Uttar Pradesh

ब्राह्मणवाद का नारा लगाने वाले धर्म को नहीं समझते : योगी आदित्यनाथ

दलितों को लेकर जारी राजनीति में विपक्ष भले ही मुखर है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसे कोई विषय ही नहीं मानते। उनकी राय में दलित बनाम ब्राह्मणवाद का नारा लगाने वाले धर्म को नहीं समझते। योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट मत है कि दलितों के बिना हिंदू धर्म की कल्पना नहीं की जा सकती।

दलितों के बिना हिंदुत्व का आधार ही नहीं है। महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव से उपजे दलित बनाम सवर्ण विवाद को लेकर इन दिनों केंद्र सरकार और विपक्ष में राजनीति गरम है। प्रकाश अंबेडकर और कांग्रेस से लेकर उत्तर प्रदेश में बसपा प्रमुख मायावती भी मोदी सरकार और भाजपा पर दलितों की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं।

इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री और हिंदुत्व के मुखर प्रतीक योगी आदित्यनाथ का पक्ष । योगी ने दो टूक लहजे में सारे विवाद को राजनीतिक स्टंट बताया। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने चार भिन्न कालखंडों के महर्षि वाल्मीकि, वेद व्यास, संत रविदास और डा. भीमराव अंबेडकर का उदाहरण दिया। उनका तर्क था कि इन चारों दलित लेखकों और विचारकों ने रामायण, महाभारत, भक्ति साहित्य और संविधान के माध्यम से धर्म की अथक सेवा की और समाज ने इन्हें और इनकी रचनाओं को सिर माथे लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री 2022 के उस भारत की बात कर रहे हैं जिसमें जातिवाद और नक्सलवाद नहीं होगा। मुख्यमंत्री के रूप में नौ महीने से अधिक का समय गुजार चुके योगी के अनुसार जो लोग दलित बनाम हिंदुत्व की बहस चला रहे हैं, वे भारत की आत्मा को नहीं जानते। असल में ये लोग केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के नेतृत्व को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे।
योगी नगर निकाय चुनाव में पश्चिम उत्तर प्रदेश में बसपा के बेहतर प्रदर्शन को दलित राजनीति के बसपा के पक्ष में किसी उभार के रूप में भी नहीं देखते। उन्होंने यह भी कहा कि दलित-मुस्लिम एकता असंभव है और हिंदुओं को बांटने के ऐसे प्रयास पहले भी होते रहे हैं।