत हुई. उन्होंने कहा कि केरल में एच1एन1 प्रभावित 1172 लोगों में से 63 की मौत हुई. राजस्थान में 407 सामने आये मामलों में 59 लोगों की मौत हुई. उन्होंने बताया कि इसी तरह कर्नाटक में 15 और तेलंगाना में 17 लोगों की मौत हुई.


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आजकल प्याज का उपयोग हमारी रसोई में बहुत ही आम बात है। बिना प्याज के कोई भी सब्जी हो या कोई भी व्यंजन अच्छा नहीं बनता। लेकिन क्या आपको पता है कि हमारी रसोई में उपयोग होने वाली प्याज कई रोगों की दवा है? आइए आज हम आपको बताते हैं कि प्याज से आप किन-किन रोगों का उपचार घर बैठे आसानी से कर सकते हैं और अंग्रेजी दवाइयों के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं।

कान का दर्द: कान के दर्द के लिए प्याज को गर्म राख में भूनकर उसका पानी निचोड़ लें। अब इस पानी को दर्द वाले कान में डालिए। कान दर्द मिनटों में छूमंतर हो जाएगा।

बिच्छू का जहर: अगर किसी को बिच्छू काट ले तो प्याज का रस और नौसादर को बराबर मात्रा में लेकर खरल में कूट लें। मक्खी, बिच्छू, ततैया आदि के काटने वाले स्थान पर इसे लगाइए, दर्द जल्दी ही ठीक हो जाएगा।
मोतियाबिंद: अगर मोतियाबिंद की परेशानी है या आंखों से कम दिखाई देता है तो प्याज का रस, शहद और भीमसेनी कपूर एक 1 ग्राम लेकर सबको खूब मिलाकर रात में नेत्रों में लगाने से मोतियाबिंद ठीक हो जाता है।आंखों की ज्योति बढ़ने लगती है, और चश्मा लगाने की भी जरुरत नहीं होती।पेशाब में जलन पेशाब में जलन होने पर प्याज के 20 ग्राम प्रति 20 ग्राम पानी डालकर उसे भोपाल आधार होने पर थोड़ा ठंडा करने पेशाब की जलन ठीक हो जाएगी।

लू लगने पर: गर्मियों में लू लगने पर प्याज के रस से छाती और पीठ पर मालिश करें, इससे लू का असर कम हो जाता है। कच्ची प्याज का उपयोग भी लू में बहुत अधिक सहायक होता है और अगर कच्ची प्याज का उपयोग गर्मियों में किया जाए तो लू लगने की संभावना 90% तक कम हो जाती है।

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अस्‍पताल में पोस्‍टमॉर्टम के लिए पड़ी थी लाश, नोंचकर खा गया कुत्‍ता
पटना , अस्‍पताल में लाश को कुत्‍ता ने निवाला बना लिया और व्‍यवस्‍था उदासीन बनी रही। दिल हिला देने वाली यह घटना समस्‍तीपुर सदर अस्‍पताल में हुई। मिली जानकारी के अनुसार रेल पुलिस एक अज्ञात शव को पोस्टमार्टम के लिए समस्‍तीपुर सदर अस्‍पताल ले गई थी। लेकिन, उसने शव को अस्‍पताल परिसर में शव को लावारिस हालत में छोड़ दिया। इसके बाद एक कुत्ते ने उसे नोंच डाला।
समस्‍तीपुर के सिविल सर्जन अवध कुमार ने यह कह पल्‍ला झाड़ लिया कि अज्ञात शव की जिम्मेदारी पुलिस की होती है। अस्पताल में कोई भी मॉर्चरी नहीं होने से शव को रखने की व्यवस्था नहीं है। रेल एसपी बीएन झा ने माना कि शव को खुले में छोड़ देना गंभीर लापरवाही है। मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
सुरेश प्रबन्धकार

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एक्ज़िमा एक प्रकार का चर्म रोग है जिसमें रोगी की स्थिति अति कष्टपूर्ण होती है| इस रोग की शुरुआत में रोगी को तेज़ खुजली होती है तथा बार-बार खुजाने पर उसके शरीर में छोटी-छोटी फुंसियां निकल आती हैं | इन फुंसियों में भी खुजली और जलन होती है तथा पकने पर उनमें से मवाद बहता रहता है और फिर यह जख्म का रूप ले लेता है | एक्ज़िमा शरीर के किसी भी भाग में एक गोलाकार दाने के रूप में पैदा होता है जिसमें हर समय खुजली होती रहती है | मुख्य रूप से यह रोग खून की खराबी के कारण होता है और चिकित्सा न कराने पर तेज़ी से शरीर में फैलता है | कब्ज़,हाज़मे की खराबी आदि और भी कारण से एक्ज़िमा हो सकता है | इस रोग में सफाई रखना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह संक्रमित रोग है | एक्ज़िमा में रोगी को खून साफ़ करने वाली औषधियों का प्रयोग करने के साथ-साथ नहाने के पानी में नीम की पत्तियां या एंटीसेप्टिक लिक्विड डालकर नहाना चाहिए| रोगी को खट्टी-मीठी वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए | आज हम आपको एक्ज़िमा के उपचारार्थ कुछ औषधि बताएंगे -
१- नारियल के तेल में कपूर मिलाकर एक्ज़िमा वाले स्थान पर लगाने से लाभ होता है |
२- अजवायन को पानी के साथ पीसकर लेप बना लें | इस लेप को प्रतिदिन पीड़ायुक्त स्थान पर लगाने से कुछ ही दिनों में एक्ज़िमा समाप्त हो जाता है |
३- नीम के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिला लें | इसे प्रतिदिन सुबह पीने से खून की खराबी दूर होकर एक्ज़िमा ठीक होने लगता है | ४- हरड़ को गौमूत्र में पीसकर लेप बना लें | यह लेप प्रतिदिन दो से तीन बार एक्जिमा पर लगाने से लाभ होता है |
५- आश्रम द्वारा निर्मित कायाकल्प तेल के प्रयोग से भी एक्ज़िमा में बहुत लाभ होता वहै | यह तेल दिन में दो बार पीड़ायुक्त स्थान पर लगाने से आराम मिलता है |
६- एक लीटर तिल के तेल में २५० ग्राम कनेर की जड़ को उबालें | कुछ देर उबालने के बाद यह जड़ जल जाती है | इसे ठण्डा करके छान लें| इस तेल को प्रतिदिन रुई से एक्ज़िमा पर सुबह-शाम लगाने से एक्ज़िमा जल्दी ही ठीक हो जाता है |

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दुनिया में अधिकांश मौत की वजह दिल का दौरा पड़ने से होती है। लोग दिल के दौरे के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन खास बात यह है कि अगर इसके लक्षण समझ लिए जाएं तो आपकी जान बच सकती है। हार्ट अटैक के लक्षण एक महीने पहले से ही दिखने लगते हैं। ऐसे 6 लक्षण हैं जिनको नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर इन 6 लक्षणों में से कोई भी आपको महसूस हो तो डाॅक्टर से संपर्क करने में देरी न करें।

क्यों पड़ता है दिल का दौरा

दिल का दौरा वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति की धमनी में अवरोध आ जाता है और रक्त प्रवाह रुक जाता है। यदि रक्त प्रवाह को जल्दी से बहाल नहीं किया जाता तो ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के अभाव में दिल की मांसपेशियों को इस तरह नुकसान हो सकता है कि उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। इससे हार्ट फेल हो सकता है और मृत्यु हो सकती है।

हार्ट अटैक के एक महीने पहले ये 6 लक्षण नजर आते हैं :

खूब थकान

बिना किसी मेहनत के ही थकान हो तो समझ लीजिए कि हार्ट अटैक हो सकता है। कई बार अच्छी नींद लेने के बाद ही आलस औऱ थकान का अनुभव करते हैं और दिन में भी नींद आती है।

नींद में परेशानी

हार्ट अटैक की एक ओर चेतावनी है आपकी नींद में खलल पड़ते रहना। आपका सबकाॅऩ्शियस माइंड आपको कहता रहतो है कि कुछ गड़बड़ है। आप रात में बार-बार जागते हैं, बार-बार बाथरूम जाना पड़ता है या रात में जोर से प्यास लगती रहती है। अगर आपको नींद की इस परेशानी का तार्किक कारण न पता हो तो डाॅक्टर से सलाह लें।
सांस लेने में दिक्कत

अगर सांस लेने में कोई परेशानी हो रही है तो यह भी हार्ट अटैक की निशानी हो सकती है। दिल के ठीक ढंग से काम न कर पाने की वजह से फेफड़ों तक उतनी मात्रा में आॅक्सीजन नहीं पहुंचती जिसकी उसको चाहिए, जिससे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।

सीने में असहजता

अगर आपके सीने में होने वाली असहजता दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार लक्षणों में से एक है। सीने में होने वाली दर्द आपको हार्ट अटैक का शिकार बना सकता है। अगर आपको सीने में किसी दबाव या जलन की शिकायत हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

अपच

हार्ट अटैक का एक ओर लक्षण अपच यानी इनडाइजेशन भी है। हालांकि मसालेदार खाने से आपके पेट में गड़बड़ी हो सकती है लेकिन अगर ज्यादा अपच हो तो यह सामान्य नहीं है।

कमजोर बाजू

अगर आपके दिल को पर्याप्त आॅक्सीजन नहीं मिल रही हैं तो यह आपके स्पाइन को प्रभावित करेगा। जब ऐसा होता है तो आपके हार्ट, स्पाइन और बाजुओं से जुड़ी तंत्रिकाएं प्रभावित होती है जिससे आपके बाजुओं में दर्द होता है। अगर आपके हाथ सुन्न हो रहे हो तो समझ लीजिए यह हार्ट अटैक का बड़ा संकेत है।

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1: गर्म पानी - सबसे आसान और सुलभ तरीका है गर्म पानी पीना, जो गर्म होने पर कीटाणु रहित भी होता है पाचन व इम्यून पावर को दुरुस्त करता है, जिसे आप बीमारियों से बच सकते हैं।

2:चाय - ग्रीन टी हो, ब्लैक टी या फिर अदरक और दालचीनी वाली गर्म चाय , आपको बारिश में बीमार पड़ने से जरूर बचा सकती हैं, इसलिए इनका सेवन करने से परहेज न करें।

3:दालचीनी का पानी - दालचीनी को पानी के साथ उबालकर तैयार किए गए पानी का उपयोग बारिश के मौसम में आपको बीमारियों से बचाता है, तो यह एक अच्छा विकल्प है।
4:तुलसी का काढ़ा - बारिश में भीग चुके हैं, तो सर्दी लगना या बीमार पड़ना तय है। लेकिन तुलसी का काढ़ा आपको बीमार पड़ने से बचा सकता है। अप चाहें तो इसमें गुड़, अदरक या लौंग का इस्तेमाल कर सकते हैं।।

5:सुप- सूप हमेशा से ही हेल्थ के लिए एक बेहतरीन विकल्प रहा है, इसलिए आप बेझिझक अपनी पसंद के गर्मागर्म सूप का सेवन करें, और बरसात में स्वस्थ रहै।।

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इस रोग में रोगी को भूख नहीं लगती | यदि जबरदस्ती भोजन किया भी जाय तो वह अरुचिकर लगता है | रोगी 1 या 2 ग्रास ज्यादा नहीं खा पाता और उसे बिना कुछ खाये -पिये खट्टी डकारें आने लगती हैं | इस तरह भूक न लगने अरुचि कहते हैं |
आमाशय या पाचनतंत्र में कमी होने के कारण भूख लगनी कम हो जाती है | ऐसे में यदि कुछ दिनों तक इस बात पर ध्यान न दिया जाये तो भूख लगनी बिलकुल ही बंद हो जाती है | अधिक चिंता, क्रोध , भय और घबराहट के कारण भी यकृत की ख़राबी के कारण भी भूख नहीं लगती |
विभिन्न औषधियों द्वारा अरुचि का उपचार
१-गेंहू के चोकर में सेंधा नमक और अजवायन मिलाकर रोटी बनाकर खाने से भूख तेज़ होती है |
२-एक सेब या सेब के रस के प्रतिदिन सेवन से खून साफ़ होता है और भूख भी लगती है | ३-एक गिलास पानी में 3 ग्राम जीरा , हींग , पुदीना , कालीमिर्च और नमक डालकर पीने से अरुचि दूर होती है |
४-अजवायन में स्वाद के अनुसार कालानमक मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से अरुचि दूर होती है |
५-प्रतिदिन मेथी में छौंकी गई दाल या सब्ज़ी के सेवन से भूख बढ़ती है |
६-नींबू को काटकर इसमें सेंधा नमक डालकर भोजन से पहले चूसने से कब्ज़ दूर होकर पाचनक्रिया तेज़ हो जाती है |

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