MauPurvanchal

मैं चाहे ये करुं मैं चाहे वो करुं मेरी मर्जी… और फिर मौत के बाद प्रशासन जिम्मेदार

Ghoshi me manmani

मैं चाहे————मेरी मर्ज़ी,घोसी(मऊ)।देश व प्रदेश की सरकारें जहां कानूनों का पालन कराने के लिये नित नई नई गाइडलाइन तैयार कर रही हैं वहीं देश के कुछ नागरिक उन गाइडलाइनो को धत्ता बताते हुए कानून की धज्जियां उड़ाने में ज़रा भी हिचक महसूस नहीं करते हैं।जिसका जीता जागता उदाहरण घोसी के मधुबन मोड़ स्थित रेलवे क्रासिंग पर देखने को मिला जब घूम घूम कर दांत चमकाने वाला क्लीनर बेचने वाले ने रेलवे पटरी के बीचों बीच ही अपनी दुकान लगा दी और उसका कस्टमर भी उसी रेलवे पटरी पर मिल गया और शुरू हो गई दांत चमकाने वाली दुकान।रेलवे पटरी के बीचों बीच लगी इस दुकान को देखकर गैम्बलर फ़िल्म का वो गाना “मैं चाहे————–मेरी मर्ज़ी” याद आने लगा।जान जोखिम में डालकर दुकानदार व ग्राहक इस तरह करने लगें और रेल दुर्घटना हो जाये तो किसको गलती दी जाये।