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भगवान की तरह पूजते थे लोग इस नेता को, आज इस तरह बिता रहे हैं अपनी जिंदगी!

यदि आप भारतीय राजनीति में रुचि रखते हैं, खुद को चुनावी दल का नेता या सदस्य बताते हैं और टीएन शेषन को नही जानते तो आपका ये जीवन बेकार ही समझिये. दरअसल हम उसी टीएन शेषन की बात कर रहे हैं जिस से हर दल के नेता थर्राते थे. भारतीय राजनीति में एक ऐसा दौर भी आया जब देश के भ्रष्टाचारी नेता भगवान के बाद टीएन शेषन से ही डरते थे. कहते हैं कि चुनाव आयोग की परछाई जिसके ऊपर पड़ जाती थी उसे जिंदगी भर टीएन शेषन का खौफ सताता था. लेकिन आज टीएन शेषन कहाँ और किस हाल में हैं किसी को खबार नही. चलिये जानते हैं अभी किस तरह के बद्दतर हाल में जिंदगी जी रहे हैं….

बात उन दिनों की है जब देश मे होने वाले हर चुनाव के नियमो की धज्जियां उड़ाई जाती थी. 80 और 90 के दशक में बूथ कैप्चर का मामला अधिकाधिक बिहार के क्षेत्रों में देखा जाता था जहां आने वाले हर चुनाव में बूथ लो लूटकर इस लोकतंत्र को मार दिया जाता था लेकिन तब चुनाव आयुक्त का कार्यभार 1955 के आईएएस टोपर टीएन शेषन के हाथों में सौंपा गया. पहली बार ऐसा देखा गया जब किसी चुनाव आयुक्त ने अपने दम पर ऐसे कड़े कदम उठाये की गैरजिम्मेदार राजीनीतिक दलों में खलबली मच गई. बता दें कि उस वर्ष से होने वाले हर चुनाव केंद्रीय सुरक्षा बल की निगरानी में होने लगे.

ताजा खबरों से पता चला है कि टीएन शेषन आज बुढापे में बहुत जिल्लत भरी जिंदगी जी रहे हैं. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त रहे टीएन शेषन जो शेर की तरह दहाड़ा करते थे आज वृद्धाश्रम में एक गुमनाम जिंदगी जीने पर मजबूर हैं. उनके समकालीन लोगो की सजने तो बताते हैं कि जब टीएन शेषन ने चुनाव आयोग में अपना कदम रखा था इस तरह आयोग का रुतबा बढ़ने लगा कि सभी नेता नियम और कानून के दायरे में रहने की आदत डालनी लगे. वहीं नेताओ के ऊपर एक व्यंग्य भी हुआ करता था – “भारतीय नेता भगवान से भी उतना नही डरते जितना कि टीएन शेषन से” लेकिन किसी ने सोचा भी नही था कि इतने हिम्मत वाले इंसान आज बद्दतर हालत में पहुंच जाएंगे.

आज जो शख्स हमारे बीच सुर्खियों में छाया है उसकी जिंदगी की हालत बद्दतर हो चुकी है क्योंकि एक सदमे के बाद उन्हें भूलने की बीमारी हो गयी. अब वो कोई भी बात ज्यादा देर याद नही रख पाते और इतने वृद्ध हो चुके हैं कि इलाज मुश्किल है. नौबत ये आ चुका है कि वो अपनी जिंदगी वृद्धाश्रम में गुजारते हैं उन्हें खुद भी नही पता कि वह असल मे क्या थे और अब किस हाल में पहुंच चुके हैं. जानकारियों से पता चलता है वह सदमे में इस कदर खो चुके हैं कि स्वस्थ होने और भी कुछ कर नही पाते बल्कि ज्यादातर वक्त वृद्धाश्रम में बिताते हैं.